Caption: Mother-in-law

What could be a better way of bonding with your mother-in-law other than sharing her sarees!


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English हिंदी

English

“Thank you so much mother-in-law! I absolutely love this saree! It looks so great on me. Next time when you visit us, you should bring that green saree which you wore on my wedding day”

“I am so happy to hear that you love my sarees dear. I wish I had brought a few more for you with me. But I had never imagined that I would ever have a son-in-law who would enjoy wearing my sarees.”

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हिंदी

“ओह सासु माँ! ये साड़ी तो मुझ पर कितनी खिल रही है. आप अगली बार यहाँ आओ तो अपनी हरी साड़ी लेकर आना जो आपने मेरी शादी के दिन पहनी थी”

“मुझे बहुत ख़ुशी है कि तुम्हे मेरी साड़ियाँ पसंद आई. काश मैं कुछ साड़ियाँ और साथ लेकर आती तुम्हारे लिए. पर माफ़ करना बेटा. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरा दामाद मेरी साड़ी पहनकर इतना खुश होगा”

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January – March 2018 Edition

List of all the indian crossdressing related articles and stories we published in January 2018.


Updates
[21/02/2017] Several captions published under our Shortest Story Challenge.
[18/01/2017] A new caption Best friends/ दोस्त या सहेली? is now published.
[15/01/2017] Our english story Suhasini is nearing it’s conclusion. Parts 10 and 11 are now available.
[05/01/2017] इंडियन लेडीज़ क्लब कहानी के अंतिम भाग १४ एवं भाग १५ प्रकाशित.

EDITORIAL

Dear readers,
Another year has come, and we sincerely pray that you girls really get to experience the full femininity within you at least once this year. With those wishes in heart, we are really happy to inform you all that Indian Crossdressing Novel is completing it’s one year on January 15, 2018! We really thank you from our heart for your support and love in the past year. And we sincerely hope for your continued love and support this year too!

Editor

संपादकीय

प्रिय पाठिकाओं,

नया साल आ गया है और हमारी दिल से कामना है कि इस साल आप सभी को अपने अन्दर की स्त्री को पूरी तरह से खुली हवा में जीने का कम से कम एक मौका ज़रूर मिले. और साथ ही, हमें ख़ुशी है ये बताते हुए कि १५ जनवरी, २०१८ को इंडियन क्रॉसड्रेसिंग नावेल के १ साल पूरे हो रहे है! आशा है कि आने वाले साल में भी आपका प्यार और सहयोग हमें निरंतर रूप से मिलता रहेगा.

तो पढ़ते रहिये!

संपादिका

Continue reading “January – March 2018 Edition”

इंडियन लेडीज़ क्लब: भाग १२

सुमति और अंजलि की प्यार भरी कहानी. दो सहेलियां जो औरत बनने के बाद पहली बार मिल रही थी. क्या एक दुसरे के अनुभव से उनका ये नया जीवन कुछ सरल हो सकेगा?


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अंजलि की कहानी

सुमति अगली सुबह जल्दी ही उठ गयी. उसे सुबह ८ बजे अंजलि से मिलने जो जाना था. जब से सुमति औरत बन गयी है, अंजलि ही बस एक औरत थी इंडियन लेडीज़ क्लब की जिससे सुमति संपर्क कर सकी थी, और अंजलि भी अब एक औरत बन चुकी थी. न जाने कितनी ही बातें करनी थी दोनों को. तैयार होते वक़्त सुमति सोच रही थी कि अंजलि ने उसे पारंपरिक कपडे पहन कर क्यों आने कहा है. कोई और समय होता तो सुमति ख़ुशी से साड़ी पहन कर जाती. पर कल ऑफिस में बुरे अनुभव के बाद जब ऑफिस के आदमी उसकी कमर को बुरी नजरो से देख रहे थे, इस वजह से सुमति का आज साड़ी पहनने का मन नहीं था.

सुमति ने जब अपनी अलमारी देखी तो उसमे सभी सलवार सूट में डीप कट थे जिससे उसका क्लीवेज साफ़ झलकता. अब उसके पास साड़ी पहनने के अलावा कोई चारा नहीं था. साड़ी में वो वैसे भी बहुत शालीन प्रतीत होती है, ये वो अच्छी तरह जानती थी. उसने अपनी अलमारी से बेबी पिंक और सफ़ेद रंग की साड़ी निकाली और झटपट पहनने लगी. आखिर उसे देर जो हो रही थी. उसने साथ में एक मध्यम आस्तीन का ब्लाउज पहना. और फिर खुद को आईने में देखने लगी. सब कुछ ठीक ही तो दिख रहा था. साड़ी उस पर अच्छी लग रही थी. उसने पल्लू से अपने सर को ढंका और सोचने लगी कि वो पारंपरिक दिख रही है या नहीं. वो खुद को ऐसे देख मुस्कुराने लगी. चाहे जो भी हो, अंजलि से मिलने को लेकर वो बेहद उत्साहित थी. आखिर एक अंजलि ही तो थी इस दुनिया में जो उसकी प्रॉब्लम समझ सकती थी… आखिर वो भी सुमति की तरह रातोरात औरत बन गयी थी. उसने फ़ोन देखा और अंजलि का पता नोट किया. अंजलि का घर का पता अब बदल गया था. उसे थोडा सा अचम्भा हुआ क्योंकि सुमति तो अब भी उसी घर में थी जहाँ वो आदमी के रूप में पहले थी. सुमति ने फिर भगवन से प्रार्थना की कि अंजलि सकुशल हो.

सुमति ने फिर ऑटो किया और अंजलि के घर समय पर पहुच गयी. सुबह सुबह दुनिया अब सुमति को अच्छी लग रही थी. एक नयी शुरुआत जो थी. उसने ऑटो से उतर कर ऑटो वाले को पैसे दिए और फिर कमर के निचे अपनी साड़ी की प्लेट को एक हाथ से पकड़ कर अंजलि के घर की ओर बढ़ने लगी. साड़ी को हाथ से थोडा ऊपर उठाना ज़रूरी था क्योंकि सड़क पर पानी और कीचड़ था. वो अपनी साड़ी ख़राब नहीं करना चाहती थी. घर के बाहर से ही पता चल रहा था कि अंजलि का घर किसी सामान्य घर की तरह था जहाँ बच्चे रहते हो. सुबह की गहमा-गहमी उस घर में बाहर से ही पता चल रही थी. देखने में घर काफी पुराना लग रहा था.. ऐसे मानो जैसे उस घर ने भव्य दिन देखे है पुराने समय में पर अब उसे रिपेयर की सख्त ज़रुरत थी.

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सपना की प्यार भरी माँ उसके पीछे टिफ़िन लिए दौड़ी चली आई. अंजलि अब एक माँ बन चुकी थी.

“सपना, अपनी होमवर्क की कॉपी रख ली तुमने?”, सुमति ने एक चिंतित माँ की प्यार भरी आवाज़ सुनी जो अपनी छोटी सी बेटी के पीछे दौड़ी आ रही थी. “हाँ मम्मी. सब पैक कर चुकी हूँ”, उस प्यारी सी बेटी सपना ने कहा जो अपने छोटे नाज़ुक कंधो पर एक बड़ा सा बस्ता टाँगे हुई थी. “अपना लंच मत भूलना”, माँ ने कहा और सपना के पास आकर उसे उसका टिफ़िन दिया. वो माँ कोई और नहीं अंजलि थी. अंजलि अब एक ६ साल की बेटी की माँ थी! उसे देख कर अंजलि एक मध्यम उम्र की हाउसवाइफ लग रही थी. अंजलि के बिखरे हुए बालो से साफ़ पता चल रहा था कि उसकी सुबह बहुत व्यस्त रही होगी अपने परिवार का ध्यान रखने में. सुमति यह सब मुस्कुराते हुए देख रही थी. न जाने क्यों पर कई क्रॉसड्रेसर का एक हाउसवाइफ बनने का सपना होता है, और अंजलि अब वो सपना जी रही थी. पर हाउसवाइफ की ज़िन्दगी इतनी आसान भी तो नहीं होती है.

“हेल्लो सुमति आंटी”, सपना ने कहा जब उसका ध्यान घर के गेट पर खड़ी सुमति पर गया. सपना अपने स्कूल यूनिफार्म में बड़ी प्यारी लग रही थी. उसकी आवाज़ सुन कर तो सुमति के कानो में जैसे शहद घुल गया. सुमति ने झुककर प्यारी सपना को एक आंटी की तरह गले लगाया. “कैसे है मेरी प्यारी सपना?”, सुमति ने अपनी पर्स से एक चॉकलेट निकाल कर देते हुए कहा. “थैंक यु आंटी”, सपना ने ख़ुशी से कहा.

“सपना चलो अब जाने का समय हो गया है. नहीं तो बस छुट जायेगी.”, चिंतित माँ अंजलि ने कहा. साथ ही साथ अंजलि के चेहरे पर ख़ुशी का भाव भी था जब उसने सपना को सुमति आंटी को गले लगाते देखा. सुमति तो पहले भी अंजलि के यहाँ आती थी. पर तब एक आदमी के रूप में. सुमति को पता था कि अंजलि की बेटी थी, इसलिए वो हमेशा चॉकलेट लेकर ही आती थी. पर तब अंजलि एक पिता थी, माँ नहीं जिसे अब सुमति देख रही थी. और सुमति भी अंकल हुआ करती थी आंटी नहीं. पर अब दुनिया बदल चुकी थी, अच्छे या बुरे के लिए यह तो भगवान ही जाने. सपना घर से निकलकर अपनी उम्र की और लड़कियों के साथ बस स्टॉप की ओर चल दी जहाँ उसकी स्कूल बस आती थी. सुमति और अंजलि दोनों ने प्यारी सपना को विदा किया.

