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ख़ास धन्यवाद: हम धन्यवाद करना चाहते है Gitanjali Paruah जी का जिन्होंने छोटी मगर इतनी ज़बरदस्त कहानी लिख कर हमें दी. जितनी सुन्दर उन्होंने इस कहानी को इंग्लिश में लिखा है, हमने अपनी तरफ से प्रयास किया है कि हिंदी में भी उतनी ही प्रभावशाली कहानी लगे, पर कोई कमी रह गयी हो तो पाठको और गीतांजलि जी से क्षमा चाहते है.

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मेरी गर्लफ्रेंड थी वो. पर मैंने उसे उस दिन उसके बेस्ट फ्रेंड की बांहों में देखा.  उसका बेस्ट फ्रेंड एक आदमी था. मुझे इस बात से कोई समस्या भी नहीं थी. कम से कम उस दिन तक तो नहीं. वो दोनों किसी दो दोस्त की तरह हाथ पकडे हुए अवस्था में नहीं थे. उन दोनों के बीच उससे कुछ ज्यादा चल रहा था.

z6aमैं वहां उस लड़की को डेट पर ले जाने के लिए उस दिन उसके घर गया हुआ था. इसलिए मैं सीधा उसके कमरे की ओर बढ़ गया था. कमरे से कुछ आवाज़े आ रही थी. और मैंने उन दोनों को दरवाज़े के की-होल से देखा था. वो बेहद हॉट ड्रेस पहनी हुई थी और वो लड़का जॉगिंग करके वापस ही आया था. उसने जॉगिंग के शॉर्ट्स पहने हुए थे, और मेरी गर्लफ्रेंड ने ऊँची हील्स और सेक्सी टूब टॉप. कमरे के बाहर तक मुझे उसकी परफ्यूम की खुशबू आ रही थी.

देख कर लग रहा था कि दोनों किस कर रहे थे. पर उस छोटे से छेद से देखते हुए मैं निश्चित होकर नहीं कह सकता था. और वो मुझे बताना भी नहीं चाहती थी. डेट पर रेस्टोरेंट में मैंने उससे पूछा भी. पर उसने मुझे यह कह कर चुप करा दिया कि मैं कोरी कल्पना कर रहा हूँ. मैं इतना असुरक्षित क्यों महसूस करता हूँ इस रिश्ते में? उसने मुझसे पूछा. कोई ऐसी वैसी बात नहीं है, उसने मुझे दिलासा दिया. वो लड़का घर में कुछ सामान लेने आया था पर मेरी आँखों में कुछ गिर गया था, जिसे वो फूंक कर निकाल रहा था. कम से कम ऐसी कहानी मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे सुनाई.

ये बात पिछले हफ्ते की थी. और कल? कल उसने मुझसे अपना रिश्ता तोड़ लिया. उसने मुझे बताया भी कि वो ऐसा क्यों कर रही है. मैं एक आदमी के रूप में उसके लिया नाकाफी था. मैं बहुत ही भावुक और कद में छोटा था, उसने मुझे बताया. इन बातों को लेकर भी कभी कोई रिश्ता तोड़ता है? मैं उसी की आँखों के सामने रोने लगा. अब बंद भी करो रोना. ओह गॉड! तुम भी न पूरे सिस्स… , वो कहते कहते रुक गयी. वो मुझे सिस्सी (Sissy) या नामर्द कहने वाली थी. वो शायद गलत भी न थी.

हम दोनों में वो हमेशा मुझसे हर बात में आगे रहती थी. हील पहनकर वो मुझसे ऊँची भी लगती थी. मैं उससे हमेशा कहता था कि वो इतनी ऊँची हील न पहने, पर अपनी जिद पर अड़ कर हमेशा मुझसे ऊँची दिखना उसे पसंद था शायद. मुझ पर जैसे अपना रौब चला कर उसे कुछ अजीब सी ख़ुशी मिलती थी. उसके प्रभावशाली व्यक्तित्व से मैं हमेशा प्रभावित रहता था, पर मुझे नहीं पता था कि उसे ऐसा आदमी चाहिए था जो उसी की तरह का व्यक्तित्व वाला हो. और मैं वैसा कभी नहीं बन सकता था.

