इंडियन लेडीज़ क्लब: भाग ५

दोस्ती, यारी, सहेलियों का प्यार और औरतों की आपस में जलन, हर तरह के जज्बातों से भरी वो लेडीज़ क्लब की रात जल्दी ही इस दिशा में बढ़ने वाली थी जिसका वहां किसी को अंदेशा तक नहीं था.


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“लहंगे में कितनी सुन्दर लग रही है वो. हैं न?”, ईशा के इस सवाल से सुमति का ध्यान टुटा. न जाने कहाँ खोयी हुई थी वो. अब तक तो वो चुपचाप अन्वेषा को अपने नए रूप में बलखाते देख रही थी. अन्वेषा एक दुल्हन की तरह शालीनता से चल रही थी, धीरे से अपने लहंगे को ज़रा ऊपर उठा कर, थोड़ी घबरायी हुई कि कहीं खुद अपने लहंगे पर ही कदम न रख दे. पर इतने बड़े घेर वाले उस महंगे सुन्दर लहंगे में तो वो अपने पैर तक नहीं देख पा रही थी. आज के पहले तो वो कभी हील वाली सैंडल तक नहीं पहनी थी, इसलिए अंजलि उसका एक हाथ थाम कर साथ दे रही थी ताकि गलती से वो गिर न जाए. “उसका मेकअप भी अच्छा हुआ है. क्या कहती हो सुमति?”, ईशा ने फिर पूछा. “हाँ. वो तो होना ही था. आखिर तुम जो थी मेकअप के लिए!”, सुमति ने एक छोटी सी मुस्कान के साथ ईशा की ओर देखा.

“चल झूठी कहीं की. दिल से तारीफ़ करो तो मानू मैं”, ईशा ने कहा. “मैं देख रही हूँ कि कोई तो बात है जो तुझे परेशान कर रही है. क्या ये उसी खबर को लेकर है? सब ठीक होगा… तू यूँ ही चिंता कर रही है.”, ईशा की बात सुन सुमति थोड़ी आश्चर्य में थी कि उसे कैसे पता चला उस खबर के बारे में. उसने निचे थोड़ी उदासी के साथ देखा. नर्वस होकर वो अपने साड़ी के आँचल को अपनी उँगलियों में गोल गोल लपेट रही थी. पर ईशा ने सुमति का चेहरा उठाया और उससे कहा, “पगली. यह तो ख़ुशी की खबर है फिर चिंता कैसे?” सुमति थोड़ी भावुक हो गयी थी. उसने ईशा को गले लगा लिया और ईशा के कंधे पर सर रख कर बोली, “सब ठीक होगा न?” तो ईशा ने अपने हाथो से सुमति के बालों पर फेरते हुआ कहा, “हाँ. ज़रूर.”

अन्वेषा, अपने नए रूप में बेहद खुश थी और ख़ुशी के मारे वो नाच रही थी. और उसका लहँगा किसी फुल की भाँती खिल उठा था. जब आसपास आपके सभी औरतें हो और आप उनके बीच सबसे सुन्दर औरत हो, तो कौन खुश नहीं होगी?

कमरे के दुसरे कोने में अन्वेषा अब अपनी ऊँची हील की सैंडल पहनकर चलने में थोडा ज्यादा सहज महसूस कर रही थी. “छम छम”, उसकी पायल की मधुर आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी. ख़ुशी के मारे अब वो थोडा तेज़ भी चल रही थी, हँस रही थी और अपने आसपास की औरतों से भी ख़ुशी से बात कर रही थी जो उसे उसकी खूबसूरती पे कॉम्प्लीमेंट कर रही थी. सबसे मिलकर वो भी इस क्लब का हिस्सा बन रही थी, जान रही थी कि कौन उसकी सहेली बन सकती है. और इन सब के बीच अंजलि भी अन्वेषा का साथ देते हुए उसके साथ चल रही थी. पता नहीं कौन औरत थी वो जिसने अन्वेषा को चैलेंज किया कि वो अपनी इस खुबसूरत सी लहँगा चोली में नाच कर दिखाए और अन्वेषा भी जोश में आकर मान गयी. और अंजलि से हाथ छुड़ाकर वो अपनी राजकुमारी से लिबास में गोल गोल घुमने लगी. पहले तो अपने हाथो से अपने लहंगे को पकड़ और थोडा ऊपर उठाकर धीरे धीरे, आखिर उस फूलों सी लगने वाली अन्वेषा के नाज़ुक हांथो के लिए लहंगा बहुत भारी जो था. पर फिर जल्दी ही उसने ख़ुशी से अपनी बाँहें खो फैला ली और अपने सर को ऊपर उठाकर तेज़ी से गोल गोल घुमने लगी. उसका लहंगा धीरे धीरे ऊपर उठता गया, और उसका घेर बढ़ता गया मानो जैसे एक कलि खिल कर फुल बन रही हो. उसके चेहरे की ख़ुशी सभी को खुश कर रही थी. अन्वेषा अब फुल बन चुकी थी.

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ईशा ने अन्वेषा को अपने साथ सोफे पर ले जाकर बैठाया और वो देखने लगी की कहीं अन्वेषा को मोच तो नहीं आ गयी.

पर आप में चाहे जितना भी जोश हो, यदि आपके पास हील पहनकर चलने का अनुभव न हो तो आपको सावधानी बरतनी ही चाहिए. और अचानक ही उस राजकुमारी की एडी मुड़ गयी और वो लचक खाकर निचे गिर पड़ी. “सत्यानाश! यह आजकल की कॉलेज की लडकिया भी न… ज़रा सा इंतज़ार नहीं कर सकती!”, ईशा ने कहा और तुरंत अन्वेषा की ओर दौड़ पड़ी उसे उठाने के लिए. अंजलि तो थोड़ी चिंतित थी कि कहीं अन्वेषा को मोच न आ गयी हो. एक बड़ी बहन की तरह वो भी दौड़ पड़ी और कहने लगी, “इसलिए मैं कह रही थी कि मेरे साथ धीरे धीरे चलो. अब लग गयी न चोट.. पैरो में मोच तो नहीं आई?” पर अन्वेषा कहाँ सुनने वाली थी? वो तो अब भी हँस रही थी. ईशा और अंजलि ने उसे तुरंत उठाया और एक सोफे पर ले जाकर बिठाया और दोनों औरतें अन्वेषा के पैरो को पकड़ देखने लगी कि कहीं चोट तो नहीं आई है. दोनों औरतें भी कितनी ख्याल रखने वाली थी. पुरुष के रूप में वो चाहे जैसे भी रही हो, पर एक बार साड़ी पहन ले, तो उन औरतों से ज्यादा ख्याल रखने वाली कोई न हो इस दुनिया में. साड़ी का भी कितना प्यारा असर होता है पहनने वाली के मन पर! फिर भी कुछ औरतें ऐसी भी थी जिन्हें अन्वेषा के गिरने से कुछ फर्क न पड़ा… उन्हें तो जैसे अपने अन्दर की जलन निकालने का मौका मिल गया था. इंडियन लेडीज़ क्लब में आखिर सभी तरह की औरतें थी, जिनमे से कुछ ईर्ष्यालु औरतें भी थी.

मधु, जो की इस क्लब में माँ की तरह थी, वो आगे आई और बोली, “लेडीज़! क्या यार कब तक मुझ बेचारी को भूखा रखोगी. चलो जल्दी से आगे का प्रोग्राम करते है… मेरे पेट में तो चूहे कूद रहे है. अन्वेषा चलो आओ इधर.” मधु ने अन्वेषा को बुलाया जो अब मन ही मन थोडा शर्मा रही थी अपनी नाचने की बेवकूफी को लेकर. किसी तरह अपने पैरो पर खड़ी होकर अंजलि के सहयोग से वो चलकर मधु के पास आई.

“देखो अन्वेषा. अब इस रात की बस एक चीज़ और रह गयी है. तुम्हारे पास ये मौका है कि तुम्हारी कोई ख्वाहिश हो जो हम औरतें आज पूरी कर सके तो बेझिझक बोल दो. हम लोग पूरी कोशिश करेंगे तुम्हारी इच्छा पूरी करने की.”, मधु ने अन्वेषा से कहा. अन्वेषा को कुछ समझ न आया. आखिर इतना सब कुछ तो उसके लिए क्लब ने पहले ही किया है… जो उसने कभी सपनो में भी नहीं सोचा था. अब आखिर वो और क्या मांग सकती थी भला? थोड़ी नर्वस होकर उसने लडखडाती जबान से कहा, “मेरी इच्छा…. मैं चाहती हूँ की सभी औरतें…” बेचारी मधु जैसी मुखर और बड़ी सी औरत के सामने कुछ बोल न पा रही थी.”मैं चाहती हूँ की सभी औरतें एक बड़ा सा गोल घेरा बनाकर ज़मीन पर बैठ जाए” यह कैसी ख्वाहिश है, मधु तो सोच में पड़ गई. पर अब यह ख्वाहिश पूरी तो करनी थी. “लेडीज़ तुम सबने सुन लिया अन्वेषा क्या चाहती है… तो चलो सब गोला बनाकर बैठ जाओ.”, मधु ने जोर से सभी से कहा.