अंजलि सुमति को देख कर सचमुच बहुत खुश थी. आखिर उसके सबसे पक्की सहेली थी वो. उसने सुमति को गले लगाया और बोली, “वाह सुमति तुम तो और खुबसूरत हो गयी हो! तुम्हे देख कर बहुत अच्छा लगा सुमति.” इस छोटे से समय में जबसे वो औरतें बन गई थी, दोनों ये सिख चुकी थी कि औरतें एक दुसरे को गले कैसे लगाती है… बिना एक दुसरे के स्तनों को दबाये! शुरू शुरू में थोडा अजीब सा लगता है जब कोई दूसरी औरत आपकी पीठ पर गले लगाते वक़्त अपना हाथ रखती है. पर दोनों तो अपने इंडियन लेडीज़ क्लब के दिनों से इसकी आदि थी.

“तुझे पता नहीं है मैं कितनी खुश हूँ तुझे देख कर अंजलि”, सुमति ने अंजलि से अलग होते हुआ कहा. वो अब भी अपनी सहेली का हाथ पकडे हुए थी. और दोनों एक दुसरे को एक टक देखने लगी.

“बहु हम मन्दिर जाने को तैयार है. हम लोग दोपहर तक वापस आयेंगे. तब तक खाना तैयार रखना.”, अन्दर से एक बुज़ुर्ग औरत की आवाज़ आई. “मेरी सास होगी वो. वो आज मंदिर जा रही है ससुर जी के साथ प्रवचन सुनने के लिए.”, अंजलि ने कहा.

और फिर एक बुज़ुर्ग दंपत्ति घर से बाहर आये… अंजलि के सास ससुर. सुमति उनसे पहले कभी नहीं मिली थी. क्योंकि अंजलि पहले एक आदमी थी और उसके साथ उसके माता-पिता रहते थे. पर अब अंजलि अपने सास-ससुर के साथ रहने वाली औरत थी. उन्हें देखते ही सुमति ने सर पर पल्लू ओढा और उनके पैर छुए. “जूग जुग जियो बेटी”, ससुर ने कहा. “तुम्हारी शादी की तैयारी ठीक तो चल रही है न?”, उन्होंने पूछा. “जी अंकल. अब तो २ दिन में मैं घर भी जा रही हूँ तयारी के लिए.”, सुमति ने जवाब दिया. “हम भी तुम्हारी शादी में ज़रूर आयेंगे बेटी. अभी तो हमें मंदिर जाने के लिए देर हो रही है. फिर मिलते है.”, अंजलि के ससुर ने मुस्कुरा कर कहा और दोनों घर से बाहर चल दिए.

सुमति को थोडा आश्चर्य हुआ कि अंजलि की सास ने उससे एक शब्द तक नहीं कहा. पर उसे उसकी परवाह नहीं थी. “चल, मुझे अपना घर तो दिखाओ मिसेज़ अंजलि!”, सुमति ने अंजलि को छेड़ते हुए कहा. “हां हाँ क्यों नहीं. पर एक बात बता तुझे एहसास हुआ कि नहीं कि मेरी सास तुझे पसंद नहीं करती है?”, अंजलि बोली. सुमति ने अपने सर से पल्लू को फेंकते हुए और अब केयर-फ्री होकर बोली, “हाँ लगा तो सही. पर ऐसा क्यों है? वो मुझे पसंद क्यों नहीं करती है?”

“तो ऐसा है कि हमारी नयी ज़िन्दगी में तुम यहाँ पहले भी एक औरत की तरह आ चुकी हो. पर पहले तुम यहाँ जीन्स टॉप पहन कर आई थी. और मेरी सास ठहरी पुराने ख़यालात की. उन्हें बिलकुल पसंद नहीं आया. उन्हें लगता है कि तुम सपना पर बुरा असर डालोगी.”, अंजलि बोली. “ओह तभी तूने मुझे पारंपरिक कपडे पहन कर बुलाई थी. वैसे तूने ये क्या तुम तुम लगा रखा है. तू बोल! खैर अब सास को छोड़… अपनी लाइफ की सब मसाला स्टोरी सुना मुझे”, सुमति में अब एक नयी जान थी.

सुमति घर के अन्दर जाते ही सोफे पर कूद कर बैठ गयी. वो बड़ी खुश थी अब. क्योंकि पहले उन्हें औरतों के रूप में छिप छिप कर मिलना पड़ता था. पहले वो एक दुसरे के साथ देवरानी जेठानी होने का नाटक किया करती थी. पर अब असल में औरतें थी वो, तो अब छुपने की ज़रुरत नहीं थी.

“ठीक है ठीक है. जल्दी ही होने वाली मिसेज़ सुमति. मैं सब बताती हूँ. पर ज़रा मुझे घर के काम भी करने है मेरे सास-ससुर के आने के पहले. तो तू मुझे काम करते देख और मैं तुझे कहानी सुनाती हूँ. तू चाहे तो मेरी मदद कर देना.”, अंजलि ने भी मुस्कुराते हुए कहा.

“ना ! मैं तेरी इन कामो में कोई मदद नहीं करूंगी. मैं ऑफिस जाने वाली औरत हूँ… हाउसवाइफ नहीं!”, सुमति ने मज़ाक करते हुआ कहा. पर वो अंजलि की मदद करेगी, यह तो अंजलि भी जानती थी.

“तो ठीक है पहले बेडरूम से शुरू करते है”, अंजलि बोली. “वाह! बेडरूम की कहानियाँ तो मेरी फेवरेट है! अपनी हॉट रातों के बारे में डिटेल से बता मुझे!”, सुमति हँसते हुए बोली. “चुप कर पगली. मेरे कहने का मतलब है कि पहले बेडरूम की सफाई करते है.”, अंजलि ने घूरते हुए सुमति से कहा.

अंजलि का घर सचमुच बेहद पुराना था और उसमे ढेरो पुराना फर्नीचर था. कोई भी देख कर कह सकता था कि इस परिवार की आर्थिक स्थिति अब सही नहीं थी. और इतने बड़े घर की देखभाल करने वाली बस अंजलि अकेली थी. पर फिर भी अंजलि एक प्यारी हाउसवाइफ लग रही थी. सुमति ने उसे थोड़ी देर ही अपनी बेटी और सास-ससुर के साथ देखा था, पर वो समझ गयी थी कि अंजलि अब एक आदर्श बहु है. उसके चेहरे पर मोहक मुस्कान थी. अंजलि ने एक पुरानी सैटिन की साड़ी पहनी हुई थी. शायद वो घर के काम करते वक़्त ऐसी साड़ी पहनती हो, सुमति ने सोचा. इसके पहले तो सुमति ने अंजलि को सिर्फ फैंसी साड़ियों में ही देखा था.

अंजलि ने फिर झाड़ू निकाली और एक हाथ से अपने को उठाकर अपने कंधे पर ले लिया. और पल्लू के दुसरे छोर को अपनी कमर में फंसा कर काम शुरू कर दी. अंजलि के सैटिन ब्लाउज में उसके मुलायम स्तन अब साड़ी के बाहर दिख रहे थे. आम तौर पर औरतें काम करते वक़्त साड़ी को यूँ ही करती है ताकि वो काम करते वक़्त उनके बीच न आये. अंजलि बिना मेकअप और गहनों के बिलकुल घरेलु गृहिणी लग रही थी. और साथ ही एक आकर्षक महिला भी. उसके रूप में इतनी सादगी के बात भी आकर्षण था. अंजलि फिर कमरे में झाड़ू लगाने लगी. पर अंजलि को इस तरह काम करते देख सुमति को थोडा दुख हो रहा था. क्योंकि एक आदमी के रूप में, अंजलि की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी थी. और अब? सुमति अंजलि से घर की आर्थिक स्थिति के बारे में बात करना नहीं चाहती थी क्योंकि अपनी सहेली से अभी तो मिली थी वो. “अच्छा मिसेज़ अंजलि. ये तो बताओ कि माँ बनकर कैसा लग रहा है? मैं देख रही थी कि सपना कितना ज्यादा प्यार करती है तुझे.”, सुमति ने ये सवाल जान बुझकर किया था क्योंकि वो जानती थी कि इस सवाल से अंजलि बहुत खुश होगी. कोई भी माँ अपने बच्चो के बारे में बातें करके खुश होती है, और अंजलि तो अभी अभी माँ बनी थी.

अंजलि ने झाड़ू निकाल कर बेडरूम की सफाई शुरू कर दी. उसने साड़ी को इस तरह पहनी थी कि वो एक मिडिल ऐज हाउसवाइफ लग रही थी.

“सुमति तुझे पता नहीं है कि माँ बनना कितना सुखद होता है! क्रॉसड्रेसिंग से बहुत बढ़कर है माँ बनना. मैं तो चाहती हूँ कि तू भी एक दिन माँ बने! पता है तुझे कि सपना तो हमेशा से ही प्यारी बेटी थी. पर जब से मैं उसकी माँ बनी हूँ, हम दोनों के बीच का रिश्ता पहले से भी ज्यादा गहरा हो गया है. मुझे उसके लिए कुछ भी करना बहुत अच्छा लगता है… चाहे उसका लंच बनाना, उसकी चोटी बनाना, उसे तैयार करना, उसके साथ खेलना, सब कुछ. मेरी ही तरह उसे साड़ी का भी बहुत शौक है. जब तब वो मुझे साड़ी पहनाने को कहती है. पर अभी तो साड़ी के लिए वो बहुत छोटी है. तुझे पता नहीं कि न जाने कितने घंटे हम दोनों बातें करती है. वो अपनी माँ को सचमुच बहुत प्यार करती है और मैं भी उसे. वो कहती है कि बड़ी होकर मेरी ही तरह बनेगी. और पता है सबसे खुबसूरत बात क्या है इस अनुभव की? मेरा उसके लिए प्यार अब जैसे अंतहीन हो गया. माँ-बेटी का रिश्ता सचमुच बहुत प्यार भरा होता है सुमति. तू समझ रही है? अभी नहीं समझी तो माँ बनकर तू भी समझ जायेगी.”, गर्व से एक माँ अंजलि ने कहा. और साथ ही वो झाड़ू भी लगाती रही.

