पहली बार


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ख़ास धन्यवाद: हम धन्यवाद करना चाहते है Gitanjali Paruah जी का जिन्होंने छोटी मगर इतनी ज़बरदस्त कहानी लिख कर हमें दी. जितनी सुन्दर उन्होंने इस कहानी को इंग्लिश में लिखा है, हमने अपनी तरफ से प्रयास किया है कि हिंदी में भी उतनी ही प्रभावशाली कहानी लगे, पर कोई कमी रह गयी हो तो पाठको और गीतांजलि जी से क्षमा चाहते है.

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मेरी गर्लफ्रेंड थी वो. पर मैंने उसे उस दिन उसके बेस्ट फ्रेंड की बांहों में देखा.  उसका बेस्ट फ्रेंड एक आदमी था. मुझे इस बात से कोई समस्या भी नहीं थी. कम से कम उस दिन तक तो नहीं. वो दोनों किसी दो दोस्त की तरह हाथ पकडे हुए अवस्था में नहीं थे. उन दोनों के बीच उससे कुछ ज्यादा चल रहा था.

z6aमैं वहां उस लड़की को डेट पर ले जाने के लिए उस दिन उसके घर गया हुआ था. इसलिए मैं सीधा उसके कमरे की ओर बढ़ गया था. कमरे से कुछ आवाज़े आ रही थी. और मैंने उन दोनों को दरवाज़े के की-होल से देखा था. वो बेहद हॉट ड्रेस पहनी हुई थी और वो लड़का जॉगिंग करके वापस ही आया था. उसने जॉगिंग के शॉर्ट्स पहने हुए थे, और मेरी गर्लफ्रेंड ने ऊँची हील्स और सेक्सी टूब टॉप. कमरे के बाहर तक मुझे उसकी परफ्यूम की खुशबू आ रही थी.

देख कर लग रहा था कि दोनों किस कर रहे थे. पर उस छोटे से छेद से देखते हुए मैं निश्चित होकर नहीं कह सकता था. और वो मुझे बताना भी नहीं चाहती थी. डेट पर रेस्टोरेंट में मैंने उससे पूछा भी. पर उसने मुझे यह कह कर चुप करा दिया कि मैं कोरी कल्पना कर रहा हूँ. मैं इतना असुरक्षित क्यों महसूस करता हूँ इस रिश्ते में? उसने मुझसे पूछा. कोई ऐसी वैसी बात नहीं है, उसने मुझे दिलासा दिया. वो लड़का घर में कुछ सामान लेने आया था पर मेरी आँखों में कुछ गिर गया था, जिसे वो फूंक कर निकाल रहा था. कम से कम ऐसी कहानी मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे सुनाई.

ये बात पिछले हफ्ते की थी. और कल? कल उसने मुझसे अपना रिश्ता तोड़ लिया. उसने मुझे बताया भी कि वो ऐसा क्यों कर रही है. मैं एक आदमी के रूप में उसके लिया नाकाफी था. मैं बहुत ही भावुक और कद में छोटा था, उसने मुझे बताया. इन बातों को लेकर भी कभी कोई रिश्ता तोड़ता है? मैं उसी की आँखों के सामने रोने लगा. अब बंद भी करो रोना. ओह गॉड! तुम भी न पूरे सिस्स… , वो कहते कहते रुक गयी. वो मुझे सिस्सी (Sissy) या नामर्द कहने वाली थी. वो शायद गलत भी न थी.