वैसे तो वो कमरा बड़ा था फिर भी इतनी सारी औरतों के लिए गोल घेरा बनाना थोडा मुश्किल काम था. और फिर निचे बैठना… इतने फैंसी कपडे पहनकर? मज़ाक थोड़ी है. यदि आपने कभी साड़ी पहनी हो तो आपको तो पता होगा कि कैसे आपको पहले जगह बनानी पड़ती है कि आप अपने पैरो को पेटीकोट के अन्दर मोड़ कर ऐसे बैठ सके कि आपकी साड़ी ख़राब न हो और उसकी प्लेट अच्छी तरह बनी रहे… और फिर पल्लू को भी तो संभाल कर फैलाना होता है. कभी कोशिश करियेगा… आसान नहीं होता है साड़ी पहन कर निचे बैठना.. और वो भी भारी साड़ियाँ! और यदि आपने टाइट चूड़ीदार पहना हो तो फिर आपके पास एक ही तरीका है कि दोनों पैरो को एक ओर मोड़ कर ही आप बैठ सकती है. पालती मारने की कोशिश भी न करना टाइट चूड़ीदार में! और फिर जो भी पहनी हो आप, एक औरत को बैठ कर अच्छी दिखने के लिए अपनी कमर सीधी रखनी होती है… वो और भी कठिन होता है. इसके अलावा छोटी स्कर्ट पहनकर बैठना थोडा आसान है पर वो भी तब जब आपने टाइट स्कर्ट न पहनी हो. और फिर इन सबके अलावा आपको अपनी बड़ी सी पर्स और सैंडल के लिए भी जगह बनानी होती है! इस क्लब के लेडीज़ असली औरतों की तरफ फ्लेक्सिबल तो थी नहीं कि जैसे चाहे आराम से मुड़ जाए. उन सब औरतों को निचे बैठने देना का सीन भी बड़ा मजेदार हो गया था. “उई… माँ! मेरी कमर.. कोई ज़रा सहारा तो दो!”, मधु ने सबसे पहले कहा जब वो धम्म से अपने बड़े से कुलहो पर निचे गिर पड़ी. अंजलि और सुमति तो देखकर ही हँस हँस कर लोटपोट हो रही थी. फिर भी किसी तरह सब निचे बैठ पायी. “अब आगे क्या करना है?”, अंजलि ने अन्वेषा से पूछा.

“अब मैं चाहती हूँ कि आप सब अपनी आँखें बंद करे और अपनी अगल बगल की औरतों का हाथ पकड़ कर चेन बनाये.. और अपने मन को शांत करे”, अन्वेषा ने कहा. पर जब कोई कहता है कि अपने मन को शांत करे तो इस क्लब की औरतों के मन में ये सब चल रहा था… “यार यह ब्रा स्ट्रेप बाहर निकल कर चुभ रहा है. मुझे ब्रा को थोड़ी ढीली पहनना चाहिए था.”, “हाय… मेरे बूब्स फिसल रहे है. आगे से कभी भारी बूब्स नहीं पहनूंगी. मेरी तो कमर में दर्द हो गया.”, “मुझे मेरे पैर फैलाने को जगह चाहिए. यह बगल वाली मोटी ने सारी जगह घेर ली.”, “आज कितनी सुन्दर लग रही हूँ मैं? शायद इस कमरे में आज मुझसे खुबसूरत कोई नहीं होगा.”, “यह क्या नाटक कर रहे है हम लोग?”, “एक दिन मैं भी अन्वेषा का लहंगा ट्राई करूंगी.”, “क्या आज मैं अपने दिल की बात उससे कह दू. क्या कहेगी वो?”, “अंजलि उस साड़ी में कितनी सेक्सी लग रही है. काश वो मेरी बीवी होती.”, “क्या कोई मेरी पीठ में चिकोटी कांट रहा है?”, “हे भगवान मुझे तो बड़ी हँसी आ रही है और यहाँ सबको चुप रहना है.”, “मुझे भूख लगी है.”, और न जाने क्या क्या सोच रही थी वो सब औरतें. जितनी औरतें उससे कहीं ज्यादा विचार!

जब सभी औरतें किसी तरह बैठ गयी तो अन्वेषा ने कहा, “इस क्लब की सभी औरतों को सबसे पहले मैं धन्यवाद् देना चाहती हूँ. क्योंकि आपकी वजह से मुझे इस ख़ास रात को अनुभव करने का मौका मिला. मैं आपमें से अधिक लोगो को तो नहीं जानती पर आप सबने मिलकर मुझे यह यादगार अनुभव दिया. मैं आप सभी के लिए कुछ कर तो नहीं सकती पर आज मैं आप सभी के लिए भगवान से ख़ास प्रार्थना करूंगी.” उसने अपनी बातों से सबका ध्यान अपनी तरफ खिंच लिया. “मैं भगवान और दुर्गा माँ से प्रार्थना करती हूँ कि वो यहाँ सभी के औरत का जीवन जीने के सपने को साकार करे. हमें ऐसा जीवन दे कि हमें किसी से छुप कर यूँ तैयार न होना पड़े. मैं प्रार्थना करती हूँ कि ये सोसाइटी हमें इसी जीवन में हमें हमारे रूप में स्वीकार करे. मैं चाहती हूँ कि हम ऐसे समाज में रहे जहाँ हम जब चाहे औरत बन सके और यह समाज हमें औरत के रूप में स्वीकार करे. मैं प्रार्थना करती हूँ कि हम सभी को ऐसे जीवनसाथी मिले जो हमारे अन्दर की औरत को भी स्वीकार करे.”

बहुत ही सोची समझी प्रार्थना थी अन्वेषा की. काश कि यह सच हो जाए तो कितना अच्छा होगा. इस प्रार्थना को सुनकर सब शान्ति से एक दुसरे का हाथ पकडे बैठी रही. कुछ सोच रही थी कि प्रार्थना तो अच्छी है पर ऐसी प्रार्थना का क्या फायदा. हमारे आसपास के लोगो की सोच एक रात में तो बदल नहीं जायेगी. पर फिर भी इस प्रार्थना ने सुमति और वहां बैठी बहुत सी औरतों के दिल को छू लिया. फिर थोड़ी देर बाद सभी औरतें अपनी जगह से उठ गयी. अब खाने का समय हो गया था. और सबकी सब दावत के मज़े लेने के लिए तैयार थी.

खाते वक़्त अन्वेषा ने मौके का फायदा उठा कर नयी जान पहचान और सहेलियां बनाना शुरू कर दी थी. वो दो लड़कियों के पास गयी जो देखने में उसकी हम-उम्र लगती थी. “हेल्लो अन्वेषा! कैसा लग रहा है राजकुमारी बन कर?”, उनमे से एक ने अन्वेषा से पूछा. “हम्म… बता नहीं सकती. ये सब सपने की तरह लग रहा है. थोड़ी सी तकलीफ हो रही है इस भारी से लहंगे को उठाकर चलने में… पर फिर भी बड़ा मज़ा आ रहा है.”, अन्वेषा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया. “मैं समझ सकती हूँ तुम्हारे दिल की बात. मुझे भी अपनी यहाँ की पहली रात अच्छी तरह से याद है. वैसे इनसे मिलो… ये मेरी अच्छी सहेली सोहा है. और मेरा नाम तो बताना ही भूल गयी मैं! मैं साशा हूँ.”, हलकी गुलाबी रंग की सैटिन की साड़ी पहनी उस लड़की ने अपना और अपनी सहेली का परिचय अन्वेषा को दिया.

अन्वेषा बढ़ कर साशा और सोहा के पास गयी जो देखने में उसकी हम-उम्र मालूम पड़ती थी. साशा एक मॉडर्न तरीके से हलकी गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी, जबकि सोहा सफ़ेद स्कर्ट और ऊँची हील में थी.

“तुम दोनों से मिलकर बहुत अच्छा लगा. वैसे साशा कितनी सुन्दर साड़ी है तुम्हारी यार. इतनी सेक्सी ब्लाउज के साथ इसको पहनने का तरीका भी बड़ा सेक्सी और मॉडर्न है. लगता है कि तुम साड़ी पहनने में एक्सपर्ट हो!”, अन्वेषा ने साशा की साड़ी के पल्लू को छूते हुए कहा. साशा सचमुच बहुत सुन्दर लग रही थी. फैंसी सैटिन की साड़ी और साथ में हाल्टर नैक ब्लाउज… उस पर खूब फब रहा था. “अरे कहाँ यार? मुझे तो साड़ी पहनना बिलकुल भी नहीं आता. वो तो यहाँ शर्मीला आंटी ने मेरी मदद की थी. वोही आंटी जिन्होंने तुम्हारा दुपट्टा तुम्हे पहनाया आज. देखना आगे से तुम भी उनकी मदद लोगी. बहुत प्यारी है वो. एक दिन वो मुझे खुद टेलर के पास ले जाकर मेरे लिए हाल्टर टॉप स्टाइल का ब्लाउज सिलवाई थी. मुझसे कहती है वो कि मेरी जैसी जवान लड़कियों की उम्र है अभी कि हम मॉडर्न ब्लाउज पहने. पुराने स्टाइल के ब्लाउज पहनने को तो पूरी उम्र बाकी है!”, साशा कहते कहते खिलखिलाने लगी. इस क्लब की लेडीज़ भी कितनी मिलनसार थी. सब एक दुसरे की मदद करते हुए एक औरत के रूप में परिपक्व हो रही थी.

“हा हा.. सच ही तो कहा है आंटी ने. जो भी तुम माल लग रही हो! मुझे तो तुम्हारी बम पे पिंच करने का जी चाह रहा है!”, अन्वेषा ने साशा को छेड़ते हुए कहा. और फिर वो सोहा की ओर पलट कर मुस्कुराने लगी. सोहा ने लम्बी स्लीव का नीले रंग का टॉप पहना था और साथ में एक सफ़ेद रंग की स्कर्ट… और मैच करती हुई सैंडल. “वाओ सोहा… ४ इंच की हील्स! मैं तो ऐसा कुछ पहनने का सोच भी नहीं सकती. आज तो १ इंच की हील में ही गिर गयी मैं. बड़ी शर्म आ रही थी उस वक़्त मुझे.”, अन्वेषा ने फिर सोहा से कहा.

