Be like her – 019

Be like the lady in this picture!


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Unlike men, women have the priviledge to say YES to everything beautiful.

Be it a dress or a saree; be it made of silk or satin; be it a flower print or a beautiful embroidery; be it gorgeous long hair or bright colored nails; be it lovely dangling earrings or sexy heels. A woman can say yes to everything.

Then, why would I not live my life as a woman?

एक औरत को ये सौभाग्य मिलता है कि वो हर खुबसूरत चीज़ को स्वीकार कर सके. फिर चाहे वो एक सुन्दर ड्रेस हो या लहराती साड़ी, वो चाहे सिल्क की हो या सैटिन की, फिर चाहे फूलों के प्रिंट हो या खुबसूरत कढ़ाई, फिर चाहे फूलो से सजे घने लम्बे बाल हो या फिर चटकदार रंगों वाली नेल पोलिश, फिर चाहे कानो में लटकते झुमके हो या सैंडल. औरत हर खुबसूरत चीज़ पर अपना हक़ मानती है.

तो फिर मैं क्यों भला एक औरत के अलावा कोई और ज़िन्दगी जियूंगी? इसी जीवन में मैं औरत होने के सौभाग्य को पाकर रहूंगी.

Indian Crossdressing Novel

Caption Credit: The woman inside me and Sensuous.

Note: No copyright violation intended. The pictures here are intended only to give wings to the imagination for us special women who this society addresses as crossdressers. Pictures will be removed if any objection is raised here.

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मेरी बहना

मेरी और मेरे चचेरे भाई अरुण की कहानी जो मेरी बहन बन गया|


कृपया कहानी की लेखिका के लिए कमेंट लिख कर उन्हें प्रोत्साहित करे!

लेखिका: श्वेता कुलकर्णी

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ये मेरी सच्ची कहानी है| ये कहानी मेरी और मेरे भाई अरुण की है| अरुण मुझसे २ साल छोटा है और मेरे चाचा का बेटा है| हम लोग बचपन से काफी साथ में खेले है और बड़े हुए है | बाद में स्कूल के बाद वो इंजीनियरिंग करने बाहर चले गया | पर जब कभी वो नागपुर आता तो घर पे मिलने जरुर आता था | मैं उसके साथ घुमने भी जाती थी और हम एक अच्छे भाई बहन थे |

अरुण मेरे लिए भाई के साथ साथ दोस्त भी था| हम साथ साथ मूवी जाते थे और शोपिंग करते थे| हम दोनों अच्छे दोस्त की तरह रहते थे| पढाई के बाद बाद अरुण की जॉब नागपुर में ही लग गयी और उसका घर में आना जाना बढ़ गया था| एक बात बता दू की हम दोस्त तो थे पर कभी प्रेमी नहीं सो इस कहानी में कोई सेक्स की बात नहीं है|

इसी बीच पापा की ट्रान्सफर मुंबई हो गयी जहा वो माँ के साथ रहने लगे| माँ कभी नागपुर तो कभी मुंबई रहने लगी| पापा की तबोयत ख़राब रहने के कारण माँ का उनके साथ होना जरुरी था और मैं घर अकेले नहीं छोड़ सकती थी इसलिए मैं नागपुर में और माँ मुंबई में रहने लगी|

मैं ज्यादा घुमने फिरने नहीं जाती थी और घर पे ही रहती थी| पढ़ते हुए कुछ दिन में मुझे बोर होने लगा था, पर अकेले बाहर जाती भी तो कहा? मेरे सभी दोस्तों के बॉय फ्रेंड थे और वो बिजी थे| मैं अकेली थी जिसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था | सो उनको भी डिस्टर्ब नहीं कर सकती थी| इसलिए मन मार के मैं घर पे ही रहने लगी | पर अरुण के घर आने और उसके साथ समय बिताना मुझे पहले से ही पसंद था हम भाई बहन कम और दोस्त जो ज्यादा थे|

मेरी कोई छोटी बहन नहीं है और ये बात मुझे बहुत खटकती थी, मैं चाहती थी की मेरी भी कोई बहन हो जिसके साथ मैं आपने कपडे गहने मेकअप शेयर कर सकू | ऐसे में ही मैंने अरुण को मेरी बहन न होने की बात बताई वो हँसा और बोला “बस इतना ही न आज से मैं तुम्हारी बहन बन जाता हूँ|” पहले तो मुझे लगा कि वो मजाक कर रहा है| मैं भी हँस दी और बोली कि “तुझे क्या पता कि लड़की होना कितना मुश्किल काम है| अगर मेरी बहन होती तो मैं उसके साथ कितना मज़ा करती, मस्त ड्रेस शेयर करती, सब बात बताती और घर के काम में हेल्प भी लेती|”

तो वो बोला, “देखो दीदी. घर के काम तो मैं वैसे भी करता हूँ| रही बात ड्रेस की तो तुम्हारे पास ही इतने कपडे है कि नए कपडे खरीदने की ज़रुरत नहीं है| और बातें तो ऐसी कोई नहीं है जो हम कर नहीं सकते| हाँ, कुछ लड़कियों वाली होगी तो अगर मैं तुम्हारी बहन बनूंगी तो वो भी कर सकोगी| मतलब तुम मुझको समझा देना| और हम दोनों बहनों की तरह साथ में रह भी सकेंगी” उस वक़्त तो मैंने उसकी बात को हँसी में ले ली और हम फिर से नार्मल रहने लगे|

पर कुछ महीनो बाद मेरी एक दोस्त जिसका नाम मयूरी था उसकी शादी थी और उसकी शादी में मुझे जाना था पर समय नहीं था कि पारलर जाकर वैक्स करू और तैयारी करू| इसलिए मैंने घर पे ही वैक्स करने का फैसला किया और तैयारी में लग गयी तभी अरुण घर पर आ गया| मुझे वैक्स करने में तकलीफ होते देख कर वो बोला, “दी मैं हेल्प करता हूँ” और मैंने अपने हाथ और पैर के बालो को निकालते वक़्त उसकी हेल्प लेने में कुछ गलत भी नहीं समझा|

