मैं परिणिता: अंतिम भाग


अब तक आपने मेरी कहानी में पढ़ा: यह कहानी है मेरी भावनाओं की, एक आदमी से औरत बनकर जो भी मैंने अपने बारे में समझा| मेरे दिल से निकली इस कहानी में प्यार है, सुकून है, सेक्स भी है, और औरत होना क्या होता उसकी सीख भी| जब से होश संभाला है, मैं जानती हूँ कि मेरे अंदर एक औरत बसी हुई है। पर दुनिया की नज़र में मैं हमेशा प्रतीक, एक लड़का बनकर रही। कुछ साल पहले जब मेरी शादी परिणीता से हुई, तो उसे भी मेरे अंदर की औरत कभी पसंद न आयी। हम दोनों पति-पत्नी US में डॉक्टर बन गए। पर मेरे अंदर की औरत हमेशा बाहर आने को तरसती रही। किसी तरह मैं अपने अरमानों को घर की चारदीवारियों के बीच सज संवर कर पूरा करती थी। पर आज से ३ साल पहले ऐसा कुछ हुआ जो हम दोनों को हमेशा के लिए बदल देने वाला था। उस सुबह जब हम सोकर उठे तो हम एक दूसरे में बदल चुके थे। मैं परिणीता के शरीर में एक औरत बन चुकी थी और परिणीता मेरे शरीर में एक आदमी। हमारे नए रूप में सुहागरात मनाने के बाद हमारा जीवन अच्छा ही चल रहा था, और एक औरत के बदन में मैं बेहद खुश थी| पर परिणीता, जो अब मेरी पति थे, वो तो पुरुष के तन में एक औरत ही थी| और उसी औरत की तलाश में अब मेरे पति क्रॉस ड्रेसर बन गए थे और उन्होंने अपने लिए नाम रखा था ‘अलका’! अब मेरी कहानी का अंतिम भाग –

६ महीने बाद

रात हो चुकी थी| हम पति-पत्नी खाना खा चुके थे और मैं बर्तन धोकर अब बस सोने के लिए तैयार थी| मैं जैसे ही अपने बेडरूम पहुंची उन्होंने मुझे कस के सीने से लगा लिया| मैं जानती थी कि वो क्या चाहते थे|

“नहीं, अल्का! प्लीज़ अभी नहीं”, मैंने कहा|

हाँ, पिछले ६ महीने में काफी कुछ बदल चूका था| अब मेरे पति जैसे ही घर लौटते, वह तुरंत स्त्री के कपडे पहनकर अल्का बन जाते| अब तो उन्होंने अपने बाल भी लम्बे कर लिए थे और तन को पूरी तरह से वैक्स करके उनकी त्वचा बेहद स्मूथ हो गयी थी| वो अब बेहद ही आकर्षक स्त्री बन चुके थे| और आज तो उन्होंने रात के लिए सैटिन की सेक्सी स्लिप पहन रखी थी| मैं जानती थी कि आज रात उनका इरादा क्या था| इसलिए तो उन्होंने एक बार फिर मुझे अपनी बांहों में जोर से पकड़ लिया|

मैंने धीरे से दर्द में आंह भरी और कहा, “कम से कम मुझे साड़ी तो बदल लेने दो|” मैं नखरे करने लगी| आखिर पत्नी जो ठहरी, एक बार यूँ ही थोड़ी मान जाती चाहे मेरा भी दिल मचल रहा हो|

“परिणीता, तुम तो जानती हो कि तुम मुझे साड़ी में कितनी सेक्सी लगती हो”, अलका ने कहा और मुझे जोरो का चुम्बन दिया| उफ्फ, उनके सेक्सी तन पर वो सैटिन नाईटी का स्पर्श और उनका चुम्बन मुझे उत्तेजित कर गया| अब तो अल्का मुझे प्रतीक नहीं परिणीता कहती थी, जो मुझे और भी सेक्सी लगता था| इन ६ महीनो में मैं तो लगभग भूल ही गयी थी कि मैं कभी प्रतीक एक आदमी हुआ करती थी|

अल्का ने मुझे दीवार से लगाकर पलटा और मेरी पीठ पर किस करने लगी और मेरे स्तनों को अपने दोनों हाथो से मसलने लगी| मैं आँखें बंद करके आंहे भरने लगी| आखिर क्यों न करती मैं ऐसा? मेरे ब्लाउज पर उनके हाथ जो कर रहे थे मुझे मदहोश कर रहे थे| मेरे ब्लाउज से झांकती नंगी पीठ पर उनकी सैटिन नाईटी/स्लिप  का स्पर्श और चुम्बन मुझे उकसा रहा था|

उनकी स्लिप उनकी कमर से थोड़ी ही नीचे तक आती थी| और उसके अन्दर पहनी हुई सुन्दर सैटिन की पैंटी में उनका तना हुआ पुरुष लिंग मेरे नितम्ब पर मेरी साड़ी पर से जोर लगा रहा था| अलका आकर्षक स्त्री होते हुए भी आखिर एक पुरुष थी| मैं अपनी साड़ी पर उनका लिंग महसूस करके मचल उठी| मैंने अपने हाथ से उनकी स्लिप को उठा कर उनकी पैंटी में उनके लिंग को पकड़ लिया| सैटिन में लिपटा हुआ वो  बड़ा तना हुआ लिंग बहुत ही सेक्सी महसूस हो रहा था|और उनकी नाज़ुक पैंटी उस मजबूत तने हुए लिंग को अन्दर अब रोक नहीं पा रही थी| फिर  मैंने भी अपने हाथो से उसे पैंटी से बाहर निकाल कर आजाद कर दिया|

“अल्का, तुम तो पूरी तरह तैयार लग रही हो|”, मैंने आंहे भरते हुए कहा| पर अल्का तो मदहोशी से मेरी गर्दन को चूम रही थी| उसने मेरी बात का जवाब एक बार फिर मेरे स्तनों को ज़ोर से दबा कर दिया| आह, उसके मेरे स्तन को दबाने से होने वाले दर्द में भी एक मिठास थी|

अल्का ने मुझे फिर ज़ोरों से जकड लिया, अब उसके स्तन मेरी पीठ पर दबने लगे| मैं तो बताना ही भूल गयी थी कि अल्का की औरत बनने की चाहत में उसने ३४ बी साइज़ के ब्रेस्ट इम्प्लांट ऑपरेशन द्वारा लगवा लिए थे| अब तो वह भी बेहद सुन्दर सुडौल स्तनों वाली औरत थी| मेरे लिए तो मानो एक सुन्दर सपना था यह| अल्का के स्तन और उसका पुरुष लिंग, मुझे एक साथ एक औरत और एक पुरुष से प्रेम करने का सौभाग्य मिलने लगा था|

कामोत्तेजना में अल्का ने अपनी पैंटी उतार दी और मुझे बिस्तर के किनारे ले जाकर झुका दी| और तुरंत ही मेरी साड़ी और पेटीकोट को उठाकर मेरी पैंटी उतारने लगी| कामोत्तेजित अल्का अब रुकने न वाली थी और मैं भी उतावली थी कि कब उसका लिंग मुझमे प्रवेश करेगा| अल्का ने मेरी पैंटी उतार कर अपनी उँगलियों से मेरी योनी को छुआ| उसके लम्बे नाख़ून और लाल रंग की नेल पोलिश में बेहद सेक्सी लग रहे थे| मुझे छेड़ते छेड़ते उसने अपनी ऊँगली मेरी योनी में डाल दी| मैं उत्तेजना में उन्माद से चीख उठी| “अब और न तरसाओ मुझे अल्का!”, मैं मदहोशी में उससे कहने लगी|

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जहाँ मैं साड़ी में खिल रही थी वहीँ अल्का अपनी सैटिन की स्लिप में गहरे रंग की लिपस्टिक के साथ बेहद सेक्सी लग रही थी| अल्का कोई और नहीं मेरे पति थे! और हम दोनों एक दुसरे के साथ रात बिताने को आतुर थे|

अल्का भी बिलकुल तैयार थी और देखते ही देखते उसका लिंग मेरी योनी को चुमते हुए मुझमे पूरा प्रवेश कर गया| मैं तो जैसे परम आनंद को महसूस कर रही थी| वो मेरी नितम्ब को अपने हाथो में पकड़ कर आगे पीछे करती तो मैं भी अपनी कमर को लहराते हुए और जोरो से आंहे भरती| और उसके हर स्ट्रोक के साथ हम दोनों के स्तन झूम उठते| मेरे स्तन तो अब भी ब्लाउज में कैद थे पर अल्का के स्तन उसकी सैटिन स्लिप में उछल रहे थे| अब अल्का खुद अपने एक हाथ से अपने ही स्तनों को मसलने लगी| और अपने ही होंठो को काटने लगी| गहरी लाल रंग की लिपस्टिक में उसके होंठ बेहद कामुक हो गए थे| वहीँ मैं अपनी साड़ी में लिपटी हुई इस पल का आँख बंद करके आनंद ले रही थी|