“अरे इतनी जल्दी क्या है अन्वेषा. तुम भी सिख जाओगी.. ज्यादा समय नहीं लगता. बस थोड़ी सी प्रैक्टिस और फिर तुम भी हील्स में दौड़ने लगोगी..”, सोहा ने कहा. “दौड़ना..? न बाबा न … मैं तो थोडा तेज़ चल लूं उतना ही काफी है.”, अन्वेषा बोली. “वैसे अन्वेषा… तुमने लहंगा चुनकर बहुत अच्छा की. तुम पर बहुत जंच रहा है ये रंग. तुमको आज लहंगा पहनकर गोल गोल घूमते नाचते देख कर बहुत अच्छा लगा. तुम्हे न किसी गाने पे प्रैक्टिस करके यहाँ हम सबके सामने कभी डांस करना चाहिए!”, सोहा ने फिर कहा. “आईडिया तो अच्छा है.. पर पता नहीं मैं लहंगा दुबारा कब पहनूंगी. सच बताऊँ तो मैं स्कर्ट पहनने वाली लड़की हूँ. टाइट सेक्सी छोटी स्कर्ट… जो सबका ध्यान खींचे!!!”, अन्वेषा हँसते हुए बोली. उसके कंगन और चूड़ियों की खनक और उसकी हँसी सचमुच बड़ी मोहक थी.

“ओहो… क्या बात है. किसका ध्यान खींचना चाहती हो मैडम? यहाँ पर तो सब औरतें है! कोई आदमी नहीं है..”, साशा ने कहा और तीनो जोर जोर से हँसने लगी. तीनो लड़कियों के बीच जल्दी ही दोस्ती की शुरुआत हो चुकी थी. सोहा ने फिर दोनों से कहा कि कुछ खाना खा लिया जाए. और तीनो खाने की तरफ एक साथ चल पड़ी… एक नयी दोस्ती की शुरुआत थी यह. उसी तरह जैसे अंजलि, सुमति और मधु की दोस्ती थी.

रात आगे बढती रही. अन्वेषा के पास बहुत सी औरतें आई और उसका क्लब में स्वागत किया. सभी ने उसके रूप की तारीफ़ की. समय तेज़ी से गुज़र रहा था… और इन औरतों के पास कहने को बहुत कुछ था पर समय कम था. वो एक दुसरे की साड़ियाँ, मेकअप और ड्रेसेज की तारीफ़ करते करते थक नहीं रही थी. कोई किसी के सुन्दर हार के बारे में बात कर रही थी.. तो कोई इस बारे में कि कैसे मंगलसूत्र हम भारतीय औरतों की खूबसूरती बढ़ा देता है. कोई अपनी नयी पायल दिखा रही थी.. तो कोई अपनी सहेलियों के साथ बातें कर रही थी. कोई अपनी नयी हेयर स्टाइल दिखा रही थी. कोई बता रही थी कि ब्रेस्टफॉर्म पहनकर कैसे उनका जीवन ही बदल गया.. नर्म मुलायम.. उम्म्म… कोई बता रही थी कि उसने कैसे अपनी cd के बारे में अपनी गर्लफ्रेंड को बताया और उसने उसे स्वीकार कर लिया. कुछ औरतें पक्की औरतों की तरह रेसिपी डीसकस कर रही थी तो कोई अपनी फिगर की चिंता. कोई उन्हें उपाय दे रही थी कि कैसे पेट पतला किया जाए. तो कुछ औरतें इस क्लब के प्रोग्राम के बाद रात को कहाँ पार्टी करना है इसकी प्लानिंग कर रही थी. इस क्लब में करने को कितना कुछ था. कोई भी औरत वहां बोर नहीं हो सकती थी!

पर अब क्लब के प्रोग्राम के ख़त्म होने का समय आ गया था. ऐसा लग रहा था जैसे रात तो अभी ही शुरू हुई थी. अभी भी इन औरतों को कितनी बातें करना बाकी थी. एक बार फिर मधु जी सेण्टर में आकर हाथो से ताली बजाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचने लगी. वो कुछ कहने वाली थी. मधु ने अपने लम्बे पल्लू को सामने लाकर अपनी कमर में लपेटा और फिर कहने लगी, “लेडीज़! मुझे उम्मीद है कि आप सबको बहुत मज़ा आया होगा आज. पर अब रात को ख़त्म करने का समय आ गया है. पर मुझे आप सबसे एक ख़ुशी की खबर शेयर करनी है.” मधुरिमा ने फिर मुस्कुराते हुए सुमति की ओर देखा और बोली, “तुम सबको तो पता ही है कि मेरी सबसे प्यारी बेटी सुमति इतने सालो से अपने इस घर में इंडियन लेडीज़ क्लब चला रही है. तो सबसे पहले सुमति को धन्यवाद देने के लिए जोर से तालियाँ. आखिर वो इतने सालो से इतनी मेहनत करती आ रही है ताकि हम सभी को ऐसी जगह मिल सके जहाँ हम सब अपने सपने पूरे कर सके. और साथ ही अंजलि को भी थैंक यू जो जल्दी आकर आज की तैयारियों में सुमति का हाथ बंटा रही थी. और फिर ईशा, शर्मीला, और अनीता को भी धन्यवाद जिन्होंने आज अन्वेषा का रूपांतरण किया.” यह हर बार की तरह क्लब की तैयारी करने वाली औरतों को धन्यवाद देने वाला मेसेज था. और हमेशा की तरह सबने ख़ुशी से जोर से तालियाँ बजाई.

“और अब सबसे बड़ी खबर! मेरी बेटी, सुमति की शादी हो रही है! एक माँ होने के नाते मुझे कितनी ख़ुशी है मैं बता नहीं सकती. पर साथ ही मैं बहुत भावुक भी हूँ आज. मेरी बेटी का घर बसने जा रहा है और एक महीने में वो एक सुहागन होगी. काश मेरे पास और समय होता जो मैं उसको अच्छी पत्नी और अच्छी बहु होने के बारे में कुछ सिखा पाती ताकि वो ससुराल में मेरा नाम न डूबा दे! पर अब क्या कर सकती हूँ मैं…. जितना सिखा सकती थी सिखा दी… “, मधु का अपना ड्रामा फिर शुरू हो गया था. उसने एक बार फिर सुमति की ओर देखा. मधु चाहे जो भी कहे पर अन्दर ही अन्दर वो सुमति के लिए बहुत खुश थी. मधु ने फिर आगे कहा, “सुमति मैं और इस क्लब की सभी औरतें तुम्हारे लिए बहुत खुश है”

“अच्छा, लेडीज़ तो अब अगली खबर. तुम सब तो जानती हो कि हम सभी यहाँ सुमति के घर में मिलती आ रही थी. पर अब हमें पता नहीं कि सुमति की होने वाली पत्नी सुमति के इस रूप को स्वीकारेगी या नहीं. मुझे यकीन है कि वो सुमति को ज़रूर अपनाएगी. कौन नहीं अपनाएगी इतनी प्यारी सुमति को? पर फिर भी.. चाहे जो भी हो… एक नयी नवेली पत्नी भले सुमति को अपना ले पर हर हफ्ते ३०-४० लोगो को अपने घर में बुलाये, इसकी सम्भावना कम है. तो जब तक हम मिलने की नयी जगह नहीं ढूंढ लेती, इंडियन लेडीज़ क्लब की मीटिंग नहीं होगी.”

ये खबर सुनते ही मानो वहां की सभी औरतों का दिल टूट गया. यही तो उनकी सबसे सेफ जगह थी. खबर सुनते ही कमरे में सभी आपस में इस बारे में बात करने लगी. किसी भी ग्रुप की तरह, इस ग्रुप में भी कुछ औरतें थी जो इस क्लब का सारा फायदा तो उठाती थी पर फिर भी शिकायत करती रहती थी. ऐसी ही औरतों की एक लीडर थी.. गरिमा. खबर सुनते ही गरिमा ने आगे आकर कहा. “यह बात हमें स्वीकार्य नहीं है.. इंडियन लेडीज़ क्लब सिर्फ सुमति का नहीं है. उसकी शादी हो रही है तो हम सब औरतें क्यों भुगते?”

मधुरिमा को अपने जीवन में ऐसी औरतों को संभालने का काफी अनुभव था. तो मधुरिमा ने गरिमा से कहा, “ठीक है गरिमा. तुम सच कहती हो. तो फिर पक्का रहा. अगले हफ्ते भी इंडियन लेडीज़ क्लब की मीटिंग होगी और आगे भी होती रहेगी. लेडीज़ सभी ध्यान दो… अगले हफ्ते से हम सभी गरिमा के घर में मिला करेंगी.”

मधु की बात सुनकर गरिमा सकपका गयी. वो पीछे हो ली और बोली, “पर मैं तो अपने पेरेंट्स और पत्नी के साथ रहती हूँ. मैं कैसे करूंगी यह सब?”

“अच्छा… तुम्हारी यह बात भी ठीक है गरिमा.”, मधु बोली, “…. तो फिर मुझे यकीन है कि तुम्हे इस क्लब के लिए कुछ करने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी. तो तुम एक अलग घर इस क्लूब के लिए किराए पर ले लो. वो तो और भी बढ़िया होगा. हम सब वहां अपनी साप्ताहिक मीटिंग के अलावा भी जब चाहे वहां जा सकेगी.”

गरिमा और कुछ बोल न सकी. मधु ने उसकी बोलती बंद करा दी थी. गरिमा हमेशा से ही ऐसी परेशानी खड़ी करने वाली औरत थी. वो कुछ भी मदद तो नहीं करती थी पर क्लब के बारे में हमेशा सभी औरतों से चुगली करती रहती थी.