हम दोनों में वो हमेशा मुझसे हर बात में आगे रहती थी. हील पहनकर वो मुझसे ऊँची भी लगती थी. मैं उससे हमेशा कहता था कि वो इतनी ऊँची हील न पहने, पर अपनी जिद पर अड़ कर हमेशा मुझसे ऊँची दिखना उसे पसंद था शायद. मुझ पर जैसे अपना रौब चला कर उसे कुछ अजीब सी ख़ुशी मिलती थी. उसके प्रभावशाली व्यक्तित्व से मैं हमेशा प्रभावित रहता था, पर मुझे नहीं पता था कि उसे ऐसा आदमी चाहिए था जो उसी की तरह का व्यक्तित्व वाला हो. और मैं वैसा कभी नहीं बन सकता था. Continue reading “पहली बार”

रूममेट: भाग ५


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धन्यवाद:हम  एक बार फिर nikki dominoes का धन्यवाद करना चाहते है जिन्होंने फिर एक बार चेतना का चेहरा बन इस कहानी को निखारने में मदद की!

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एअरपोर्ट से टैक्सी लेकर मैं चेतना के घर की ओर बढ़ रहा था. दिल में न जाने कितने एहसास आ रहे थे, न जाने कितनी यादें आ रही थी, और एक बेचैनी भी थी. चेतना से १० साल बाद मिलने के बारे में सोच कर ही ख़ुशी भी मिल रही थी. पर मन बहुत भावुक भी हो रहा था. मन में एक डर भी था जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था. न जाने चेतना से मिलकर क्या होगा आगे? और न जाने कैसे अचानक ही बेमौसम बारिश भी होने लगी. जैसे मौसम भी मेरे दिल की तरह आज भावुक हो रहा था. इतने सालो से चेतना की दूरी के बारे में सोचते हुए चेतना का घर कब आ गया, मुझे पता भी न चला.

किसी तरह हिम्मत करके मैंने उसके घर के दरवाज़े पर दस्तक दी. थोड़ी देर बाद मुझे घर के अन्दर से कुछ आहट सुनाई दी. शायद चेतना दरवाज़ा खोलने आ रही थी. स्वाभाविक है कि मेरे दिल की धड़कने तेज़ होने लगी थी. आखिर मैं चेतना को इतने सालो बाद देख कर अपनी भावनाओं पर काबू कैसे रख पाऊँगा? इस सवाल का जवाब नहीं था मेरे पास, और न ही अब सोचने का समय था. चेतना के कदमो की आवाज़ बढती जा रही थी. मेरे कानो में उसकी चूड़ियों की खनक अब सुनाई दे रही थी. और फिर उसी खनक के साथ दरवाज़ा खुला. चेतना मेरी आँखों के सामने थी. मेरी वोही चेतना जिससे मैं इतना प्यार करता था. आज १० साल बाद, एक बार फिर मेरे लिए दरवाज़ा खोल कर खड़ी थी.

इतने सालो में हम दोनों के पास न जाने कितना कुछ था दिल में कहने को, पर एक दुसरे को देख कर जैसे होंठो ने जवाब दे दिया. हम एक दुसरे से एक शब्द भी न कह सके. बिना कुछ कहे हम एक दुसरे को बस देखते रह गए. चेतना ने आज वही लाल साड़ी पहनी थी जो उसने हमारी शादी की शाम को गोवा में पहनी थी. माथे पर एक सुहागन की तरह बड़ी सी लाल बिंदी लगाए, कितनी प्यारी लग रही थी वह. मैं उसकी बड़ी बड़ी आँखों में देखता रह गया. वो भी कुछ नहीं बोली. समय जैसे ठहर सा गया था. पर उसकी आँखों में उमड़ती हुई भावनाओं से पानी भरते मैं देख सकता था. हम दोनों एक दुसरे को न जाने कितनी देर देखते रह गए. दिल ने कहा कि  निशांत गले लगा ले, यह तेरी ही चेतना है, रुका क्यों है? पर मैं अपनी जगह पर स्थिर अपनी चेतना को बस देखता रह गया. और वो भी वहीँ भावुक होकर मेरी ओर देखती रही.

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माथे पर बड़ी सी बिंदी लगाये, और हमारी शादी के अवसर की लाल साड़ी पहने चेतना ने मेरे लिए दरवाज़ा खोला. आज भी उतनी ही सुन्दर लग रही थी मेरी चेतना!