मेरी वैक्स के दौरान मैंने उसको कहा, “अरुण तुम भी आपना वैक्स कर लो वैसे भी ज्याडा बाल तो है नहीं तुम्हारे”| उसने कहा “आप कर के दो तो कर लू”| सो मेरी वैक्स क बाद मैंने भी उसके हाथ और पैर की वैक्स कर दी| उसने कहा कि वो छाती के भी बालो की वैक्स करना चाहेगा जैसे हीरो लोगो के होते है तब मैंने उसको छाती के बालो की भी वैक्स कर दी और उसको बाद में नहाने के लिए बोली क्योंकि वैक्स के कारण उसे बहुत जलन हो रही थी| प्रॉब्लम तो तब हुयी जब वो नहाकर आया क्योंकि पापा तो मुंबई में रहते थे इसलिए उनके कोई कपडे घर में नहीं थे और जो थे वो काफी दिनों से रखे थे बिना धोये अब अरुण के पहनने के लिए कुछ नहीं था| ये बात हमने पहले सोची नहीं थी और उसके कपडे वैक्स के कारण ख़राब हो गए थे और मैंने धोने भी डाल दिए थे जिसको सूखने में कम से कम दो घंटे लगते| हालांकि वो तब तक टॉवेल लपेटकर रह सकता था पर वैक्स के बाद उसको मेरे सामने शर्म आने लगी थी|

तो अरुण ने मुझसे कुछ पहनने को माँगा| तो मैंने कहा, “घर में कोई जेंट्स के कपडे तो है नहीं| क्या तुम मेरे या माँ के पहन सकोगे?” कुछ न होने से तो कुछ अच्छा सोच कर उसने हाँ कर दिया| अब मेरे सामने सवाल था कि मैं उसको क्या दू क्योंकि माँ तो सिर्फ साड़ी पहनती थी| इसलिए मैंने उसको अपने कपडे देने के बारे में सोचा| मैंने अरुण को मेरी एक नाईट camisole दिया और निचे शॉर्ट्स पहनने को कहा| camisole तो बनियान की तरह होता है तो उसे कुछ प्रॉब्लम नहीं हुई पर मेरी शॉर्ट्स में वो घुस नहीं पा रहा था इसलिए मेरे पास उसको मेरा सलवार या मिडी देने के अलावा कोई आप्शन नहीं बचा था| मेरा मिडी देने का मन नहीं हुआ तो मैंने उसको सलवार दे दी वो भी बिना कमीज़ के| क्योंकि सलवार बहुत ढीला होता है और वैसे कपडे लड़के पहनते नहीं है तो उसे काफी अजीब लग रहा था और मुझे भी उसे देखकर हँसी आ रही थी|

खैर उसके बाद मैं उसके लिए टीवी चालु कर नहाने चली गयी| नहाकर आते ही मैंने टॉप और मिडी पहन ली जिसकी लम्बाई मेरे घुटनों तक थी| मुझे दुसरे दिन शादी के लिए अपने पैरो पे मेहंदी जो लगानी थी| तब तक अरुण भी सलवार और camisole के साथ कम्फ़र्टेबल हो गया था| बाद में हमने खाना खाया और मैं उसको देख कर हँसी आने लगी| अचानक से मुझे अपनी छोटी बहन वाली बात याद आई और मैंने अरुण से कहा, “भगवन ने आज मुझे एक बहन दे ही दी” और हम हँसने लगे| मैंने अरुण से कहा कि क्यों न अब वो मेरी सलवार और camisole पहन ही लिया है तो अब मेरी नयी बहन का नाम कारण भी किया जाए| मैंने उससे पूछा कि उसको लड़कियों में कौनसा नाम पसंद है? तो उसने कहा, “मेरी सबसे अच्छी दोस्त बहन तुम ही हो और मैं चाहता हूँ कि मेरा नाम भी श्वेता हो” तो मैं बोली, “पर घर में दो दो श्वेता कैसे हो सकती है?”

तो उसने कहा, “ये बात तो सिर्फ हम दोनों के बीच की है| मैं वैसे भी आपको दीदी कहता हूँ| और नाम से नहीं बुलाता| आप मुझे श्वेता कहना” मुझे भी उसकी ये बात अच्छी लगी इसलिए मैंने उसका नामकरण श्वेता कर दिया| उस दिन उसने मुझे मेहंदी लगाने में मदद की और मैंने भी उसके वैक्स किये हुए पैरो पर घुटनों के निचे और सॉक्स के ऊपर वाले हिस्से में मेहंदी निकाल दी ताकि ऑफिस में किसी को उसके वैक्स और मेहंदी के बारे में पता न चले|

ये तो बस कहानी की शुरुआत थी कि कैसे मुझे मेरी छोटी बहन श्वेता मिली आने वाले समय में मैं आपको और भी बाते बताउगी| पर इस कहानी को किसी और कहानी की तरह मन में सेक्स मत लाना| ये एक अच्छी कहानी है और आज भी हम दोनों लोगो के सामने भाई बहन है और अकेले में हमारा रिश्ता बहनों वाला ही है|

आगे अगले पेज में पढ़े…

बुआ की भतीजी

एक क्रॉसड्रेसर की कहानी जिसको बुआ ने भतीजी बनाया


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Story Credit: Sanjana

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Ye kahani ek 24 saal ke ladke ki hai jo kaise ladki ban gaya……Mera naam susheel hai mai family ke sath rahta hoo mujhe bachpan se hi crossdresing karna bahut pasand tha. Me bachpan se hi sochta tha jab mujhe itni samjh bhi nhi thi ki mai ladki kyo nhi hoo.phir jaise jaise badi hui ladki banne ki iccha aur badti gyi. Lekin me apni khwahish ko dabakar ek ladke ka jiwan ji rahi thi . But me zindgi se khush nhi thi. Lekin phir bhi me kabhi kabhi crossdresing kiya karti thi apne ap ke liye .