“अच्छा लेडीज़. अब और कुछ कहने को तो रहा नहीं. चलो प्लीज़ आप सब मिलकर घर को साफ़ करने में मदद कर दो. कल सुबह ही सुमति का छोटा भाई और उसकी मंगेतर यहाँ आने वाले है. और आप लोग जो भी अपना सामान लेकर आई थी, प्लीज़ अपने साथ ले जाना. यहाँ कुछ भी मेकअप या कपडे नहीं रहने चाहिए” और फिर सभी औरतें मधुरिमा की देख रेख में साफ़ सफाई में जुट गयी.

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मधु ने अब घर की सफाई की ज़िम्मेदारी उठा ली थी. हर कोई सुमति का घर साफ़ करने में मदद कर रही थी.

साफ़ सफाई होने के बाद, अब वक़्त आ गया था कि वो औरतें अब वापस अपने कपडे बदल कर आदमी बन जाए. बहुत सी औरतों के लिए यह उनके दिन का सबसे दुखदायी समय होता था. पर वो अपने साथ बहुत ही खुबसूरत यादें संजोये जा रही होती थी. कई बार कुछ औरतें रात को अपने औरत वाले रूप में ही वहां से निकल जाती थी. कुछ लोग किसी के घर जाकर फिर ड्रिंक्स और लेट पार्टी के लिए मिलते थे. अन्वेषा ने ऐसी ही एक पार्टी में जाना तय किया. उस पार्टी में करीब ९ औरतें थी और साथ में साशा और सोहा भी थी. पर वहां जाने के पहले अन्वेषा को कपडे बदलने थे. ऐसी राजकुमारी की तरह वो रात गए बाहर नहीं जा सकती थी. क्लब की कुछ औरतों ने उसे लहंगा चोली उतारने में मदद की. अब अन्वेषा ने एक छोटी ड्रेस पहन ली थी जो वो अपने साथ घर से लेकर आई थी. न जाने उसमे इतनी हिम्मत कैसे आ गयी थी कि वो यहाँ से बाहर लड़की बन कर ही जाने वाली थी. साशा, सोहा और दूसरी औरतें भी औरत की तरह ही उस पार्टी में जा रही थी. वैसे भी पार्टी किसी के घर में थी.. सौभाग्य से जिसका घर था उसके घरवाले कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए थे. भले ही पार्टी के लिए उन सबके पास जगह थी… पर वहां तक जाने के लिए इंडियन लेडीज़ क्लब से बाहर निकलना पड़ता. और चारदीवारी के बाहर जाने में सब उत्साहित रहती थी… पर बाहर जाने में डर भी रहता है कि यदि पुलिस वालो ने रोक लिया तो? या किसी पहचान वाले ने देख लिया? पर ग्रुप में बाहर जाने में डर थोडा कम हो जाता था. धीरे धीरे अन्वेषा, साशा, सोहा और लगभग सभी औरतें वहां से अब जा चुकी थी. और रह गयी थी सिर्फ सुमति, मधु, अंजलि और ईशा.

ईशा एक कोने में सुमति का हाथ पकड़ी हुई थी, और उसे विश्वास दिला रही थी कि शादी के बाद भी हम सब साथ मिलने का बहाना बना ही लेंगे. पर शादी के बाद क्या होगा सोचकर सुमति थोड़ी चिंतित ही रही. उसे देख अंजलि भी वहां आ गयी. और फिर अंजलि और ईशा ने एक एक कर उसे गले लगाकर प्यार से ढांढस बंधाया.

“क्यों न हम सबकी एक फोटो हो जाए? आखिर हम सहेलियों को ये रात यादगार बना लेनी चाहिए. क्योंकि अगली बार तो सुमति जी मिस से मिसेज़ हो चुकी होंगी.”, अंजलि कहकर हँसने लगी. तभी मधु वहां आ गयी और बोली, “फोटो खींचनी है तो तुम तीनो साथ में खड़ी हो जाओ. मैं खिंच देती हूँ.” और मधु ने अपनी ब्लाउज के अन्दर से फ़ोन निकाली. “मधु जी, फ़ोन भी ब्रा में? तो यह राज़ है आपके बड़े बूब्स का”, ईशा ने मधु से पूछा. अंजलि हँस रही थी. “मैडम ईशा, इस ब्रा में और भी बहुत कुछ है. मुझे पता है कि तुम भी मेरी तरह 40DD कप चाहती हो! चल अब छोडो बूब्स की बातें… मुस्कुराओ तुम तीनो” और फिर मधु के कहने पर तीनो सहेलियों ने एक दुसरे की कमर पर हाथ रखा, मुस्कुरायी और क्लिक! कितना यादगार पल था वो.. उन सहेलियों के लिए. हमेशा की तरह आज भी बेहद खुबसूरत लग रही थी तीनो.

फोटो के तुरंत बाद ही अंजलि और ईशा ने भी कपडे बदले और सुमति से विदा ली. मधु कुछ देर और वहां रुकी थी. उसने सुमति से कहा कि वो भी कपडे बदल कर नाइटी पहन ले. सुमति बाथरूम से कपडे बदलकर जल्दी ही वापस आ गयी. मधु और सुमति अब सुमति के बिस्तर पर ही बैठे हुए थे. वहां मधु ने सुमति को माँ के प्यार के साथ गले लगायी और बोली, “मैं जानती हूँ कि तुम कैसा महसूस कर रही हो सुमति. मैं भी कई सालो पहले ऐसे समय से गुज़र चुकी हूँ. पर शादी कोई सज़ा नहीं है.. वो भी तुम्हारे जीवन में खुशियाँ लेकर आएँगी. और कभी कभी, वो ख़ुशी इतनी ज्यादा होती है कि हम अपने अन्दर की औरत को भी भूल जाते है. कम से कम शुरु के कुछ साल तक तो ऐसा ही रहता है. फिर क्या पता तुम्हारी पत्नी भी सुमति को खुले दिल से स्वीकार कर ले? और यदि न करे, तब भी अंजलि, ईशा और मैं तो है न तेरे साथ हमेशा? हम किसी न किसी तरह समय और जगह ढूंढ लेंगे सुमति से मिलने के लिए. तुम समझ रही हो न?” मधु की बातों में सचमुच ममता भरी हुई थी.

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लम्बे व्यस्त दिन के बाद, सुमति अपनी नाइटी पहन कर जल्दी ही सो गयी.

“पर माँ! मैं तुम्हे भी तो कितना याद करूंगी. तुम मुझसे इतनी आसानी से मिल न पाओगी. और फिर अपनी बहु – मेरी पत्नी से नहीं मिलोगी तुम?”, सुमति ने कहा. “बेटी, मैं तो हमेशा इसी शहर में रहूंगी न? तो हम किसी न किसी तरह मिल लेंगे. अपनी माँ पे भरोसा नहीं है ? अब चुपचाप बिस्तर में सो जाओ.” मधु ने प्यार से सुमति के सर पर हाथ फेरा. वो भी जानती थी कि अपनी इस प्यारी सी बेटी से न मिल पाना उसे भी दुख देगा. उसने सुमति को लेटाकर एक माँ की भाँती चादर उढ़ाकर उसके माथे पर एक किस दिया. “गुड नाईट, सुमति बेटी. अपना विग जल्दी निकाल लेना वरना नींद नहीं आएगी अच्छे से.”, मधु बोली और फिर वो भी अपने घर के लिए निकल गयी. सुमति को भी जल्दी ही नींद आ गयी. इस व्यस्त रात के बाद, आरामदायक नाइटी पहनकर किसी को भी नींद आ जाए. आखिर एक अच्छी नाइटी एक औरत के तन को प्यार से छूती है, लपेटती है और अपने स्पर्श से उसे पहनने वाली औरत को अच्छी तरह से समझती भी है.

हैरानी भरी सुबह

सुमति के घर में : कभी आपने एक आरामदायक नाइटी में सोने का आनंद लिया है? यदि हाँ, तो आप जानती ही होंगी की सुबह सुबह नींद खुलने पर नाइटी का स्पर्श आपकी कोमल त्वचा पर कितना सुख देता है. सुमति ने भी वही अनुभव किया. उसकी आँखें बंद थी पर उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी. उस वक़्त उसकी बांहों में कोई होता तो वो बंद आँखों के साथ ही उसे जोर से सीने से लगा लेती. पर फिर भी वो अपनी आँखें मींचे मींचे ही उठ बैठी. उफ़… उसकी स्मूथ त्वचा पर उसकी मखमली सी नाइटी तो आज मानो फिसल रही थी. सुबह सुबह इस तरह से औरत होना महसूस करते हुए उठने का मौका बार बार कहाँ मिलता है. सुमति अब सीधी होकर बैठ गयी थी. और बैठते ही उसने अपनी उँगलियों को अपने लम्बे बालो पर फेरा और फिर उन्हें अपने चेहरे के पीछे कर दी. पर उसके लम्बे बाल? सुबह सुबह सूरज की रौशनी में अब सुमति अंगडाई ले रही थी, मानो अपने अन्दर की सारी नींद को उस उजाले में उड़ा देना चाहती हो. नए दिन का स्वागत करती हुई सुमति का सीना उसके स्तनों के साथ अंगडाई लेते हुए किसी मादक सौंदर्य की धनी लड़की की तरह आगे निकल आया था. पर सुबह सुबह की हलकी सी ठण्ड जब महसूस हुई तो उसने अपने हाथ मोड़ लिए. अपने ही हाथो पर अपने ही नर्म मुलायम स्तनों का दबना उसे सुख दे रहा था. उसने फिर अपने स्तनों को अपनी बांहों के बीच थोडा और दबाया. और उस दबाव के साथ उसके स्तन थोड़े ऊपर उठ गए. पर उसके स्तन? कैसे?