ऐसा लग रहा था जैसे चेतना की आँखों में आंसुओं का सैलाब बस आने को तैयार है, पर तभी चेतना ने झट से मुझसे विपरीत दिशा में पलट कर अपनी आँखें पोंछते हुए, मुझसे अन्दर आने को कहा, “अन्दर आइये न”. चेतना के पहले शब्द. और मैं अब भी निशब्द था.

“आपकी फ्लाइट कैसी रही? गौरव ने मुझे बताया था कि तुम यहाँ आ रहे हो कुछ दिनों के लिए. मुझे उम्मीद न थी कि तुम यहाँ आओगे. वैसे तुम थक गए होगे न? मुझे तो इतनी लम्बी फ्लाइट कभी पसंद नहीं आती”, चेतना ने अपने शब्दों से अपनी भावनाओं को छुपाने की कोशिश की.

मैं चेतना के पीछे पीछे घर के अन्दर चल दिया. मेरी चेतना आज भी उतनी ही सुन्दर थी. उसकी उम्र शायद अब ३३ साल के करीब होगी. और उम्र के साथ चेतना में एक परिपक्व औरत वाली अद्भुत शालीनता भी आ गयी थी.  मैं पीछे पीछे चेतना की चाल देखता रह गया. किसी और के लिए चेतना क्रॉस-ड्रेसर होगी पर मेरी नजरो में तो वो सचमुच औरत थी. मेरी पत्नी थी चेतना. उसे देख कर मुझे यकीन था कि आज चेतना मेरे लिए ख़ास रूप से तैयार हुई थी. उसके एक एक कदम पर उसकी पायल छम छम करती. उसकी “छम छम” मुझे एहसास दिला रही थी मैंने क्या खोया है.

“फ्लाइट अच्छी थी.”, मैंने चेतना के सवाल का संक्षिप्त में जवाब दिया. दिल भी आखिर कितना अजीब होता है. जब बहुत कुछ होता है कहने को, तब वो कुछ भी नहीं कह पाता. Continue reading “रूममेट: भाग ५”

रूममेट: भाग ४


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ख़ास धन्यवाद:  इस बार हम धन्यवाद करना चाहते है संजना सिंह का, जिन्होंने अपनी खुबसूरत तसवीरें इस कहानी के लिए दी. संजना मुंबई में CD ब्यूटी पारलर भी चलाती है. यदि आप कभी मुंबई जाए और आपके भीतर एक सुन्दर औरत बनने की ख्वाहिश हो तो संजना से ज़रूर मिले.

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कहानी में अब तक:  ये कहानी मेरी यानी निशांत और मेरे रूममेट चेतन की है. कई साल पहले एक दिन अनजाने में मुझे चेतन के कमरे में लड़की के कुछ कपडे मिले थे. पूछने पर चेतन ने मुझे बताया कि वो एक क्रॉस-ड्रेसर है, ये बात मेरे लिए किसी शॉक से कम नहीं थी. उसके अगले दिन मैंने चेतन से यूँ ही कहा कि वो एक बार मुझे लड़की बन कर दिखाए. जब चेतन तैयार होकर आया तो वो एक बहुत ही आकर्षक लड़की बन चूका था. अब वो चेतन नहीं, चेतना थी. हम दोनों बियर के नशे में थे, और उस हालत में उस रात हम दोनों के बीच शारीरिक सम्बन्ध स्थापित हो गए. होश आने पर मुझे ग्लानी हुई कि आखिर मैं और चेतन ये कैसे कर सकते है? हम तो गे नहीं थे? पर पता नहीं कैसे धीरे धीरे हमारी दोस्ती बचाते हुए, समय के साथ साथ, चेतना और मुझे आपस में प्यार हो गया. आखिर जब दो दिल मिलते है तो दिल ये नहीं सोचता कि जिससे प्यार हुआ है उसका लिंग आदमी का है या औरत का. हम दोनों का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था, और चेतना मेरी गर्लफ्रेंड बन चुकी थी, जो हमारे घर को भी बखूबी सँभालने लगी थी, एक हाउसवाइफ की तरह. अब आगे-

