देवर और भाभी

एक देवर और भाभी का रिश्ता तो बहुत ही नटखट और प्यार भरा होता है. पढ़िए एक ऐसी ही शरारत जब देवर को भाभी ने अपनी ननंद बना दिया!


कृपया ऊपर दी हुई स्टार रेटिंग का उपयोग कर इस कहानी को रेटिंग दे!

नोट: इस कहानी की लेखिका है “मेल इन साड़ी” जिन्होंने यह बहुत ही प्यारी देवर भाभी की कहानी हमारे expression challenge #3 के जवाब में लिखी है. आशा है आपको बहुत पसंद आएगी! हम तो इस कहानी को पढ़ कर पहले ही दीवाने हो चुके है!

देवर और भाभी का रिश्ता बड़ा ही प्यार भरा होता है| मेरा भी मेरी भाभी के साथ कुछ ऐसा ही था| एक दिन भाभी को पता नहीं क्या सूझी और बोली “देवर जी तुम भी चलो न मेरे साथ मेरी दोस्त की शादी में “| मैं बोला, “भाभी आपकी दोस्त की शादी है और वो भी गाँव में, मैं क्या करूंगा ? और फिर मेरे साथ का कोई होगा भी नहीं बोर हो जाऊंगा।”

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भाभी और मेरा रिश्ता बड़ा ही प्यार भरा था

भाभी बोली, “बात तो तुम भी सही कह रहे हो लेकिन मेरा वादा है तुम्हें बोर नही होने दूंगी देवर जी!!” सुनकर मैं बोला, “भाभी ऐसा क्या करने वाली हो जो मुझे बोर नही होने दोगी वो भी 3 दिन ??”

भाभी बोली,”देवर जी ये सब मुझपर छोड़ दो याद है ना तुमने अपने कॉलेज के फंक्शन में जो नाटक किया था तब के बाद तुम्हें खूबसूरत औरत के रूप में नही देखा!!” मैं शर्म और खुशी के मारे अजीब सी हालात में था, समझ नही आ रहा था भाभी से कैसे आंखें मिलाऊँ, लेकिन साथ ही एक अलग अहसास दिल में हिलोरें मारने लगा था|

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भाभी की बात सुनकर समझ नहीं आया कि कैसे आँखें मिलाऊँ उनसे?

आज भी याद था वो दिन जब कॉलेज में मुझे मेरी लड़कियों जैसी कद काठी और रूप रंग के कारण लड़की का रोल निभाना था, और उस दिन से पहले मैंने कभी सोचा तक नही था लड़कियों के कपड़े पहनने के बारे में, रिहर्सल तो लड़कों वाले कपड़ो में ही हुई। लेकिन फाइनल रिहर्सल के दिन डायरेक्टर साहब ने सबको अपने गेटअप में आने के लिए बोल दिया|

मैने अब तक घर में अपने इस रोल के बारे में नही बताया था, बहुत शर्म आती थी लेकिन आखिरकार बताना तो था पर किसको? भाभी को बताऊं या माँ को ? मुझे भाभी ही सही ऑप्शन लगी, लेकिन भाभी की छोटी बहन भी उनसे मिलने यहां आयी थी, भाभी से बोलूं भी तो कैसे बिल्कुल समझ नही आ रहा था| आखिर मैने फैसला कर लिया कोई चोरी तो नही कर रहा तो बताना तो पड़ेगा ही और जैसे ही भाभी को अकेला देखा मैं भाभी के पास चला गया|

भाभी बोली, “देवर जी कुछ काम था ?”

मैंने झिझकते हुए कहा “हैं भाभी पर ….भाभी बोली पर क्या? बोलो न!”

मैंने फिर कोशिश की लेकिन इतना ही बोल पाया कि कॉलेज के प्रोग्राम में हिस्सा लिया है….तो भाभी बोली “तो इसमें क्यों शर्मा रहे हो?” में बोला, “भाभी लड़की का रोल मिला है”, और मेरी आँखें शर्म से नीचे हो गयी, और मेरी फूटी किस्मत तभी भाभी की बहन रिया भी कमरे में आ गयी! वो और में बिल्कुल एक उम्र के थे पर मेरे शर्मीले स्वभाव के कारण बात बहुत कम कर पाता था| भाभी की हंसी छूट गयी पर मुझे शर्माता देखकर उन्होंने हंसी रोकी और बोली “कब है प्रोग्राम और तुम मुझसे क्या चाहते हो ?” अब इन बातों में भाभी की बहन रिया भी शामिल हो गयी थी…