Mahine me kai baar apni mom ki saree , blouz, petticoat aur jewelry pahanti thi..Mujhe acchi tarah se yaad hai ki meri family me mere ek uncle ki shadi thi jo mujhse umra me 3 saal bade the. To unki shadi me meri dono bua mere ghar pe aa gayi . shadi ladke aur ladki wale milkar dono log ek sath ek jagah par kar rhe the . To mere ghar ke sabhi log 5 dino ke liye shadi me ja rhe the but kisi ko to ghar pe rukna hi tha maine bol diya ki mai rukunga to mom bhi man gayi mere liye to ye bahut accha mouka tha ki zindagi me phli baar acche se taiyar hokar 5 din tak aaram se ladki ki tarah rah sakti hoo. Lekin phir mom ne kaha ki tum rokoge to phir tumhare khane ka kya hoga . To meri ek jo chhoti bua hai rukne ke liye unhone bol diya.

Mai man hi man chintit thi ki mouka hath se gaya but kya kar sakti thi.meri chhoti bua bahut hi acchi thi. Phir agle din sabhi log shadi ke liye nikal gye ab ghar me keval main aur meri bua thi. Maine socha phle ki tarah thodi bahut crossdresing to ho hi jayegi. Meri bua ka bag mere kamare me hi rakha hua tha..To jaise hi khana kha ke bua mom ke kamre me letne ke liye gayi me bhi apne kamre me aa gayi . To maine dekha ki bua ka ek bahut hi sundar bLouz chamakila golden color ka table par rakha hua tha . Jisko dekhar me bahut khus hua . To maine jab use uthaya to dekha ki is blouz me cup lage hue hai. To maine jaldi se use pahan liya . Meri bua ka size , hight mere jaise hi thi. To wo blouz mujhe asani se phit ho gya..Ab mujhse raha nhi jaa raha tha . To maine unke bag se saree , petticoat nikal kar pahanne lagi thi. Maine blouz aur petticoat pahn rakha tha . Aur saree pahan rahi thi..Achanak mere kamre ka darwaza khula to main dekhar wahi shok ho gayi . Samne meri bua khadi thi . Unhone mujhe dekh liya. Saree blouz me . Aur wo zor se hasne lagi.

Mere man me yahi khayal aa raha tha ki ab kya hoga…Bua mere paas aayi . Aur mujhe dekhkar boli tumhe saree pahanna nhi aata. Me tumhe sikha deti hoo ki kaise pahnte hai. Maine bua se poocha ki ap ko ye azeeb nhi lga. To wo boli ki tumhe ladki ke kapde pasand hai . To kya hua. Ye sunkar mujhe bahut sukun mila. Phir wo boli aao tumhe aaj me ladki banati hoo. But usse pahle apne baare me mujhe sab kuch batao . To maine unhe apne bare me sab kuch bata diya ki mujhe ladki banna hi. To ye sab sunkar meri bua boli ki tum chinta mat karo me hoo na me tumhe ladki bana dungi. Lekin usse phle mujhe medicine kha lene do jo mere bag me hai . Me wahi to lene ke liye aayi thi.

Medicine khane ke baad meri bua mere liye Vax cream lekar ayi jo ki mere ghar pe hamesha rahti hai . To bua boli sabse phle apne sare kapde utaro . Maine apne sare kapde utar diye . Me bilkul nude tha . Meri bua neeche ki taraf isara karke boli ki isko sant rakho. Aur me kuch kah nhi paya. Me man hi man bahut khush tha. Ki aaj meri iccha puri ho rahi hai..Bua mujhe bathroom lekar gayi aur meri poori body par Vax lagaya jisse mere sare bal nikal gye vaise jyada bal mere body par nhi girls ki tara hi the meri dadi munch bhi sahi se nhi aati thi. Meri body shape bhi girl ki tarah hi tha. Jab sare vaxing ho jane ke baad nahane ke baad unhone mujhe ek towel diya aur bola ise girl ki tarah apne chest se lapeto to maine aise hi kiya. Ab unhone mere liye ek bra aur panty nikali . Jo maine pahan li . Ab wo boli ki tumare boobs ke liye kuch karna padega. kuch der ruko yahi. Aur wo kamre se bahar chali gyi aur kuch der baad jab kamre me wapas aayi to unke hath me do water ballon the.

Jo unhone meri bra me rakh diye . Jisse mujhe accha lag raha tha aur chalne par hil bhi rahe the. Ab unhone mujhse poocha ki tum saree pahnoge ya suit to maine bola ki saree pahnongi. To unhone apne bag se kai saree nikal kar mujhe dikhayi aur bola ki tum inme se pasand kar lo to maine ek pink aur red color ki kafi bhari saree pasand kar li. To bua boli ki tumhari pasand to ladkio jaise hi hai. Ab unhone mujhe petticoat nikal kar diya .Jo maine pahan liya . Phir unhone mujhe saree ki matching ka hi blouz deiya jisme cups the . Wo mujhe bilkul sahi fit ho gaya.uske baad unhone mujhe payal & bhichiya nikal kar diye pahanne ke liye jo maine pahn liye. Uske baad unhone chudion ka set nikal kar diya jo ki bilkul saree se matching tha .

Bua ne mujhe chudiya pahanne me help ki aur dono haton me 9 -9 chudiya aur 2-2 kangan pinaye . Phir unhone mujhe saree pahnna sikhya ki kaise saree pahnte hai jab me saree pahan rahi thi to chudion ki khan bahut madhur lag rhi thi . Unhone mujhe bahut acche se saree pinaye.. phir mera makeup kiya eyebrow banayi. Lipstick lagayi .Kazal lagaya. bindi lagayi. Nailpolish lagayi Ab unhone mujhe mirror ke samne khada kiya me bahut hi sunder dikh rahi tHi. Me bata nhi sakti ki us din me kitni kush thi. Phir wo achanak se boli abhi sab kuch nhi Hua. Abhi tum puri tarah se taiyar nhi hui . Girl ki sabse jaruri cheej to rah hi gyi hai jise wo hamesha pahanti hai . Bua boli ladki bina nak kan chidwaye acchi nhi lagti. Main boli ki sach me ap mere nak kan chidwaye ngi . Wo boli ha. Bilkul tabhi to tum aur sunder dikhogi . Main bahut khus ho gyi. Aur wo jaker sui lene chali gyi. Ab unhone mujhe baitha ke mere dono kano ko 2-2 jagah se ched diya. Maine poocha ki do jagah se kyo.