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चेतना को याद करते हुए जैसे मेरा दिल झकझोर उठा था, उसी तरह जिस हवाईजहाज में मैं बैठा हुआ था, वो भी टर्बुलेंस में हिचकोले खा रहा था. उन्ही हिचकोलो के बीच मेरा ध्यान वर्तमान में थोड़ी देर के लिए आ गया. मन में अजीब सी बेचैनी थी. और उस बेचैनी को दूर करने के लिए मेरे पास एक छोटी सी वाइन की बोतल थी, उसे एक ही घूंट में मैं पी गया. पर चेतना की याद मेरे मन से जा ही नहीं रही थी. उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा मेरी आँखों के सामने अब भी आ रहा था. मैं फिर से पुरानी यादो में खो गया.

हम दोनों के बीच प्यार हुए शायद एक महीने से थोडा ज्यादा गुज़र चूका था. चेतना और मैं एक दुसरे के प्यार में एक दुसरे के साथ समय बीतने को हमेशा आतुर रहते थे. जब पहला पहला प्यार होता है न, तो पूरी दुनिया गुलाबी और सुन्दर लगने लगती है. हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. एक दिन मैं ऑफिस से बड़ी ख़ुशी के साथ वापस लौटा.

“चेतना, चेतना, कहाँ हो तुम?”, घर पहुचते ही मैंने चेतना को आवाज़ लगायी. मुझे यकीन था कि अब तक चेतन ने कपडे बदल लिए होंगे और घर में मेरी प्यारी गर्लफ्रेंड चेतना होगी. “चेतना!”, मैंने एक बार फिर आवाज़ लगायी.

“आ रही हूँ बाबा! ऐसी भी क्या जल्दी है निशु?”, चेतना अपने साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछते हुए किचन से निकली. शायद किचन में कुछ कर रही थी वह. उसके खुबसूरत चेहरे को देख कर मेरी ख़ुशी और बढ़ गयी. और मैंने ख़ुशी से चेतना को घुटनों से पकड़ कर अपनी बांहों में ऊपर उठा लिया. Continue reading “रूममेट: भाग ४”

रूममेट: भाग ३


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एक हफ्ते बाद

“निशांत, अब जागो भी. तुम्हे ऑफिस के लिए देर हो रही है”, चेतना, मेरे जीवन में नई नई आई हुई इस खुबसूरत सी लड़की ने मुझे सुबह सुबह जगाते हुए कहा. मैंने धीरे से अपनी आँखें खोल कर देखा तो चेतना का खुबसूरत चेहरा मेरे सामने था, जो झुक कर मुझे जगाने की कोशिश कर रही थी. कितनी दमक रही थी वो सुबह की सूरज की रौशनी में, और उसके लम्बे बाल मेरे चेहरे के पास तक लटक रहे थे. नाईटी में चेतना का खुबसूरत चेहरा देख कर मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ और मैं ख़ुशी से मुस्कुराने लगा. इससे अच्छा कोई तरीका हो सकता था भला दिन की शुरुआत करने का?

“हाय! कौन कमबख्त ऑफिस जाना चाहता है …”, मैंने उसे प्यार से अपनी बांहों में खिंच लिया ” … जब मैं इतनी खुबसूरत औरत के साथ यहाँ समय बिता सकता हूँ”. अब मुस्कुराने की उसकी बारी थी. उसने मेरी बांहों से बाहर आने को कोशिश भी नहीं की, बल्कि खुद मुझमे समा गयी. उसके नर्म मुलायम स्तन मेरे सीने से लगकर दबे जा रहे थे. आपको तो पता चल ही गया होगा कि पिछले एक हफ्ते में हम दोनों के बीच काफी कुछ बदल गया था.