मैंने पलट कर देखा तो अल्का अब भी अपने स्तनों को मसल रही थी| उसे देख कर मेरा भी मन उसके स्तनों को चूमने को मचल उठा| मैं अब उठ कर अपनी साड़ी से अपने पैरो को ढककर अपने घुटनों पर खड़ी हो गयी और उसकी ओर चंचल नजरो से देखने लगी| शायद वो भी इंतजार कर रही थी कि कब मैं उसके स्तनों को चुमुंगी| फिर क्या था? मैं  उसके एक स्तन को अपने हाथो से पकड़ कर छूने लगी और उसे तरसाने लगी| उसके मुलायम सुडौल स्तन पर फिसलती हुई सैटिन स्लिप पर छूने का आनंद ही कुछ और था| उसने भी अपने दोनों हाथो से मेरे स्तनों को पकड़ लिया| मैंने उसका एक स्तन उसकी स्लिप से बाहर निकाला और फिर अपने होंठो से चूम ली| आनंद में अल्का ने अब अपनी आँखें बंद कर ली थी| मुझे एहसास था कि उसे बेहद मज़ा आ रहा है क्योंकि वो उस आनंद में मेरे स्तनों को और जोर से दबाने लगी| फिर अपनी जीभ से मैंने उसके निप्पल को थोडी देर चूमने के बाद, अपने दांतों से उसके निप्पल को काट दिया| अल्का अब दीवानी हो कर कहने लगी, “ज़रा और ज़ोर से कांटो”| फिर उसने मेरे सर को पूरी ताकत से अपने सीने से लगा लिया| मैंने अपने दुसरे हाथ से उसका लिंग पकड़ लिया| कहने की ज़रुरत नहीं है पर हम दोनों मदहोश हो रही थी| मैं तो सालो से एक स्त्री के साथ सेक्स करने में सहज थी और इस नए रूप में अब पुरुष तन का आनंद लेना भी सिख गयी थी मैं|और अल्का तो एक ही शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों ही थी|

उसी उन्माद में फिर हम दोनों एक दुसरे को चूमने लगी| अल्का ने मेरा सर अपने हाथो में पकड़ कर मुझे चूमना शुरू कर दिया था| उसकी सैटिन स्लिप का मखमली स्पर्श मुझे उतावला कर रहा था और वहीँ मेरी नाज़ुक काया पर लिपटी हुई साड़ी उसे दीवाना कर रही थी| और हम दोनों के स्तन एक दुसरे को दबाते हुए मानो खुद खुश हो रहे थे| अल्का ने मेरे सीने से मेरी साड़ी को उठा कर मेरे ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल लिया| वह जो भी कर रही थी वो मेरे अंग अंग में आग लगा रहा था| और उसका लिंग मेरे हाथो में मानो और कठोर होता जा रहा था|

अल्का ने एक बार फिर मेरी साड़ी को कमर तक उठा लिया| उसका इरादा स्पष्ट था| अब उसका लिंग मेरी योनी में सामने से प्रवेश करने वाला था| मैं भी बस उसी पल के इंतजार में थी| मैंने अपना पेतीकोट उठा कर उसके लिए रास्ता भी आसान कर दिया था| साड़ी की यही तो ख़ास बात है, बिना उतारे ही आप झट से प्यार कर सकते है| यह मैं भी जानती थी और अल्का भी| अल्का ने फिर धीरे से अपना लिंग मेरी योनी से लगाया| और  मैंने उस बड़े से लिंग को अपने अन्दर समा लिया| उसके अन्दर आते ही मैं और जोर जोर से आवाजें निकालने लगी| इस दौरान हम दोनों एक दुसरे के स्तन दबाकर उन्मादित थे| धीरे धीरे हमारी उत्तेजना बढती गयी, दोनों की आवाजें तेज़ होती गयी, हवा में अल्का के स्तन उसकी स्लिप से बाहर आकार झुमने लगे, और दोनों की आँखें बंद हो गयी| और उस उत्तेजना की परम सीमा पर पहुच कर हम दोनों ने एक दुसरे का हाथ कस कर पकड़ लिया| और फिर अल्का का एक आखिरी स्ट्रोक और हम दोनों एक ही पल में … बस मुझे कहने की ज़रुरत है क्या? यह वो रात थी जब मेरे तन में एक नए जीवन का प्रवेश हुआ| हाँ, उस रात के बाद अब मैं माँ बनने वाली थी!

पिछले ६ महीने

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अल्का और मैं, हम दोनों बहुत अच्छी सहेलियाँ बन गयी थी!

पिछले ६ महीने हम पति पत्नी के जीवन में नयी खुशियाँ और नई परीक्षा लेकर आया था| मेरे पति अब घर आकर तुरंत स्त्री के कपडे पहनते, मेकअप करते और अल्का बन जाते| मेरे पति अब क्रॉस ड्रेसर बन चुके थे और मैं इस स्थिति से खुश थी| मुझे एक सहेली मिल गयी थी| जब भी मौका मिलता हम दोनों सहेलियाँ बाहर शौपिंग करने या घुमने फिरने निकल पड़ती| दोनों को एक बार फिर जैसे नए सिरे से प्यार हो गया था| हम दोनों के कद काठी अलग अलग थी तो ड्रेस अलग अलग ही खरीदते पर साड़ियां अब साथ मिल कर लेते थे| पर ब्लाउज हमें अलग अलग सिलवाने पड़ते थे| जहाँ मैं अब एक औरत बन कर थोड़े पारंपरिक से ब्लाउज कट सिलवाने लगी थी, वहीँ वो ज्यादा सेक्सी ब्लाउज सिलवाने लगे थे| पुरुष तन को स्त्री के रूप में निखारने में वो कोई कमी नहीं रहने देना चाहते थे|

पर समय के साथ उनकी स्त्री बनने की इच्छा तीव्र होती जा रही थी| उन्होंने बाल भी बढ़ाना शुरू कर दिया था| पर मुझे शॉक उस दिन लगा जब उन्होंने घर लौट कर कहा कि अब वो ऑपरेशन करा कर पूरी तरह स्त्री बनना चाहते है| मैं तो एक पल के लिए अन्दर ही अन्दर टूट गयी थी क्योंकि चाहे जो भी हो, अब मैं एक स्त्री थी और मुझे सम्पूर्ण करने वाले पति यानी पुरुष का साथ चाहिए था| पर उन्होंने बेहद प्यार से मुझे गले लगाया और फिर मुझसे इस बारे में और बात की| फिर हमने मिलकर निर्णय लिया कि वह ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाएंगे पर पूरी तरह लिंग परिवर्तन नहीं कराएँगे| मैं नहीं चाहती थी की वो अपना पूरा पुरुषत्व ख़त्म कर दे| ऑपरेशन के बाद ३४ बी साइज़ के उनके स्तन इतने बड़े भी नहीं थे कि दिन में अपनी नौकरी में वो पुरुष रूप में जाए तो छुप न सके| पर इतने छोटे भी न थे उनका आनंद न लिया जा सके| मेरा जीवन अब बेहद सुखी था| और उनका भी| अब मुझे पूरी तरह औरत होने का अनुभव करने में बस एक ही कमी रह गयी थी, मैं माँ बनना चाहती थी| मुझे उन्हें मनाने में थोडा समय लगा पर एक दिन वो मान ही गए|

अगले ९ महीने

अपने शरीर में पलती हुई एक नयी जान को लेकर चलने के वो ९ महीने का अनुभव शायद मेरे जीवन का अब तक सबसे प्यारा अनुभव रहा| इस दौरान मुझे अल्का के रूप में मुझे समझने वाली सहेली मिली तो पति के रूप में सहारा बनने वाला पुरुष भी| पर धीरे धीरे उन्होंने अल्का बनना कम कर दिया था, क्योंकि वो जानते थे कि अब मुझे एक पुरुष का सहारा चाहिए था| आखिर वो प्यार भरे ९ महीनो में ,अपने अन्दर पलते हुए जीवन को अब बाहर लाने का वक़्त आ गया था| बड़े प्यार से ९ महीने पाला था उसे, पर अब मैं हॉस्पिटल में प्रसव पीड़ा में थी| उस दर्द में तड़पते हुए तो मानो एक पछतावा हो रहा था कि क्यों मैंने माँ बनने का निर्णय लिया| पर उस पीड़ा को तो सहना ही था|अब उससे पीछे नहीं पलट सकती थी|

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9 महीने अपनी कोख में एक जान को पालना मेरे जीवन का सबसे प्यारा अनुभव था

मेरी प्रसव पीड़ा पूरे १४ घंटे रही| पर उसके बाद जब डॉक्टर ने मेरे हाथो में एक नन्ही सी जान को सौंपा तो मेरी आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए| मैं एक बेटी की माँ बन गयी थी| माँ, सबसे प्यारा अनुभव| औरत होने के सारे सुख दुःख इस अनुभव के सामने फीके है! मैंने अपनी बेटी को प्यार से गले से लगा लिया| मैं भावुक होकर सारा दर्द भूल चुकी थी| इसके बाद मुझे नर्स ने सिखाया कि बच्चे को दूध कैसे पिलाना है| उस बच्ची ने जब मेरे स्तन से दूध पीया तो जैसे मेरे अन्दर से प्यार की अनंत प्रेम धारा बह  निकली| मैं आँखें बंद करके उस प्यार को महसूस करने लगी| जब यह सब हो रहा था तब मेरे पति मेरे साथ ही थे| वो बहुत खुश थे पर उनकी आँखों में मैं एक बात देख सकती थी| उनके अन्दर हमारा शरीर बदलने के पहले वाली पत्नी परिणीता थी, जो सोच रही थी कि वो भी कभी माँ बन सकती थी और यह सुख वो भी पा सकती थी| पर किस्मत ने उनको अब आदमी बना दिया था| मैंने उनके दिल की बात सुनकर उन्हें पास बुलाकर कहा, “सुनो, अपनी बेटी को नहीं देखोगे?” उन्होंने प्यार से बेटी को गले लगा लिया| फिर मैंने उनके कान में धीमे से कहा, “हमारी बेटी भाग्यशाली है कि उसके पास एक पिता और दो माँ है!” मेरी बातें सुनकर उनकी आँखे भी नम हो गयी| उन्होंने कहा, “हाँ! और हमारी भाग्यशाली बेटी का नाम होगा प्रतीक और परिणीता की दुलारी “प्रणिता”!”