मेरे साथ बिताये हुए समय में उसे एहसास हो गया था कि जिस आदमी की उसे तलाश है वो उसके बेस्ट फ्रेंड में था. उसका बेस्ट फ्रेंड उससे कहता भी था पर न जाने क्यों वो उसकी बात को मानती नहीं थी. मुझे तो इस बात की खबर तक न थी. पर उस आदमी ने मुझे बाद में यह सब बताया था.

उस आदमी को हमेशा पता था कि वो उसे ही प्यार करती है, पर शायद वो जानती नहीं थी. शायद उसे समय की ज़रुरत थी. और उस खाली समय को भरने का काम मैं कर रहा था.

सोच सोच कर मेरी आँखों में आंसू थे, और मैं उस वक़्त भी रो रहा था जब वो आदमी मुझसे मिलने आया था. चाहे जो भी हो, वो आदमी दिल का बेहद अच्छा था. उसे दुःख था कि उस लड़की और उसके बीच जो हो रहा था, उसकी वजह से मुझे इतना दर्द मिला. वो जानता था कि वो लड़की कितनी निष्ठुर और बेरहम हो सकती थी. और वो खुद बचपन से उस लड़की के पीछे पीछे भागते हुए खुद उस लड़की की निष्ठुरता सहता चला आया था.

मैं तो बिस्तर पे सर गडाए रो रहा था जब मैंने दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुना. मैं नहीं चाहता था कि कोई मुझे रोते हुए देखे. इसलिए मैंने दरवाज़े की दूसरी ओर मुंह पलट कर करवट ले लिया, इस उम्मीद में कि कोई मुझे रोते हुए न देख ले. पर मेरी सिसकियाँ न रुकी.

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मैं अकेले बिस्तर पे रोता रहा.

“ओह सॉरी, लगता है मैं गलत कमरे में आ गया”, मैंने उसकी दरवाज़ा खुलने के बाद आवाज़ सुनी, “मुझे लगा यह तुम्हारे भाई का कमरा है”, उसने कहा. वो जाने वाला ही था, तब मैंने पलट कर देखा कि आखिर कौन है दरवाज़े पर. उसने मुझे देखा और कहा, “ओह, ये तो तुम ही हो! मुझे लगा कि बिस्तर पे तुम्हारी बहन है. माफ़ करना, पर बिस्तर पे तुमको देख कर लगा जैसे कोई लड़की लेडीज़ जीन्स पहन कर सोयी हुई थी”

मैं हमेशा से ही लेडीज़ जींस पहनता था. क्योंकि आदमियों के जीन्स कभी मुझे सही फिट नहीं आते थे. कभी कमर सही आती तो मेरी हिप्स पर जीन्स टाइट होती थी, कभी हिप्स पे सही होती तो कमर ढीली होती थी. किसी साधारण आदमी के मुकाबले मेरी हिप्स थोड़ी ज्यादा बड़ी और गोल थी. इसलिए एक बार मेरी बहन ने मुझे अपनी जीन्स पहन कर देखने को कहा था. और उस दिन से मैं लेडीज़ जीन्स ही पहनता था. पर इस बात को छुपाने के लिए कि मैं लेडीज़ जीन्स पहनता हूँ, मैं हमेशा लम्बी खुली शर्ट पहनता था. पर उस दिन, रोते हुए मेरी शर्ट उठ गयी थी और मेरी कमर दिखने लगी थी. मेरे बड़े गोल कुल्हे (हिप्स) भी उस दिन दिख रहे थे. और इसलिए शायद उसे लगा कि इस कमरे में एक लड़की रो रही थी.

मैंने उसके सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. आखिर मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे हमेशा के लिए छोड़ दिया था. इस वक़्त मेरे मन में इस बात की फ़िक्र नहीं थी कि उस आदमी को मेरी लेडीज़ जीन्स के बारे में पता चले. मैं फिर पलट कर सुबकने लगा. मैं नहीं चाहता था कि वो मुझे देख सके. पर वो मेरी बगल में आकर बैठ गया और मुझे उठाकर बिठाने की कोशिश करने लगा. वो मुझे चुप कराना चाहता था.