“निशु, प्लीज़ मुझे जाने दो!”, चेतना ने प्यार से कहा. कुछ दिनों से उसने मुझे प्यार से निशु कहना शुरू कर दिया था. मुझे भी सुन कर बहुत अच्छा लगता था. आखिर हम दोनों को प्यार जो हो रहा था. “ऐसे कैसे जाने दू, जानू?”, मैंने भी मासूमियत से कहा. उसके पास जवाब नहीं था. उसने अपनी नज़रे झुका ली और मेरे सीने की ओर देख कर शर्म से मुस्कुराने लगी. मेरी बांहों में उसे भी अच्छा जो लग रहा था.

“निशु, मुझे तुमसे कुछ कहना है”, उसने कहा. वो मेरे गले में लगे लॉकेट से अपनी नाज़ुक उँगलियों से खेलते हुए बहुत प्यारी लग  रही थी. “क्या बात है चेतना?”, मैं पूछा.

“पता है हमें साथ में सोते हुए एक हफ्ते हो चुके है. मुझे तुमसे गले लग कर सोना सचमुच बहुत अच्छा लगता है. जब तुम मुझे प्यार से गले लगते हो, मुझे बहुत प्यार महसूस होता है. और हमारा साथ में बिताया हुआ समय चाहे हमारी रोज़ की शाम हो या सुबह, सब कुछ सुहावना लगता है. पर हमने वो चीज़ नहीं की जो उस रात…”, वो कहते कहते रुक गयी. “कौनसी चीज़ चेतना?”, मुझे पता था वो क्या कहना चाहती थी, पर मैं झूठ मुठ का नाटक कर रहा था. “तुम्हे पता है मैं क्या कह रही हूँ!”, उसने उत्साह में कहा. “नहीं तो?”, मैं यूँ ही उसे परेशान करता रहा.

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रूममेट: भाग २


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ख़ास धन्यवाद:  हम धन्यवाद् करना चाहते है nikkie dominoes का जिन्होंने अपनी नीली रंग की साड़ी में तसवीरें इस कहानी के लिए दी| उनका एक बहुत ही सुन्दर youtube channel भी है. इनके जैसी सुन्दर औरतें बहुत कम ही इस दुनिया में,   इनका चैनल अवश्य देखे!

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मेरी कैलिफ़ोर्निया की हवाई यात्रा अब भी काफी लम्बी बाकी थी. मुझे अब भी सालो पुरानी वो रात याद आ रही थी जब चेतना से मेरी पहली मुलाकात हुई थी. सचमुच अद्भुत रात थी वो! पहली रात जब मैंने पहली बार किसी औरत को प्यार दिया था, और मेरी किस्मत ऐसी की वो औरत औरत होकर भी औरत न थी. चेतना मेरा ख़ास दोस्त चेतन था जो साड़ी में लिपटा हुआ किसी औरत से कम नहीं था. “पर क्या इस बात से फर्क पड़ता है कि चेतना वास्तविकता में औरत नहीं थी?” जब दो दिल मिलते है तब ऐसे सवाल का कोई तुक नहीं बनता. आखिर में मैंने जिसे प्यार किया था वो दिखने और व्यवहार में तो औरत ही थी.  प्यार में कोई सीमा नहीं होती और उसका जेंडर से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए.  पर यह बोलना आसान है. उस वक़्त तक चेतना से मुझे दिल से प्यार नहीं हुआ था, हम दोनों तो केवल जिस्म की आग में तड़पते दो बदन थे जो एक दुसरे को आलिंगन किये हुए थे. इसलिए यह सवाल मुझे अगले दिन झकझोरता रहा.