अन्वेषा पार्टी वाले घर में: वो घर जहाँ कल रात अन्वेषा और औरतों के साथ ड्रिंक्स और डांस पार्टी के लिए गयी थी, आज वहाँ सब बिखरा पड़ा था. फर्श पर हर जगह बियर की बोतलें और कैन बेतरतीब तरह से बिखरी हुई थी. कहीं रंगीन ब्रा, कहीं सेक्सी पेंटीयाँ तो कहीं किसी लड़की के टॉप सब कुछ अस्त-व्यस्त पड़ी हुई थी. उस घर में कई लडकियां एक दुसरे के ऊपर सोयी पड़ी थी जैसे रात भर खूब पार्टी हुई हो. कुछ लडकियां तो टॉपलेस थी और उनके नग्न स्तन खुले दिख रहे थे. और कुछ लडकियां अपने टॉप पहनी हुई थी पर उनके स्तन टॉप से लापरवाह तरीके से बाहर दिख रहे थे. और कुछ तो केवल पेंटी पहनी हुई थी. दो लडकियां सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट पहनी हुई थी और उनकी साड़ियाँ बिस्तर पर फैली हुई थी. सभी लड़कियों को शायद शराब पीने के बाद का हैंगओवर था और सब एक दुसरे की बांहों में सोयी पड़ी थी. अन्वेषा कमरे के एक कोने में बिस्तर पर थी. ऐसा लग रहा था जैसे वो साशा के बगल में लेटी थी. साशा पेटीकोट पहनी हुई थी और अन्वेषा के हाथ उसके हाल्टर टॉप ब्लाउज के अन्दर थे. इन लड़कियों ने कुछ ज्यादा ही पार्टी कर ली थी कल रात को जहाँ कोई रोक टोक नहीं थी.

सुमति के घर में: सुमति तो अब शॉक में थी. उसके पास असली स्तन थे! यह कैसे हो सकता है? वो पागल तो नहीं हो रही? वो सोचने लगी. वो ज़रूर सपना देख रही होगी. क्या कल रात उसने कोई ड्रग तो नहीं ली. अपने असली स्तनों को महसूस करने के बाद वो अपनी कमर के निचले हिस्से की तरफ तो देखना ही नहीं चाहती थी. कहीं उसका लिंग तो नहीं बदल गया? वो सचमुच पागल हो रही थी, उसने खुद से कहा. पर हैरानी भरा समय जो उसे पागल करने वाला था, वो तो अब बस शुरू ही हुआ था.

प्रिय पाठिकाओं, धन्यवाद जो आपने अब तक इस कहानी को पढ़ा. अब आगे की कहानी बहुत ही क्रेजी होने वाली है. तो पढ़ते रहिये… जानने के लिए कि आगे क्या हुआ!

क्रमश: …

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< भाग ४ भाग ६ >

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इंडियन लेडीज़ क्लब: भाग ३

लेडीज़ क्लब में आज खुशियाँ छाई हुई थी. यहाँ सुन्दर सुन्दर लिबास में जमा सभी औरतें खुश थी पर उन्हें पता नहीं था कि आज की रात उनमे से एक औरत उनकी ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल देगी.


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हर किसी को मधुरिमा आंटी से बात करना पसंद था.

इंडियन लेडीज़ क्लब की पार्टी अब शुरू हो चुकी थी. और मधुरिमा भी पार्टी का मज़ा ले रही थी. एक कोने में किसी लड़की से बात कर रही थी. वैसे भी वहां की सभी औरतों को ‘मधु आंटी’ से बात करने में बड़ा मज़ा आता था. वैसे तो मधु झूठमूठ का गुस्सा दिखाती थी जब भी उसे कोई आंटी कहता था… पर फिर भी सभी मधु को प्यार से सम्मान के साथ आंटी कहते थे. पर फिर भी क्लब में कुछ औरतें ऐसी भी थी जिन्हें मधु से जलन होती थी. क्योंकि उनकी नजरो में मधु के पास सब कुछ था. उसके पास बड़े स्तन थे और उसे नकली ब्रैस्ट-फॉर्म की ज़रुरत नहीं होती थी. मधु आंटी के कुल्हे भी किसी मदमस्त औरत की तरह बड़े थे जो उनके फिगर को और आकर्षक बनाते थे. सचमुच बहुत सुन्दर लगती थी जब भी मधु अपनी भरी-पूरी काया पर कस कर साड़ी लपेटती थी. जब वो चलती थी तो उनके स्तन उनके हर कदम पर हिलते थे और साड़ी उनके कुलहो पर फिसल कर आवाज़ करती थी. पर सच तो सिर्फ मधु और उसकी करीबी कुछ सहेलियां जानती थी. एक लम्बी बीमारी और कई दवाइयों के सेवन से वो मोटी हो गयी थी, पर एक क्रॉस-ड्रेसर के रूप में ये मोटापा एक तरह का वरदान था. और फिर ऊपर से, अजंता नाम की एक ऐसी पत्नी थी मधु की, जो उनके हर कदम पर साथ भी देती थी, और न सिर्फ मधु को बलकि मधु की सहेलियों को भी ख़ुशी से अपनाती थी. मधु की तरह अजंता भी जवान लड़कियों को बिलकुल बेटी की तरह से प्यार से रखती थी. अजंता को कोई प्रॉब्लम नहीं थी इस बात से की मधु औरत के रूप में घर से बाहर जाए. और मधु की चाल और मदमस्त तन को देखकर किसी को शक भी नहीं होता था कि मधु औरत नहीं है. इंडियन लेडीज़ क्लब में किसी ने कभी मधु को आदमी के रूप में भी नहीं देखा था, वो तो हमेशा घर से ही मधु बनकर अपनी कार चलाकर आती थी. पर इन सब में एक औरत अपवाद थी.

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कुछ साल पहले, सुमति मधु के घर कुछ दिन रहने आई थी. वहां मधु ने सुमति को अपनी बेटी की तरह रहने दिया था.

कुछ साल पहले, सुमति को एक टेम्पररी जगह चाहिए थी रहने के लिए. यह तब की बात है जब सुमति इस घर में आई नहीं थी जो आज इंडियन लेडीज़ क्लब के नाम से जाना जाता है. उस वक़्त तक मधु और सुमति का रिश्ता माँ-बेटी के रिश्ते की तरह बन चूका था. और उस दिन जब सुमति मधु के घर रहने आई थी, तब मधु ने बिलकुल एक माँ बनकर अपनी बेटी का स्वागत किया था. और अगले दो दिन, सुमति उस घर में बेटी बनकर ख़ुशी से रही. मधु और उनकी पत्नी अजंता ने सुमति को खूब प्यार दिया था. सुमति भी अपने ‘मधुसुदन अंकल’ और ‘अजंता आंटी’ के साथ बहुत खुश रही थी. उस छोटे से समय में उसने अजंता आंटी के साथ किचन में बहुत कुछ बनाना सिख लिया था. अजंता सुमति से कहती थी कि यदि संभव होता तो वो सुमति को अपनी बहु ज़रूर बनाती! पर अजंता और मधुसुदन का कोई बेटा नहीं था. उनकी एक बेटी थी जिसकी शादी हो चुकी थी.

मधु की बेटी योगिता ने बचपन से ही अपने पिता को घर में कई बार साड़ी पहने देखा था. मधु और अजंता ने अपनी बेटी  योगिता से कभी कुछ छिपाया नहीं था. और योगिता भी मानती थी कि उसकी एक नहीं दो-दो माएँ है! आज भी जब वो अपने मायके आती है तो एक दिन ज़रूर अपनी मधु माँ के साथ बिताती है. उस एक दिन जहाँ एक माँ अजंता बेटी के लिए उसकी पसंद का खाना बनाने में व्यस्त रहती है, वही दूसरी माँ मधु योगिता को शौपिंग कराने बाहर ले जाती है. ये सब जानकर तो किसी को भी लगता था कि सब कुछ तो था मधु के पास. बस एक कमी थी.. एक अच्छी सेहत की. लम्बे समय से अपनी बीमारी से जूझती मधु अक्सर घर में बीमार पड़ी रहती थी.. और लोगो से तभी मिलती थी जब वो अच्छी हो. इसलिए किसी को पता नहीं था कि हंसती खेलती मधु जो सबको इतना खुश रखती है.. खुद कितनी परेशानियों के साथ जी रही होती है.

वो सुन्दर चूड़ियों की खनकती आवाज़…. इसलिए तो पहनती है हम इन्हें. परजब वो हमारी या हमारी सहेलियों की साड़ी में अटक जाती है तो हमें तकलीफ भी देती है. पर ऐसी तकलीफ तो हम औरतें रोज़ सहना चाहेंगी.

खैर इस वक़्त इस लेडीज़ क्लब की सभी लेडीज़ सज धज कर तैयार थी, उनके चेहरे पर मुस्कान थी, सभी अपने गहनों से लदी चमचमा रही थी और कुछ अपनी ऊँची हील पहन कर लड़खड़ा भी रही थी. भले ही सबको औरत बनना अच्छा लगता था यहाँ, पर हर किसी को अभी तक एक शालीन औरत की तरह चलना नहीं आता था. कुछ तो इसके बावजूद ४ इंच की हील पहन लेती थी भले उनसे १ इंच की सैंडल पहन कर भी चला न जाए. कुछ थी जिनसे अपना दुपट्टा या साड़ी का पल्लू संभाले नहीं संभालता था. बार बार पल्लू या दुपट्टा फिसलता और वो बार बार उसे ऊपर उठाकर ठीक करती… फिर भी पिन नहीं लगाती! और कुछ तो हज़ार पिन लगाने के बावजूद भी न संभाल पाती. ये छोटी छोटी बातें और मुश्किलें उनके औरत होने की अनुभूति को और बढ़ा देती थी. कुछ औरतों को लम्बे खुले बाल इतने पसंद थे कि भले वो आँखों के सामने आये और उन्हें कुछ अच्छे से दिखाई न दे… फिर भी बाल खुले ही रखेंगी! खनखनाती चूड़ियां और चमचमाते लहराते लम्बे कानो के झुमके कभी बालों में अटक जाते तो कभी साड़ी के पल्लू की एम्ब्राईडरी में! जितना सजो जितना पहनो उतनी मुसीबतें! यही तो इस क्लब में ख़ास था, आपके साथ आप ही की तरह और भी कई औरतें होती थी जो इन सब मुसीबतों को झेलते हुए भी आपको एक औरत बनने के सपने को पूरा करने में मदद करने को तैयार थी. इन छोटी छोटी मुश्किलों से कुछ सिख कर आगे बढ़ते हुए औरत बनने के इस रास्ते में सभी को मज़ा आता था. हर क्रॉस-ड्रेसर इस बात को समझती है.