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उस दिन कॉलेज के बाद भाभी के सामने मुझे शर्म तो आ रही थी सच्चाई बताने में

मैं भाभी से बोला, “भाभी 3 दिन बाद है पर कल मुझे ड्रेस में फाइनल रिहर्सल करनी है और मेरे पास लड़कियों के कपड़े नही हैं|” भाभी और रिया दोनों जोर से हंसने लगे और भाभी बोली, “तो मेरे कपड़े ले जाना!” फिर रिया भी और हंसने लगी|

मैं बोला भाभी, “मैं आपको अपनी प्रॉब्लम बात रहा हूँ और आप दोनों मजाक बना रहे हो ?” ये देखकर रिया की हंसी बन्द हो गयी| भाभी बोली “सॉरी मेरा ये मतलब नही था अच्छा फाइनली बोलो तुम क्या चाहते हो ??” मैं बोला, “मुझे लड़कियों के कपड़े चाहिए और एक वादा ये कि घर के किसी भी सदस्य को इन बातों का पता नही चलना चाहिए|”

भाभी बोली, “लेकिन इसके बदले मुझे क्या मिलेगा?” मैं बोला, “भाभी आप कभी भी मुझसे एक चीज़ मांग लेना मैं मना नही करूंगा|” और भाभी ने भी हाथ से हाथ मिलाकर डील पक्की कर ली| अब भाभी सीरियसली मेरे लिए सोच रही थी| उन्होंने अपने कुछ सूट निकाले और बोली, “एक बार इनको ट्राई करो|” मैं उनको लेकर दूसरे कमरे में गया तो भाभी बोली, “तुम पहन लोगे क्या ? अब अगर तुम्हें लड़की बनना ही है तो हमसे शरमा के कैसे चलेगा ?” भाभी बोली चुपचाप अपने कपड़े उतारकर खड़े हो जाओ बस मेरे पास इसके अलावा कोई चारा नही था!

मैं बस एक बेजान पुतले की तरह खड़ा हो गया जो बस शर्मा रहा था| भाभी ने रिया से कहा, “रिया तू क्या खड़ी है? तू भी हेल्प कर मेरी|” और अब रिया भी इसमें शामिल हो गयी|

रिया ने भाभी का एक बहुत ही अच्छा नीले कलर का सूट हाथ में पकड़ा और बोली, “दीदी ये पहनाओ इनपे अच्छा लगेगा|” भाभी बोली, “हाँ, इसे ट्राई करते हैं!” और इसी के साथ मेरी टीशर्ट और लोअर उतार दिया गया!

रिया बोली, “आपको अंडर शर्ट भी निकालनी पड़ेगी|” और फिर बस मैं उन दो औरतों के सामने केवल कच्छे में खड़ा था बस| और मेरी हालत मुझसे ज्यादा कोई नही समझ सकता| तभी रिया भाभी के कान में कुछ फुसफुसाई और भाभी हंसने लगी| मुझे लगा अब कुछ नया ड्रामा होगा| इतने में भाभी बोली, “देवर जी तुम्हारी शर्म गायब करने का इलाज है मेरे पास|” और रिया को इशारा किया और रिया ने अलमारी से कुछ निकाल के बेड पर रख दिया| ये एक लेस वाली ब्लैक ब्रा और पैंटी का सेट था जो भाभी शायद अपने लिए लायी थी, लेकिन अपने देवर पर इस्तेमाल कर रही थी अब! मेरी हालत अब ऐसी हो गयी थी कि लगता था ये जमीन फट जाए और में उसमें समा जाऊं बस|

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रिया को एक तरकीब सूझी और उसने भाभी के कान में कुछ फुसफुसा कर कहा| अब तो मेरी शर्म की सीमा पार हो गयी थी|