Wo boli ki aaj kal 2 jagah kano me ched ka fashion hai . Bua boli Mere bhi to kano me 2 jagah se ched hai . Unhone mere kano me bahut hi heavy jhumke pahna diya . Kan ke dusre ched me choti bali pahna di . Mere kan par bahut vazan ho gaya tha. Mere chahre ka thoda sa bhi hilne par jhmke hilte the . To bahut accha lagata tha. Ab bua boli ki ab tum nak aur chidwao me boli ki thik hai . Maine kaha ki ap mujhe nak me kya pahnaogi unhone kaha ki tumhe kya pasand hai. Maine kaha ki mujhe apki nak ki bali bahut pasand hai . Jo puri nag ki hai. To wo boli tum yahi pahn lena. Me kuch aur pahan lungi . To wo apni nak ki bali utarne lagi . Lekin bua ki nak ki bali utar nhi paa rhi thi . To wo boli tum meri nak ki bali nikal do. Aur maine unKi nak ki bali nikal di . Aur unhone apne jewelry box se ek phool nikal liya aur boli ki tum ise mujhe pahna do . To maine bua ko nak ka phool pahna diya. Ab bua boli ki ab tumhari baree hai. Aur unhone mere nak par sui se ched kar diya. Aur usme nag wali bali meri nak me pahna di. Ab me apne ap ko dekhar shok ho gyi me ladki bankar kitni sunder dikhti hoo…Maine bua se bola ki mere baal bade hote kitna accha hota..To bua boli isme kya hai tumhare liye wig le aate hai. Maine bola abhi. Wo bole ha abhi jyada samay nhi hua hai. Abi to keval 10 hi baje hai. Chalo wig lekar aate hai. Maine bola me aise jaoongi. Wo boli ab tum ladka nhi ho ab tum ladki ho. Aaj se tumhara name swati hai.

aur me scooty nikal kar saree pahan kar wig lene bua ke sath market chali gayi. To dukandar ko mujhe dekhkar bilkul bhi shak nhi hua. Ki ye ladki nhi hai. Wo to mujhse Benji karke baat kar raha tha.ab ham ghar wapas aa gaye the..Aur phir me wig lagakar ek bahut hi sunder ladki ban gyi thi. Bua ne mujhse kaha ki aaj se tum aise hi rahna. Maine kaha log kya kahenge. Wo boli unki chinta mat karo . Aur tumhare mammy papa ko me sambhal lungi. Ab ham dono logo ne raat me khub baat ki . Phir jab rat ko 2 baj gaye to bua boli ki ab tum so jao . Kal tumhare liye market se shopping karne chalenge. Bua boli ki tum saree me hi so jaogi ya fir tumhe nighty du. Me kaha nahi me to saree me hi so jaogi . To bua boli thik hai. But apne kano se jhumke utar do .Ye kafi heavy hai. Inhe regular nhi pahnte hai. To unhone mujhe golden hoop earing di.

Jo maine pahan li. Mere kano me kafi pain ho raha tha . Aur nose me bhi. But me bahut khush thi. Phir dusre din. Bua ne mujhe subah 6 baje utha diya aur boli ladkian jyada der tak nhi soti hai. Aaj tumhe ghar ke sare kam shikhaongi. Me khade hokar fresh hokar nahane ke liye chali gyi. Jab bahar aayi to dekha bua ne mere liye ek blue black color ki saree blouz rakhi thi . Maine use pahan liya . Aur usi ke sath ki matching chudiya bhi pahan li . Aur bua ne mujhe acche se taiyar kiya. Aur bua ke sath milkar ghar ke sare kam bhi kiye. Phir free hone ke baad ham dono log shoping karne market gye . Bua ne mujhe 4 saree , suits, top , skirt , kai sare earing heavy ., Necklace sabhi cheeje dilayi .

Aur phir ham ghar aa gye . Me bahut kush thi ki ab mere paas bhi khud ki saree aur jewellery hai. Aise hi main roj taiyar hoti. Ab to me saree pahnna bhi seekh gyi. Aaj sabhi log ghar aane wale the . Mujhe dar lag raha tha ki kya hoga. Tabhi door bell baji. Aur bua mujhse boli ki gate tum kholne jao. Maine gate khola dekha sabhi log bahar khade the. To sabhi log andar aa gye aur mom ne mujhse poocha beti tum kon ho. To bua hasne lagi . Ye apki nayi beti swati hai. Phir ghar ke sabhi log samajh gye . Ki me susheel hoo. Phir mom ne poocha beta ye sab kya hai . Tum ladki ki tarah kyo bane ho. Aur ye nose & ear kyo pierce karwaye . Bahar log dekhenge to sab kya kahenge. Phir meri bua ne meri mom aur sabhi logo ko samjhaya. To ghar ke sabhi log maan gye.

Aur me bahut hi khush ho gyi. Meri khusi ka thikana nhi tha. Aur meri bhabhi boli meri nanad to bahut hi sundar hai. Phir kuch din baad bua chali gayi. Mujhe unke wapas jane ka bahut bura laga but unko apne ghr to jana hi tha. Ab me girl ki tarah hi rahti thi. Kuch mahine baad maine doctor se treatment lena start kiya to doctor ne mujhe hormone ke tablet di aur bola ki kam se kam 18 month tak aise hi girl tarah raho use baad tumhari surgery hogi. Aur ab main ghar pe ladki ki tarah hi rah rhi thi. Aur log bhi ab kuch nhi bolte the shuru me to mujhe dekhkar log tane marte the. But ab me to poori tarah se ladki ban gyi thi. Keval surgery hona baki tha. Me apni mom ko koi bhi kaam nhi karne deti thi. Sare kam me hi karti thi. Mujhme ab ladko ki koi bhi aadat nhi bachi thi . Aur phir meri surgery ho gyi. Ab me bahut khush thi .Mere paas ek boyfriend bhi hai…

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Reader’s Corner

Indian Crossdressing Stories, captions and articles contributed by our readers.