कुछ दिनों बाद

अब हम पति पत्नी घर आ गए थे| प्रणिता को दूध पिलाकर मैं उसे अपनी बगल में सुलाकर सोने को तैयार थी| वो भी आज बड़े दिनों बाद अल्का बन कर मेरी बगल में सोने आ गए| उन्होंने एक मुलायम सा गाउन पहना हुआ था उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाकर गुड नाईट कहा और हमारा तीन सदस्यों का परिवार चैन की नींद सो गया|

अगली सुबह जब मैं उठी तो मेरे चेहरे पर खिड़की से सुनहरी धुप आ रही थी| लगता है मैं ज्यादा देर सो गयी थी| इतनी गहरी नींद लगी थी उस रात कि सुबह होने का अहसास ही न रहा| आज कुछ बदला बदला सा लग रहा था| अब तक मैंने अपनी आँखे नहीं खोली थी| पर मेरे स्तन आज हलके लग रहे थे जबकि उन्हें दूध से भरा होना चाहिए था| फिर भी अंगडाई लेती हुई जब मैंने आँखे खोली तो जो द्रिश्य था उसको देख कर आश्चर्य तो था पर ख़ुशी भी| मेरी आँखों के सामने मेरी पत्नी परिणीता बैठी हुई थी और उसकी गोद में हमारी बेटी प्रणिता सो रही थी| परिणीता ने ख़ुशी से मेरी ओर पलट कर देखा और चहकते हुए बोली, “हम फिर से अपने अपने रूप में आ गए प्रतीक! मैं फिर से परिणीता बन गयी हूँ और तुम मेरे पति प्रतीक!”

मैंने खुद को देखा तो मैंने वो गाउन पहना हुआ था जो कल रात मेरे पति पहन कर सोये थे| मैं फिर से आदमी बन गयी थी| मुझे एक पल को तो यकीन ही नहीं हुआ| इस नए बदलाव का मुझ पर क्या असर हुआ? क्या मुझे इस बात का दुख था कि अब मैं औरत नहीं थी? बिलकुल नहीं, मुझे बल्कि बेहद ख़ुशी थी| परिणीता की ख़ुशी देख कर स्त्रि का तन खोने का मुझे कोई दुख नहीं था| अब मैं फिर से एक क्रॉस ड्रेसर आदमी बनने को तैयार थी| पर अब मेरे पास वो कुछ था जो पहले न हुआ करता था| अब मेरे पास ऐसी पत्नी थी जो मेरे जीवन के क्रॉस ड्रेसिंग वाले इस पहलू को समझ सकती थी, एक ऐसी पत्नी जो मेरा सहयोग करने को तैयार थी| और तो और अब मेरे बाल लम्बे थे और मेरे पास स्तन भी थे! ज़रा सोच कर देखिये एक क्रॉस ड्रेसर को और क्या चाहिए इससे ज्यादा?

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अब तो सोच कर यकीन ही नहीं होता कि मैं कभी संपूर्ण औरत बन कर एक बच्ची को जन्म भी दी थी या कभी किसी पुरुष से शारीरिक प्यार भी किया था| सब कुछ सपने की तरह है!

परिशिष्ट

आज लगभग २ साल हो चुके है उस रात से जब मैं प्रतीक से परिणीता बन गयी थी| और अब कुछ महीने बीत चुके है मुझे फिर से प्रतीक बने| आज भी हम दोनों पति-पत्नी को यकीन नहीं होता कि हमारे साथ ऐसा भी हुआ था| सोच कर ही अजीब लगता है कि मैं एक पुरुष से प्रेम करने लगी थी! या एक स्त्री के तन में मैं कभी थी भी| मैंने एक बच्चे को माँ बनकर जन्म दिया था, एक सपने सा लगता है| पर ऐसा सब हमारे साथ क्यों हुआ था? इसका जवाब हमारे पास नहीं है|पर जो हुआ उसने हमारा जीवन हमेशा के लिए बदल दिया था| हम दोनों के बीच अब बहुत प्यार है| हम दोनों एक दुसरे की परेशानियों को और दिल को बेहद अच्छे तरह से समझ सकते है, जो समझ हम दोनों में पहले न थी|अब मैं जानती हूँ कि औरत के रूप में परिणीता कितनी मुश्किलों का सामना करती है, और अब वो समझती है कि एक पुरुष होकर औरत बनने की लालसा क्या होती है| इसी समझ की वजह से अब मैं जब मन चाहे स्त्री रूप में अल्का बन सकती हूँ| पर इन सबसे ज्यादा, अब हमारे जीवन को पूरा करने वाली बेटी प्रणिता है जिसकी दो मांए है!

यह मेरी कहानी का अंतिम भाग था| फिर भी पिछले २ सालो में और भी बहुत कुछ हुआ था जिसके बारे में मैंने लिखा नहीं है| जैसे जब मैं परिणीता के शरीर में थी तब मेरी माँ के साथ मेरा रिश्ता कैसे बदल गया? उनकी नजरो में अब मैं उनका बेटा प्रतीक नहीं बल्कि बहु परिणीता थी? या मेरे सास ससुर के साथ मेरा रिश्ता जो अब मुझे अपनी बेटी की तरह देखते थे? या मेरी बहन के साथ उसकी शादी के समय मेरा समय कैसा बीता जब मैं उसका भैया न होकर प्यारी भी थी?  इन सब के बारे में समय मिला तो ज़रूर लिखूंगी| उसके लिए आपका सब्र, प्यार और कमेन्ट भी चाहिए| आखिर आपको मेरी कहानी कैसी लगी थी ज़रूर बताना| चाहे तो ब्लॉग पर या फिर फेसबुक पर कमेंट करे| मैं इंतज़ार करूंगी आपके प्यार भरे सन्देश का!

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मैं परिणिता: भाग १४


अब तक आपने मेरी कहानी में पढ़ा: यह कहानी है मेरी भावनाओं की, एक आदमी से औरत बनकर जो भी मैंने अपने बारे में समझा| मेरे दिल से निकली इस कहानी में प्यार है, सुकून है, सेक्स भी है, और औरत होना क्या होता उसकी सीख भी| जब से होश संभाला है, मैं जानती हूँ कि मेरे अंदर एक औरत बसी हुई है। पर दुनिया की नज़र में मैं हमेशा प्रतीक, एक लड़का बनकर रही। कुछ साल पहले जब मेरी शादी परिणीता से हुई, तो उसे भी मेरे अंदर की औरत कभी पसंद न आयी। हम दोनों पति-पत्नी US में डॉक्टर बन गए। पर मेरे अंदर की औरत हमेशा बाहर आने को तरसती रही। किसी तरह मैं अपने अरमानों को घर की चारदीवारियों के बीच सज संवर कर पूरा करती थी। पर आज से ३ साल पहले ऐसा कुछ हुआ जो हम दोनों को हमेशा के लिए बदल देने वाला था। उस सुबह जब हम सोकर उठे तो हम एक दूसरे में बदल चुके थे। मैं परिणीता के शरीर में एक औरत बन चुकी थी और परिणीता मेरे शरीर में एक आदमी। हमारे नए रूप में सुहागरात मनाने के बाद हमारा जीवन अच्छा ही चल रहा था, और एक औरत के बदन में मैं बेहद खुश थी| पर परिणीता, जो अब मेरी पति थे? अब आगे –

“साड़ी के पल्ले को ऐसे अपने कंधे पर यूँ फैलाते है और बाकी की साड़ी से अपने पूरे तन को ऐसे फैलाकर ढँककर देखने से आपको बिना साड़ी को पहने ही बेहतर अंदाज़ा हो जाता है कि ये साड़ी पहनने के बाद आप पर कैसी लगेगी| अब बताओ मुझ पर कैसी लगेगी ये साड़ी?” मेरे पतिदेव बड़ी ही ख़ुशी से खुद पर साड़ी लगाकर प्रदर्शन कर रहे थे और मैं उनकी ख़ुशी देख कर हँस हँस कर पागल हो रही थी| अपने पति के तन पर साड़ी देख कर किसी भी औरत को अटपटा ज़रूर लगता पर मैं सामान्य औरत न थी| आज से तीन हफ्ते पहले तक मैं एक क्रॉस ड्रेस करने वाला आदमी थी और मेरे पति तब एक औरत होने के साथ साथ मेरी पत्नी परिणीता थे|

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मैंने ठान लिया था कि मैं अपने पति को साड़ी पहनने में सहयोग करूंगी| जिस स्थिति से मैं खुद गुज़र चुकी थी मैं नहीं चाहती थी की वो भी उस दुःख से गुज़रे|