भाभी बोली, “तुम्हें हमारे सामने ऐसे खड़े होने में शर्म आ रही है ना? तो चलो इनको पहन लो| एक जवान खूबसूरत लड़की को बिना ब्रा और पेंटी के नही रहना चाहिए!” भाभी के मुह से कभी ऐसे शब्दों को नही सुना था मैंने| लेकिन शायद मेरी शर्म दूर करने के लिए उन्होंने ये करने में भी कसर नही रखी| उन्होंने ब्रा मेरे हाथों में दी मैंने उसे पकड़ तो लिया पर अब क्या करूँ समझ नही आ रहा था| तभी भाभी ने मुझसे हाथ आगे करने को बोला और ब्रा के स्ट्रैप्स के अंदर मेरे हाथ डाल दिये| और रिया ने भी अपना काम करते हुए पीछे से आकर हुक लगा दिए| और चहक के बोली, “दीदी आपका और इनका साइज तो बिल्कुल एक है 36C परफैक्ट फिट है इन्हें…!!”और भाभी भी चहकने लगी ख़ुशी से बोली, “चलो इसका मतलब अब देवर जी के लिए कपड़ों की कोई कमी नही| जो चाहे पहन सकते हैं|” अब मेरी भी शर्म थोड़ी दूर होने लगी थी, शायद ये सब उस काली लेस वाली ब्रा का असर था जिसने मेरी छाती के साथ मेरे दिल दिमाग को भी लड़कियों सा कर दिया था|

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मैने भाभी के हाथों से पेंटी भी ले ली और बाथरूम में जाकर झट से पहन आया| भाभी बोली, “वाह देवर जी ब्रा पहनते ही तुम्हारी सारी शर्म गायब हो गयी|” और रिया भी ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और बोली, “दीदी खाली ब्रा अच्छी नही लग रही इसमें कुछ भर दो ताकि सुडौल लगने लगे|” और भाभी ने मेरी ब्रा की कप में कपड़े भर दिए और गर्व से ऐसे देखने लगी जैसे कोई औरत अपनी जवान बेटी के यौवन को निहार रही हो…|

अब बारी थी उस हलके नारंगी कॉटन के सूट को पहनने की जिसका चूड़ीदार पायजामा और साथ में सुनहरे रंग का बॉर्डर लिया हुआ दुपट्टा था| भाभी ने रिया को इशारा किया और रिया चूड़ीदार पायजामे को हाथ में लिए खड़ी थी| भाभी और रिया मुझे तय्यार करने में ऐसे लगे थे जैसे नयी नवेली दुल्हन की सखियाँ! और ये बात अपने आप में कुछ ख़ास होने का एहसास करवा रही थी| मुझे ऐसा लगता था कि लड़की होना भी अपने आप में कुछ ख़ास होता होगा, कितनी मेहनत करनी होती है लड़कियों को अपने रूप सृंगार और अच्छा दिखने के लिए और हम लड़के बस यूँही चल देते हैं कहीं भी … मैं ये सब सोच ही रहा था की तभी भाभी बोली देवर जी पायजामा तो हो गया अब एक बार सूट पहनकर दिखाओ और उनकी आवाज़ सुनकर में जैसे चौंक गया और तभी रिया ने सूट मेरे गले से अंदर डाला और सूट भी पहना दिया| थोड़ा सा टाइट था, लेकिन इतना था कि मेरे शरीर के बस वो अंग उभरकर आए जो इस सूट को पहनने वाली लड़की के आने चाहिए| रिया चहककर बोली, “दीदी पर्फेक्ट फिट है ये भी!” और भाभी तो इतनी खुश लग रही थी कि खुशी के मारे मेरे माथे को चूम लिया और बोली, “आज मैं चाहती हूँ की तुम मेरी बहन रिया से भी ज़्यादा खूबसूरत लगो!” ये सुनकर मेरी आखों में भी पानी भर गया| मैने कभी सोचा नही था कि भाभी मुझे अपनी सग़ी बहन से ज़्यादा दुलार दे सकती है| और इसी बीच भाभी ने मेरे गले में दुपट्टा डाल दिया और बोली, “पता है लड़कियों को बिना दुपट्टे के ऐसे नही घूमना चाहिए, मर्दों की नज़रें बहुत खराब होती हैं!” और हम तीनों खिलखिलाकर हँसने लगे|

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रिया मुझ पर अपने मेकअप का जादू दिखाने लगी

मैने ये कभी नही सोचा था की कॉलेज का ये नाटक मुझे भाभी को और रिया को इतना नज़दीक ले आएगा…. खैर अब उन दोनों के सामने में भी अपने आप को एक लड़की ही महसूस करने लगा था| बस बालों का फ़र्क था, तभी भाभी ने रिया से कहा, “रिया, ज़रा अपना मेकप का जादू दिखा तूने क्या सीखा पार्लर के कोर्स में ….”