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मधु अब आज का प्रोग्राम शुरू करने को तैयार थी.

मधुरिमा जी भी अब बस आज के मुख्य कार्यक्रम को शुरू करने के लिए तैयार थी. उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को अपने ही नटखट अंदाज़ में अपनी बड़ी सी कुलहो पर लपेटा और सामने ठूंस कर सबके सामने आ गयी. उन्हें पल्लू को कमर में लपेटना अच्छा लगता था. वो उस कमरे में ऊपर जाती सीढ़ियों पर चढ़ने लगी. उनके हर एक कदम पर उनकी नितम्ब एक परफेक्ट औरत की तरह लहराती. शायद वो जान बुझ कर ऐसा करती है पर चुस्त ब्लाउज और कस के लपेटी हुई साड़ी में उनकी चाल सबका ध्यान उनकी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहती थी. फिर ऊपर जाकर वो पलटी और ताली बजाकर एक बार फिर सबका ध्यान अपनी ओर खिंचा और बोली, “लेडीज़! अब आज के ख़ास पल का समय आ गया है जिसके लिए हम सब आज यहाँ है.” सभी का ध्यान अब मधु आंटी की ओर था.

“हां हाँ… डिन्नर के लिए ही न! पर डिनर के अलावा भी तो कुछ है आज और तुम सब तो जानती ही हो. अब जब तुम सब तैयार हो चुकी हो, अब तुम सब बस खाना खाना चाहती हो…”, सभी उनकी बात सुनकर हँसने लगी. “.. लेकिन आज हम सब यहाँ है हमारी नयी मेम्बर के स्वागत के लिए. मैं आप सभी का परिचय कराना चाहती हूँ अन्वेषा से!”, मधु ने आगे कहा. तालियों की गडगडाहट के साथ ही साथ खनकती चूड़ियों की मधुर आवाज़ अब हवा में भर गयी थी. और हर किसी की नज़र उस हैण्डसम जवान युवक की ओर थी जो शर्माता हुआ एक कोने में खड़ा था. जब इतनी औरतें एक साथ किसी की ओर देखे तो ज़ाहिर है उसे थोड़ी शर्म आएगी. बिना कुछ कहे उसने बस अपने हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन किया. उस कमरे में अकेला वो आदमी … उसे ज़रा भी अंदाजा नहीं था कि इतनी सारी औरतें मिलकर उसके साथ क्या क्या कर सकती है! मधुरिमा आखिर उस युवक को अपने साथ खिंच लायी.

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मधु उस युवक को अपने तरह से छेड़ने लगी.

“ओहो देखो तो कितनी शर्मीली है अन्वेषा!”, मधुरिमा ने उस युवक को अपने हाथों से खींचते हुए कहा. “तो हैण्डसम.. हाय तुझे अपने हाथो से छुए बगैर कैसे रहूंगी मैं?”, मधुरिमा ने अब उस युवक को छेड़ते हुए करीब खींचते हुए अपने सीने से लगा लिया. बेचारा शर्माता रह गया वो.

“लेडीज़, आज हम सभी का कर्त्तव्य है कि अन्वेषा आज की रात कभी न भूल सके! इसे भी हम औरतों के हाथ का जादू हमेशा याद रहना चाहिए.”, मधुरिमा बोलती रही और वो युवक शर्माता रहा. जिस तरह से मधु उस युवक को कमर से पकड़ कर गले लगा रही थी, उस युवक को उस वक़्त एहसास नहीं था कि मधु के अन्दर कितना वात्सल्य प्रेम भरा हुआ था.

पर अब मधु ज़रा सीरियस हो गयी और बोली, “अन्वेषा, यह मेरा वादा है कि आज की रात तुम्हारी सबसे सुनहरी यादों वाली रात होगी. क्योंकि आज इस शहर की बेस्ट औरतें अपनी कला से तुम्हे जवान लड़के से खुबसूरत राजकुमारी में तब्दील कर देंगे.. ऐसी राजकुमारी जिसको तुमने सपने में भी नहीं सोचा होगा. हम सब तुम्हारा इस क्लब में स्वागत करती है.”

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अन्वेषा को क्लब की औरतों ने ये खुबसूरत सिल्क की ब्रा और पेंटी का सेट गिफ्ट में दिया था. 

मधु ने फिर सुमति की ओर इशारा किया और सुमति तुरंत एक बैग लेकर मधु के पास आई. मधु ने वो बैग पकड़ा और अन्वेषा की ओर पलट कर बोली, “अन्वेषा ये इस क्लब की सभी औरतों की ओर से एक छोटा सा तोहफा है तुम्हारे लिए जिसे हम सबने मिलकर प्यार से लिया है तुम्हारे लिए.”

अन्वेषा ने उस बैग को हाथ में लिया और आखिर उसने कुछ शब्द कह ही दिए. “सभी को मेरा धन्यवाद. आज मैं थोड़ी नर्वस हूँ और इमोशनल भी. मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आज रात मैं एक लड़की बन जाऊंगी और वो भी आप जैसे खुबसूरत औरतों की मदद से..”, अन्वेषा की आवाज़ रुन्धने लगी भावुकता में.

“डार्लिंग, इतनी भावुक भी न हो! कम से कम अपना गिफ्ट तो देख लो खोल कर!”, मधु ने अन्वेषा के चेहरे को प्यार से छूते हुए कहा. अन्वेषा ने जब बैग खोला तो उसकी आँखें चमक उठी. उस बैग में बहुत ही सुन्दर सैटिन सिल्क की ब्रा और पेंटी का सेट था. इतनी सुन्दर तो उसने कभी नहीं देखी थी. यह सोचकर ही कि वो इतनी नाज़ुक सुन्दर ब्रा पेंटी पहनेगी.. उसका दिल भर आया. और तो और उस सेट के साथ एक विक्टोरिया सीक्रेट का एक सैटिन का रोब भी था उस बैग में!

“लेडीज़!! इसके पहले की अन्वेषा और भावुक हो.. चलो इसे “प्रिंसेस रूम” में ले चलते है. ईशा तुम तैयार हो?”, मधुरिमा ने ईशा से पूछा जो एक लॉक कमरे को पहरा दे रही थी. वो कमरा था “प्रिंसेस रूम”. ईशा ने सर हिला कर हाँ का इशारा किया.

“प्रिंसेस रूम? यह क्या है?”, अन्वेषा ने पूछा. मधुरिमा ने फिर मुस्कुरा कर कहा, “बस एक मिनट में तुम्हे पता चल जायेगा डार्लिंग!” और मधु ने अपने हाथो से अन्वेषा के गाल खिंच लिए.

मधु अन्वेषा का हाथ पकड़ उसे अपने साथ ले चली. और सभी औरतें उन दोनों के पीछे पीछे. ईशा ने जब दरवाज़ा खोला तो वो कमरा किसी भी क्रॉस-ड्रेसर के लिए मानो स्वर्ग सा था. अन्वेषा का तो मुंह खुला का खुला रह गया. उस रूम को बेहद ही प्यार से सजाया गया था… जहाँ ढेरो खुबसूरत साड़ियाँ, फैंसी एम्ब्राईडरी किये ब्लाउज, लम्बी सुन्दर अनारकली, चमचमाते पंजाबी सूट, सेक्सी वेस्टर्न सैटिन गाउन, एक से बढ़कर एक लहंगा चोली, चमकते हुए गहने और अनगिनत चप्पल और सैंडल सजे हुए थे.

प्रिंसेस रूम को सुन्दर साड़ियों, दमकते ब्लाउज, सेक्सी इवनिंग गाउन, चमचमाते गहनों और अनगिनत सैंडल के साथ सजाया गया था. और इन सब में एक ऑउटफिट चुन कर पहनना अन्वेषा क्या किसी भी लड़कीके लिए आसान नहीं होगा.

प्रिंसेस रूम की तैयार सुमति और अंजलि ने मिलकर की थी. सुमति जो पूरी रात दौड़ रही थी, वो इसलिए क्योंकि वो दूसरी मेम्बर्स से वो कपडे इकठ्ठा कर रही थी जो अन्वेषा के साइज़ के हो. सभी ने अपने बेस्ट कपडे इस पल के लिए लाये थे जिसमे से एक अन्वेषा आज पहन सकेगी. सुमति ने ये सब चुप-चाप किया था वहीँ अंजलि ने अपनी सजावट की कला का उपयोग करते हुए सभी कपड़ो को बहुत सुन्दर तरह से उस कमरे में सजाया था. प्रिंसेस रूम न सिर्फ अन्वेषा के लिए बल्कि सभी के लिए सरप्राइज था. जब भी कोई नया मेम्बर क्लब में आता, सभी सदस्य उस रूम को देखने के लिए उतावले रहते. पुरुष रूप में न सही पर एक बार औरत बनने के बाद इस क्लब की सभी औरतें बेझिझक यहाँ कपड़ो के डिजाईन की तारीफ़ कर सकती थी. फैब्रिक छू छूकर देखती कि कैसे है वो कपडे या उनका रंग कैसा है.