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सुमति ने अंजलि की फर्श पर पड़े खिलोनो को समेटने में मदद की. वो सोच में पड़ गयी कि क्या वो भी कभी माँ बनना चाहेगी?

“हाँ, ये सब तो तेरी आँखों की चमक देख कर ही पता चल रहा है कि तुझे माँ बनकर कितना अच्छा लग रहा है.”, सुमति ने मुस्कुराकर कहा. और फिर उस कमरे में फर्श में बिखरे खिलौनों को उठाकर सुमति ने अंजलि की कमरे को साफ़ करने में मदद की. सपना की एक गुडिया को हाथ में पकडे सुमति उसे एक टक देखते हुए सोचने लगी क्या वो कभी चैतन्य के बच्चे की माँ बनना चाहेगी? चाहे माँ बनने का अनुभव कितना भी अच्छा हो, पर उसके लिए उसे चैतन्य के साथ वो करना पड़ेगा जिसे सोच कर ही उसे मन ही मन ख़राब लग रहा था. उसके लिए माँ बनना इतना आसान नहीं होगा. अंजलि की बात और थी, वो तो पहले से ही माँ बन चुकी थी. “तू ये बता तूने अपने होने वाले पति से बच्चो के बारें में बात की या नहीं?”, अंजलि ने बिस्तर ठीक करते हुए सुमति से पूछा. सुमति जो उस वक़्त अपने मन की उधेड़ बून में खोयी थी, अचानक अंजलि के सवाल से बाहर निकली. “नहीं, अभी तक तो हमने इस बारे में बात नहीं की है.”, सुमति ने किसी तरह जवाब दिया.

“यदि मेरा अंदाजा सही है तो जिस आदमी से तेरी शादी हो रही है वो चैताली ही है न?”, अंजलि ने अपने जीवन में आये बदलाव से सुमति के बारे में अंदाज़ लगाया. “हाँ, चैताली ही अब चैतन्य है! दिल का बहुत साफ़ है वो. और उसके माता पिता भी मुझे बहुत प्यार करते है. वो दोनों परसों आये थे मुझे दुल्हन के कपडे खरीदवाने. मुझे बहुत मज़ा आया था उनके साथ. पता है बहुत महँगी साड़ियाँ और लहंगा ख़रीदा है मैंने. तू मेरी शादी में आएगी न? शादी के दिन स्टेज में मेरी बगल में खड़ी रहना तू. समझी? यकीन नहीं होता कि मैं दुल्हन बनने के सपने जो देखती थी वो ऐसे सच होंगे”, सुमति ने कहा. जब वो अंजलि से शादी में आने को कह रही थी, उसमे कहीं एक दर्द भरी रिक्वेस्ट थी… क्योंकि सच तो यही था कि उस शादी को लेकर वो संशय में थी.

शायद दोनों सहेलियां इस बात को जानती थी इसलिए दोनों के लबो पे अब एक चुप्पी थी. “ये सब कितना अजीब लग रहा है न अंजलि. ये औरत का जीवन. मुझे पता नहीं मैं खुश रह पाऊंगी या नहीं.”, सुमति ने अंजलि से अब दिल की बात कह ही दी थी. “मैं जानती हूँ तुझ पर क्या गुज़र रही है सुमति.”, अंजलि ने प्यार से कहा.

“अच्छा मेरी छोड़.. तू बता .. हाउसवाइफ बनकर कैसा लग रहा है? हम सभी क्रॉसड्रेसर का तो सपना था हाउसवाइफ जैसे जीना. तू तो वो सपना जी रही है. बता न तुझे अच्छा लग रहा है?”, सुमति ने उचकते हुए अंजलि से पूछा. शायद अंजलि खुश हो अपने जीवन में तो वो भी सुमति को कुछ सीख देती, ऐसी सोच थी सुमति की उस सवाल के पीछे. उसका सवाल सुनकर अंजलि हँस दी.

“यार तेरा घर कितना ठंडा है.”, सुमति कहते हुए उस कमरे में बिस्तर में बैठ गयी. उसने फिर सावधानी से अपने पैरो को अपनी साड़ी से ढँक लिया. ये दोनों औरतें शुरू से ही साड़ी को हर सिचुएशन में संभालने में एक्सपर्ट थी. क्रॉसड्रेसर होते हुए भी किसी औरत से ज्यादा सहज थी ये दोनों साड़ी में. सुमति की अदाएं तो बेहद मोहक और स्त्रियोचित थी. उसने अपने बांये हाथ से अपने पल्लू को खिंच कर सामने कर अपनी गोद में रख दिया ताकि वो अपने पल्लू पर न बैठे. अंजलि तो शुरू से ही कहती थी कि सुमति एक परफेक्ट औरत है. और आज उसकी बात कितनी सही साबित हो रही थी. सुमति की नर्म सैटिन की साड़ी उसे ठन्डे कमरे में एक गर्माहट दे रही थी.

“तूने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया अंजलि”, सुमति ने फिर कहा.

“कौनसा सवाल? हाउसवाइफ के सपने वाला? इतना भी ग्लेमर भरा काम नहीं है सुमति ये. एक पत्नी के रूप में सजने सँवारने का समय नहीं होता है. ऊपर से दिन में ३ बार खाना नाश्ता बनाओ, घर की दिन भर सफाई करो, बच्चे को तैयार करो और वो भी रोज़ रोज़. और फिर सास-ससुर की सेवा सो अलग. और इतना करने पर भी किसी की तरफ से कभी कोई प्यार नहीं, सिवाय मेरी बेटी के. सच कहूं तो हाउसवाइफ होना बड़ा कठिन काम है. मैं तो ये सब ख़ुशी से इसलिए करती हूँ क्योंकि फिर मुझे मेरी प्यारी बेटी सपना के साथ समय बीताने मिलता है. मुझे गृहिणी बन कर अच्छा लग रहा है पर उस कारण से नहीं, जिस कारण से क्रॉसड्रेसर हाउसवाइफ बनना चाहते है. इस काम में ग्लैमर कम और मेहनत ज्यादा है.”, अंजलि ने कह. वो बात करते करते घर भर में बिखरी हुई चीजें समेट कर उनकी सही जगह पर रखने में व्यस्त थी. अंजलि का जीवन सचमुच में बड़ा व्यस्त था फिर भी उसके चेहरे पर एक संतुष्टि थी. उसका जीवन इतने तेज़ी से एक काम करने वाले अच्छी खासी कमाई वाले आदमी से एक थोड़ी गरीब परिस्थिति वाली औरत में बदल गया था. फिर भी एक चीज़ थी जो उसके लिए सबसे बड़ा सुख लेकर आई थी… वो था अपनी बेटी की माँ बनना.

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अंजलि सचमुच एक हाउसवाइफ के जीवन में ढल गयी थी. उसने बिस्तर जमाया ताकि सुमति उस पर बैठ सके. सुमति को कमरे में ठण्ड लग रही थी तो उसने अपने पैरो को साड़ी से अच्छी तरह ढँक लिया. दोनों सहेलियां साड़ी संभालने में शुरू से ही एक्सपर्ट थी.

“तुझे भूख लगी होगी सुमति. मैं तेरे लिए नाश्ता लेकर आती हूँ. मैंने पोहा बनाया है. तुझे पसंद है ?”, अंजलि ने सुमति से कहा. “चिंता मत कर अंजलि … नाश्ता इंतज़ार कर सकता है. मैं तो तुझसे मिलने आई हूँ नाश्ता करने नहीं.”, सुमति बोली.

“चल पगली. मैं भूल नहीं सकती कि तू किस तरह इंडियन लेडीज़ क्लब की सभी औरतों के लिए खाना बनाया करती थी. मैं तो तुझे पोहा खिला ही सकती हूँ. वैसे भी तैयार है बस लेकर आना है. फिर हम दोनों बैठ कर बातें करेंगी. मैं साफ़ सफाई बाद में कर लूंगी. दोपहर का खाना मैंने पहले ही तैयार कर लिया है तो मुझे और कोई काम भी नहीं है. बस अब अपनी सहेली के साथ गप्पे मारूंगी”, अंजलि मुस्कुराते हुए बोली.

“सुबह के ८:३० बजे लंच भी तैयार? तू मज़ाक कर रही है? बेटी को तैयार करने के बाद तुझे इतना समय कैसे मिल गया?”, सुमति आश्चर्यचकित थी.

अंजलि तभी एक प्लेट पोहा लेकर आई. “मैं सुबह ४ बजे उठ गयी थी.”, अंजलि मुस्कुराकर बोली. “वैसे भी सपना और उसके पापा के लिए टिफ़िन बनाना था. वो भी सुबह जल्दी काम पर जाते है न”

“सपना के पापा! अब तुम उनका नाम भी नहीं लेती.. हा हा”, सुमति हँस दी. “वैसे मुझे अच्छी पत्नी बनने के लिए तुझसे हफ्ते भर की ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी. मेरी शादी के बाद काम आएगी.”

सुमति को जैसे यकीन नहीं हो रहा था कि अंजलि कैसे अपने नए जीवन में ढल गयी थी. सुमति को तो फिर भी थोडा समय मिला था सब चीज़ से परिचित होने में. पर अंजलि को तो सोचने समझने का मौका भी नहीं मिला होगा. उस दिन सुबह उठते ही औरत बनते ही उसके सर पर सुबह से ही माँ, पत्नी और बहु होने की ज़िम्मेदारी आ गयी होगी. पोहा खाते हुए सुमति बोली, “हम्म ये हुआ न टेस्टी पोहा!” अंजलि सुमति को देख खुश हो गयी कि उसकी सहेली को नाश्ता पसंद आया.