शायद मुझे उठाने के प्रयास में  मुझे छूते ही उसे एहसास हो गया था, “तुम कितने सॉफ्ट और कोमल हो!”, उसने कहा. उसकी बात अनसुनी कर मैं उठकर बैठ गया. और पता नहीं क्यों, मैंने उसे जोर से गले लगा लिया और रोने लगा. पता नहीं क्यों मुझे ये बहुत ही स्वाभाविक लगा. मैं उस आदमी को थोडा बहुत तो जानता ही था, उसका स्वाभाव हमेशा सब का ख्याल रखने वाला था. “तुम कितने समझदार और ख्याल रखने वाले हो”, मैंने रोते रोते उससे कहा.

और उसने मुझे रोने दिया. न जाने कितने देर तक मैं रोता रहा. जब मैं चुप हुआ तब तक उसका कन्धा और शर्ट मेरे आंसुओं से भीग चूका था. मुझे अपने किये पर थोड़ी शर्म महसूस हो रही थी. उस वक़्त तक मुझे पता नहीं था कि मुझे देखकर उसके मन में क्या होता था. शायद वो भी नहीं जानता था मेरे दिल कि यह बात.

उसने मुझे आंसू पोंछने के लिए अपना रुमाल हाथ में दिया. तब मैंने उसकी भीगी शर्ट को देखा. मैंने कहा कि मैं उसकी शर्ट सुखा देता हूँ. पर उसने मना कर दिया. मैंने फिर भी उसकी शर्ट की बटन खोलना शुरू कर दिया था. और उसने मुझे मना न किया.

जब मैंने उसके शर्ट को खोल कर देखा, तो मैं आश्चर्यचकित था. उसके सीने पर एक असली आदमी की तरह खूब सारे बाल थे. पता नहीं क्यों मैंने धीरे से अपनी उँगलियों से उसके सीने के बालो को छूना शुरू किया. वो मुझे ऐसा करते देख रहा था. न जाने उस पर इसका क्या असर हो रहा था. और फिर अचानक मुझे शर्म सी आने लगी. एक लड़की की तरह मैं अपने दोनों हाथो से अपनी आँखों को ढँक लिया.

“अरे तुम शर्मा क्यों रहे हो? अपने चेहरे से हाथ हटाओ. तुम मेरे सीने पर अपना हाथ रख सकते हो”, उसने मेरे चेहरे से मेरे हाथो को हटाते हुए कहा. मेरी लाज अब थोड़ी कम हो गयी थी. और मैंने उसके सीने पर हाथ रख कर उसके कान में धीरे से कहा, “वाह्ह्ह!”.

“क्या तुमने पहले कभी आदमी का सीना नहीं देखा था?”, उसने पूछा. मैंने अपना सिर न में हिला दिया. मैंने कभी इतना मजबूत सीना नहीं देखा था.

“मेरी छाती तुम्हारी छाती से अलग तो नहीं है”, उसने फिर कहा.

“नहीं, तुम्हारा सीना बहुत मजबूत और चौड़ा है. मेरा सीना ऐसा बिलकुल नहीं है”, मैंने कहा.

“मुझे देखने दो”, उसने कहा और हँसते हुए उसने अपने हाथ मेरे सीने पर फेरने लगा.

“हाँ”, उसने कहा. “तुम्हारा सीना बेहद कोमल है. बेहद सॉफ्ट जैसे… “, वो कहते कहते रुक गया.

“सॉफ्ट जैसे क्या?”, मैंने धीरे से पूछा. मेरी आवाज़ न जाने क्यों कोमल हो गयी थी.

“क्या मैं सच कह दू?”, वो भी अब धीमि आवाज़ में बातें करने लगा.

“हाँ”, मैंने जवाब दिया.

“जैसे लड़की का सीना होता है”, उसने कहा.

“सच्ची? तुम्हे मेरे सीने में लड़की की तरह क्या लगता है”, मैंने उससे पूछा. मैंने उसके सीने पर से हाथ हटाकर अपने सीने पर रख लिए. अपने सर को एक तरफ झुकाकर मैं उसकी ओर बेशर्मी से देखने लगा जैसे मैं नहीं चाहता था कि अब मैं उसके सीने को और छूकर देखू.

मेरी हरकत देख वो मुस्कुरा दिया. “ये तो बिलकुल लड़कियों जैसी हरकत कर रहे हो तुम,झूठमुठ का गुस्सा”, वो हँसने लगा.

“ये देखो…”, उसने आगे कहा और मेरे दाहिने स्तन को अपने हाथ से छूकर कहा, “ये तो लगभग A कप साइज़ का स्तन है. बिलकुल सॉफ्ट और कोमल. और तुम्हारे सीने पर तो बाल भी नहीं है!”.