हाँ जी, मेरे पति, परिणीता, को मैं साड़ी पहनने वाली थी!  ज़िन्दगी भी कैसे कैसे खेल खेलती है| “पत्नी ने पहनाई पति को साड़ी”, जब मैं क्रॉस-ड्रेसर थी, तब न जाने क्यों, कितनी ही बार मैं इन्टरनेट पर यह गूगल में खोजा करती थी| तब मेरी पत्नी परिणीता ने मुझे साड़ी पहनाना तो दूर, वह तो मुझे साड़ी में देखना तक नहीं चाहती थी| मैं सोचती थी कि दुनिया में क्या कोई भाग्यशाली क्रॉस-ड्रेसर है जिनकी पत्नियाँ उनको सहयोग करती है और अपने हाथो से साड़ी पहनाती है? तब मुझे क्या पता था कि एक दिन मैं खुद ही औरत बन जाऊंगी और मेरी तब की पत्नी परिणीता, मेरे पति बन जायेंगे| आदमी बनने के बाद भी परिणीता के अन्दर दिल तो औरत का ही था! और वो फिर से औरत की तरह से सजना संवरना चाहता था| पर उनके दिल में यह चिंता थी कि जब उन्होंने पहले मुझे हमेशा औरतों के कपडे  पहनने से मना किया था तो अब जब वह खुद आदमी बन चुके है तो कैसे वह अब औरतों के कपडे पहने? इसी बात से मेरे पति दुखी थे| अब एक औरत के रुप में मुझे वह करना था जो मैं पहले एक आदमी होते हुए अपनी पत्नी से उम्मीद करती थी| मुझे एक सहयोगी पत्नी बनना था! मैं नहीं चाहती थी कि मेरे पति उस दुःख से गुज़रे जो मैंने सहा था| मैंने ठान लिया था कि मैं उनकी पत्नी, उन्हें अपने हाथो से एक बेहद खुबसूरत औरत बनाऊँगी!

और इसीलिए मैं अपना पुराना क्रॉसड्रेसिंग का बक्सा लेकर उनके सामने बैठी थी| और वो, मेरी खरीदी हुई मखमली साड़ियों को खोल खोलकर अपने हाथो से छूकर अपने तन पर लगा कर देख रहे थे कि वो कौनसी साड़ी पहनेंगे| मैंने उन्हें अपनी ड्रेस्सेस भी दिखाई थी पर उन्हें कोई पसंद नहीं आई थी| उनके विचार में मेरी ड्रेस की चॉइस बड़ी ख़राब थी| पर ६ फूट की औरत के कद के लिए अच्छी ड्रेस मिलना आसान भी तो नहीं होता! पर फिर भी आज बड़े दिनों बाद उनकी आँखों में मैं ख़ुशी की चमक देख रही थी|

“प्रतीक, मानना पड़ेगा कि तुम्हारी साड़ियों की चॉइस बड़ी है|”, उन्होंने कहा| वो अब भी मुझे प्रतीक कहते है| आखिर में मैं प्रतीक ही हूँ भले अब एक औरत के शरीर में हूँ| मैं मुस्कुरा दी| उन्हें साड़ियों को खोलते हुए देख कर मुझे बेहद ख़ुशी मिल रही थी| वो एक एक साड़ी को खोल कर पल्ले को अपने कंधे पर लगाकर देखते, जैसे औरतें करती है| यह भी ज़िन्दगी का अजीब पल था, परिणीता जब औरत थे, तब उनका साड़ियों में कम और ड्रेस में ज्यादा इंटरेस्ट था पर अब इस नए जीवन में साड़ियों के लिए कितने उत्साहित लग रहे थे| वैसे सच कहूँ तो शायद उन्हें ज्यादा ख़ुशी इस बात की थी कि वह फिर से औरत होना महसूस करने वाले थे|

जहाँ मैं उन्हें खुश देखने में खोयी हुई थी, मेरा ध्यान ही न रहा कि मेरे पास उस बक्से में कुछ ऐसे कपडे भी थे जो मुझे सेक्सी औरत की तरह महसूस करने में मदद करते थे| मैं  नहीं चाहती थी कि उनकी नज़र उन पर पड़े| पर अब तो देर हो चुकी थी|उन्ही में से एक था मेरा ब्लाउज जो कि सच कहू तो बेहद सेक्सी था| उसमे पीठ काफी खुली रहती थी और पीछे से हुक लगती थी|उन्होंने उसे उठा कर कहा, “हम्म तो तुम्हे सेक्सी ब्लाउज पसंद है! इतना एक्स्पोस तो मैं औरत होकर भी नहीं करता था! और ब्लाउज की कटोरियों को देख कर तो लगता है कि तुम्हे बड़े बूब्स बहुत पसंद है|” वो मसखरी कर रहे थे|

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अपने पति को साड़ी पसंद करते देख मुझे बेहद ख़ुशी हो रही थी| अब वो मेरे जीवन का क्रॉस ड्रेसर वाला पहलु समझ सकते थे

“पतिदेव! जब मैंने वो ब्लाउज सिलवाई थी तब मैं एक ६ फूट की आदमी थी| और जब ६ फूट की औरत बनना हो तो स्वाभाविक दिखने के लिए बड़े बूब्स ही चाहिए|”, मैंने थोडा शरमाते हुए कहा| मुझे थोड़ी लाज तो आ ही रही थी क्योंकि मेरे क्रॉस ड्रेसर जीवन का पहलु मैं उनके साथ पहली बार इस तरह खुलकर शेयर कर रही थी| और यह सच था कि परिणीता से कहीं अधिक सेक्सी ब्लाउज थे मेरे पास|

“चलो पतिदेव, अब तुमने साड़ी पसंद कर ली हो तो मैं तुम्हे तैयार कर दूं|”, मैंने कहा| मैं भी अपनी पहनी हुई साड़ी की प्लेट ठीक करते हुए उठी और उनसे बोली की चलो अब कपडे उतारो|

“मुझे तैयार करना है? मैडम मैं तुम्हारे सामने कपडे नहीं उतारूंगा|”, उन्होंने कहा| “मेरे प्यारे पतिदेव, आपको याद न हो तो पिछले तीन हफ्तों में आपकी पत्नी बन कर रातों को मैंने आपको कई बार नग्न देखा है| तब तो आपको कोई परेशानी न थी|”, मैंने उनके चेहरे के बेहद करीब आकर कहा और उनके शर्ट के बटन खोलने लगी| भला वो उन हसीं रातों को कैसे भूल सकते थे जब मैंने पत्नी बन कर उनको सुख दिया था| मेरी सेक्सी मुस्कान से वो थोडा शर्मा गए|

“सुनिए मैडम, तुम भूल रही हो कि तुम्हे सिर्फ तीन हफ्ते हुए है औरत बने, जबकि मैं सालो तक औरत था| मुझे साड़ी पहनना आता है| मैं खुद पहन लूँगा| तुम्हे सिखाने की ज़रुरत नहीं है|”, उन्होंने कहा| मैं देख सकती थी कि उनमे अभी भी एक झिझक थी| एक सुन्दर औरत से आदमी बन जाना और फिर आदमी होते हुए पत्नी के सामने साड़ी पहनना उनके लिए आसान नहीं था| वो मुझसे और इस स्थिति से थोडा बौखला गए थे|

पर मैं भी एक प्यारी पत्नी थी| मैंने उन्हें अपने गले से लगा लिया और उनका सर अपने सीने पे रख दिया| मेरे स्तनों के बीच उन्हें ज़रूर प्यार महसूस हुआ होगा| फिर मैंने कहा, “मैं जानती हूँ कि तुम एक सुन्दर औरत थे| मैं जानती हूँ कि तुम खुद तैयार हो सकते हो| पर मैं भी जानती हूँ कि आदमी के शरीर को स्त्री रूप में सँवारने में क्या क्या दिक्कत आती है| मुझ पर भरोसा करो|”

मेरी बात मानते हुए उन्होंने अपने कपडे उतार लिए| जब तक वे साड़ियां खुद पर लगा लगा कर पसंद कर रहे थे, मैं उन्हें देख कर मुस्कुराती हुई उनके पहनने के लिए पॉकेट ब्रा और हिप पैड लेकर आई| आखिर में उन्होंने एक लाल रंग की मखमली साड़ी अपने कंधे पर लगायी और उससे अपने तन को ढंकते हुए मेरी ओर देख कर उत्साहित होकर बोले, “यह कैसी लगेगी मुझ पर?” उनका चेहरा खिल गया था|

उन्हें देख कर मेरी आँखें भर आई| वो आज मेरी उन भावनाओं को महसूस कर रहे थे जो मैं पहले क्रॉस ड्रेस करते वक़्त महसूस करती थी| वो साड़ी से अपने पूरे तन को ढकने की कोशिश कर रहे थे, पर एक चीज़ थी जो छुप न पा रही थी| मखमली साड़ी के स्पर्श से उनका पुरुष लिंग तन गया था और साड़ी में वह उभर कर दिख रहा था| वो थोडा शर्मा गए| अपने अनुभव से मैं जानती थी कि एक क्रॉस ड्रेस करने वाले पुरुष के लिए कई बार ऐसा होना स्वाभाविक है| मैंने उसे नज़रंदाज़ करते हुए उन्हें अपने हाथो से उन्हें हिप पैड वाली पैंटी पहनाई| पर एक औरत होते हुए तना हुआ लिंग ऐसे ही नज़रंदाज़ नहीं हो जाता| उस लिंग को पैंटी के अन्दर करते हुए मेरे तन में कुछ कुछ होने लगा| पर इस वक़्त मुझे मेरे पति, परिणीता, को औरत बनाना था| न कि उन्हें पुरुष होने का शारीरिक सुख देना था|