अगली सुबह  जब नींद खुली तो देखा कि चेतना अब भी मेरी बांहों में थी. सुबह सुबह उठने पर एक औरत का तन जब आपकी बांहों में आपके तन से लगकर हो, उसकी फीलिंग ही कुछ ख़ास होती है. साड़ी में लिपटी नींद में आँखें बंद की हुई चेतना अब भी सुन्दर लग रही थी. मुझसे बिलकुल चिपक कर सोयी हुई थी वो. मेरी बांहों में ऐसे जैसे सारी दुनिया की चिंता से मुक्त हो निश्चिन्त थी वो. पर चेतना एक साधारण औरत नहीं थी, वो मेरा ख़ास दोस्त चेतन था, जो एक क्रॉस-ड्रेसर था. कल रात मैंने पहली बार चेतन का यह रूप देखा था. और मैंने एक ऐसी औरत के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किया था जो औरत ही नहीं थी. उस रात के बाद की सुबह होश आया तो मेरा दिमाग सोचने पर मजबूर हो गया था कि जो रात के अँधेरे में हमने किया क्या वो सही था?

सुबह उठने पर मेरा नशा उतर गया था. अब हॉर्मोन भी मुझे उत्तेजित नहीं कर रहे थे. चेतना अब भी मेरी बगल में थी, या था? टाइट ब्लाउज में उफ़ कितनी आकर्षक लग रही थी वो. उसकी नग्न पीठ देख कर मेरा मन उसे चूमने को होने लगा था. साड़ी में लिपटी हुई बेहद सेक्सी लग रही थी और चाहकर भी मैं उसे छूने से खुद को रोक नहीं पाया. मेरे स्पर्श से शायद उसकी नींद खुल रही थी. मैं कुछ देर रूककर उस औरत को एक टक देखता रहा. कितनी सुन्दर थी वो!

मेरा दिल दिमाग तो एक सवाल से विचलित था. क्या मैं गे हूँ? आप मेरी जगह होते तो आपको भी ऐसा ही लगता, खासतौर पर यदि आप जीवन भर स्त्रियों की तरफ आकर्षित रहे हो. यह सवाल मन में आते ही मेरा बिस्तर से उठकर भागने का मन हुआ.

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रूममेट: भाग १


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“तुमने तो स्वेटर और टूथब्रश रखा ही नहीं”, मेरी पत्नी ईशा ने मुझसे कहा. उसके तेवर बता रहे थे जैसे उसे मालूम था मैं अपनी यात्रा के सामान में कुछ न कुछ भूल रहा हूँ. वो मेरे सूटकेस में सामान रखने लगी.

“ईशा, कैलिफ़ोर्निया में ठण्ड नहीं होती. और टूथब्रश तो होटल में भी मुफ्त  मिल जाता  है.”, मैंने अपने बचाव में कहा.

“ओहो निशांत, मैं कैलिफ़ोर्निया की बात नहीं कर रही. हवाईजहाज में तुम्हे ठण्ड लग जायेगी. तुम भी न! बिलकुल सोचते नहीं हो.”, ईशा ने शिकायती लहजे में कहा. पर उसकी शिकायत में प्यार भी बहुत छुपा हुआ था.

“आज ग्रोसरी शौपिंग करते वक़्त गौरव भैया और नीतू भाभी मिले थे. गौरव भैया बता रहे थे कि आपके सबसे अच्छे दोस्त चेतन कैलिफ़ोर्निया में ही रहते है.”, ईशा ने कहा.

“हाँ”, मैंने संक्षिप्त में उत्तर दिया.

“सुना है कि वो आपके बेस्ट फ्रेंड है. पर इतने सालो में हमारी उनसे मुलाकात या बात तक नहीं हुई. बस तस्वीरों में देखा है उन्हें. ये कैसे बेस्ट फ्रेंड हो आप?”, ईशा ने मुझसे फिर पूछा.

“मैडम, जब मैं US आया था तब वो इंडिया में ही रह गया. और दोबारा कभी एक शहर में मुलाक़ात ही नहीं हुई. समय के साथ दोस्ती भी छुट जाती है.”, मैं ईशा को सच बताया. पर ये पूरा सच नहीं था.

