आंटी


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कमरे में एक कैलेंडर टंगा हुआ था जिसमे साल १९९५ लिखा हुआ था| उस कमरे में किसी की हलचल की आवाज़ आ रही थी| वो लड़का बेहद गहरी नींद में था पर आवाज़ सुन उसकी नींद खुल गयी और वो बहुत घबरा गया| मम्मी पापा तो अगले दो दिन के लिए शहर से बाहर थे| तो कौन हो सकता था? सबसे ज्यादा डर तो उसे पकड़े जाने का था| किसी तरह हिम्मत करके उसने अपनी चादर से बाहर झाँका| एक ३५-४० साल की औरत उसके बिस्तर के सामने एक कुर्सी पे बैठी गृहशोभा मैगज़ीन के पन्ने पलट रही थी| उसने अपनी टाँगे एक पर एक रखी हुई थी जिस पर उसकी साड़ी की प्लेट उसकी कमर से होती हुई नीचे किसी फूल की तरह खिल कर खुल रही थी| उसने काफी ऊँची हील की सैंडल पहन कर रखी थी| ज़रूर कोई बाहर से आई है| लड़के ने सोचा क्योंकि उसके घर में किसी के पास भी ऐसी सैंडल नहीं थी| किसी भी १४ साल के लड़के को ऐसी औरत बेहद आकर्षक लग सकती है, उस लड़के को भी लगी| चादर से झांकते हुए उस औरत ने लड़के को  देख लिया था| आज तो वो पक्का पकड़ा जायेगा|

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एक अनजान ३५-४० वर्षीया औरत उस लड़के के बिस्तर के पास बैठी हुई थी| कोई भी १४ वर्ष का लड़का उनकी तरफ आकर्षित हो जाता|

“तो तुम्हे औरतों की किताबें पढना बेहद पसंद है? ”, उस औरत ने उस लड़के की ओर देख कर कहा| उस औरत के चेहरे पर बड़ी शरारती मुस्कान थी|

“मेरी नहीं है|”, लड़के ने चादर के अन्दर से ही कहा| वो इस आरोप को नकारना चाहता था|

वो औरत मुस्कुरा दी जैसे उसे लड़के की बात पर विश्वास ही न हो| उस औरत का चेहरा लड़के को जाना पहचाना सा लग रहा था पर उसने कभी पहले उन्हें देखा नहीं था| कहीं पापा की कोई रिश्तेदार तो नहीं आ गयी? हो सकता है मम्मी पापा भी आये हो साथ| उसके दिल की धड़कने और बढ़ गयी| “आप कौन है आंटी?“, लड़के ने घबराते हुए पूछा|

“आंटी?“, औरत ने बड़े नाटकीय अंदाज़ में कहा, “हाय रे लड़के, कम से कम दीदी ही कह दिया होता| इतनी उम्र भी नहीं है मेरी|” उसने गृहशोभा को किनारे रखते हुए बोली, “चल मैं तेरे लिए आंटी ही सही!” कुर्सी पर आंटी ने अपने पैर सीधे कर अपनी साड़ी की प्लेट ठीक की, और फिर अपनी साड़ी को हाथ से सुधारते हुए अपने ब्लाउज को साड़ी से ढकते हुए उठ खड़ी हुई| लड़का सोच में पड़ गया| अब ३५-४० साल की औरत तो उसके लिए आंटी ही हुई न?

अपनी साड़ी के बेहद सलीके से की हुई, बिलकुल नपी-तुली बराबर प्लेट की हुई पल्लू को एक हाथ से पकड़ कर वह उस लड़के के बगल में आकर बैठ गयी| “तेरी उम्र के लड़के अपने बिस्तर के नीचे छुपाकर अश्लील मैगज़ीन रखते है और तूने गृहशोभा छुपा रखा है? ” आंटी ने आँखें मटकाते हुए लड़के से कहा| कितने पास आ गयी थी अब आंटी| लड़के को डर भी लग रहा था पर वह आंटी की बेहद ही सुन्दर साड़ी में लिपटी खुली कमर से नज़रे न हटा पाया आखिर उसकी आँखों के ठीक सामने थी|