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अंजलि सुमति के सामने एक बेंच पर बैठ गयी और अपनी साड़ी से अपने स्तनों को ढंकने लगी. वो थकी हुई ज़रूर लग रही थी पर इस जीवन से वो संतुष्ट थी.

अंजलि सुमति के सामने एक बेंच में बैठ गयी. वो अपनी साड़ी में दमक रही थी. एक परफेक्ट हाउसवाइफ के लिए उसकी साड़ी उसकी हर चीज़ में सहायक होती है. घर की पुरानी फींकी रंग की दीवार से टिक कर अंजलि ने अपने घुटने को ज़रा ऊपर उठाया और उस पर अपना हाथ रखकर जैसे एक पल आराम करना चाहती थी वो. साड़ी ज़रा उठने को आई तो तुरंत आदतनुसार उसने उसे खिंच कर अपने पैरो को ढँक लिया. थोड़ी थकी ज़रूर दिख रही थी वो पर सन्तुष्ट भी थी. “क्रॉसड्रेसर का हाउसवाइफ का सपना”, मन ही मन सोचकर ही उसे हँसी आ गई.

“अंजलि तू बुरा न माने तो एक बात पूछू?”, सुमति ने पूछा. “अरे अब परमिशन लेगी क्या? मुझे पता है कि कल से तुझे कुछ परेशान कर रहा है. और मुझे तेरी परेशानी का कारण भी पता है. फिर भी तू ही पूछ”, अंजलि बोली. आखिर अंजलि भी तो उसी परिस्थिति से गुज़र रही थी जिससे सुमति.

“जहाँ तक मेरा अंदाजा है, जो मेरी भाभी थी पहले, वही अब तेरा पति भी है. है न? उनके साथ तेरे सम्बन्ध कैसे है?”, सुमति ने अपना सवाल पूछा. इस सवाल के बहाने वो शादी के बाद का अपना भविष्य समझना चाहती थी.

“तो मेरा अंदाजा सही था कि कौनसी बात तुझे परेशान कर रही है.”, अंजलि हँसते हुए बोली और फिर एक मिनट के लिए चुप भी हो गयी. उसने एक लम्बी गहरी सांस ली जैसे उसे समझ न आ रहा था कि इस सवाल का जवाब कैसे दे. “सुमति, तू मेरी सहेली है इसलिए तुझे बता रही हूँ. मैं कबसे किसी से इस बारे में बात करना चाहती थी पर किसी से नहीं कर सकती मैं. शुक्र है कि तू है मेरे साथ”, अंजलि बोली. उसने अपनी साड़ी का पल्लू खिंच कर अपने स्तनों को ढँक लिया. उसकी सैटिन साड़ी बेहद ही स्मूथ थी जो बार बार उसके ब्लाउज पर फिसल जाती और उसके ब्लाउज का उभार बाहर दिखने लगता. एक औरत के सामने उसके स्तनों का उभार ब्लाउज में दिखना, उसे इस बात से कोई परेशानी तो नहीं थी. वैसे भी सुमति से क्या शर्माना. पर फिर भी फिसलती हुई साड़ी संभालना तो आदत थी उसकी.

“तुझे याद है कि तेरी भाभी पहले कैसे हुआ करती थी? एक छोटे से गाँव से आई हुई डरी सहमी और बहुत ही पारंपरिक. सास-ससुर की हर एक बात माने वाली और पति को परमेश्वर मानने वाली. मैं एक पति के रूप में जो भी करती थी, वो हमेशा बिना सवाल किये मुझे सहारा देती थी. उसने मुझसे कभी नहीं पूछा कि मैं एक आदमी होते हुए साड़ी क्यों पहनती थी. मुझे लगता था कि वो मुझे समझती थी. पर सच तो ये था कि उसकी परवरिश ऐसी हुई थी कि कभी पति या सास-ससुर से कोई सवाल नहीं करना है उसे. वो तो बस अपना कर्त्तव्य मान कर मेरी हर बात मान लेती थी. इसलिए मेरे क्रॉसड्रेसर होने पर भी उसने कभी शिकायत नहीं की थी. मुझे कभी पता भी नहीं चला था कि उसके दिल में मेरे औरत बनने पर उसे कैसा लगता था. और ऊपर से ज्यादा पढ़ी लिखी भी नहीं थी वो.”, अंजलि पुरानी बातों में खो गयी थी.

सुमति को अब लगा कि उसकी सहेली अब दिल से बात कह रही है तो वो भी अब रिलैक्स हो गयी थी. और वो
अंजलि की बातें सुनती हुई बिस्तर पर लेट गयी. अपनी सहेली की उपस्थिति में अब उसकी साड़ी बिखर भी रही थी तो उसे उसकी फ़िक्र नहीं थी. इस वक़्त उसे पता था कि अंजलि अब कुछ गंभीर बात उससे कहने वाली है.

“पता है. अब तेरी भाभी मेरे पति परमेश्वर बन चुके है. और वो बिलकुल भी नहीं बदले है. पहले की ही तरह है अब बस वो एक आदमी है.” अंजलि बोली.

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सुमति अब बेफिक्र होकर अपनी सहेली की बात सुनते हुए बिस्तर पर लेट गयी. उसका एक स्तन उसकी ब्रा से बाहर आ रहा था.

“मतलब?”, सुमति ने पूछा. लेटने पर सुमति का एक स्तन उसकी ब्रा से बाहर आ रहा था जिसे उसने अपने हाथो से वापस अन्दर कर दिया. सुमति को यूँ अपने स्तनों को संभालते देख अंजलि मुस्कुरा दी पर फिर जल्दी ही गंभीर होकर बोली, “मेरे पति पहले की ही तरह सोचते है. वो मानते है कि पत्नी को हर हाल में अपने पति की हर बात मानना चाहिए. पत्नी का काम बस घर, बच्चे और परिवार संभालना है उनके अनुसार. मैं जिस तरह की पति थी उसके बिलकुल विपरीत है वो. मैं तो अपनी पत्नी की जितनी हो सके मदद करती थी, पर ये बिलकुल भी नहीं करते. और हमारी घर में आर्थिक स्थिति भी थोड़ी ठीक नहीं है कि घर में कोई मदद के लिए नौकर चाकर रख ले. हम दोनों में मैं ज्यादा पढ़ी लिखी हूँ नौकरी करने लायक… पर ये और इनके माता पिता भले गरीबी में रह लेंगे पर बहु को घर से बाहर काम पर जाने नहीं देंगे. उनके हिसाब से मुझे घर साफ़ रखना और खाना बनाना ही देखना चाहिए.”, कहते कहते अंजलि की आँखों में आंसू आ गए.

“ये घर कितनी मुश्किल से चल रहा है कैसे बताऊँ मैं. मेरे ससुर की थोड़ी सी पेंशन और मेरे घर से मेरे माता-पिता जो समय समय पर पैसे भेजते है, उसके सहारे किसी तरह जीवन कट रहा है. मैं तो अपनी बेटी की छोटी छोटी छोटी इच्छाएं भी पूरी नहीं कर पाती”, अंजलि की आवाज़ अब टूट रही थी. “दिन भर काम करने के बाद फिर रात को… “, कहते कहते वो रुक गयी. उसकी बातें सुन सुमति उठ कर अंजलि की बगल में आकर बैठ गई. उसके हाथो को अपने हाथ में लेकर अंजलि के सर को अपने कंधे पर रख कर उसे सांत्वना देने लगी. बेहद भावुक पल था वो जब दो सहेलियां दिल से अपनी ज़िन्दगी बयान कर रही थी. इस वक़्त वो सिर्फ औरतें नहीं थी … वो दो दोस्त थी. सुमति अंजलि की पीठ पर हाथ फेर कर उसे सहारा दे रही थी.

“… और फिर रात को… रात को… मुझे अपना तन अपने पति को समर्पित करना पड़ता है. चाहे मैं कितनी भी थकी हुई क्यों न हो. मुझे वो अच्छा नहीं लगता है सुमति… एक आदमी का स्पर्श. मुझे बिलकुल पसंद नहीं पर उन १०-१५ मिनटों के लिए मैं बिस्तर पर लेटी रहती हूँ जब वो मेरे जिस्म का …”, अंजलि का दुख अब बाहर आ चूका था. सुमति और वो दोनों एक ही परेशानी से गुज़र रही थी.

सुमति को पता न था कि वो क्या कहे अंजलि से. ये दोनों सहेलियां बस एक दुसरे को गले लगाए एक दुसरे का हाथ थामे वहां बैठी रही. कुछ देर बाद, सुमति ने अंजलि के चेहरे को उठाकर अपनी प्यारी सहेली के चेहरे को देखा. और फिर उसने अपनी सहेली के होंठो को चूम लिया. अंजलि ने भी उसे रोका नहीं और उसने भी सुमति के होंठो को चूम लिया. उन दोनों के अन्दर की भावनाए उमड़ कर उस चुम्बन में आ रही थी. उन दोनों के नर्म होंठ एक दुसरे को चूम रहे थे. उन दोनों के गर्म और मुलायम जिस्म एक दुसरे के करीब आ रहे थे. अंजलि की सॉफ्ट सैटिन साड़ी अब सुमति की साड़ी से मिल रही थी. उन दोनों के कोमल स्तन एक दुसरे को दबा रहे थे. और सुमति के हाथ अंजलि की जांघो और उसकी कमर पर फिसल रहे थे. सुमति के स्पर्श से जैसे अंजलि के तन में आग लग गयी थी. दोनों सहेलियां एक दुसरे को चूमती रही. सुमति अब थोड़ी उत्तेजित हो रही थी. उसने अपने हाथ अंजलि के साड़ी के अन्दर से उसके ब्लाउज के ऊपर पहुँच गए और अंजलि से स्तनों को दबाने लगे. अंजलि भी जवाब में और जोरो से सुमति के होंठो को चूमने लगी. सुमति अंजलि के और करीब आकर अपने स्तनों को उसके स्तनों से दबाने लगी और अपने हाथ अंजलि के ब्लाउज के अन्दर डाल उसके स्तनों को मसलने लगी. दो स्त्रियों के कोमल जिस्म का यह मिलन बेहद उत्तेजित था. दोनों को वो चुम्बन मदहोश कर रहा था. ऐसा चुम्बन जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया था. पर फिर भी सब कुछ कितना स्वाभाविक लग रहा था. जैसे दोनों सहेलियां एक दुसरे के लिए ही बनी थी… और दोनों के जिसमे एक दुसरे के पूरक थे. पर अचानक अंजलि ने अपने होंठो को वापस खिंच लिया और वो चुम्बन वहीँ रुक गया.