और फिर मैंने उन्हें बड़े प्यार से तैयार करना शुरू किया। मैं चाहती थी कि आज वो अपने पुरुष तन में वही नज़ाकत महसूस कर सके जो एक स्त्री महसूस करती है। इसलिए आज मैंने उन्हें साटिन की पेंटी और ब्रा पहनाई। और फिर मैचिंग पेटीकोट। और फिर धीरे धीरे प्यार से उनके तन पर साडी लपेट कर प्लेट बनाने लगी। मेरे नाज़ुक हाथों का स्पर्श शायद उन्हें स्त्री होने का सुख भी दे रहा था। और वैसे भी कोई भी औरत आपको बता सकती है कि कितनी प्यारी भावना है जब कोई और औरत आपको प्रेम से साड़ी पहना रही हो। मैंने उनके ब्लाउज पर साड़ी चढ़ाते हुए पूछा, “आप खुला पल्ला पसंद करेंगे या प्लेट किया हुआ?” उन्होंने मेरी आँखों में देखा पर कुछ न बोल सके। मैंने ही निश्चय किया कि वो खुला पल्ला पहनेंगे। खुला पल्ला जब प्यार से आपके हाथो पर स्पर्श करता है , वह जो स्त्रीत्व की भावना जगाता है वह एक पल में ही एक क्रॉस ड्रेसर को बेहद ही भावुक स्त्री बना सकता है। जब मैं पल्ले को उनके ब्लाउज पर पिन से लगा रही थी, उन्होंने अपने हाथों से मखमली पल्ले को छूते हुए अपनी आँखें बंद कर ली। मैं जानती थी कि वह क्या अनुभव कर रहे थे। आखिर मैं भी पहले एक क्रॉस ड्रेसर रह चुकी थी।

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हमने तय किया कि आज वो खुले पल्ला रखेंगे| स्त्रीत्व महसूस करना हो तो खुले पल्ले से बेहतर कुछ नहीं है| आखिर गिरते हुए पल्लू को सँभालने की नजाकत ही कुछ और होती है|

फिर मैंने उन्हें एक कुर्सी पर बैठाया ताकि मैं उनका मेकअप कर सकूँ। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा, “थैंक यू प्रतिक! पर मैं मेकअप खुद कर सकता हूँ। मुझे  मेकअप करना आता है।”

“पतिदेव, पहले तो कहिये कि मैं मेकअप कर सकती हूँ! अब आप एक औरत है!” मेरी बात सुनकर उन्होंने एक औरत की तरह शर्मा कर नज़रे झुका ली। “पर आज मैं आपको मेकअप करने नहीं दूँगी। पुरुष के चेहरे को स्त्री की तरह निखारना एक अलग कला है जो अभी आपको आती नहीं है।  पर मैं अच्छी तरह जानती हूँ। मेरा भरोसा करिये मैं आपको बेहद सुन्दर औरत बनाउंगी!”

हम दोनों मुस्कुराये| और जल्द ही मैंने उनका मेकअप भी कर दिया।  मेकअप के बाद वो उस साड़ी में बेहद ही आकर्षक औरत में तब्दील हो गए थे। आखिर क्यों न होते, मैंने वह साड़ी बहुत सोच समझकर खरीदी थी उस तन के लिए। और आज मुझे खुद पर बड़ा गर्व था कि मैंने बहुत सलीके से उन्हें साडी पहनाई थी और मेकअप भी बहुत अच्छा कर सकी थी।

मैं फिर उनकी कुर्सी के पीछे से आकर अपने हाथों को उनके गले पर रख कर कुर्सी को शीशे की ओर घुमाया। परिणीता अब खुद को देख सकते थे। उन्हें यकीन ही न हुआ कि उनका पुरुष तन इतनी सुन्दर औरत में तब्दील हो सकता था। एक हाथ से उन्होंने अपने ब्लाउज की ऊपर की साड़ी की बॉर्डर के ऊपर फेर कर देखा। और फिर अपने चेहरे को हाथ लगाने लगे। उनकी आँखों में आज ख़ुशी के आंसू थे।

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परिणीता अब एक औरत बन चुके थे और औरत बनने की ख़ुशी उनके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी|

“जानू, आज मैं एक भी आंसू और नहीं देखना चाहती।”, मैंने उन्हें प्यार से गले लगाते हुए कहा। वो भावुक होते हुए मुस्कुरा दिए। “थैंक यू प्रतिक। पर मेरे बालों का क्या होगा?”, उन्होंने अपने सर के छोटे छोटे बालों को हाथ लगाते हुए कहा।

मैं तो इसी पल के इंतज़ार में थी। सभी क्रॉस ड्रेसर जानते है कि जब तैयार होने के बाद अंत में आप लंबे बालो का विग लगाते है तो मानो एक पल में ही जादू हो जाता है। और मैं चाहती थी कि यह जादुई पल वह खुद अनुभव करे। और जैसे ही मैंने उन पर विग लगाया, वो ख़ुशी के मारे उठ खड़े हुए और अपने हाथों को हवा में फैलाकर अपनी साड़ी के पल्लू को लहराते हुए गोल गोल घूमने लगे। उनके शरीर में छुपी हुई मेरी पत्नी परिणीता वापस आ गयी थी। उनको ख़ुशी में झूमते देख मेरी आँखों में भी ख़ुशी थी।  और फिर हमने एक दुसरे को गले लगा लिया। उनके सीने से लग कर मैं भी बेहद खुश थी।

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आपका शरीर चाहे जैसा हो, साड़ी आपके तन की सभी कमियों को छुपा देती है, यह तो क्रॉस ड्रेसर बड़े अच्छे से जानते है| मेरे पति भी अब आकर्षक औरत लग रहे थे, बस उन्हें मेरी तरह खुला पल्लू सँभालने का अनुभव न था|

“सुनिये, क्योंकि आपका नाम परिणीता तो अब मेरा हो चूका है। क्या आपने अपने स्त्रीरूप के लिए कोई नया नाम सोचा है?”

“हाँ। वही नाम जिस नाम से तुम इस रूप में रहा करती थी। ‘अल्का’ ”

अल्का, यही नाम मैं उपयोग करती थी जब मैं प्रतिक से औरत बन जाया करती थी। अल्का का मतलब होता है खूबसूरत बालों वाली लड़की, और वही तो बनती थी मैं। और अब मेरे पति, मेरी सहेली अल्का बन चुके थे। आज हम दोनों के बीच एक नए रिश्ते की शुरुआत हो रही थी।  सच कहूँ तो हमारे तन एक दुसरे में बदलने का सबसे बड़ा फायदा यही हुआ था। भले औरत का तन पाने की मुझे बहुत ख़ुशी थी पर सबसे ज्यादा ख़ुशी इस बात की थी कि मुझे अब एक सहेली मिल गयी थी जिसके साथ मैं औरत होने का पूरा आनंद ले सकती थी! मैं परिणीता और मेरी प्यारी सहेली अलका! अगले भाग में हम दो सहेलियोँ की हॉट रात के बारे में पढना मत भूलियेगा, जब हम दो सहेलियाँ दो जिस्म एक जान हो गयी थी| अगला भाग मेरी इस कहानी का अंतिम भाग होगा,  तो पढ़ते रहिये और फेसबुक पर हमारे पेज को पसंद करना न भूलियेगा!

To be continued …

कहानी के सभी भागों के लिए यहाँ क्लिक करें।

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दूसरी औरत


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Note: This story has been contributed by one of our readers, Ankita Sharma. All credit goes to her for the story.