मैंने अपनी आँखें बंद कर ली, और वो मेरे स्तनों को छूता रहा. मैं उसकी साँसों को अपने चेहरे पर महसूस कर सकता था. फिर न जाने क्यों मैंने अपना चेहरा उठाया, जैसे हम दोनों के बीच कुछ होने वाला था. मैं अब भी उसकी गर्म सांसें महसूस कर सकता था. मैं जानता था कि उसकी नाक और उसके होंठ मेरे चेहरे के बेहद करीब है.

हम दोनों खुले सीने के साथ वहां जैसे किसी मदहोशी में थे. पर अचानक ही वो पल टूट गया.

“सुनो “, उसने मुझे कहा, “क्या मैं कुछ आगे बढ़ सकता हूँ?”, एक जेंटलमैन की तरह उसने मुझसे पूछा.

मैं तो खुद अब और रुकना नहीं चाहता था. पर वो आगे न बढ़ा. शायद वो इस तरह आगे नहीं बढ़ना चाहता था.

“सुनो, तुम तैयार हो जाओ. हम दोनों बाहर चलते है.”, उसने जैसे मुझे आर्डर दिया. मैं चुपचाप उसकी बात मानकर उसके साथ बाहर चल दिया.

जब हम वापस लौटे, मैं किसी लड़की की तरह खिलखिला रहा था. हम दोनों शौपिंग के लिए गए थे, और जब वापस आये तो मेरे पास वो सारी चीजें थी जो मेरे पहले कदम के लिए ज़रूरी थी. उसने मुझे बताया नहीं था कि हम बाहर क्यों जा रहे है, पर हम दोनों शायद जानते थे कि अब आगे क्या होने वाला है. शायद ये होना ही था.

उसने मुझे पेंटी, स्कर्ट, ड्रेस और कुछ ब्लाउज दिलाये थे. उसने मुझसे कहा कि मेरे लिए साड़ी पहनना जल्दबाजी होगी. सबसे ज्यादा मुश्किल मेरे लिए ब्रा खरीदने की थी. कहीं भी किसी दुकानदार के पास A कप की ब्रा नहीं थी. वो नहीं चाहता था कि मैं बड़े कप की ब्रा खरीद कर उसमे कुछ भरू. उसने कहा, “तुम्हारे इतने प्यारे कोमल स्तन है. उसको किसी और चीज़ से भर कर छुपाने की ज़रुरत नहीं है.” किस्मत से एक दूकान थी जहाँ young adult सेक्शन था जहाँ हमें मेरे साइज़ की ब्रा मिल गयी.

हम जैसे ही घर पहुंचे, उसने मुझे मेरे पूरे शरीर को शेव करने कहा. “पर मेरे तन पर बाल नहीं है”, मैंने कहा.

उसने मेरे तन की ओर देखा और फिर कहा, “कम से कम तुम्हारे चेहरे पर जो हलके हलके बाल है उन्हें तो शेव कर लो”. पर मेरे पास शेविंग किट नहीं था. उसे थोडा आश्चर्य हुआ पर उसे जल्दी ही समझ आ गया था कि मेरे तन पर अब तक एक भी बाल नहीं आया था. किसी लड़की की तरह मैं अब भी चिकना था. वो मेरी ओर देख कर हँसने लगा. क्या वो मेरा इस बात को लेकर मज़ाक उड़ा रहा था?

उसने देखा कि मेरी आँखों में आंसू आ रहे है. और फिर उसने वो कहा जो मैंने सपने में भी न सोचा था. उसने मेरे चेहरे से एक आंसू की बूंद को पकड़ कर कहा, “मैं तुम्हारा कभी मज़ाक नहीं उड़ाऊँगा. प्रॉमिस!”

“अब जाकर कपडे बदल कर आओ”, उसने मुझे आर्डर दिया.

मैंने जीवन में अपनी बहन के जीन्स के अलावा कभी कोई लड़कियों के कपडे नहीं पहने थे. पर उन कपड़ो को छू कर ऐसा लगा जैसे वो मेरे लिए ही बने थे. मैंने बैग से एक पेंटी निकाली. इतनी सिल्की और स्मूथ चीज़ मैंने पहले कभी नहीं पहना था. बहुत छोटी सी पेंटी थी वो, पता नहीं मेरे बड़े से कुलहो पर कैसे आएगी वो? शायद काफी टाइट होगी मुझ पर. पर जब मेरी चिकनी जांघो से होकर वो पेंटी मेरे तन पर चढ़ी, तो जैसे खिल कर वो मेरे तन से ऐसे चिपक गयी जैसे मेरे तन का हिस्सा हो.