“नहीं मैं ये नहीं कर सकती सुमति”, अंजलि बोली. “क्यों नहीं कर सकती अंजलि? मैं भी शादी नहीं करना चाहती हूँ चैतन्य के साथ. अभी भी देर नहीं हुई है. हम दोनों एक नया जीवन साथ में शुरू कर सकती है. सपना भी हमारे साथ रहेगी. मैं जॉब करूंगी और सपना को हम एक बेहतर जीवन दे सकते है. सब कुछ ठीक होगा अंजलि. बस तुम मेरे साथ आकर मेरी जीवन संगिनी बन जाओ”, सुमति ने अंजलि से याचना की. पर मन ही मन वो जानती थी कि अंजलि नहीं मानेगी.

“सुमति… मुझे तुम पसंद हो. और ये सब अभी ठीक लग रहा है, पर हम आगे नहीं बढ़ सकती इस रास्ते पर. ये ठीक नहीं होगा”, अंजलि ने कहा. “क्या ठीक नहीं है अंजलि? क्या हमें एक खुबसूरत जीवन का हक़ नहीं है?”, सुमति बोली पर वो जानती थी कि अंजलि क्या सोच रही है.

“सुमति इतनी स्वार्थी न बनो. तुम्हे चैताली याद है? उसने तुम्हारा साथ तब दिया था जब तुम एक क्रॉसड्रेसर थी. तुम्हारी बचपन की सबसे अच्छी दोस्त थी वो. वो भले आज चैतन्य बन गयी होगी पर वो वही इंसान है जिसने तुम्हे स्वीकार किया था क्रॉसड्रेसर के रूप में. क्या तुम इन कामुक भावनाओं के लिए वो सब भुला कर उसे छोड़ दोगी? और सपना के बारे में सोचो… माँ बाप अलग रहेंगे तो उस पर क्या बीतेगी. मैं अपने पति को नहीं छोड़ सकती. भले आज वो जैसे भी हो पर उन्होंने मेरा साथ तब दिया था जब वो औरत थे.”, अंजलि की बात में सच था.

सुमति भी अंजलि की बात समझ रही थी. पर मनमें चल रही भावनाओं को काबू करना आसान कहाँ होता है. औरत बनना ही अपने आप में एक कठिन अनुभव रहा है अब तक. ऐसा लगने लगा था जैसे कि एक क्रॉसड्रेसर का जीवन ही बेहतर था औरत होने से तो. उसकी आँखों से आंसू बह निकले. तो अंजलि ने अपनी साड़ी के पल्लू से अपनी सहेली के आंसू पोंछने लगी.

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सुमति ने उठ कर अपनी साड़ी ठीक की.

“मुझे गलत न समझना सुमति. काश मैं तुम्हारे साथ जीवन जी सकती. पर ये मेरे लिए गलत होगा कि मैं अपने परिवार को छोड़ दूं. और मुझे अपनी बेटी के भविष्य के बारे में सोचना है. मैं उसे एक परिपक्व और आज़ाद विचारों की औरत बनाना चाहती हूँ. उसे मेरे अनुभव से सीखना होगा कि औरत की जगह सिर्फ ४ दीवारों के अन्दर नहीं है. तुम समझ रही हो?”, अंजलि बोली. सुमति का चेहरा अब भी उदास था. तो अंजलि ने उसकी आँखों में देख कर कहा, “मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी अपनी सुमति आंटी की तरह कॉंफिडेंट औरत बने.” और सुमति मुस्कुरा दी.

दोनों सहेलियों ने एक दुसरे को एक बार फिर गले लगाया, इस वादे के साथ कि वो दोनों एक दुसरे का सहारा बन कर रहेंगे. और फिर दोनों औरतें उठ खड़ी हुई और अपनी साड़ी की प्लेट सुधारने लगी.

“सुमति.. सुन. मैंने कल मधुरिमा आंटी को बताया था कि हम दोनों आज उनसे मिलने १० बजे आयेंगे उनके घर पर. हमें जाने के लिए तैयार होना चाहिए.”, अंजलि ने कहा.

सुमति का दिल अब कुछ हल्का था. शायद ये अपनी भावनाएं व्यक्त करने का नतीजा था कि दोनों सहेलियां अब कुछ अच्छा महसूस कर रही थी. अंजलि ने सुमति को ये एहसास दिलाया था कि कभी कभी सही रास्ते पर चलने के लिए कुछ सैक्रिफाइस करना पड़ता है. अंजलि सही भी थी कि चैताली ने हमेशा सुमति की क्रॉसड्रेसिंग में साथ दिया था बचपन से, और आज तक किसी को इस बारे में बताया नहीं था. सुमति अब भला कैसे चैताली को छोड़ सकती थी सिर्फ इसलिए कि वो अब चैतन्य नाम का एक आदमी है. वो भी तो आखिर चैताली के सामने औरत बन जाया करती थी.

“अच्छा सुन अंजलि, मैं तेरा बाथरूम यूज़ करती हूँ अपना मेकअप सुधारने. मेरे आंसू से मेरा काजल फ़ैल गया होगा.” , सुमति बोली.

अंजलि सुमति की तरफ देख कर मुस्कुरा दी. और खुद तैयार होने में मगन हो गयी.

क्रमश: …

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इंडियन लेडीज़ क्लब: भाग १०

एक औरत और एक बहु बनकर अब तक दिन बीताने में सुमति को कोई भी कठिनाई न महसूस हुई. बल्कि वो तो बहुत खुश थी. पर बहु के साथ साथ वो पत्नी भी बनने वाली थी. क्या वो आगे भी खुश रहेगी?


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चैतन्य के माता-पिता और सुमति के भाई रोहित को ट्रेन से विदा कर, एक दुसरे का हाथ पकडे चैतन्य और सुमति पार्किंग लॉट में खाड़ी कार की ओर बढ़ चले थे. कार के पास पहुँचने पर सुमति बड़ी सावधानी से अपनी साड़ी को उठाकर पैसेंजर सीट पर बैठ गयी. एक औरत को भी न बहुत संभल कर चलना होता है और ख़ास तौर पर जब इतने प्यार से साड़ी पहनी हो तो उसकी प्लेट तीतर-बीतर हो जाए तो किसी को भी अच्छा न लगेगा. सुमति मन ही मन आज बड़ा गर्व महसूस कर रही थी कि आज वो दिन भर साड़ी और हील वाली सैंडल पहन कर बिना किसी परेशानी के बीता सकी थी. मानो या न मानो सैंडल पहन कर इतने घंटो रहना बड़ी बात होती है. अपने सास-ससुर के साथ आज अपनी दुल्हन के लिबास की शौपिंग करके वो बड़ी खुश थी, जो उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी. और सुमति को खुश देख, चैतन्य भी बड़ा खुश था.

“हम्म … अब बस हम दोनों अकेले रह गए है. अब क्या करना है?”, चैतन्य ने थोडा शरारती अंदाज़ में कहा. जैसे उसके शब्दों में एक हसरत छुपी हुई थी.

“करना क्या है? अब ये भी मैं बताऊँ तुम्हे? मुझे घर ले चलो और क्या.”, सुमति ने थोड़े रूखे स्वर में कहा. जैसे कुछ देर के अन्दर उसके अन्दर का पुरुष जाग उठा था. पर बात वो नहीं थी. चैतन्य के साथ खुद को अकेला पाकर थोड़ी सी सहम गयी थी वो. चैतन्य की हसरत भरी निगाहों को देख कर उसे एहसास हो चला था कि अब वो एक औरत के तन में है जिसे पुरुष कुछ ख़ास नजरो से भी देख सकते है. और फिर चैतन्य की तो होने वाली बीवी थी वो… तो वो ऐसे देखे तो अचरज नहीं होना चाहिए था सुमति को. पर सुमति को औरत बने अभी एक दिन तक न हुआ था. कैसे समझ पाती वो यह सब? बेचारी बस थोडा असहज होते हुए अपने साड़ी के पल्ले को खोल कर अपने बदन के चारो ओर लपेट कर बैठ गयी. अपने सीने को ढँक कर रखना उसे उचित लगा.

“अच्छा राजकुमारी जी. जैसे आप कहें!”, चैतन्य ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया. जैसे उसे सुमति के रूखेपन वाले व्यवहार का अनुभव था. सुमति के लिए ये बड़ी अजीब सी स्थिति थी. चैतन्य जो कल तक चैताली नाम की लड़की था, वो उसके साथ ऐसे बर्ताव कर रहा था जैसे वो हमेशा से ही सुमति का होने वाला पति था. सुमति सोचती रह गयी कि यदि उसे याद है कि वो कल तक एक आदमी थी तो चैतन्य को क्यों याद नहीं है कि वो लड़की था? शायद ये सब एक सपना था पर चलती हुई कार से जब खिड़की से बहती हुई हवा उसके आँचल से छन कर उसके ब्लाउज में उसके स्तनों पर पड़ कर एक सिहरन पैदा करती, सुमति इस वास्तविकता को सपने के नाम पर नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती थी.