बस भाभी का हुक्म मिलते ही रिया ने अपना जादू दिखाना शुरू किया मेरे चिकने चेहरे पर फाउंडेशन और ना जाने क्या क्या लगाने तक उसने मुझे आईने से दूर रखा, और जब गुलाबी लिपिस्टिक का स्वाद मेरे होंठों से होते हुए मेरे जेहन को छूने लगा तो मुझे ये खुश्बू मेरे स्त्रीत्व का अहसास से करने लगी थी| लोगों को सालों लग जाते हैं इस अहसास को जीने के लिए लेकिन मैं पहली ही बार में इस आनंद को महसूस कर लुंगी कभी सोचा तक नही था! आप लोग सोच रहे होंगे कि ये खुद के लिए लुंगी शब्द का इस्तेमाल क्यों ? लेकिन क्या बताऊँ जिस अवस्था को में जी रही थी उसमें भाभी भी मुझे लड़की जैसे ही संबोधित कर रही थी और रिया तो जैसे उसको कोई सहेली मिल गयी हो!

मेकअप पूरा होते ही रिया मुझे शीशे के पास ले गयी और अपनी कलाकारी पर इठलाक़े भाभी से बोली, “दीदी देखो आपके देवर को आपकी ननद बना दिया!” और खुद को आईने में देखकर तो मुझे खुद को भी अपने स्त्री रूप से प्यार हो गया और ये पहली नज़र का प्यार कमबख्त बहुत जालिम होता है!!! भाभी बोली, “रिया वाकई तुम अपने काम को अच्छी तरह से निभा सकती हो|” और अब हम तीनों खुश थे!! तभी भाभी बोली, “देवर जी तुम लड़की तो बन गए लेकिन अभी तुम्हें चाल ढाल और आवाज़ पर मेहनत करनी पड़ेगी और आज तो ये संभव नही क्योंकि माँ जी घर आती ही होंगी| और अगर उन्होंने आप को इस रूप में देख लिया तो आप के लिए बहु की जगह जमाई की तलाश शुरू कर देंगी!” और खिलखिला के हंस दी| इस खिलखिलाहट में रिया भी उनका साथ दे रही थी, पर मुझे अब फिर से इस रूप से बाहर भी तो आना था|

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उस दिन तो मैं अपने इस स्त्रीत्व के अनुभव के लिए भाभी के सामने शुक्रगुज़ार हो गयी

मेरा दिमाग मुझसे कहा रहा था कि माँ के आने से पहले चेंज कर लूं और दिल बस इसी स्त्रीवेश में रहने को आतुर था| भाभी और रिया के रूप में इतनी प्यारी सहेलियों को छोड़ने का मन ही नही था| लेकिन मेरी किस्मत उस दिन बहुत अच्छी थी| भाभी बोली, “देवर जी, आप चिंता न करो आपके भैया और माँ जी कल सुबह आपकी बहन के घर कानपुर जा रहे हैं कल से आप पूरी तरह लड़की बन जाना, और कल बाजार से आप की साइज की चूड़ियां और एक अच्छी सी विग भी लानी है, ताकि अपने देवर जी को ननद बना सकूं और हाँ अब मैं आपसे निकी बोलूंगी. ओके??” और मैने भी हामी में सर हिला दिया| और जल्दी से कपड़े चेंज करने लगा| और बाथरूम में जाकर अपना मेकअप भी उतार लिया| भाभी का अनुमान कितना सही था मेरे पुरुष रूप में आने के 2 मिनट भी न हुए होंगे कि माँ मंदिर से वापस आ गयी, और में सोचने लगा अगर भाभी ने सही समय पर मुझे आगाह न किया होता तो आज मेरी खैर नही थी!!! खैर, जब किस्मत अच्छी हो तो सब चीज़ अच्छी चलती है, और आगे के दो दिन भी मेरे बहुत अच्छे गए, और अब था मेरे स्कूल के प्रोग्राम का दिन!!!

आगे के दो दिन मैंने, भाभी और रिया ने सहेलियों की तरह गुज़ारे. रिया तो मुझे तरह तरह से तैयार कर मेरे साथ घुल मिल गयी थी. और भाभी मुझे अपनी प्यारी ननद की तरह ट्रीट करती थी.