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अंजलि ने अन्वेषा से कहा, “मैंने कहा था तुम्हे घबराने की कोई बात नहीं है.”

अंजलि फिर आगे आई और अन्वेषा से बोली, “मैंने कहा था हैण्डसम… आज तुम्हारी रात है. अब घबराने की कोई बात नहीं है.” अन्वेषा शर्मा गयी और अपना सर झुका ली. “अब तुम्हे इन सभी कपड़ो में से एक ऑउटफिट पसंद करनी है जो तुम्हे अच्छी लगे. खुद को इमेजिन करो कि तुम सबसे खुबसूरत किस्मे लगोगी?”

“इनमें से सिर्फ एक का चुनाव तो बहुत कठिन होगा… सब एक एक से सुन्दर है”, अन्वेषा सोचने लगी. आखिर वो लम्बे लाल सेक्सी सैटिन गाउन को कैसे रिजेक्ट करेगी… उसे पहन कर तो उसे रेड कारपेट पे चल रही सेलेब्रिटी की तरह लगेगा… या फिर फिर इस चमकीली गुलाबी साड़ी से कैसे मुंह फेर लूं जिसको पहन कर मैं नयी नवेली पत्नी की तरह दिखूंगी. या मैं उस स्लिम-फिट वाली अनारकली को कैसे मना कर दू जिसका इतना घेरा है कि मेरे कॉलेज की सभी लड़कियों को मुझसे जलन हो जाएगी? एक ऑउटफिट पसंद करना सचमुच कठिन काम होगा.

अन्वेषा की दुविधा देख कर अंजलि बोली, “रिलैक्स अन्वेषा. जब तुम अपनी पसंद की ड्रेस देखोगी न तो तुम्हे बिलकुल भी नहीं सोचना पड़ेगा. मेरा यकीन मानो, हर लड़की का सबसे फेवरेट ऑउटफिट होता है. पर उसके पहले तुम्हारे पास अभी थोडा समय है. ईशा तुम्हे बाथरूम ले जाएगी जहाँ तुम पहले अपनी ब्रा और पेंटी पहनोगी. फिर उस बैग से सैटिन रोब पहनकर बाहर आओगी. आखिर एक दुल्हन या राजकुमारी का श्रृंगार ऐसे ही थोड़ी शुरू होता है!” अंजलि अन्वेषा का कन्धा पकड़कर मुस्कुराने लगी. अन्वेषा मन ही मन सोच रही थी कि बस कुछ देर पहले जब वो अंजलि से पहली बार मिली थी तब उसे लगा था कि अंजलि उसके साथ फ़्लर्ट कर रही है. पर अब उसे समझ आ गया था कि इस क्लब में औरतें ऐसे ही एक दुसरे को छेडती है. अन्वेषा फिर ईशा के संग बाथरूम चली गयी जहाँ वो सबसे सेक्सी ब्रा और पेंटी पहनने वाली थी. वो औरत बनने की ओर कदम बढ़ा रही थी. आज उसका सपना सच होने वाला था.

अन्वेषा के अन्दर जाने पर ईशा ने बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया था. और इस दौरान, बाकी औरतें प्रिंसेस रूम की सजावट देखने में मगन हो गयी. आखिर उन सभी की भी सुनहरी यादें जुडी हुई है इस कमरे से. अन्वेषा की ही तरह एक दिन वो भी राजकुमारी बनी थी इसी कमरे में. पर इस ख़ुशी के बीच उन औरतों के ये नहीं पता था कि आज ये उनकी इंडियन लेडीज़ क्लब में आखिरी पार्टी होने वाली है. क्योंकि उनके बीच एक औरत है जो उन सब की ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल देगी.
क्रमश: …

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< भाग २ भाग ४ >

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पहली बार

The story of love, revenge and realizing the power of femininity


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ख़ास धन्यवाद: हम धन्यवाद करना चाहते है Gitanjali Paruah जी का जिन्होंने छोटी मगर इतनी ज़बरदस्त कहानी लिख कर हमें दी. जितनी सुन्दर उन्होंने इस कहानी को इंग्लिश में लिखा है, हमने अपनी तरफ से प्रयास किया है कि हिंदी में भी उतनी ही प्रभावशाली कहानी लगे, पर कोई कमी रह गयी हो तो पाठको और गीतांजलि जी से क्षमा चाहते है.

Read in English

मेरी गर्लफ्रेंड थी वो. पर मैंने उसे उस दिन उसके बेस्ट फ्रेंड की बांहों में देखा.  उसका बेस्ट फ्रेंड एक आदमी था. मुझे इस बात से कोई समस्या भी नहीं थी. कम से कम उस दिन तक तो नहीं. वो दोनों किसी दो दोस्त की तरह हाथ पकडे हुए अवस्था में नहीं थे. उन दोनों के बीच उससे कुछ ज्यादा चल रहा था.

z6aमैं वहां उस लड़की को डेट पर ले जाने के लिए उस दिन उसके घर गया हुआ था. इसलिए मैं सीधा उसके कमरे की ओर बढ़ गया था. कमरे से कुछ आवाज़े आ रही थी. और मैंने उन दोनों को दरवाज़े के की-होल से देखा था. वो बेहद हॉट ड्रेस पहनी हुई थी और वो लड़का जॉगिंग करके वापस ही आया था. उसने जॉगिंग के शॉर्ट्स पहने हुए थे, और मेरी गर्लफ्रेंड ने ऊँची हील्स और सेक्सी टूब टॉप. कमरे के बाहर तक मुझे उसकी परफ्यूम की खुशबू आ रही थी.

देख कर लग रहा था कि दोनों किस कर रहे थे. पर उस छोटे से छेद से देखते हुए मैं निश्चित होकर नहीं कह सकता था. और वो मुझे बताना भी नहीं चाहती थी. डेट पर रेस्टोरेंट में मैंने उससे पूछा भी. पर उसने मुझे यह कह कर चुप करा दिया कि मैं कोरी कल्पना कर रहा हूँ. मैं इतना असुरक्षित क्यों महसूस करता हूँ इस रिश्ते में? उसने मुझसे पूछा. कोई ऐसी वैसी बात नहीं है, उसने मुझे दिलासा दिया. वो लड़का घर में कुछ सामान लेने आया था पर मेरी आँखों में कुछ गिर गया था, जिसे वो फूंक कर निकाल रहा था. कम से कम ऐसी कहानी मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे सुनाई.

ये बात पिछले हफ्ते की थी. और कल? कल उसने मुझसे अपना रिश्ता तोड़ लिया. उसने मुझे बताया भी कि वो ऐसा क्यों कर रही है. मैं एक आदमी के रूप में उसके लिया नाकाफी था. मैं बहुत ही भावुक और कद में छोटा था, उसने मुझे बताया. इन बातों को लेकर भी कभी कोई रिश्ता तोड़ता है? मैं उसी की आँखों के सामने रोने लगा. अब बंद भी करो रोना. ओह गॉड! तुम भी न पूरे सिस्स… , वो कहते कहते रुक गयी. वो मुझे सिस्सी (Sissy) या नामर्द कहने वाली थी. वो शायद गलत भी न थी.

हम दोनों में वो हमेशा मुझसे हर बात में आगे रहती थी. हील पहनकर वो मुझसे ऊँची भी लगती थी. मैं उससे हमेशा कहता था कि वो इतनी ऊँची हील न पहने, पर अपनी जिद पर अड़ कर हमेशा मुझसे ऊँची दिखना उसे पसंद था शायद. मुझ पर जैसे अपना रौब चला कर उसे कुछ अजीब सी ख़ुशी मिलती थी. उसके प्रभावशाली व्यक्तित्व से मैं हमेशा प्रभावित रहता था, पर मुझे नहीं पता था कि उसे ऐसा आदमी चाहिए था जो उसी की तरह का व्यक्तित्व वाला हो. और मैं वैसा कभी नहीं बन सकता था. Continue reading “पहली बार”

First Time

The story of love, revenge and realizing the power of femininity


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A special thanks: We would like to thank Gitanjali Paruah for such a powerful and mind-boggling story. The story and the language used is so perfect and powerful that we didn’t edit a single word in this story.

हिंदी में पढ़े

She was my girlfriend. Except that I saw her in the arms of her best friend. And her best friend was a male. I always had a problem with that. But I had never felt threatened. Not until now. It was not casual hand holding. It was nothing short of intimate.

z6aI was supposed to pick her up for a date. So I had gone to her room. I had heard noises. And I had peeked through the key hole. She was in a hot dress and he had just come back from a jog. She was in a tight sleeveless top and a tube mini bottom. He was in shorts and a cut unisex tee. She was in high heels. He was barefoot. He always jogged barefoot as I would learn later from him. I could smell her perfume through the keyhole. He was sweating after a jog.

It looked like they were kissing. But I could not make out. She wouldn’t tell me when I asked her after we had gone on the date. She shushed me saying it was nothing and I was imagining. Why was I so insecure, she asked. It was nothing, she said. He had come to pick up something and she had something fall into her eyes. And he had blown her eyes. Or so she said.

This had happened last week. Yesterday, she had dumped me. And she had told me why. I wasn’t man enough for her. I was too short and too soft for her, she said. My eyes welled up. Before I realized it, she had seen it. Are you about to cry? For God’s sake! I knew it, you ARE a sis…, she held herself back. I desperately bit back my tears for fear of looking unmanly, the irony was all but lost on me.  Continue reading “First Time”

Roommate: Part 4

Nishant and Chetna were in so much love. Then why were they apart? Read this heart warming story of a cross-dresser.


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Special thanks: This time we want to give a special thanks to Sanjana Singh who graciously agreed to contribute her beautiful pictures for this story. She runs a CD beauty parlour in Mumbai. If you are ever in Mumbai and want to transform into a beautiful woman, don’t forget to meet Sanjana.