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Last Entry Updated on: 11 July, 2018.

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Be like her – 018

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Everyday take one step towards becoming your own dream girl. Face every challenge with a loving smile. Because femininity is worth any challenge.

हर रोज़ अपने सपनो की राजकुमारी बनने के लिए एक छोटा सा कदम बढ़ाती हूँ मैं. कई बार मुश्किलें भी आती है, पर जब दिल से औरत बन चुकी हूँ तो मुस्कुराकर उनका सामना करती हूँ. क्योंकि स्त्री-बोध एक ऐसा तोहफा है जिसके लिए हर संघर्ष छोटे है. हम भाग्यशाली है जो भले तन से न सही पर दिल से तो औरत है.

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Caption Credit: The woman inside me and Sensuous.

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Caption: Saree Blouse

A conversation between a husband and a wife who supports his crossdressing.


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English हिंदी

English

( It’s a morning time when both the husband and the wife are getting ready to leave for their work. )

“Listen, honey. Do you remember my mother gave me this saree last year on Diwali?”

( She looks at her husband with a saree in her hand. )

“Yes. I remember.”  ( He says buttoning his shirt while not even looking at the saree. )

“At least look at it once before answering.” ( She yells a little. )

“Ok… Ok.. Let me see.” ( He looks at the saree and touches to feel the fabric ) ” Yes, I remember this saree. It is very beautiful. ”

“Would you like to wear it?”

” Yes. Of course. Why not?” ( He smiles. )

“Ok. Look this saree came with this matching blouse piece that has the same design as the saree for sleeves. You know I have one more blouse piece that would go well with this saree. I think I like this saree too. I am thinking we should get both the blouses stitched so that we both can wear it. Tell me which blouse piece would you prefer for yourself?”

“Hmmm … the one that came with the saree, that one.” ( He points to the blouse piece he likes )

“Ohh… I liked that too for myself…. Alright, you can have the better blouse this time.” ( She pauses. ) “Wait a minute. What will I tell my mom if she ever asks me why don’t I wear the blouse that came with the saree?”

“No worries, darling. You can have the original blouse. I don’t mind the other one.”

“Ok.” ( She is still thinking about something. )

“Now, what happened?”

“Nothing. I was just thinking that I should go to the tailor this afternoon during my lunch time from the office.  I will give both the blouses to stitch. Is it ok with you?”

“Yes. I am ok.” (He starts walking towards his shoes. )

“Can’t you just wait here for a minute?” ( She gets a little upset. )

“Now what?”

“Go to our room, and bring one blouse of yours that still fits you well. I will need that to give to the tailor for your measurements. Most of your blouses are getting too tight these days. You better open up inside stitches in it to loosen those. I am not going to do that for you. You always come to me in the last minute to loosen your blouses. ”

“Ok. Ok. Let me find one.”

( He brings one blouse from the closet in his room. )

“This one fits perfectly on me. Ask the tailor to stitch with these exact measurements.”

“Ok. ” (She takes his blouse from his hands, and starts to worry about something new.)

“Now, can I go and get ready Madam? I am getting late for the office.”

“Don’t leave just yet. Why are you in such a hurry? At least tell me what kind of design you would like on the blouse? How do you want your neck and back to be styled? How deep the back should be? I don’t want you to complain later that you didn’t like the blouse design.”

“Hmm… I think a simple regular blouse would look good on this saree. Just keep the sleeves a little short, but don’t get the back too deep.” (He looks at the saree and the blouse piece once again. )

“Come near for a minute.” (She picks up the saree and places it over his shoulder and the back. ) “I feel the deeper back would look better on you.”

“As you wish, darling.”

“Of course. For a change, you should listen to your wife’s advice at least once in the life!”

“I always do, dear.”

“Is that so, dear? In that case, answer this for me. Do you remember I purchased a dress for you last month? Tell me, why don’t you wear it?”

“Darling. That dress is a little too sexy and open. ” ( He says hesitantly ) “… And I feel that between you and me, you should be the one who should always look sexier.”

( She starts to blush, and he comes up to her from the back and hugs her )

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हिंदी

z8

( सुबह का समय है और पति-पत्नी दोनों ही ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहे है )

“सुनो. माँ ने ये साड़ी दी थी पिछली दिवाली पे…”  ( वो हाथ में साड़ी पकडे अपने पति की ओर देखती है)

“अच्छा.” (वो शर्ट की बटन लगाते हुए बिना साड़ी को देखे ही कहता है)

“एक बार इधर देखो तो सही.”

“हाँ बाबा. देखता हूँ. दिखाओ?” (वो साड़ी को देखने लगता है) “हाँ याद है ये साड़ी मुझे. बहुत सुन्दर है.”

“तुम पहनोगे इसे?”

(वो मुस्कुराता है) “हाँ, क्यों नहीं?”

“अच्छा. इसके साथ ये ब्लाउज पीस भी है. वैसे मेरे पास एक और मैचिंग ब्लाउज पीस है. पता है मुझे भी ये साड़ी पसंद है. तो सोच रही हूँ कि हम दोनों के लिए ब्लाउज सिलवा लेती हूँ. बताओ तुमको कौनसा पीस पसंद आ रहा है?”

“हम्म… जो साड़ी के साथ आया है, वो वाला.”

“मुझे भी वही ज्यादा पसंद आया था. चलो इस बार तुमको तुम्हारी पसंद का ब्लाउज लेने देती हूँ.” (वो फिर कुछ सोचने लगती है) “सुनो. पर यदि माँ ने मुझसे कभी पूछा कि मैंने दुसरे कपडे का ब्लाउज क्यों सिलवाया तो क्या जवाब दूँगी उनको?”

“तो ठीक है. तुम मेरे लिए दुसरे पीस से सिलवा दो.”

“ठीक है.” (वो फिर कुछ देर सोचने लगती है)

“अब क्या हुआ?”

“ऐसा करती हूँ कि आज ही ऑफिस से लंच के समय टेलर के पास दोनों ब्लाउज पीस दे आऊंगी सिलवाने को. ठीक है?”