“अब उनके शहर जा ही रहे हो तो मिल लेना उनसे”, ईशा बोली.  “देखता हूँ.  ऑफिस के काम से फुर्सत मिल जाए तो चेतन से भी मिल लूँगा. “, मैंने जवाब दिया.  मेरी चेतन से मिलने की कोई इच्छा नहीं थी.  शायद हिम्मत भी नहीं थी.

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नेहा भाभी


Author’s note: Please use the STAR rating option above to rate this story. We would like to thank our beloved reader Neha Gupta, who gave us these beautiful pictures of her own for the story. Yes, she is a real wonderful crossdresser. Find her on Facebook and say thanks to her!

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“मेरे प्यारे देवरजी आ गए! देखो तो कितने लम्बे हो गए हो तुम!”, मेरी प्यारी नेहा भाभी ने मेरे आते ही मुझे गले लगा लिया| और मैं भी अपनी खुबसूरत भाभी को देखते ही उनसे गले लिपट गया| नेहा भाभी बेहद ही सुन्दर थी, वैसी ही जिनके बारे में लोग सपने देख कर न जाने कैसी कैसी कहानियां लिखते है| सुन्दर चेहरा, दुबला पतला छरहरा बदन, भरे हुए स्तन, लम्बे बाल, कोई भी कमी न थी उनमे| वो आज हरी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिसमे भूरे रंग की बॉर्डर थी| उनके छोटे आस्तीन वाले मैचिंग ब्लाउज में उनकी काया तो बस मंत्र-मुग्ध कर रही थी| उनके मुलायम स्तन गले लगाने पर जिस तरह मेरे सीने पे महसूस हो रहे थे, उन्हें छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था| पर मेरी भाभी थी वो! और मुझे उनका सम्मान करना चाहिए|

मैं १०वी की परीक्षा के बाद गर्मी की छुट्टी बीताने तनुज भैया और नेहा भाभी के घर अभी अभी पहुंचा था| तनुज भैया मुझे  स्टेशन लेने आये थे| मुझे उनके यहाँ छुट्टी बीताना बड़ा पसंद था| आखिर नेहा भाभी मुझे इतना प्यार जो देती थी| भैया और भाभी की शादी को २ साल ही हुए थे और उन दोनों में अब भी नए शादीशुदा दंपत्ति वाली चमक थी| कोई भी मेरी भाभी को देख ले तो उनको तुरंत यकीन हो जाए कि मेरे भैया कितने भाग्यशाली थे| कहने को तो नेहा भाभी हाउसवाइफ थी, पर बेहद ही मॉडर्न विचारोवाली थी वह| वो चाहे साड़ी पहने या फिर स्कर्ट, सभी में वो मॉडर्न लगती थी| अंग्रेजी भी फर्राटे से बोल लेती थी वो| भाभी के बारे में मुझे मेरे मन में उलटे सीधे विचार नहीं लाने चाहिए पर वो है ही इतनी आकर्षक| और उनके गले लगाने के बाद उनके मुलायम स्तनों को अपने सीने से महसूस करने के बाद तो मन में ऐसे विचार आना स्वाभाविक था| मुझे जीवन में और भी औरतों ने गले लगाया है, पर नेहा भाभी मुझसे ज्यादा करीब से गले मिलती थी| मैं यह नहीं कह रहा कि उनका मुझमे किसी गलत तरह का इंटरेस्ट था| बल्कि सच तो यह था कि नेहा भाभी मेरी काफी अच्छी दोस्त थी| फ़ोन पर ही सही पर उनसे अपने दिल की बहुत सी बातें आसानी से कह सकता था मैं| खुले दिल से वो मेरी बातें सुनती और अपनी भी बातें कहती| शायद इसलिए उन्होंने मुझे इतने प्यार से बेफिक्र हो कर गले लगाया था| और मैं था जो उनके कोमल बदन के बारे में सोच रहा था| मुझे खुद पर थोड़ी शर्म महसूस होने लगी| वो अब भी मेरा हाथ पकड़ कर ख़ुशी से मेरी ओर देख रही थी| Continue reading “नेहा भाभी”