Read in English

“मेरी शादी हो चुकी है”, उसने लड़की से कहा| “अब मेरे जीवन में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है|”

“तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते| हम एक दुसरे के बगैर नहीं जी सकते|”, उसने अपनी आँखों के बहते आंसूओं के साथ कहा|

उसने लड़की की ओर देखा; अपनी खुबसूरत दोस्त को निहारता रह गया| उसकी यह दोस्त उसके जीवन के हर पल उसके साथ रही है जबसे उसे याद है| उसे भी नहीं पता था कि अपनी इस दोस्त से और क्या कहे और कैसे कहे? उसके लिए भी यह आसान नहीं था और यह दोनों के दिल को तोड़ देने वाली बात थी| पर यह करना बेहद ज़रूरी था| उसने हिम्मत की और कहा, “तुम तो जानती हो हमारे रिश्ते को दुनिया में कोई समझ नहीं सकेगा| हमारा रिश्ता बेहद ख़ास है| मैं तुम्हारे साथ बिताया हर पल जीवन भर याद रखूंगा, तुम्हे जब जब देखा, तुम्हारी एक एक मुस्कान, तुम्हारी नज़रें, तुम्हे बढ़ते और खिलते हुए देखना, मुझे कितना पसंद है, तुम तो जानती ही हो? हम दोनों के बीच कुछ गलत नहीं है| पर यही सच है| क्या तुम यह समझती नहीं हो? अब हम नहीं मिल सकते|”

उसके शब्द लड़की के दिल पर मानो पत्थर की तरह पड़े, और उसके दिल को इतना दुःख कभी न हुआ था| वो तो बस इतना चाहती थी कोई उसके अस्तित्व को बस स्वीकार कर ले, और अपने जीवन में सिर्फ कुछ पल ही सही, उसे मौका दे कि वो लड़की उस लड़के के साथ थोड़ी देर इस दुनिया को देख सके| वो ज्यादा कुछ नहीं चाहती थी| बस कभी वो लड़का उससे दो शब्द तारीफ़ के कह दे कि हाँ, वो बेहद खुबसूरत है और बेहद ख़ास लड़की है| इतने सालो के रिश्ते में इतना तो उसका अधिकार था| वह भी तो खुश जीवन की अधिकारी थी|

लड़की ने लड़के से कहा,” मैं दिल से चाहती हूँ तुम हमेशा खुश रहो| सच्ची! पर तुम्हे सच पता है|” वह थोड़ी देर रुकी और वो लड़का उसकी ओर देखता रहा| लड़की ने कहा, “तुम जिसे चाहे भुला सकते हो पर उसे कैसे भुला सकते हो जो तुम्हारे दिल में रहती हो और तुम्हारी आत्मा में भी तुम्हारी सहभागी हो?”

वो जानता था कि वह लड़की सही कह रही है| उन दोनों की आत्मा एक ही थी| पर यह करना बेहद ज़रूरी था| उसने लड़की को आखिरी बार शीशे में देखा, उसके चेहरे को एक आखिरी बार प्यार से हाथ लगाया| “अलविदा मेरे दोस्त”, यह बोल कर उसने अपने होंठो पर लगी लिपस्टिक पोंछ डाली|

Epilogue

वो लड़की आज भी अँधेरे में इंतज़ार करती है कि किसी दिन वह बाहर आकार यह दुनिया देख सकेगी और अपनी ज़िन्दगी जी सकेगी|

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The Other Woman


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She said to him, “I wish you a happy life. Really, I wish you that.”

Note: This story has been contributed by one of our readers, Ankita Sharma. All credit goes to her for the story.

हिंदी में पढ़े

“I am married now”, he told her. “There is no place for you in my life anymore”.

“You can’t do this to me. We can’t exist without each other”, she said with tears in her eyes.

He looked at her; he gazed at his beautiful friend who had been there with him every second of his life as far as he could remember. He did not know what to say or how to say. This was not easy for him as this would break them both. But this had to be done. He mustered all the courage he could and said, “You know that nobody in this world will understand our relationship. Our relationship is special. I am always going to cherish those moments whenever I saw you. Your every move, your every smile, your gaze; I always longed to see you and nourish you. There is nothing wrong with us, but that’s how it is. Don’t you know this?”

His words appeared so cold to her, and it hurt her badly. All she wanted was a mere acknowledgement of her existence in his life, and a few rare opportunities to see the world with him. She didn’t want much but a few words now and then telling her that she is a special girl. And that she is entitled to have a happy life too.

She said to him, “I wish you a happy life. Really, I wish you that. But you know the truth.” She paused for some time while he continued to look at her. She said, “You can forget anyone, but you can’t forget someone who resides in your heart and shares your soul with you.”

He knew that she was right. She shares his soul. But this had to be done. He looked at her in the mirror and touched the face in the mirror with his hands one last time. “Good bye, my dear friend.”, he said and wiped away the lipstick he was wearing.

Epilogue

She still lurks in the shadows waiting to come out.

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Indian Ladies Club: Part 4


Story so far: Sumati is the brains behind Indian Ladies Club where men from all walks of life gather together to become the woman of their dreams. Sumati is assisted by her very good lovely friend Anjali in setting up her apartment for the ILC meeting. Madhurima, the senior most member of the club joins them soon.

Tonight all the “ladies” at ILC have gathered here to welcome a new member Anvesha. As part of the welcome ceremony, the club members are going to transform Anvesha into a beautiful princess. Anvesha’s transformation is about to begin now. But these ladies have no idea how this new girl is going to change their life soon.

Read all the parts here

“Oh! I have so many crazy stories about going out dressed.”, Madhurima said to a group of women who had gathered around her. The ladies of the club were not chit-chatting among their own group of friends now while Anvesha was changing in the bathroom with the help of Isha. “But let me tell you about one evening when I took Sumati to the market to buy vegetables.”, Madhu continued. “No!!! mom. Please don’t tell that story.”, Sumati was laughing and pleading at the same time. “Sumati, you can’t order your mom like this”, said Madhu in a complaining tone and continued with her story, “You know, me being an ideal mom, I wanted Sumati not only to learn how to cook, but also learn how to bargain with vegetable vendors like a true woman.” Madhu’s facial expressions would make everyone laugh.

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Madhu was telling her outing story when she went out with Sumati dressed as women to buy vegetables from the local market. Sumati was so embarrased that day with what Madhu did to her.

“So, one day we both dressed up in regular homely sarees like any other women do when they go to shop for vegetables. The market is only 1 km from my home. So we decided to walk to the market. And in that entire way to the market, Sumati was so scared, that she wouldn’t even utter a word. I didn’t understand what was there to be scared of. She looked beautiful, and after all, she is my daughter.”, Madhu said with pride, but Sumati was genuinely scared that day as she didn’t want to be recognized as a man in a saree.

“And when we reached the market, we started finding and sorting the vegetables we wanted to purchase. Finally, when we had all that we wanted, I told Sumati about the trick on how to bargain with the seller. You know it’s my duty as a mom to pass the trick to my daughter.”, Madhu showed sincerity. “Mom! Please! I am not going to stay here anymore”, Sumati wanted Madhu to stop telling the story. But everyone else asked Madhu to continue.

“So, I asked Sumati to either pull down her pallu on the front so that her cleavage is little more visible, or pull it a little up so that her blouse covered breasts can be seen from one side. You know men can’t say no to a woman whose breasts are a even a tiny bit visible.”, Madhu said as if it was such an innocent advice. The ladies listening to this were getting mad laughing. Sumati seemed to get enraged and said, “You know what she did publicly in the market? She literally pulled my pallu to open up my cleavage in front of the whole crowd!”

“So, what? I then asked her if she is not willing to do anything, she should at least show her bra strap! But she didn’t do that either! Haiii, my own daughter doesn’t listen to me. We could have easily saved 50 rupees that day!”, Madhu put her hand over her chest as if she was truly disappointed with Sumati. Sumati was smiling now. She hugged her mom and said, “My mom wants me to be indecent in public so that she can save Rs. 50!!! See how much she loves her daughter?”

“So, what happened next?”, someone asked. “Oh! I cannot be an irresponsible woman, you know? So, just before I was about to make the payment, I said to Sumati out loud,’Oh dear! my bra strap is digging hard into my skin today’. And I pulled my bra strap out in front of the seller. Long story short, we saved Rs. 25 that day. You know? During my prime youth days, I could have easily saved Rs. 50.  But Sumati looked so red and embarrassed that day.”, said Madhu laughing out loud. All the girls were laughing. And it was always like that when Madhu is around.

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Anvesha came out wearing a satin robe, lush long hair, a light lipstick. She could already feel like a gentle princess, and she was about to pick her outfit that she would wear tonight.

The bathroom door opened. Isha came out first, and then she brought tonight’s princess Anvesha with her. Anvesha was now wearing the satin robe with the matching bra and panty set inside. Anvesha now had lush long hair, ready to be styled. Isha had applied a light layer of foundation and a light lipstick to her. The idea behind this was to make Anvesha already feel like a girl from inside when everyone else would do her transformation. Anvesha was looking down as she treaded light feather like steps as expected from a princess.

“Oh my Anvesha! Are you ready to pick your outfit for the night now?”, Isha asked her. Anvesha nodded like a shy bride. She was already getting into the feminine behavior.

 

 

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There is something alluring about the red bridal saree that Indian girls can’t resist. In fact, many members had chosen this saree on their princess evening. Sumati had worn this on the occasion of ILC opening.

Anvesha first started looking at all the bright colored sarees. For Indian girls, sarees have a special place in their heart. They all have the fond memories of seeing their mom and women in the family dressed in the royal attire. And for young girls who don’t yet know how to wrap the 6 yards of heavenly pleasure around their body, they die for opportunities like this when other women would wrap them in it. There was one particular saree, a red bridal one, that always caught the attention of new members of the club. There is something charming about the red bridal saree that indian girls can’t resist. This one was bought by Sumati which she wore for the opening of Indian Ladies Club several years ago. Since then, many girls had chosen this saree on their evening as princess. Anvesha looked at this saree with so much love for it. She had never worn a saree, at least not the way it is meant to be, as she didn’t know how to wrap herself in the 6 yards of heavenly pleasure. She was afraid that she might not be able to walk properly in a saree. Having never worn saree properly with a petticoat, she didn’t know that walking in a saree does not have to be difficult at all.

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Will you be able to pick which anarkali to wear from these two choices?