“हाँ. ठीक है.” (वो फिर अपने जुते पहनने के लिए जाने लगता है)

“रुको तो सही.”

“अब क्या हुआ?”

“जाओ तुम अलमारी से अपना कोई ब्लाउज लेकर आओ जो तुमको अच्छा फिट आता है. टेलर को दूँगी नाप के लिए. वैसे तुम्हारे बहुत से ब्लाउज अब टाइट होने लगे है. उनकी सिलाई भी खोलनी है. इस बार तुम खुद खोल लेना सिलाई याद से. नहीं तो आखिरी मौके पर मेरे पास आ जाते हो कि ब्लाउज टाइट हो रहे है.”

“ठीक है डार्लिंग. सिलाई भी खोल लूँगा मैं. अभी तो नाप का ब्लाउज लाता हूँ.”

(वो अलमारी से एक ब्लाउज लेकर आता है)

“इसकी फिटिंग मुझे अभी भी अच्छी आती है. इसके नाप से सिलवा देना तुम.”

“ठीक है.” (वो फिर कुछ सोचने लगती है)

“अच्छा अब मैं जाकर तैयार हो जाऊं? ऑफिस के लिए देर हो रही है”

“अब थोडा रुको भी इतनी जल्दी करते रहते हो. कम से कम ये तो बता दो कैसा डिजाईन चाहिए तुम्हे? ब्लाउज का गला और पीठ कैसी चाहिए तुमको? पीठ की गहराई कितनी करनी है? फिर तुम्ही मुझे कहोगे कि तुम्हे डिजाईन पसंद नहीं आया.”

“हम्म… मेरे विचार में इस साड़ी में कोई सिंपल डिजाईन ही सही रहेगी. आस्तीन को थोड़ी छोटी रखना और पीठ ज्यादा गहरी मत करना.” (वो साड़ी और ब्लाउज पीस को एक बार फिर देखने लगता है.)

“एक मिनट पास आओ” (वो साड़ी को उठाकर उसके कंधे और पीठ पर लगाकर देखती है) “मेरे ख्याल से तुम पर पीठ में डीप ज्यादा अच्छा लगेगा.”

“ठीक है डार्लिंग. जैसा तुम कहो.”

“हाँ. पत्नी की बात कभी कभी मान लेनी चाहिए तुम्हे!”

“अरे हमेशा ही मानता हूँ!”

“अच्छा तो पिछले महीने मैंने जो तुम्हारे लिए ड्रेस ली थी, तुम उसे क्यों नहीं पहनते हो?”

“डार्लिंग. वो ड्रेस न … कुछ ज्यादा ही सेक्सी और खुली है.” (वो थोडा संकोच करते हुए कहता है) “… और मुझे लगता है कि हम दोनों में हमेशा तुम्हे ही ज्यादा सेक्सी दिखना चाहिए”

( उसकी बात सुनकर वो शर्मा जाती है और वो अपनी पत्नी को पीछे से आकर गले लगा लेता है.)

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कुछ बातें

शादी के बाद पति और पत्नी के बीच की वो बात जिससे हर क्रॉसड्रेसर घबराता है.


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नोट: प्रिय सहेलियों, इस कहानी के माध्यम से ये मेरा एक प्रयास है कि मैं अपनी शादी के बाद का अपना अनुभव आप लोगो के साथ बाँट सकू … इस कहानी में थोड़ी वास्तविकता और थोड़ी काल्पनिकता भी. मेरी दिल से ख्वाहिश है कि ये कहानी आपको पसंद आये. यदि मेरे प्रयास में मैं सफल रही तो कृपया अपने कमेंट और विचार ज़रूर शेयर करे.

– अनुपमा

“मुझे समझ नहीं आता कबीर कि आखिर तुम्हे औरतों के कपड़ो में क्या दिलचस्पी है? कपडे तो बस कपडे होते है… तन को ढंकने के लिए बस. फिर तुम औरतों के कपडे क्यों पहनना चाहते हो?”, मेरी नयी नवेली पत्नी ने मुझसे पूछा जब मैंने शादी के कुछ दिनों बार उसे अपनी क्रॉसड्रेसिंग के बारे में बताया. वो ये सवाल गुस्से में नहीं पूछ रही थी, बल्कि इसलिए पूछ रही थी क्योंकि उसे सचमुच समझ नहीं आ रहा था कि मैं ऐसा क्यों हूँ. वैसे भी किसी भी औरत के लिए आसान नहीं होता ये सुनना कि उसके पति को औरतों की तरह सजना पसंद है. और ये मेरी पत्नी के लिए भी आसान न था.

“इतनी आसानी से तुम्हे कैसे समझा दू तनु? मुझे तो पता भी नहीं कि मैं तुम्हे कभी इसे पूरी तरह समझा सकूंग.”, मैं सच ही तो कह रहा था. “शायद इस बात को तुम्हे समझने में कई दिन और महीने लग जाए. और फिर मैं तुमसे उम्मीद भी नहीं करता कि तुम आज ही इसे समझ जाओ. पर जब तक तुम मुझे अच्छी तरह समझ नहीं लेती, मुझे कोई जल्दी भी नहीं है.”, मैंने अपनी पत्नी की दुविधा को थोडा कम करने की कोशिश किया और खुद के अन्दर चल रहे द्वन्द को भी कम करना चाहा. पता नहीं तनु को इस बारे में इस वक़्त बताना सही था या नहीं.

“पर मुझे समझाने की एक बार कोशिश तो करो कबीर.”, उसकी आँखों में आंसू थे. मेरी भोली और प्यारी पत्नी की आँखों में आंसू देख कर मेरा दिल भर आया. और अपनी किस्मत पर हँसी भी आ रही थी कि जो बात मैं खुद नहीं समझ सका हूँ उसे ऐसे कैसे समझा दू. दुनिया भर के मेडिकल एक्सपर्ट को भी इस बात का कारण नहीं पता था तो मैं क्या समझाता उसे.

