प्रतिभा: एक अजनबी से मुलाकात


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संपादक के विचार: हम नहीं चाहते कि इस कहानी को पढ़कर पाठक समझे कि क्रॉसड्रेसर कहीं से भी किसी पुरुष या स्त्री से कमतर है. इस कहानी का विषय आपके लिए ज़रुरत से कहीं अधिक हॉट और सेक्सी हो सकता है. आपको चेतावनी दी जा चुकी है.

लेखिका: प्रतिभा मेहरा

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जीवन के उतार चढाव से गुज़रते वक़्त परिवर्तन हमारे जीवन में चलता रहता है. और इस परिवर्तन की यात्रा में हम कुछ नया ढूंढ पाते है कुछ नया सिख पाते है

हर किसी की तरह, मेरी ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव थे जिसने मुझे अपने बारे में कुछ जानने का अवसर दिया कि मैं वाकई में कौन हूँ और क्या चाहता हूँ. मेरा नाम रोहित है, ३२ साल का शादी शुदा इंसान और मुंबई में रहने वाला, एक MNC में काम करता हूँ. यह मेरी आत्मा-साक्षात्कार की कहानी है, एक कहानी उस दिन की जब मेरी दुनिया हमेशा हमेशा के लिए बदल गयी. Continue reading “प्रतिभा: एक अजनबी से मुलाकात”

Pratibha: A wild encounter


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Editor’s note: We do not want our readers to feel that crossdressers are lesser than man/woman in any way. The subject matter of this story may be too hot for you to handle. You have been warned!

Author: Pratibha Mehra

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Transformation is a process, and as life happens there are tons of ups and downs. It’s a journey of discovery – there are moments on mountaintops and moments in deep valleys of despair.

Like everyone else in this world, my life had its ups and downs, and that led me to discover who I really was. I am Rohit, 32 yr old married guy from Mumbai, working for an MNC and with a great taste for finer things in life. And this is my story of self-discovery, a story about an incident when my world and my life turned upside down completely. Continue reading “Pratibha: A wild encounter”

होस्टल लाइफ


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नोट हम धन्यवाद करते है कायनात खान का, जो इस कहानी की लेखिका है. फेसबुक पर कायनात का एक पेज भी है Crossdresser Desire नाम का जहाँ वो अपने कैप्शन पोस्ट करती है. तो लेखिका को ज़रूर मेसेज कर प्रोत्साहित करे!

भाग १

होस्टल की ज़िन्दगी, जब अपने होस्टल के दिनों को कोई याद करता है तो दोस्तों के साथ पूरे दिन और पूरी रात चलने वाली मौज मस्ती आँखों के सामने आ जाती है, और यह ख़ुशी दुगुनी हो जाती है यदि बात हो गर्ल्स होस्टल की! मेरी भी बड़ी सुहानी यादें है गर्ल्स होस्टल की, पर ख़ास बात ये है कि मैं लड़की नहीं हूँ. कम से तन से बाहरी रूप से तो नहीं, पर मन से तो मैं पूरी तरह लड़की हूँ. Continue reading “होस्टल लाइफ”

The daughter who never was – Part 6


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Morning

After finishing breakfast, Shikha didi helped me with the breakfast. I felt really nice when I touched my own soft smooth skin after years. The satin nightie that I was wearing was slipping effortlessly over my body and got me excited a little.

“OK, dear. Now, you should go and take a hot bath. And take out a beautiful saree from my cupboard to get ready. I don’t want to hear our mother nagging about your looks.”, Shikha didi said as she touched my legs to inspect for any spots that may have been left. She wanted to ensure that my waxing was perfect. She seemed satisfied with her work.
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बेटी जो थी नहीं – ६


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सुबह

नाश्ता करने के बाद शिखा दीदी ने मेरी फुल बॉडी वैक्सिंग की. सालो बाद अपनी मखमली कोमल त्वचा को महसूस करके मुझे अच्छा तो बहुत लग रहा था. अब दीदी की दी हुई सैटिन की मैक्सी भी मेरे तन पर फिसलते हुए मुझे रोमांचित कर रही थी.

“अच्छा वैक्सिंग तो हो गयी. अब नहा ले और मेरी अलमारी से अच्छी सी साड़ी निकाल कर तैयार हो जा. माँ को कोई शिकायत का मौका नहीं मिलना चाहिए.”, शिखा दीदी ने मेरे पैरो पर हाथ फेरते हुए कहा. वो देख रही थी कि कहीं कोई हिस्सा रह तो नहीं गया वैक्सिंग के लिए. अपने काम से वो संतुष्ट दिखी.
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The daughter who never was – Part 5


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Freedom

“Listen, now that you are going to a big city, don’t forget our culture and your manners. I have heard the kind of things the girls from big cities do. Don’t ever forget your limits!”, my mother Gita said as she filled my suitcase with sarees and salwar suits.

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I was going to receive my freedom soon

The time to go and attend my college in Delhi had arrived. My sister Shikha didi and her husband Vinay will be coming to take me with them soon. After years of wait, I was finally ready to be free from the control of my evil mother Gita. I will now be free to live my life as a boy in my new college. But still, my mother was packing my bag with sarees and salwar suits. May be she had really become a mad woman, or she was trying to ignore the fact that she had forced me to live the life of a girl, which I never intended to be. I never saw any remorse or regret on her face for all the bad things she did to me. I silently listened to whatever she was saying to me. It was just a matter of a few hours, and I will be free soon! Continue reading “The daughter who never was – Part 5”

बेटी जो थी नहीं – ५


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आज़ादी

“अच्छा सुन, शहर जाकर अपने रंग ढंग न बदल लेना. मैंने सुना है बड़े शहरों के कॉलेज में लडकियां कैसे कैसे गुल खिलाती है. अपनी मर्यादा मत भूलना!”, मेरी माँ ने मेरे सूटकेस में कुछ साड़ियाँ और सलवार सूट भरते हुए कहा.

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अब जल्दी ही मैं अपनी माँ के चंगुल से आज़ाद होने वाली थी.

मेरे दिल्ली में कॉलेज जाने का समय आ चूका था. थोड़ी ही देर में शिखा दीदी और विनय जीजू मुझे अपने साथ लेने के लिए आने ही वाले थे. अब सालों के इंतज़ार के बाद मैं अपनी क्रूर माँ गीता के चंगुल से आज़ाद होकर कॉलेज में एक लड़के के रूप में पढने वाली थी. पता नहीं फिर क्यों मेरी माँ गीता मेरे लिए साड़ियाँ और सूट भर रही थी. या तो वो पागल हो गयी थी या फिर वो इस बात को अनदेखा करना चाहती थी कि अपने जिस बेटे को उसने ज़बरदस्ती एक लड़की का जीवन जीने मजबूर की है, वो अब फिर से लड़का बन कर रहना चाहता है. उसके चेहरे पे उसने जो कुछ भी मेरे साथ किया उसके लिए कभी पश्चाताप या दुःख नहीं देखा मैंने. मैं चुपचाप उसकी बातें सुनती रही. बस कुछ ही घंटे और सहना था मुझे और फिर मैं आज़ाद पंछी. Continue reading “बेटी जो थी नहीं – ५”