लड़के ने सोचा असलियत सामने न आ जाए इसलिए उसने झूठ का सहारा लिया, “उस मैगज़ीन में सेक्सी कहानियां भी है! मुझे सेक्सी कहानियाँ बड़ी पसंद है|” कोई लड़का अपना एक राज़ छुपाने के लिए आंटी से सेक्सी कहानी पढने का झूठ बोलने की हिम्मत करे, तो सोचो उसका राज़ कितना गहरा होगा|

“अच्छा जी? दुल्हन स्पेशल अंक में सेक्सी कहानियाँ? मैं देख चुकी हूँ सारी सेक्सी कहानियाँ उसमे| ‘दुल्हन का सोलह श्रृंगार’, ‘शादी में लहंगा पहने या साड़ी?’, ‘विभिन्न राज्यों की दुल्हन की पोशाक’| पूरी मैगज़ीन में सिर्फ दुल्हनो की फोटो है और साड़ियों की, मुझे तो एक भी सेक्सी कहानी नहीं दिखी उसमे|” आंटी ने उसका झूठ पकड़ लिया|

लड़का बेहद डर गया| अब क्या करेगा वो यदि इस अनजान आंटी ने मम्मी को कुछ बता दिया तो? आंटी ने लड़के के गद्दे के नीचे हाथ डाला और कुछ निकालती हुई बोली, “हाय दईया, ये क्या है?”

आंटी ने जब हाथ बाहर निकाला तो उनके हाथ में एक साड़ी थी| आंटी ने अपने हाथों से उस साड़ी को उल्टा पलटा कर खोल कर देखने लगी| “बेहद सस्ती साड़ी दिख रही है| मैं तो कभी न पहनूंगी ऐसी साड़ी| किसके लिए खरीदी तुमने? और कितने में खरीदी है?“, आंटी लड़के के चेहरे के पास आते हुए बोली| आंटी ने जो पर्फुम लगा रखा था, बेहद ही बढ़िया खुशबु थी उसकी| लड़के का ध्यान कुछ देर उनकी खुशबू पर चला गया|

“१०० रुपये में ख़रीदा है | पर प्लीज़ किसी को मत बताना|”, लड़के ने डरे सहमे कहा|

“नहीं बताऊंगी”, आंटी हँसते हुए बोली, “पर अब तू चादर से बाहर निकलेगा या मैं ही खिंच दूं|”

लड़के ने ना में सिर हिलाया तो उस आंटी ने झट से चादर खिंच दी| उनकी चूड़ियाँ खनक उठी| लड़के को समझ न आया कि वो अब क्या करे| उसकी असलियत सामने आ गयी थी| उसने अपनी माँ की साड़ी और ब्लाउज पहन रखा था|

“अरे शरमाता क्यों है? तुझे साड़ी पहनना बहुत पसंद है न? मुझे भी पसंद है|”, आंटी हँसते हुए बोली| “उफ़ कितनी गर्मी है यहाँ|”, कहते हुए आंटी ने अपनी ब्रा की स्ट्रैप को खिंच कर ब्लाउज के अन्दर किया| उसके बाद सामने से अपने स्तनों के नीचे से ब्लाउज में उँगलियाँ डालती हुई शायद ब्रा को ठीक करने लगी|  “बड़ा पसीना आ रहा है, और पता नहीं कि मैं मोटी हो गयी हूँ या मेरी ब्रा छोटी हो गयी है| तुझे क्या लगता है? मैं मोटी हूँ?“, आंटी ने लड़के से कहा|

लड़का तो वैसे ही शर्म से पानी पानी हो रहा था| और यह आंटी ऐसी बातें कर रही थी कि उसके मुंह से कोई जवाब नहीं निकल सकता था| इस शर्म के बीच भी वो ये भूल नहीं सकता था कि आंटी थोड़ी सी मोटी ज़रूर थी पर हॉट भी बहुत थी| उनके बड़े से स्तन बिलकुल टाइट ब्लाउज में फिट थे| सामने से ब्लाउज की गहराई में उनकी साड़ी के पीछे स्तनों को देखा जा सकता था| और फिर उनके ब्लाउज की पीठ में इतना बड़ा कट उसने पहले कभी ये स्टाइल नहीं देखा था| आंटी की भरी हुई पीठ सेक्सी लग रही थी| और उनके होंठो पर गहरे रंग की लिपस्टिक बेहद आकर्षक लग रही थी| लड़के के घर में ऐसी लिपस्टिक होती तो वो ज़रूर लगता|