अपनी इसी बेबसी के साथ मैंने उसे गले लगा लिया और उसके बालों पर अपनी उंगलियाँ फेरता हुआ बोला, “ठीक है मैं कोशिश करता हूँ. मुझे पता नहीं कि सचमुच समझा सकूंगा या नहीं.”, मैंने उसे दिलासा दिया, “पर तनु, उससे पहले मुझे तुमसे एक वचन चाहिए.”

मेरी बात सुनका तनु ने मेरा हाथ अपने हाथो में लेकर जैसे मुझे विश्वास दिलाना चाहा कि वो मेरे साथ है और मुझे छोड़ नहीं रही है. “तनु, तुम मुझे ये वचन दो कि तुम मेरे बारे में कोई भी गलत राय नहीं बनाओगी और अपने पति के रूप में मेरी वैसी ही इज्ज़त करती रहोगी जैसे आज के पहले करती थी…. क्योंकि… क्योंकि… यदि मैं तुम्हारी नजरो में गिर गया तो फिर मेरा अस्तित्व ही ख़त्म हो जायेगा.”, मैंने कहा, “… और फिर तनु, चाहे कुछ भी हो जाए तुम ये मत भूलना कि मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूँ. चाहे जैसी परिस्थिति आये.”

मेरी बात सुन अपनी आँखों से आंसू पोंछते हुए उसने मुझसे कहा, “मैं वचन देती हूँ कबीर. मैं हमेशा तुम्हारी इज्ज़त करूंगी. मैं तुम्हे सचमुच समझना चाहती हूँ, कबीर.” मैं अपनी भोली पत्नी को देख मुस्कुरा दिया. उसे तो पता भी न था कि ये वचन निभाना कितना कठिन था.

तनु को अब तक मेरे प्यार पर यकीन हुआ हो न हुआ हो, पर उसकी इस बात से मुझे तो यकीन हो गया था कि वो मुझसे बेहद प्यार करती है, वरना ये बात इतनी सहजता से नहीं कह सकती थी वो. मुझे समझने की उसकी चाहत सच में दिल से थी. सच कहूं तो मेरी पत्नी तनु इस वक़्त मुझे बहुत ही परिपक्व और सहनशील औरत लगी. वैसे तो इस बारे में बात करना मेरे लिए भी आसान नहीं था. पर अब कुछ न कुछ कहना तो था ही. ये विषय भी ऐसा था जिसे एक बार छेड़ दिया तो यूँ बाद के लिए छोड़ नहीं जा सकता था.

मैंने तनु की बांहों को अपने हाथो से हाथ लगाया. उसकी बांह उसकी ब्लाउज की एक सुन्दर आस्तीन से सजी हुई थी. और फिर मैंने उससे पूछा, “क्या तुम महसूस कर सकती हो कि कैसे तुम्हारी बांहों में ब्लाउज की फिटिंग चुस्त है? मानो जैसे तुम्हारी त्वचा को वो चूम रही हो.”

तनु ने अपनी बांह की ओर देखा. ये सवाल उसके लिए अटपटा सा था. शायद उसने इस तरह कभी सोचा भी न हो. फिर उसने मेरी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे पूछ रही हो, ये कैसा सवाल है? “क्या तुमने ऐसी चुस्त फिटिंग तुमने कभी किसी आदमी के कपड़ो में देखी है?”, मैंने अपने सवाल को थोडा और समझने में उसकी मदद की.

तनु ने ना में अपना सिर हिलाया. और फिर रुक कर कुछ देर सोचने के बाद बोली, “पर फिर साड़ी, स्कर्ट, और सलवार तो ढीली फिटिंग के कपडे भी तो होते है न?” उसकी बात में तर्क था.

“हाँ. सही कह रही हो तुम. पर तुमने कभी साड़ी या लहंगा चोली की तरह लहराते हुए कपडे लडको पे देखे है?”, मैंने कहा. शायद उसके सवाल का जवाब मैंने कुछ ज्यादा ही जल्दी दे दिया था. पर फिर थोड़ी देर सोचकर मैंने उससे पूछा, “क्या तुम्हे अपनी साड़ी और सलवार का दुपट्टा संभालना अच्छा नहीं लगता?”.

“हाँ. लगता तो है. पर सच कहूं तो पहले मैंने ऐसा कुछ सोची नहीं थी. मेरे लिए तो बस कपडे थे. लहराते या चुस्त.. जैसे भी हो. ” पर पता है तुम्हे? शादी के बाद तुम्हारे सामने जब जब अपनी साड़ी ठीक करती हूँ या फिर अपने पल्लू को संवारती हूँ तो और भी अच्छा लगता है. मुझे ऐसा करते देख तुम्हारी आँखें चमक जाती है न इसलिए!”, वो धीमी सी हँसी हँसते हुए बोली. मैं भी उसके साथ मुस्कुरा दिया. और फिर मैं उसकी ओर देख कर बोला, “जब जब तुम ऐसा कुछ करती हो तो तुम्हे देखकर मुझे भी अच्छा लगता है.” एक सामान्य भारतीय पति की तरह ही सोच थी मेरी भी. अच्छा लगता था अपनी पत्नी को ऐसे देखना.

इस बात के बहाने तनु की मुस्कराहट देखकर मुझे थोड़ी तसल्ली हुई. उसने इस वक़्त अपनी नज़रे झुकाई हुई थी. शायद वो कुछ सोच रही थी. पर जिस तरह वो अपने हाथो की चूड़ियों के साथ खेल रही थी, ऐसा लग रहा था कि उसे अपने दिल की बात कहने में थोडा संकोच हो रहा है.

“वो सब तो ठीक है कबीर पर शादी के पहले ये साड़ी वगेरह संभालना मुझे अच्छा नहीं लगता था. शायद एक कारण ये भी था कि इसकी वजह से आदमियों की अनचाही नज़रे मुझ पर पड़ती थी. और एक कारण अभी भी है. जब मुझे बहुत काम होते है तो ये कपडे संभालते रहना मुझे पसंद नहीं है.. शायद अब तो मुझे दुपट्टा संभालने की आदत हो चुकी है. पर साड़ी संभालना अब भी सिख रही हूँ. मैं जब भी तुम्हारी माँ के साथ किचन में होती थी न, ये साड़ी संभालना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता था.”, उसने सोच कर कहा और मैं उसकी बातें सुनता रहा.