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Story so far:  This is the story of me i.e. Nishant and my roommate Chetan. Many years ago, one day I accidentally found a few women’s clothes in Chetan’s room. When I asked Chetan, he told me that he is a crossdresser. It came as a shock to me. Next day, I casually asked Chetan to dress up as a woman for me. And when he came back, he had transformed himself into a beautiful woman named Chetna. We both were a little drunk, and ended up making physical love. I felt guilty after that as were not gay. But soon, in an attempt to save our years of friendship, I fell in love with Chetna. And when two hearts meet, your heart doesn’t think if the person you love has male genitals or female organs. Our love was growing day by day, and Chetna had become my girlfriend. She was taking care of our home like a perfect housewife.

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My heart was still aching from remembering Chetna today. My flight to California was going through a turbulence, and my heart was going through a similar turbulence as well. The turbulence brought me back to the present for a while. But I was feeling restless. Chetna was all over in my mind and heart. I could not get her out of my mind. To feel a little better, I did what I knew best. I took out a small bottle of wine and drank it all in one shot. Still Chetna’s beautiful smiling face kept appearing in front of my eyes, and I went back thinking about those beautiful days with her.

It had been a little more than a month since I fell in love with Chetna. We both used to wait eagerly to spend our time together. If you have experienced the first love, you know how beautiful the world becomes. And something like that was happening to us too. And one evening, I returned home happily from my office to see my Chetna.

“Chetna, Chetna, where are you dear?”, I called her as soon as I reached home. I knew by now Chetan must have transformed himself into my lovely girlfriend Chetna. “Chetna!”, I called once again in my excitement.

“Hold on, dear. What’s the rush, Nishu?”, Chetna came out of the kitchen wiping her hands with her saree pallu. She was probably doing something in the kitchen. My happiness increased the instant I saw her beautiful face. And in that happiness, I picked her up in my arms by holding her around her knees. Continue reading “Roommate: Part 4”

रूममेट: भाग ४

आखिर निशांत और चेतना के प्यार के बीच क्या आ गया था? क्यों उन्हें अलग होना पड़ा? पढ़िये दिल को छूने वाली एक क्रॉस-ड्रेसर की कहानी.


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ख़ास धन्यवाद:  इस बार हम धन्यवाद करना चाहते है संजना सिंह का, जिन्होंने अपनी खुबसूरत तसवीरें इस कहानी के लिए दी. संजना मुंबई में CD ब्यूटी पारलर भी चलाती है. यदि आप कभी मुंबई जाए और आपके भीतर एक सुन्दर औरत बनने की ख्वाहिश हो तो संजना से ज़रूर मिले.

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कहानी में अब तक:  ये कहानी मेरी यानी निशांत और मेरे रूममेट चेतन की है. कई साल पहले एक दिन अनजाने में मुझे चेतन के कमरे में लड़की के कुछ कपडे मिले थे. पूछने पर चेतन ने मुझे बताया कि वो एक क्रॉस-ड्रेसर है, ये बात मेरे लिए किसी शॉक से कम नहीं थी. उसके अगले दिन मैंने चेतन से यूँ ही कहा कि वो एक बार मुझे लड़की बन कर दिखाए. जब चेतन तैयार होकर आया तो वो एक बहुत ही आकर्षक लड़की बन चूका था. अब वो चेतन नहीं, चेतना थी. हम दोनों बियर के नशे में थे, और उस हालत में उस रात हम दोनों के बीच शारीरिक सम्बन्ध स्थापित हो गए. होश आने पर मुझे ग्लानी हुई कि आखिर मैं और चेतन ये कैसे कर सकते है? हम तो गे नहीं थे? पर पता नहीं कैसे धीरे धीरे हमारी दोस्ती बचाते हुए, समय के साथ साथ, चेतना और मुझे आपस में प्यार हो गया. आखिर जब दो दिल मिलते है तो दिल ये नहीं सोचता कि जिससे प्यार हुआ है उसका लिंग आदमी का है या औरत का. हम दोनों का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था, और चेतना मेरी गर्लफ्रेंड बन चुकी थी, जो हमारे घर को भी बखूबी सँभालने लगी थी, एक हाउसवाइफ की तरह. अब आगे-

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चेतना को याद करते हुए जैसे मेरा दिल झकझोर उठा था, उसी तरह जिस हवाईजहाज में मैं बैठा हुआ था, वो भी टर्बुलेंस में हिचकोले खा रहा था. उन्ही हिचकोलो के बीच मेरा ध्यान वर्तमान में थोड़ी देर के लिए आ गया. मन में अजीब सी बेचैनी थी. और उस बेचैनी को दूर करने के लिए मेरे पास एक छोटी सी वाइन की बोतल थी, उसे एक ही घूंट में मैं पी गया. पर चेतना की याद मेरे मन से जा ही नहीं रही थी. उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा मेरी आँखों के सामने अब भी आ रहा था. मैं फिर से पुरानी यादो में खो गया.

हम दोनों के बीच प्यार हुए शायद एक महीने से थोडा ज्यादा गुज़र चूका था. चेतना और मैं एक दुसरे के प्यार में एक दुसरे के साथ समय बीतने को हमेशा आतुर रहते थे. जब पहला पहला प्यार होता है न, तो पूरी दुनिया गुलाबी और सुन्दर लगने लगती है. हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. एक दिन मैं ऑफिस से बड़ी ख़ुशी के साथ वापस लौटा.

“चेतना, चेतना, कहाँ हो तुम?”, घर पहुचते ही मैंने चेतना को आवाज़ लगायी. मुझे यकीन था कि अब तक चेतन ने कपडे बदल लिए होंगे और घर में मेरी प्यारी गर्लफ्रेंड चेतना होगी. “चेतना!”, मैंने एक बार फिर आवाज़ लगायी.

“आ रही हूँ बाबा! ऐसी भी क्या जल्दी है निशु?”, चेतना अपने साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछते हुए किचन से निकली. शायद किचन में कुछ कर रही थी वह. उसके खुबसूरत चेहरे को देख कर मेरी ख़ुशी और बढ़ गयी. और मैंने ख़ुशी से चेतना को घुटनों से पकड़ कर अपनी बांहों में ऊपर उठा लिया. Continue reading “रूममेट: भाग ४”

रूममेट: भाग ३

आखिर दो दोस्तों के बीच प्यार हो ही गया. निशांत और चेतन, जो की अब खुब्सुरत औरत चेतना बन चूका था, उन दोनों में प्यार परवान चढ़ ही गया


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एक हफ्ते बाद

“निशांत, अब जागो भी. तुम्हे ऑफिस के लिए देर हो रही है”, चेतना, मेरे जीवन में नई नई आई हुई इस खुबसूरत सी लड़की ने मुझे सुबह सुबह जगाते हुए कहा. मैंने धीरे से अपनी आँखें खोल कर देखा तो चेतना का खुबसूरत चेहरा मेरे सामने था, जो झुक कर मुझे जगाने की कोशिश कर रही थी. कितनी दमक रही थी वो सुबह की सूरज की रौशनी में, और उसके लम्बे बाल मेरे चेहरे के पास तक लटक रहे थे. नाईटी में चेतना का खुबसूरत चेहरा देख कर मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ और मैं ख़ुशी से मुस्कुराने लगा. इससे अच्छा कोई तरीका हो सकता था भला दिन की शुरुआत करने का?

“हाय! कौन कमबख्त ऑफिस जाना चाहता है …”, मैंने उसे प्यार से अपनी बांहों में खिंच लिया ” … जब मैं इतनी खुबसूरत औरत के साथ यहाँ समय बिता सकता हूँ”. अब मुस्कुराने की उसकी बारी थी. उसने मेरी बांहों से बाहर आने को कोशिश भी नहीं की, बल्कि खुद मुझमे समा गयी. उसके नर्म मुलायम स्तन मेरे सीने से लगकर दबे जा रहे थे. आपको तो पता चल ही गया होगा कि पिछले एक हफ्ते में हम दोनों के बीच काफी कुछ बदल गया था.

“निशु, प्लीज़ मुझे जाने दो!”, चेतना ने प्यार से कहा. कुछ दिनों से उसने मुझे प्यार से निशु कहना शुरू कर दिया था. मुझे भी सुन कर बहुत अच्छा लगता था. आखिर हम दोनों को प्यार जो हो रहा था. “ऐसे कैसे जाने दू, जानू?”, मैंने भी मासूमियत से कहा. उसके पास जवाब नहीं था. उसने अपनी नज़रे झुका ली और मेरे सीने की ओर देख कर शर्म से मुस्कुराने लगी. मेरी बांहों में उसे भी अच्छा जो लग रहा था.

“निशु, मुझे तुमसे कुछ कहना है”, उसने कहा. वो मेरे गले में लगे लॉकेट से अपनी नाज़ुक उँगलियों से खेलते हुए बहुत प्यारी लग  रही थी. “क्या बात है चेतना?”, मैं पूछा.

“पता है हमें साथ में सोते हुए एक हफ्ते हो चुके है. मुझे तुमसे गले लग कर सोना सचमुच बहुत अच्छा लगता है. जब तुम मुझे प्यार से गले लगते हो, मुझे बहुत प्यार महसूस होता है. और हमारा साथ में बिताया हुआ समय चाहे हमारी रोज़ की शाम हो या सुबह, सब कुछ सुहावना लगता है. पर हमने वो चीज़ नहीं की जो उस रात…”, वो कहते कहते रुक गयी. “कौनसी चीज़ चेतना?”, मुझे पता था वो क्या कहना चाहती थी, पर मैं झूठ मुठ का नाटक कर रहा था. “तुम्हे पता है मैं क्या कह रही हूँ!”, उसने उत्साह में कहा. “नहीं तो?”, मैं यूँ ही उसे परेशान करता रहा.

Continue reading “रूममेट: भाग ३”