फिर भी सुमति मन ही मन उत्साहित थी. दुल्हन बनने की ख़ुशी जो थी. किस क्रॉसड्रेसर को अच्छा नहीं लगेगा ये? “एक बहु बनना इतना कठिन भी नहीं था. मेरी सास कितनी प्यारी है और मेरा कितना ख्याल रख रही थी वो मेरा आज”, सुमति कलावती के साथ बिठाये पलो को याद कर मुस्कुराने लगी. और मुस्कुराती भी क्यों नहीं आखिर इतना बढ़िया दिन जो बीता था. पर फिर भी उसे एहसास न था कि एक बहु बनने का मतलब सास के साथ सिर्फ शौपिंग करना नहीं होता है. और भी बहुत कुछ करना होता है. खैर अपनी सास के साथ उसने किचन में भी समय बिताया था. वो भी तो अच्छा ही था. पर वो एक बात भूल रही थी. किसी की बहु बनने के लिए किसी आदमी की पत्नी भी बनना पड़ता है. और वो इस बात को नज़रंदाज़ कर रही थी कि वो एक पत्नी बनने वाली है.

कार के चलने पर बहती हुई हवा में लहराती सुमति की रेशमी जुल्फें मानो उसके चेहरे पर खिलखिला रही थी. और सुमति बार बार अपनी जुल्फों को पीछे करती. उसे ऐसा करते देखना बहुत ही सुखद था चैतन्य के लिए जो चुप-चाप इस सुन्दर औरत को देख रहा था, जो कुछ दिनों में उसकी पत्नी बनने वाली थी. पर पूरे रास्ते में चैतन्य और सुमति ने एक दुसरे से ज्यादा बातें नहीं की.

जल्दी ही सुमति का घर आ गया था. सुमति ने घर का दरवाज़ा खोला और दोनों अन्दर आ गए. सुमति सोच कर चल रही थी कि चैतन्य कुछ मिनट घर में रूककर पानी वगेरह पीकर अपने रास्ते निकल जाएगा. उसे चैतन्य की उपस्थिति से ज्यादा परेशानी न थी. वो मन ही मन चैतन्य में अपनी बचपन की दोस्त चैताली को देखने की कोशिश करती पर उसके जेहन में बन रही नयी यादें उसे हमेशा चैतन्य को एक लड़के के रूप में ही दिखा रही थी.

“ओफ्फ्फ मैं तो शौपिंग करके थक गयी हूँ चैतन्य. मैं जाकर कपडे बदलती हूँ … अब और ज्यादा देर ये हील पहन कर नहीं रह सकूंगी मैं. तुम यहाँ बैठ कर पानी या सोडा लेकर पी लेना.”, सुमति ऐसा कहकर अपने कमरे चली गयी और चैतन्य बाहर के कमरे में सोफे में बैठ गया.

अपने बेडरूम में पहुँचते ही सुमति ने अपनी हील वाली सैंडल निकाल फेकी. उसके अन्दर उर्जा का नया संचार हो गया था. उसके अन्दर एक नया उतावलापन था खुद को आईने में देखने का… अपने नए बदन को निहारने का. सुमति तो आदमी के तन में भी औरत के कपडे पहनकर बहुत खुबसूरत लगती थी और अब तो उसके पास एक औरत का तन था. दिखने में सुमति लगभग पहले की ही तरह थी पर अब वो ज्यादा पतली थी, उसकी कमर और फिगर बेहद लचीला हो गया था, और अब उसका कद पहले से थोडा कम था. और तो और अब उसके बड़े और मुलायम स्तन थे और साथ ही अब उसके पास स्त्री योनी भी थी. किसी हुस्न्परी से कम नहीं लग रही थी वो आईने में और खुद को देखकर सुमति ख़ुशी से न फूली समा पायी.

सुमति ने फिर धीरे से अपना नेकलेस उतारा जो उसके नाज़ुक से गले पर बेहद जंच रहा था. और फिर कानो में पहनी भारी सी ईअर-रिंग भी उतारनी थी. उसके लिए उसने अपने बालो को पहले एक ओर कर अपने सर को एक ओर झुकाकर अपनी दुबली सुन्दर उँगलियों से उन झुमको के पीछे का स्क्रू खोलने लगी. एक क्रोसड्रेसर के रूप में तो उसे क्लिप-ऑन ईअररिंग पहनना पड़ता था जो कुछ घंटो में कानो में दर्द करने लगते थे. पर एक औरत के रूप में कानो में झुमके पहनने का अनुभव ही अलग था. सिर्फ झुमके उतारने में उसे स्त्रीत्व की अनोखी अनुभूति हो रही थी. और फिर उसने अपनी दूसरी ईअररिंग भी बड़े प्यार से निकाल ली.

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सुमति ने बड़े ही नजाकत से अपने नेकलेस और झुमको को उतारा. और फिर अपनी साड़ी के पल्लू का पिन जो ब्लाउज में लगी थी उसे खोल कर खुद को आईने में देखने लगी. कितनी ही खुबसूरत लग रही थी सुमति!

अब सुमति ने अपनी ब्लाउज में लगी पिन को खोल कर अपने पल्लू को आज़ाद कर दिया क्योंकि उसे अब साड़ी जो उतारनी थी. उसे महसूस हुआ कि अब नाज़ुक दुबली उँगलियों से यह सब करना कितना आसान हो गया था उसके लिए. सचमुच की औरत होना तो सुमति को बेहद लुभा रहा था. अभी तो एक दिन भी नहीं हुआ था औरत के तन में उसे और उसे इतना सुख मिल चूका था जो एक क्रॉस ड्रेसर के रूप में इतने समय में कभी नहीं मिला. वो अपने पल्लू को पकडे खुद को आईने में देखने लगी. “बिना गहनों के भी मैं कितनी सेक्सी लग रही हूँ. मेरे स्तन भी कितने परफेक्ट है. काश अंजलि और मधुरिमा माँ यहाँ होती तो कितना मज़ा आता. पता नहीं उनके साथ क्या हो रहा होगा?”, सुमति अपनी ख़ुशी जल्द से जल्द अपनी क्रॉसड्रेसर सहेलियों के साथ साझा करना चाहती थी.

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सुमति अब सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहन कर आईने के सामने खड़ी थी.

सुमति अब धीरे धीरे अपनी साड़ी को उतारने लगी. उसकी साड़ी तो मानो जैसे उसके तन से लिपट कर थी
और उसे उतारना एक खुबसूरत से गिफ्ट को खोलने के समान था जिस पर कई लेयर के गिफ्ट पेपर लपेटे हुए हो. और सुमति का तन उस पैकिंग में छुपा हुआ गिफ्ट था जो परत दर परत खुल कर दिखने को उतावला था. आज तो सुबह से ही बेचारी सुमति इतनी व्यस्त रही कि वो अपने इस औरत के तन को निहार तक न सकी थी. अब उसके पास समय था जब वो खुद को अच्छी तरह से देख सके. साड़ी को उतारने के बाद उसने अपनी साड़ी को अपनी बगल में बिस्तर में रख दी और खुद को पहली बार देखने लगी.

सुमति अब सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहने आईने के सामने खड़ी थी. “यकीन नहीं होता कि ये मेरा फिगर है! मेरी बाँहें कितनी पतली है और मेरी कमर भी पहले से पतली और लचीली हो गयी है. मेरे कुल्हे तो कितने बढ़ गए है! इतना बड़ा तो कभी हिप पैड पहन कर भी नहीं कर पायी थी मैं! और मेरे स्तन! हाय! मेरे ब्लाउज में कितने अच्छे लग रहे है. न जाने मेरा ब्रा साइज़ क्या है? मुझे अपनी ब्रा में देखना पड़ेगा”, सुमति अपने तन को देखते हुए सोचने लगी. सब कुछ सपने सा था. “यदि ये सपना है तो मुझे कभी इस सपने से न जगाना”, उसने खुद से कहा. उसे पता नहीं था कि जाने अनजाने कितनी बड़ी गलती कर रही थी वो ऐसा सोचकर.

खुद की ब्रा के बारे में सोचते हुए उसके मन में अब अपने स्तनों को देखने की इच्छा जागृत हुई. होती भी क्यों न? हम सभी क्रॉस-ड्रेसर को तो नकली स्तनों के साथ भी पूर्ण स्त्री का एहसास हो जाता है, और फिर सुमति के पास तो अब असली स्तन थे. अब वो एक बार अपने स्तनों को दबाकर देखना चाहती थी कि क्या वाकई में उसमे वो सुख है जैसे हम सभी सोचते है. सुबह कपडे बदलते वक़्त उसके पास यह करने का समय नहीं था, पर अब तो उसके पास बहुत समय है. आज तो दिन में जब वो साड़ी की दूकान में लहंगा चोली ट्राई करने गयी थी, उसके दिन में तो उसी वक़्त अपनी ब्रा उतारने के बाद यह करने की इच्छा थी पर उसे पता नहीं था कि क्या पता क्या नतीजा होता ऐसा करने पर. इसलिए उसने अपनी इच्छाओं पर उस वक़्त काबू रखना ही मुनासिब समझा था. वैसे भी उस वक़्त लहंगा और साड़ी की खरीददारी में ही इतना मज़ा आ रहा था कि स्तनों की तरफ ध्यान देने की ज़रुरत भी नहीं तो थी सुमति को. यही सब सोचते हुए उसे अचानक कुछ ध्यान आया. ट्रायल रूम में जब वो लहंगा चोली उतारकर फिर से साड़ी पहनने गयी थी, तब वो वापस से ब्रा पहनना भूल गयी थी! उसकी ब्रा अब तक उसकी पर्स में रखी हुई थी. “ओह माय गॉड! मैं अपने सास-ससुर के सामने बिना ब्रा के ही घूम रही थी! मैं भी कितनी बेवकूफ हूँ.”, वो सोचने लगी. अच्छा हुआ था कि उसका साड़ी ब्लाउज काफी सही फिट वाला था जो उसके स्तन उसके ब्लाउज के अन्दर झूल नहीं रहे थे. वरना बाहर किसी और के सामने स्तनों का ऐसा झुलना उचित नहीं माना जाता है. सुमति भी अब एक औरत की तरह ही सोचने लगी थी.