भाभी बोली, “निकी आज तुम ये गुलाबी सूट पहनो इसका हरा पटियाला सलवार तुमपर बहुत अच्छा लगेगा और हरा दुपट्टा तो तुम्हारे कॉलेज के लड़कों का दिल ही ले लेगा|” बस बोलते ही भाभी शुरू हो गयी अपनी बहन रिया के साथ, और आज केवल 25 मिनट में मुझे उन दोनों ने पूरी जवान खूबसूरत लड़की बना दिया| और फिर भाभी मैं और रिया कॉलेज को निकल गए| और मज़े की बात किसी ने भी मुझे गौर से घूरकर नही देखा, और ये बात मेरे लिए बहुत अच्छी थी| अब में समझ गयी थी कि एक लड़की के रूप में अब मैं पूरी तरह पास हो चुकी हूं। जैसे ही कॉलेज पहुंचे भाभी बोली, “निकी थोड़ी देर में तुम्हारा प्ले शुरू हो जाएगा फिर तुम्हें पता नही कब इस रूप में देख पाऊंगी इसलिए यादगार के रूप में तुम्हारी फ़ोटो लेते हैं|” और उन्होंने कॉलेज के गार्डन में मेरी अलग अलग पोज़ देते हुए कई फ़ोटो ले डाली, और ये फोटो उसी का एक हिस्सा मात्र है।।

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मेरे कॉलेज के ड्रामा के दिन की वो तस्वीर! आज भी देख कर मचल उठती हूँ मैं!

आज भी जब इस फोटो को देखती हूँ तो कॉलेज का वो प्ले बिल्कुल आंखों के सामने आ जाता है, कितनी खूबसूरत लग रही थी मैं, भाभी के इस गुलाबी कमीज और हरे पटियाला सलवार और दुपट्टे में, मेरे साथ के लड़कों को तो जैसे विश्वास ही नही हो रहा था कि ये मैं हूँ!!! हाय, आखिर वो प्ले भी समाप्त हुआ और मैं रिया और भाभी के साथ लड़की बनके ही घर को आ गया। रास्ते में भाभी और रिया मुझे छेड़ते हुए आ रहे थे|

भाभी बोली, “देवर जी आज तक तो मुझे केवल रिया की चिंता थी अब तो तुम्हारे लिए भी लड़का ढूंढना पड़ेगा, वर्ना ये मदमस्त जवानी तुमसे सम्भलेगी नही!” और हल्की सी मुस्कुरा दी मुझे देख कर| और मैने भी भाभी से चुटकी लेते हुए बोल दिया, “भाभी सच कहा आपने इस ड्रेस में आकर तो मुझे भी अब बॉयफ्रेंड की कमी महसूस हो रही है, बहुत मन कर रहा है कि कोई होता जो मेरी कमर में हाथ डालकर मेरे साथ चुहलबाज़ीयाँ कर रहा होता|” भाभी बोली, “हाय रे| देखो तो इस लड़की को! २ दिन हुए नहीं लड़की बने और इसे कोई कमर में हाथ डालने वाला भी चाहिए!” भाभी और रिया हँसने लगी और फिर भाभी बोली, “कल से तुम्हारे भैया और माँ वापस आ जाएंगी, इसलिए अब ये सब भूल जाओ|” और मैं भी इस सच्चाई को महसूस कर मन मसोस के रह गया, और इसी बीच हम घर पहुंच गए। पर दिल खुश था या दुखी समझ नही आया था उस पल और आज इस बात को 2 साल पूरे होने के बाद भाभी का ये प्रस्ताव मुझे अजीब सी उलझन में डाल रहा था।

समाप्त… इससे आगे की कहानी भाभी की सहेली की शादी कुछ दिनों में!

यदि आपको कहानी पसंद आई हो तो इसको रेटिंग देना न भूले! और कमेन्ट अवश्य करे!

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20 thoughts on “देवर और भाभी”

  1. Meri bhabhi apni sis ki shadi ke manghe me yellow satin salwar suit pahna ke parlour se makeup karake mere kanoo ko chidwaya aur khoob sari peelee chooriyan pahnawae ,wig lagaya aur pura function apni nanad bana ke enjoy karaya tha.woh experience me kabhi nahi bhool sakta aur aajtak mere kaan ke ched open hai ,jab bhi ghar me akele hote bhabhi ke suit ,saree pahante ,bhabhi ki ijazat se aur tailor se bhi suit silwa ke pahante hai..Kai baar salwar suit me bhabhi apne sath market aur parlour leja chuki hai.

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    1. since the author of this story has never responded back, we believe there is not going to be any follow up to this story.

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