Anvesha moved past all the sarees and the satin evening gowns. She was already experiencing the sensation of satin around her body. The bra and panty she was wearing were made of satin, and were giving her so much pleasure. And the satin robe, she could feel the royal touch of it every second in every inch of her skin wherever it touched her. She thought she will try an anarkali instead. All the anarkalis, hanging in front of her eyes, were irresistible. For each anarkali was more beautiful than the other one. She started realizing that it is going to be a very difficult choice to make. She limited her choices to a pink glittering anarkali, and another one in orange with a beautiful red border. Both these were heavy and would come close to her ankles. The dupattas with the anarkali were even more beautiful. She imagined herself handling the delicate dupattas on her shoulders. Just imagining that would give her shivers. She imagined herself wearing those, and she realized she would look dazzling in each of those. Oh! What a difficult choice it is to pick one!, she wondered.

“A girl always knows her outfit”, Anvesha remembered what Anjali had said to her earlier. Where is my outfit? Anvesha wondered. And then, her eyes fell on the prettiest lehenga she had ever seen. Red in color, like a bridal one. It came with a lovely dupatta too. She instantly knew this was going to be her outfit for the night. A girl always knows her outfit. She smiled, and told Isha in a meek voice trying to imitate a girl, “I want this one.”

“Ok, girls! Let the transformation begin!”, Madhurima exclaimed. Soon, a group of ladies surrounded Anvesha. Two of these ladies held Anvesha’s hands and took her to the chair where she will seat while her transformation happens. Anvesha looked at the ladies around her, dressed meticulously in bright colors, glittering sarees and lehengas. She really felt like a princess. Her heart was full of joy and her happiness found no limits. She was now really smiling and experiencing what it means to be treated like a princess. The ladies at ILC weren’t lying. They knew how to give a special treatment. She felt like a delicate princess, and she felt safe in the hands of the beautiful ladies. Until a few minutes ago, they all were strangers to her and she was nervous. But the nervousness was gone. She walked delicately to her chair, and couldn’t stop smiling. She shyed when she saw women giggling and started looking down. Her hair came in front of her eyes which she delicately slid to the side with her hands. She never felt this feminine.

Anvesha’s magical transformation into princess had begun.

 Soon, Isha started the magical transformation using her makeup skills. Anvesha felt really relaxed. The feeling, that you get when someone else is doing your makeup, can be understood only be experiencing it. Anjali was incharge of styling Anvesha’s hair with the help of Trupti. Those two discussed the options for a while. They both looked at the lehenga, and thought about the best style that would go with it. Anvesha was not allowed to see herself. The ILC ladies wanted to give her a surprise after the complete transformation. A few girls from the club began applying nail polish on Anvesha’s fingernails and toenails. When you have wet nail polish on your nails and you can’t move until it dries, that’s when you really start understanding what it means to be a princess. Anvesha’s toenails were in a bad shape. So, the ladies decided to give her a pedicure before applying the nail polish. Soon it was suggested that they should wipe out the polish they just had applied on her nails, apply new fake transparent nails and then paint it. Anvesha tried to look at those nails but she couldn’t see it clearly as her make up was being done. She caught a glimpse of one nail. “God! Those nails are long. How will I do anything with such long nails?”, she wondered.

Sharmila aunty was standing in front of Anvesha along with Madhu, Sumati, and many other women. Sharmila suddenly began to laugh and said something in the ears of Madhu. Madhu then looked at Anvesha. Madhu placed her hand over her forehead as if thinking what should I do now. Other women began to laugh too looking at Anvesha. Anvesha was getting really embarrassed now. Then, Madhu took the courage and said, “Somebody please cover her robe! Come on, we are decent women out here.” Sumati was laughing out really loud and said, “And this advice is coming from a woman who wanted me to expose my breasts in a public market.” Apparently, Anvesha was not the only one who was excited. She had an erection, and her satin panties could no longer hold her excited partner inside. And it had come out of the robe as well. Cross-dressing, especially in the age group of 18-25 when the hormones are raging, is often accompanied with sexual excitement. It was not like Anvesha had an eye on one of the ladies around her. There was nothing that Anvesha could have done to prevent it. After all, satin has a sensuous effect and she was wearing the sexiest lingerie inside. Satin was kissing her body. And from what she could see, she had sexy long nails of a girl. But she was red-faced. The ladies soon got over what happened, and focused on what they were doing. But Anvesha was not. Thankfully, the embarrassment made the excitement to go down.

The final transformation

The makeup, hair and nails were all done. Now, it was time for the final transformation. Anvesha was picked up from the chair. Isha was all set to remove Anvesha’s robe. But Madhu interrupted, “Isha, make sure that her excitement is contained before you undress her. We don’t wanna see that thing again”. Everyone giggled like true ladies. Their bangles made the tinkling sound as they tried to stop giggling. What a pleasure it is to be with ladies, and be one of them! Anvesha smiled too. Isha now removed her robe. Anvesha was standing only wearing a satin bra and panty in front of everyone. No wonder she felt really shy. She covered her face with her hands.

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Anvesha could now feel the heavy weight of lehenga below her waist. She felt delicate like a woman.

Trupti came close to Anvesha. She peeped inside Anvesha’s bra and inserted soft warm breastforms in the bra cups. Anvesha still had her eyes closed. She could feel the weight of breastforms on her chest, and her bra trying to hold it in place. “Princess Anvesha, don’t try to touch them yet!”, Trupti said and giggled. The feminine feeling one gets wearing the heavy breastforms is always tempting. And for someone, who is wearing it for the first time, the femininity it invokes in them sees no bounds. Anvesha still had her face covered with her palms. She quickly wanted to wear something because she wasn’t sure when her excitement would show up again down there. Anjali and Trupti brought lehenga and slipped it over Anvesha’s legs. Finally, her lower body was covered. She could now experience the heavy weight of lehenga. Trupti quickly tightened the lehenga around Anvesha’s waist while Anjali delicately was correcting the folds in the heavy beautiful lehenga. Anjali really had good feminine sense. Anvesha could now feel the weight of whole lehenga around her waist. She didn’t realize it was going to feel this heavy. But that’s the beauty of a lehenga especially for crossdressers, the heavier it is and the more you seem to struggle with the lehenga’s weight, the more delicate and womanly you feel. And that’s what we want. To feel like a delicate flower. Each step one takes while pulling the hundreds of pleats and folds of the glittering beauty, it takes us one step closer to feel like a perfect woman. It slows one down, and gives you a chance to truly experience each moment of the womanhood.

Trupti tightly tied the knot on the back of Anvesha’s choli. The tightness around her chest made her feel as if the breastforms became part of her body. She desperately wanted to touch her soft breasts. Anjali and other ladies began to put jewelry on her.

Trupti then helped Anvesha wear her choli. Trupti tied the knots on the back of the choli really tight. The tightness of the choli made her breastforms become part of her own body. She really wanted to touch and feel the softness of her breastforms with her hands. At least, she was able to feel it on her chest. Now, she was almost the woman she always wanted to be. Full-bossomed, with soft breasts, long hair and beautiful nails. Her eyes and her expressions were getting more womanly with each step in her transformation. If this not magic, she could not imagine what else can be.

Anjali and other ladies picked out jewelry from a large collection that would match the lehenga choli. “How does it feel, Anvesha? Aren’t you excited to see yourself in the mirror? It will only take a few more minutes.”, said Anjali while putting on a very beautiful necklace around Anvesha’s neck. Anvesha blushed and didn’t say anything. “Look, how this princess is blushing!”, Madhu said. She was really admiring her. Isha and other women slid dozens of bangles in her hand. Some bangles seemed too tight to go through her hands. “Ouch!”, said Anvesha in a meek voice. Isha tried to tease Anvesha and said, “Look ladies! She has already become gentle like a princess. Will you be able to carry these many bangles Anvesha?”

The ladies then put on big hanging earrings on Anvesha’s ears. “Anvesha, these earrings are going to hurt you after sometime. I am sure you knew that being a woman was not going to be so easy.”, Anjali warned her. Anvesha nodded. The sweet pain is going to be so worth it. She thought to herself. As fun being dressed by other woman is, the ladies who adorn the lucky princess enjoy the whole transformation as much. There is a little girl in all the ladies at the Indian Ladies Club who always wanted to play with dolls and dress it when they were child but could not do so. This transformation gives them a chance to play the dressing doll game as an adult. And there is no doubt, they enjoy every aspect of each.

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Draping dupatta in a correct way is the most critical thing while wearing a lehenga choli. Only an expert like Sharmila can do that correctly.

Wearing lehenga and choli is not that difficult. The real skill is needed in draping the really long dupatta. You might have the best looking lehenga, but if you don’t wear dupatta correctly, you may still end up looking rookie in the prettiest lehenga. This is where Sharmila aunty moved in. She draped the dupatta and arranged pleats on Anvesha’s right shoulder very carefully with love. Sharmila exhibited real motherly love whenever she would help someone dress. Sharmila delicately arranged pleats over Anvesha’s 36C breasts, and wrapped the other end of her dupatta around her body and pinned it in the front. Step by step, from lehenga and breastforms to bangles, earrings and dupatta, Anvesha could feel the increasing weight on her body, and she loved it. She already had started experiencing the sweet pain of becoming a woman.

© Biyani Photography
Anjali sat down to put anklets on her foot like a caring elder sister who is dressing her younger sister as a bride.