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सुमति ने सामने झुककर आईने में अपने क्लीवेज को देखा. और फिर उसने धीरे से अपने ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किये. उसके स्तन तो मानो उसके टाइट ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब दे.

सुमति ने फिर अपने ब्लाउज में अपने क्लीवेज को देखा. वो मन ही मन मुस्कुराने लगी अपने उन दिनों को याद करके जब से टेप का उपयोग करके दर्द के साथ क्लीवेज बनाना पड़ता था. उस टेप को वापस त्वचा से उखाड़ने में जो दर्द होता था सो अलग. और अब देखो, उसके पास इतना गहरा क्लीवेज है. वो झुककर पास से अपने क्लीवेज की गहराई को देखने लगी. और फिर अपनी उँगलियों से क्लीवेज के बीच अपनी ब्लाउज की नैक को थोडा निचे खींचते हुए और अच्छे से देखने की कोशिश करने लगी. “हाय दैया! कितने बड़े और मुलायम स्तन मालुम होते है मेरे.”, खुद ही के स्तनों को अपने हाथो से छूते हुए सुमति शर्मा भी रही थी, इतने बड़े स्तन थे कि उसकी हथेली में न समा सकते थे वो. और फिर ऐसे लग रहे थे जैसे उसके टाइट ब्लाउज से बस वो खुद ब खुद बाहर निकल आयेंगे. खुद को दिल और दिमाग दोनों से खुबसूरत और सेक्सी महसूस करते हुए, सुमति अपने ब्लाउज के हुक धीरे धीरे खोलने लगी. “मेरे निप्पल कौनसे रंग के होंगे, हलके भूरे, गहरे भूरे या गुलाबी?”, मन भी न कैसे कैसे सवाल जगाता है. बेचारी सुमति सुबह इतनी जल्दी में थी कि अपने निप्पल के रंग तक को ठीक तरह से नोटिस नहीं कर सकी थी. सुबह सुबह उसके जीवन में इतना बड़ा परिवर्तन जो आ गया था. पर अब उसके पास खुद के स्तनों को देखने का भरपूर समय था.

वो धीरे धीरे अपने नए तन का आनंद ले रही थी. उसे अब कोई जल्दी नहीं थी. और अब वो वक़्त आ गया था जब वो खुद को पूरी तरह से देख सकेगी. उसने अपने ब्लाउज को उतारा और उसकी आँखों के सामने सुन्दर सुडौल उसके स्तन थे. देखने से ही प्रतीत होता था कि कितने मुलायम होंगे वे. हाय! कितना सुन्दर आकार था उनका और साइज़ भी ऐसा कि दिल करे कि उन्हें तुरंत पकड़ कर कुछ करने लगे. इतने नशीले झूमते स्तनों को चूम कर तो कोई भी लकी बन जाता. पर सुमति के पास अब बस यही तो कमी थी… उसके स्तनों को कोई प्यार से छूने वाला या चूमने वाला न था. पर किसी और की क्या ज़रुरत है? क्या सुमति खुद अपने स्तनों के साथ नहीं प्यार से खेल सकती?

ब्लाउज के उतारते ही सुमति के नर्म, मुलायम, बड़े, सुन्दर और सुडौल स्तन अब उसकी आँखों के सामने थे.

खुद के इतने सुन्दर स्तनों को देखकर सुमति को बड़ा गर्व महसूस हुआ और वो सोचने लगी, “अब यही क्यों रुकना? अब मुझे पेटीकोट उतारकर अपनी पूरी फिगर देखनी चाहिए!”, सुमति ने सोचा और फिर अपने पेटीकोट का नाडा खोलने लगी. पर अब आईने से मुंह फेरकर ऐसा करने लगी. शायद खुद को पहली बार नग्न देख कर सुमति लजा रही थी. और फिर धीरे धीरे अपने पेटीकोट को निचे सरकाने लगी. सुमति हर चीज़ धीरे धीरे कर रही थी क्योंकि अपने तन और स्त्रीत्व का आनंद लेना है तो वो धीरे धीरे कर कर लेने में ही सबसे ज्यादा सुख देता है. यह तो वो आदमी के तन में जब थी, तबसे जानती थी. और फिर आज तो उसकी टाँगे और जंघा इतनी चिकनी थी जैसे रेशम. दिन में जब भी वो अपने पैरो को क्रॉस करके एक के ऊपर एक करके बैठती थी… उसे तुरंत एहसास होता था कि कितनी चिकनी टाँगे है उसकी. और इन्ही चिकनी स्मूथ टांगो पर उसका पेटीकोट भी इतने प्यार से धीरे धीरे खुद ब खुद फिसलने लगा. वो मन ही मन शर्माने लगी… पर खुद को निहारने में मशगुल सुमति कुछ भूल रही थी. उस घर में उसके अलावा भी एक और शख्स था. चैतन्य बाहर के कमरे में सब्र के साथ सुमति का इंतज़ार कर रहा था, पर सुमति आधे घंटे से अब तक बाहर नहीं आई थी.

और फिर सुमति का इंतज़ार करते हुए थक जाने के बाद चैतन्य सुमति के कमरे में दरवाज़ा खोल कर दाखिल हुआ. और चैतन्य से बिलकुल बेखबर हो सुमति उस वक़्त लगभग नग्न अवस्था में थी. उसका पेटीकोट अब उसके घुटनों तक नीचे आ चूका था और ऊपर ब्लाउज तो वो पहले ही उतार चुकी थी. और क्योंकि वो आईने के विपरीत दिशा में देख रही थी, उसके खुले स्तनों के साथ वो चैतन्य की आँखों के सामने थी. और फिर चैतन्य को कमरे में देख कर वो गुस्से से आग बबूला हो उठी. “चैतन्य… तुम्हे शर्म हया है या नहीं? तुम्हे सुबह भी कहा था मैंने कि किसी के कमरे में आने के पहले दरवाज़े पर दस्तक देनी चाहिए.” सुमति चीख उठी. किसी तरह अपने पेटीकोट को जल्द से जल्द ऊपर उठा कर वो नाडा बाँध रही थी. और तब तक चैतन्य को सुमति के सुन्दर स्तनों का खुबसूरत नज़ारा देखने मिल रहा था. “कितने बेशर्म हो तुम. कम से कम अपनी आँखें तो बंद कर लो.”, सुमति लगभग रो पड़ी थी … उसकी आवाज़ काँप रही थी पर उसका गुस्सा बहुत बढ़ चूका था. गुस्से में उसके हाथ भी काँप रहे थे. शायद उसकी आँखों में एक-दो बूँद आंसूओं के भी थे.

सुमति ने फिर झट से अपनी बिस्तर पर पड़ी अपनी बेतरतीब साड़ी को उठाकर किसी तरह अपने सीने के सामने रख कर अपने स्तनों को छुपाने लगी. “निकल जाओ इस कमरे से तुरंत अभी. अब जाओ भी!”, सुमति एक बार फिर गुस्से से चैतन्य पर बरस पड़ी. पर चैतन्य मुस्कुरा रहा था.

“कम ऑन सुमति. ऐसा तो है नहीं कि मैं पहली बार तुम्हे बिना कपड़ो के देख रहा हूँ”, चैतन्य ने मुस्कुराते हुए कहा. “तुमने… तुमने मुझे बगैर कपड़ो के कब देखा?”, सुमति को यकीन नहीं हुआ. पर इस नयी दुनिया में कुछ भी यकीन करने लायक नहीं था वैसे भी.

चैतन्य उसके करीब आया और उसकी दोनों कलाइयों को पकड़ कर उसके और पास आ गया. सुमति अब चैतन्य की साँसे अपने तन पर महसूस कर सकती थी. और चैतन्य की मजबूत पकड़ के साथ उसके हाथ से उसकी साड़ी छुट गयी. और चैतन्य उसके और करीब आ गया. सुमति के स्तन अब चैतन्य के शरीर को छू रहे थे. “तुम भूल गयी उन पलों को जब हमने कई बार एक दुसरे के साथ प्यार किया था?”, चैतन्य ने कहा और आगे बढ़कर सुमति की कमर पर हाथ रख कर उसे अपने और करीब खिंच लाया. “नहीं… ये सच नहीं है.”, सुमति ने चैतन्य की बात को झुठलाना चाहा पर उसकी आवाज़ अब बेहद धीमी थी. ये स्थिति ही कुछ असहज थी सुमति के लिए… वो तो सपने में भी एक पुरुष के साथ शारीरिक सम्बन्ध के बारे में नहीं सोच सकती थी.

“क्या हो गया है तुम्हे सुमति? तुम कैसे इस बात को झुठला सकती हो? तुम ही तो थी जिसने सेक्स के लिए पहला कदम आगे बढ़ाया था. याद है जब कॉलेज के पहले साल के बाद तुम जब छुट्टियों में घर आई थी और…”, कहते कहते चैतन्य के होंठ सुमति के होंठो के काफी करीब आ गए थे. और सुमति उसकी आँखों में देखते रह गयी. जिस तरह से चैतन्य कह रहा था वो झूठ तो नहीं लग रहा था.

फिर भी सुमति कैसे मान लेती इस बात को. “नहीं ये सच नहीं हो सकता”, सुमति ने कहा और अपनी आँखें बंद कर ली. एक बार फिर उसके सर में चुभने वाला एक तेज़ दर्द हुआ. एक बार फिर उसके दिमाग में नयी यादों का जन्म हो रहा था. उस दर्द के साथ उसे याद आ रहा था वो गर्मी का मौसम जब उसने चैतन्य के साथ सेक्स के लिए खुद पहला कदम बढाया था. उस वक़्त उसके घर में कोई नहीं था. उसे सब कुछ ऐसे याद आ रहा था जैसे सब कुछ सचमुच उसके साथ ऐसा हुआ था. पर कल तक तो वो आदमी थी… फिर भी ये नयी यादें तो इस नयी दुनिया का सच थी. उसे याद आ रहा था कि कैसे सेक्स के वक़्त वो चैतन्य पर हावी थी और चैतन्य बस सुमति का साथ दे रहा था. पर सुमति ने ऐसा क्यों किया था?