“तू तो कुछ बोलता नहीं है| तुझे क्या पता ब्रा के बारे में| तू तो सिर्फ ब्लाउज पहना हुआ है| वो भी २ सॉक्स भर के!”, आंटी जोर से हंसने लगी|

लड़का और शर्म से पानी पानी हो गया| पता नहीं कौन आंटी है यह? वो अभी भी डर रहा था कि यह आंटी मम्मी से न कह दे| और न भी कहे तो पता नहीं मुझसे बदले में क्या कराएगी| लड़का कुछ देर सोचता रहा|

“आंटी, आप कौन है?”, लड़के ने फिर से पूछ ही लिया|

“तूने ही तो कहा कि मैं तेरी आंटी हूँ| और अब पूछता है कि मैं कौन हूँ| चिंता न कर, कुछ सालों में तू मुझे  बड़ी अच्छी तरह  से जान जायेगा!”, आंटी हँसते हुए बोली| आंटी का चेहरा अब भी जाना पहचाना लग रहा था पर लड़के को पता न था कौन है वो| जो भी थी बेहद खुबसूरत लग रही थी उस साड़ी में| बिलकुल नयी तरह की साड़ी थी| और उनकी रंग बिरंगी चमकीली चूड़ियाँ भी बड़ी फैशनेबल लग रही थी| फिर भी लड़का डरा हुआ था|

“डर मत| मैं किसी को नहीं बताऊंगी तेरे बारे में| तुझे साड़ी पसंद है न? यह बता मेरी साड़ी कैसी लग रही है? छूकर देख और बता!”, आंटी ने अपनी साड़ी का पल्लू उसके हाथ में पकडाते हुए पूछा|

“आप सचमुच किसी को बताओगी नहीं न?”, लड़के ने पूछा| आंटी की साड़ी का मखमली पल्लू छूकर तो जैसे उसे स्वर्ग मिल गया| “अरे बाबा| नहीं बताऊंगी| तू बोले तो तुझे साड़ी पहनना सिखा कर जाऊंगी”, आंटी ने अपना हाथ उसके चेहरे पे लगाते हुए कहा| फिर अपने पल्लू को अपने हाथो से फैलाकर लड़के को अपने पल्लू से ढक दी|

लड़का ख़ुशी से मुस्कुरा दिया| और बोला, “बहुत सुन्दर साड़ी है आपकी, आंटी| छूने से मखमली एहसास मिलता है| मैं भी आपके जैसे अच्छी तरह साड़ी पहनना सीखना चाहता हूँ| आंटी, आप मुझे पक्का सिखाओगी?”

आंटी बेहद प्यार से मुस्कुरा दी| और बोली, “हाँ, पक्का सिखाऊंगी| पर साड़ी में अच्छे दिखने के लिए शरीर का आकार भी सुधारना पड़ता है| ब्लाउज में केवल २ सॉक्स से काम नहीं चलेगा| मेरे स्तन देख रहा है कितने बड़े है?”, आंटी ने अपना पल्लू उठाकर अपना ब्लाउज दिखाते हुए बोली| ब्लाउज की कटोरियों में आंटी के दोनों स्तन बेहद ही सुडोल और सेक्सी लग रहे थे|

लड़के ने फिर कहा, “ठीक है आंटी| पर मैं उन्हें छूकर देखू तो मुझे अंदाज़ा हो जायेगा कि मुझे कैसा आकार बनाना है|” उसने अपना हाथ आंटी के ब्लाउज की तरफ बढ़ा दिया|

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जब लड़के ने आंटी के ब्लाउज पर हाथ लगाकर उनके स्तनों का आकार जानना चाहा, तो आंटी नाराज़ सी हो गयी| कोई भी औरत नाराज़ हो जाए ऐसा अवस्था में, पर उन्हें देख कर कोई भी मचल सकता था|