Anjali then pulled out anklets from her big purse, and said, “Ok, pretty girl! Smile and get ready for the final piece of jewelry. Bring forward your foot.” Anjali sat down to put anklets on her foot like a caring elder sister who is dressing her younger sister as a bride. Anjali looked up into Anvesha’s eyes and smiled. Anvesha could not believe that she thought Anjali was trying to flirt with her earlier in the evening. She was beginning to understand the ladies at ILC. Madhu now came upto Anvesha and gave her a motherly hug. She performed the ritual to prevent any bad things from happening to her. Madhu then brought silver sandals with her and put it down in front of Anvesha’s feet. “Anvesha, now it’s your turn to take your first step as a woman. Come! Put on those sandals.”

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Anvesha took her first step as a woman to put on her sandles. She was looking royal in that outfit. She was trembling with excitement.

Anjali held Anvesha’s arms as she took the first step. She was trembling with excitement. The sandals had an inch of heel so Anjali was there to help her from tripping. Isha pulled up her lehenga to help Anvesha see her foot slide into the sandals. The round ghera around the lehenga can be really big for a girl to be able to see their own feet. Anvesha took the step. The anklets jingled. The bangles tinkled. The several layers of clothes inside her lehenga rustled. Her earrings dangled. And necklace glittered. And Anvesha blossomed. Each sound made by her clothes and her jewelry produced the sweetest melody she had ever heard. As she took the next step, and put on both the sandles. She looked up. And she sees the most beautiful girl in front of her eyes. She had imagined how beautiful this girl would be, but what she saw was beyond her imagination. The ladies at ILC had quietly brought a large mirror in front of Anvesha for her to see herself as soon as she looks up after wearing her sandals. The ladies at ILC knew how to give a special treatment. Looking herself in the mirror as the most beautiful woman in the world, her eyes got filled with tears of joy. She had now began her journey as a woman. Everyone at ILC clapped to welcome this new woman. While all this was happening, there was one lady, who was watching all the events quietly, standing alone in a corner of the room. She was the one who made all this possible for Anvesha, and many more girls who are now the members of the Indian Ladies Club. There was something going inside her mind. She just didn’t know how to express it.

Continued…

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मैं परिणिता: भाग ७


अब तक आपने मेरी कहानी में पढ़ा: मैं एक क्रोसड्रेसर हूँ जिसे भारतीय औरतों की तरह सजना अच्छा लगता है। मेरी शादी हो चुकी है और मेरी पत्नी परिणीता है। हम दोनों अमेरिका में डॉक्टर है। परिणीता को मेरा साड़ी पहनना या सजना संवारना बिलकुल पसंद नहीं था । पर आज से ३ साल पहले एक रात हम दोनों का जीवन बदल गया। सुबह उठने पर हम दोनों का बॉडी स्वैप हो चूका था मैं परिणीता के शरीर में थी और वो मेरे शरीर में थी।  मतलब मैं, प्रतीक, एक औरत बन चुकी थी और परिणीता एक पुरुष। उस सुबह इस हकीकत का सामना करते हुए हमने एक दुसरे का हाथ थाम कर घर से बाहर निकलने का निर्णय लिया।  और हम अब हमारे घर के लिए किराना खरीदने जा रहे थे।  अब आगे –

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जब भी हम पति-पत्नी कहीं बाहर साथ में बाहर जाते है तो हमेशा मैं ही कार चलाया करती थी। क्योंकि तब मैं रिश्ते में पति थी। आज बात कुछ उलट थी। अब मैं एक औरत थी, और परिणिता एक आदमी जो मेरा पति है। फिर भी मेरी आदत के अनुसार मैं कार चलाने ड्राइवर सीट पर बैठने गयी, और परिणीता पैसेंजर सीट पर। सीट पर बैठते ही मैंने अपना लेडीज़ बैग कंधे से उतार कर परिणिता को थमा दिया।

ac083परिणिता मुस्कुराई और मेरी जांघो की ओर इशारा करके बोली, “प्रतीक, तुम्हारी ड्रेस उठ गयी है। ठीक कर लो उसे।” मैंने अपनी ड्रेस की और देखा। सचमुच मेरी चिकनी मुलायम जाँघे साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं मन ही मन शर्मा गयी और दोनों हाथों से ड्रेस को नीचे की और खींचने लगी। परिणिता ने फिर मेरा हाथ पकड़ कर कहा, “सुनो पतिदेव। आज प्लीज ज़रा ड्रेस की ओर ध्यान रखना। कार के उतरने से पहले एक बार फिर चेक कर लेना की उठ न गयी हो। और बाहर अनजान लोगो के बीच उसे खींचने की कोशिश मत करना। वह काफी असभ्य लगता है।”

“हाँ, परी! मैं ध्यान रखूँगा। और वैसे भी तुम साथ हो तो मुझे किस बात की चिंता।”, मैंने कहा। पर चिंता तो थी। घर में बैठ कर सजना संवारना एक बात है और बाहर जाना एक बात। मैं कोई भी अपनी मर्दानी हरकत से किसी का ध्यान आकर्षण नहीं करना चाहती थी।

“मैं सिंसेरिली कह रही हूँ प्रतीक। तुम्हारी ही नहीं मेरी इज़्ज़त का भी सवाल है! जब हमारे शरीर वापस बदल जायेंगे तब मैं नहीं चाहती कि आज की किसी बात की वजह से मुझे शर्मिंदा होना पड़े।”

मेरा नया शरीर कद में पहले से काफी छोटा था। मुझे अपनी सीट एडजस्ट करनी पड़ी। फिर भी कार के शीशे के बाहर पहले मुझे जितना दीखता था, उससे कम ही दिख रहा था। भगवान का नाम लेकर मैं चल पड़ी। कुछ ही देर में हम पटेल स्टोर नाम की किराना दूकान के बाहर पार्किंग में थे।

कार से निकलने से पहले मैंने झट से अपनी ड्रेस को फिर से खिंच कर ठीक की। कार के शीशे को अपनी ओर पलट कर मैंने अपने बालों को देखा। अपनी उँगलियों से उन्हें सीधा किया और न जाने क्यों, अपने हाथों से बालो को पीछे कर उनका जुड़ा बना लिया। मैंने पलट कर परिणिता की ओर देख कर कहा, “अब सब ठीक है। चलो अब चलते है।” मैंने एक छोटी सी मुस्कराहट दी। परिणिता मेरी ओर हैरत से देखती रह गयी। वह कुछ कह पाती उसके पहले ही मैंने कहा, “क्या तुम्हे मेरे बाल ऐसे अच्छे नहीं लग रहे? ठीक है। मैं इन्हें खुले ही रखता हूँ।”

“प्रतीक, तुम्हे यह बालों को पीछे बाँधने का आइडिया कैसे आया? तुम बिलकुल किसी औरत की तरह ऐसे कैसे कर सकते हो? कहीं तुम पहले भी कहीं औरत बनकर घर से बाहर तो नहीं जाते थे?”, परिणिता ने मुझसे पूछा।

“नहीं, परी। ऐसा कुछ नहीं है। सच में! आज से पहले मैंने सिर्फ घर के एक कमरे में ही खुद को औरत के रूप में देखा था। मैं कभी औरत रूप में उस कमरे से बाहर नहीं निकल था। तुमने ही मुझसे थोड़ी देर पहले कहा था कि तुम्हारी इज़्ज़त का सवाल है। इसलिए मैंने खुद को शीशे में चेक किया कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं। और ऐसा करते तो मैंने तुम्हे कई बार देखा है।”, मैंने परिणीता का हाथ पकड़ कर कहा। मेरी बात में सच भी था और झूठ भी। हाँ, आज के पहले मैं कभी घर से बाहर औरत के रूप में नहीं निकली थी। पर यह दर्पण में खुद को देख कर बालों को सुधारना, इस बारे में तो मैंने कुछ सोचा भी न था। न जाने कैसे बिना सोचे समझे बस यह हो गया। बालों का जूड़ा कैसे बनता है, मुझे तो यह पता भी नहीं था फिर भी मैंने क्यों और कैसे यह किया मुझे भी समझ नहीं आ रहा था।

Beautiful woman paints her lips

परिणिता सोच में पड़ गयी। फिर कुछ देर सोच कर उसने पर्स से लिपस्टिक निकाल कर मुझे देते हुए कहा, “अच्छा। तुम अपनी लिपस्टिक रिफ्रेश कर लो। थोड़ी फीकी हो गयी है।”

मैं भी सोच में पड़ गयी क्योंकि मेरा लड़कियों वाला व्यव्हार परिणीता को कभी पसंद नहीं था। पर शायद आज वो कुछ और नहीं कर सकती थी। मैंने चुप चाप लिपस्टिक लगा ली। माहौल में थोड़ा तनाव हो रहा था। तो उसे दूर करने को मैंने उसे गालों पर किस किया और कहा, “मैडम, मुझे यकीन है कि ये सिर्फ आज की बात है। कल तक फिर हम अपने अपने शरीर में होंगे। और सच कहूँ तो यह ड्रेस, लिपस्टिक, ब्रा वगेरह मुझसे और ज्यादा समय नहीं हो पायेगा। मुझे ब्रा पहनने से ज्यादा, अपनी पत्नी की ब्रा उतारना पसंद है।” मेरी बात सुनकर वो मुस्कुरा दी।

To be continued … 

 

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