“पर कबीर, मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि तुम कहना क्या चाहते हो? तुम्हे लड़कियों के कपडे चुस्त फिटिंग की वजह से पसंद है या फिर इसलिए कि वो लहराते भी है?”, तनु ने एक बार फिर मुझे अपने विषय पर लाने के लिए ये सवाल पूछा. मैं जानता था कि उसके लिए ये सवाल पूछना कठिन था जो उसके चेहरे से दिख रहा था. मेरे लिए ये बड़े आश्चर्य की बात होती यदि वो सचमुच जानना चाहती कि मैं लड़कियों के कौनसे कपडे पहनना पसंद करता हूँ. इसलिए मैं बिना जवाब दिए ही सिर्फ मुस्कुरा दिया.

“अच्छा अब एक काम करो. तुम अब अपने मन में ही सोचो कि लड़कियों के कपडे की कितनी वैरायटी होती है, और फिर सोचो कि लडको के पास कितने आप्शन होते है?”, मैं बोला. मेरा सवाल सुन वो छत की ओर ऐसे देखने लगी जैसे सचमुच वो सोच रही हूँ. पर उसे सोचने की ज़रुरत नहीं थी. इस सवाल का जवाब तो बहुत ही साफ़ और सरल था.

“हाँ. लडको के पास बहुत कम आप्शन होते है.”, वो बोली.

“और रंगों के आप्शन?”, मैंने पूछा.

“ह्म्म्म… जो रंग के कपडे लडकियां पहन सकती है वो शायद लडको पर अच्छे नहीं लगेंगे.”, वो एक बार फिर सोचते हुए बोली.

“ठीक है. और फिर हेयरस्टाइल, जेवेलरी, मेकअप, ये सब के आप्शन किसके पास है?”, मैंने उससे आगे पूछा.

“सिर्फ लड़कियों के पास. लड़के तो ये सब कभी नहीं करते है. और मुझे नहीं लगता कि लड़के ये सब करना पहनना पसंद भी करेंगे.”, वो बोली.

“तुम्हे कैसे पता कि लड़के ये सब करना पसंद नहीं करेंगे. आज से कुछ ३०-४० साल पहले तक तो लड़के कानो में कुंडल भी पहनते थे. और उसके पहले राजा महाराजा के ज़माने में जेवेलरी भी पहनते थे और रंग बिरंगे कपडे भी, तब तो लडको के बाल भी लम्बे हुआ करते थे … और फिर उसके भी पहले तक तो लड़के और लड़की के कपड़ो में बहुत फर्क भी नहीं होता था.”, मैंने कहा. मेरी ये बात तनु को सचमुच सोचने पर मजबूर कर गयी कि क्यों वो ऐसा सोचती है कि लडको को गहने, हेयर स्टाइल और मेकअप का शौक नहीं हो सकता.

“मुझे लगता है कि ये फर्क इसलिए है क्योंकि लड़कियों को सुन्दर दिखना अच्छा लगता है.”, बहुत ही सच्चाई के साथ तनु ने कहा. पर ये सच्चाई सिर्फ उसकी सच्चाई थी…

“और लडको को सुन्दर दिखना अच्छा नहीं लगता?”, मैंने उससे धीरे से कहा और चुप हो गया. और वो भी चुप हो गयी. शायद उसे धीरे धीरे समझ आ रहा था कि लडको को सुन्दर दिखने का तो किसी ने कभी मौका ही नहीं दिया.

“तुम कहना क्या चाहते हो कबीर?”, कुछ देर चुप रहने के बाद तनु ने मुझसे पूछा. तनु को पता था कि मैं उससे क्या कहना चाह रहा हूँ. पर फिर भी उसके लिए मेरी बात को समझते हुए भी असमझ करना एक मजबूरी थी. क्योंकि ये ऐसी बात थी जो उसके अब तक के सालो के अनुभव को झुठला रही थी.

“ज्यादा कुछ नहीं, तनु. बस इतना ही कह रहा हूँ कि लड़कियों और लडको के कपड़ो में बहुत फर्क होता है.”

एक बार फिर ख़ामोशी हम दोनों के बीच थी. पर अच्छी बात ये थी कि तनु ने अपनी किसी बात से मुझे बुरा महसूस नहीं कराया था.

ये खामोशी हम दोनों के लिए असहनीय होती जा रही थी. और फिर थोड़ी देर बाद उस ख़ामोशी को तोड़ते हुए तनु फिर बोली, “पता है बचपन में मेरा भाई नेल पोलिश और मेहँदी लगाकर बड़ा खुश होता था. जब भी ऐसा कोई मौका आता था वो नेल पोलिश लगवाने मेरी माँ के पास पहुच जाता था. पर अब वो ऐसा कुछ नहीं करता.” और फिर मेरे करीब आकर मेरे हाथो को अपने हाथो में पकड़ा और मेरे सीने से अपना सर लगाकर उसने कहा, “शायद इस सोसाइटी ने उसे ये न सिखाया होता कि ये नेल पोलिश लड़कियों की है लडको की नहीं, तो शायद वो आज भी नेल पोलिश लगाकर खुश होता.”

ऐसा लग रहा था कि शायद तनु मेरे दिल की बात समझ रही थी. फिर भी जो बात सालो से उसे सिखाई गयी है कि लडको को ऐसे रहना चाहिए और लड़कियों को ऐसे… वो बात इतनी आसानी से भुलाई नहीं जा सकती थी. इस वक़्त शायद हम दोनों को सब्र की ज़रुरत है. समय के साथ साथ शायद हम दोनों के बीच की आपसी समझ बढ़ सकेगी, मुझे इस बात का भरोसा हो चला था.

कभी कभी मैं भी सोचता हूँ कि यदि सोसाइटी में लड़के लड़कियों के रहन सहन और पहनावे के आज की तरह नियम न होते तो क्या मैं तब भी इस तरह लड़की के नाम से फेसबुक में प्रोफाइल बनाता?

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