आंटी ने झट से उसका हाथ हटाया और बोली, “धत, बेशर्म! तुझे पता नहीं है कि औरतों से कैसे पेश आते है? औरतों की हमेशा इज्ज़त करना ज़रूरी है| समझा? कभी भूलना नहीं!” आंटी नाराज़ तो न थी पर उनकी आँखों में नाटकीयता थी| लड़के ने हाँ में सिर हिलाया|

“चल तुझे साड़ी पहनना सिखाती हूँ|”, आंटी ने लड़के का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर से उतारा | आंटी के हाथ की कांच की चूड़ियाँ उसे बेहद अच्छी लग रही थी| लड़का बेहद ख़ुशी से आंटी के साथ बिस्तर से उठ खड़ा हुआ|

लड़के ने बस किसी तरह साड़ी को अपने तन पर लपेट रखा था| आंटी ने उसे बड़े प्यार से सिखाया की प्लेट कैसे बनायीं जाती है और पिन कहाँ लगाना है| कुछ ही देर में आंटी ने लड़के को साड़ी में तैयार कर दी|

“आंटी, आप बेहद खुबसूरत है और प्यारी भी| पर अब सच बताना मैं सुन्दर लग रहा हूँ न?”, लड़के ने पूछा| “हाँ बेटा, तू बहुत सुन्दर लग रहा है|” आंटी ने उसका सिर प्यार से हाथो में पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और अपने आँचल में ढक लिया| लड़के को उनके कोमल स्तनों के बीच बेहद प्यार महसूस हुआ|

“अच्छा, अब मैं चलती हूँ| किसी के आने के पहले कपडे बदल लेना| अपना ध्यान रखना!”, आंटी ने बहुत ही प्यार से कहा और बाहर के कमरे की ओर जाने लगी| लड़का इसके पहले कुछ कह पाता, आंटी का मखमली पल्लू उसके हाथ से फिसल कर चला गया| अगले कमरे में बस एक पल बाद पहुंचा तो आंटी गायब थी|

वो आंटी को ढूंढता रहा पर वो मिली नहीं| घर के सारे दरवाज़े भीतर से बंद थे| पता नहीं कहाँ गायब हो गयी आंटी? सपना तो नहीं था ये, क्योंकि आंटी उसे साड़ी पहना कर गयी है| पहली बार इतनी अच्छी तरह से साड़ी पहना था वह| यह सपना तो नहीं हो सकता था| उन आंटी की तस्वीर उसके दिल में हमेशा के लिए बस गयी थी| “बड़ा होकर मैं भी आंटी की तरह बनूँगा| उनकी तरह साड़ी ब्लाउज चूड़ियाँ पहनूंगा| उनकी तरह दिखने के लिए मैं कुछ भी करूंगा|”, सोचकर लड़का शीशे में खुद को देखकर उन आंटी की तरह पल्लू को पकड़ कर खेलने लगा| फिर थोड़ी देर बाद आंटी की तरह मटकते हुए चलकर वो अपनी डायरी में आज की तारीख के पन्ने पर एक शब्द लिखा, “आंटी”|

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वह आंटी कहीं अचानक से अदृश्य हो गयी| पर उनकी तस्वीर उस लड़के के दिल दिमाग में हमेशा के लिए बस गयी| वह उन्हें कभी भूल नहीं सकेगा|

“कहाँ गए थे आज यूँ सज धज के?”, आंटी जैसे ही एक छोटे से मशीनी कमरे से बाहर निकली तो किसी दूसरी औरत ने पूछा| “कुछ नहीं, बस सोचा कि आज अपने १४ साल की उम्र के समय में होकर आता हूँ| बड़ा मज़ा आया|”, आंटी ने साड़ी का पिन खोलकर पल्लू उतारते हुए कहा|

“मुझे यकिन है बेहद ही स्वीट रहे होगे उस उम्र में तुम| मैं भी मिलना चाहूंगी कभी| पर अभी तुम्हारे दोस्त आने वाले है, अब ज़रा आदमी रूप में आ जाओ|”, उस औरत ने आंटी को गले लगा कर गर्दन पर एक किस दिया| आंटी अब आदमी बनने को तैयार थी|  आंटी ने अपनी साड़ी उतार कर एक टेबल पर रखी जिस पर एक बड़ी पुरानी डायरी रखी हुई थी जिसका एक पन्ना खुला था और उस पर “आंटी” लिखा हुआ था|

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