फिर मैंने ब्रा निकाल कर पहनने का प्रयास किया. पर मैं पीछे हुक नहीं लगा पा रहा था. मुझे थोड़ी शर्म तो आ रही थी पर मैंने आखिर उसे मदद के लिए बुलाने के सोचा. पर न जाने क्यों मुझे शर्म सी आने लगी और मैंने झट से एक तोवेल ढूंढ कर अपने सीने पर एक दुपट्टे की तरह उसे ओढ़ लिया. मैं जानता हूँ कि थोड़ी सी मुर्खता था, पर मुझे यह करना बड़ा स्वाभाविक सा लगा.

मैंने दरवाज़ा खोलकर झाँक कर उसकी ओर देखा. उसने मुझे झांकते हुए देख कर कहा, “कहो स्वीटी क्या बात है?”

“मुझे आपकी मदद चाहिए”, मैंने धीमी आवाज़ में कहा. वो मुस्कुरा कर मेरे पास आया और बोला, “कहो, कैसे मदद कर सकता हूँ मैं?”

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उसने मुझे जीवन में पहली बार ब्रा पहनना सिखाया

मैंने अपने सिर झुककर उसे चुपचाप हाथ में ब्रा दे दी. उसने ब्रा को पकड़ कर मेरे चेहरे पर हाथ रखते हुए कहा, “तुम तोवेल में ऐसे छुप कर रहोगी तो मैं तुम्हे ब्रा कैसे पहनूंगा?” उसने मुझे लड़की की तरह संबोधित किया.

मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया. शर्म में मैंने अपना इरादा बदल लिया, “बस मुझे बता दो इसे पहनते कैसे है. मैं खुद पहन लूँगी” अब मैं भी खुद को एक लड़की की तरह नाज़ुक महसूस कर रही थी.

“यह हुई न असली लड़की वाली बात”, ये बोलकर वो हँसने लगा. पर उसने मुझे छेड़ा नहीं.

उसने मुझे बताया कि कैसे पहले कप को पीछे की ओर करके पहले ब्रा का हुक लगाना चाहिए, और फिर उसे घुमाकर सामने लाकर ब्रा के स्ट्रेप से अपने हाथ डालकर पहननी चाहिए.

मैं उसे देखते ही रह गया. मैंने उससे मासूमियत से पूछा, “आप तो बेहद स्मार्ट है. आपको यह तरीका कैसे सुझा? मैं तो कभी सोच भी नहीं पाती!”

“मैंने उसे ऐसे कई बार ब्रा पहनते देखा था”, उसने कहा. वो उस लड़की की बात कर रहा था जिसने मेरा दिल तोडा था. यह बात कहते ही उसे अपनी भूल का अहसास हुआ. वो लड़की उसके साथ मेरे पीठ पीछे लम्बे समय से धोखा दे रही थी. और मुझे आज ये बात पता चल रही थी. स्वाभाविक था मेरी आँखों में एक बार फिर आंसू थे. मेरी नज़रे एक बार फिर झुक गयी थी.

पर उसने मेरे चेहरे को अपने हाथ से प्यार से उठाते हुए कहा, “जो बीत गया उसे भूल जाओ. अब सब ठीक होगा”.

और अब सचमुच सब कुछ ठीक हो रहा था. मैंने उसके मजबूत सीने को अपने हाथो से पकड़ लिया, और उसके सीने पर सिर रखकर चुपचाप सिसकने लगा. और उसने मुझे रोने दिया. फिर धीरे से उसने एक बार फिर मेरे चेहरे को प्यार से अपने हाथ से उठाया और मेरे होंठो को अपने होंठो के बीच ले लिया. अब वाकई में सबकुछ ठीक हो गया था. अब जैसे पुरानी कोई भी बात मुझे विचलित नहीं कर सकती थी. मेरा मन और समय, दोनों अब ठहर से गए थे.

 

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अभी आगे बहुत कुछ होना है!

 

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