अब तक चैतन्य के होंठ सुमति के होंठो को चूमने लगे थे. सुमति के कोमल चेहरे चैतन्य की हलकी हलकी दाढ़ी के बाल उसे चुभ रहे थे. सुमति ने अपनी कलाई चैतन्य के हाथो से छुडानी चाही पर उसकी मजबूत गिरफ्त से वो आज़ाद न हो सकी. वो महसूस कर सकती थी कि चैतन्य के शरीर का निचला हिस्सा अब उसके तन से और करीब आ रहा है. कुछ होता देख कर सुमति ने अपनी पूरी जान लगाकर चैतन्य को एक बार धक्का देकर अपने से दूर किया.

पर चैतन्य इतने सब के बाद अब रुकने के मूड में न था. उसने सुमति को पलटकर उसकी दोनों कलाइयों को पकड़ लिया और फिर सुमति की पीठ पर चूमने लगा. फिर उसने सुमति की कमर को अपने हाथो से लपेट लिया और उसे फिर अपनी बांहों में खिंच लिया. मदहोशी में ही उसने सुमति से कहा, “तुम कैसे भूल सकती हो हमने न जाने कितनी बार प्यार किया था? मैं तो हमारी शादी तक रुकना चाहता था पर तुम ही तो थी जो मुझे बार बार अपने करीब खिंच लाती थी. और अब तुम्हे ऐसे देखकर मैं खुद को कैसे रोकूंगा सुमति?” चैतन्य अब जोरो से सुमति की गर्दन पर चूमने लगा.

“प्लीज़ रुक जाओ चैतन्य.”, सुमति ने उससे भीख मांगी. पर चैतन्य तो सुमति के शरीर पर हाथ फेरते हुए और बेताब हुए जा रहा था. और फिर उसके हाथ सुमति के स्तनों को पकड़ कर जोरो से मसलने लगे और वो खुद सुमति की गर्दन को चूमता रहा. और अपने निचले तन से सुमति के कुलहो पर जोर देने लगा. अबसे कुछ मिनट पहले की ही तो बात थी जब सुमति खुद अपने स्तनों को दबवाना चाहती थी पर ऐसे तो नहीं? चैतन्य का लिंग सुमति को अब अपने कुलहो में पीछे महसूस होने लगा था. वो बस किसी तरह चैतन्य की गिरफ्त से निकलना चाहती थी. अन्दर ही अन्दर रोती हुई सुमति के लिए यह सब इतना तेज़ी से हो रहा था कि वो सोच भी नहीं पा रही थी. उसे पता भी नहीं था कि जो हो रहा है उसके साथ उसे पसंद भी आ रहा है या नहीं… या उसकी नयी यादो में उसे कभी ये पसंद भी रहा होगा?

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जब सुमति अपना पेटीकोट उतार रही थी, तभी चैतन्य उसके कमरे में आ गया था.

सुमति को पता चल गया था कि चैतन्य अब अपनी बेल्ट खोल रहा था. वो जानती थी कि अब उसके साथ क्या होने वाला है. क्या वो उसे रोक पाएगी? वो सोचती ही रही कि चैतन्य अपनी पेंट निचे कर अपने लिंग को सुमति के कुलहो के बीच की दरार में जोर से दबाने लगा. उसने एक बार फिर सुमति के स्तनों को अपने हाथो से जोर से मसला. और फिर सुमति को निचे झुकाकर उसने सुमति के पेटीकोट को उतार दिया. आज चैतन्य सुमति पर हावी हो रहा था… अपनी वासना में एक पल के लिए भी उसने नहीं सोचा कि सुमति क्या चाहती है. उसने अपने जोश में सुमति की पेंटी निचे उतार दी और फिर उसने वही किया जो हर आदमी इसके आगे करता है. “आआआ..आ.हहह”, ये आवाज़ सुमति के उन्माद की न थी बल्कि दर्द में निकली एक कराह थी. चैतन्य का लिंग सुमति की योनी के लिए काफी बड़ा मालूम हो रहा था. औरतों को तो अपने अन्दर पुरुष लिंग को लेना अच्छा लगना चाहिए न? पर सुमति को तो ऐसा नहीं लग रहा था. वो दर्द में थी और अन्दर ही अन्दर रो रही थी और चैतन्य उसकी भावनाओं को समझे बगैर एक वहशी की तरह सुमति के स्तनों को दबा रहा था.

पर अचानक ही जैसे चैतन्य को होश आया. उसे समझ आ रहा था कि कुछ गलत हो रहा है. सुमति आज वैसी नहीं थी जैसे वो उसे जानता था. प्यार करते वक़्त सुमति कभी इस तरह से नहीं रहती थी. उसने झट से अपने लिंग को खिंच लिया. “आई ऍम सॉरी सुमति यदि मैंने तुम्हे दर्द दिया हो तो. मुझे तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी. मैं कभी तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती नहीं करूंगा. मुझे माफ़ कर दो सुमति. मैं दुबारा कभी ऐसा नहीं करूंगा.” न जाने चैतन्य को क्या हुआ और वो बदहवासी में सुमति से माफ़ी मांगने लगा. अभी जो हुआ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था उन दोनों के बीच. वो अन्दर ही अन्दर परेशान हो उठा. आज न जाने कैसे सुमति को अपनी आँखों के सामने नग्न देख कर वो बेकाबू हो गया था. उसे अपने किये पर शर्म आने लगी और बस तुरंत सुमति के बेडरूम से बाहर जाने लगा.

और सुमति? सुमति तो बिस्तर पर अपना चेहरा गडाए अपने पेट के बल लेटी रह गयी. उसका पेटीकोट अब भी उसके घुटनों निचे था और उसकी पेंटी भी निचे सरकी हुई थी. और उसकी आँखों में आंसूओं की मोटी मोटी बूँदें थी. अब उसे सब कुछ याद आ गया था. उसकी नयी यादों में जिसमे वो हमेशा से औरत थी, वो कभी भी पुरुषो की तरफ आकर्षित नहीं थी… उसे कभी भी पुरुष के साथ सेक्स करने की इच्छा नहीं हुई थी. और वो पल जब उसने चैतन्य के साथ प्यार किया था, वो सिर्फ इसलिए था क्योंकि वो जानना चाहती थी कि क्या वाकई में वो पुरुष को पसंद नहीं करती है. अपने नए जीवन में भी सुमति पहले की तरह सिर्फ और सिर्फ औरतों की तरफ आकर्षित होती थी. शायद इसलिए वो चैतन्य पर हावी होकर सेक्स करती थी ताकि वो हर तरह से देख ले कि उसे कोई आदमी सुख दे सकेगा या नहीं. भले अपने नए सच को जानने के लिए उसने चैतन्य का इस्तेमाल किया था पर उन पलों में चैतन्य सुमति के साथ भावुक रूप से जुड़ गया था.

एक औरत के रूप में नयी ज़िन्दगी इतनी सुन्दर भी नहीं होगी जितना सुमति ने सोची थी. आज दुनिया में हर कोई सुमति को सिर्फ और सिर्फ एक औरत के रूप में ही जानता है. पर सिर्फ सुमति ये सच जानती है कि वो एक पुरुष के रूप में जन्मी थी और कल तक एक आदमी थी. वो असली जीवन में एक क्रोस-ड्रेसर थी. पर अब इस नयी दुनिया में तो उस आदमी के अस्तित्व के बारे में भी किसी को नहीं पता. न जाने ये कैसी माया कैसा जादू था… सुमति अब तक नहीं समझ सकी थी इस बात को. पर एक बात वो समझ गयी थी. भले ही तन से वो आज एक पूरी औरत थी पर दिल-दिमाग से वो आज भी कल तक वाली आदमी थी जो एक क्रॉसड्रेसर था. उसका दिमाग भले स्त्रियों की हर चीज़ की तरफ आकर्षित था, वो सब कुछ औरतों की तरह करना चाहती थी पर शारीरिक रूप से भी वो सिर्फ औरतों के तरफ आकर्षित थी…. पुरुष की तरफ नहीं. अब इस नयी दुनिया में वो एक अच्छी बहु तो बन सकती थी पर कभी एक अच्छी पत्नी नहीं बन सकती थी. वो जानती थी कि भले वो घर एक कुशल गृहिणी की तरह संभाल सकती थी पर वो कभी अपने पति को तन का सुख नहीं दे सकती थी. ये औरत का शरीर जो एक घंटे पहले तक एक वरदान लग रहा था … अब सुमति को वही तन एक श्राप लग रहा था. इस नए सच को जानकर सुमति की आँखों से अश्रुधरा बह निकली. क्या एक क्रॉसड्रेसर के रूप में उसकी ज़िन्दगी इस औरत की ज़िन्दगी से बेहतर थी? ये सवाल रोती हुई सुमति के मन में घूम रहा था.

क्रमश: …

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इंडियन लेडीज़ क्लब: भाग ९

हर क्रोसड्रेसर का एक सपना होता है कि वो एक दिन दूल्हन की तरह सजे. जितना मज़ेदार दुल्हन बनना होता है, उतना ही मज़ा दुल्हन की शौपिंग करने में आता है. और सुमति वो सुख पाने वाली थी. आज वो उन दुकानों में जायेगी जहाँ रंग बिरंगी साड़ियाँ उसे दिखाई जाएँगी.


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किसी दिन दुल्हन बनने का हर क्रॉस-ड्रेसर का सपना होता है. और उसके लिए साड़ी खरीदने जाना तो होने वाली दुल्हन के लिए सबसे यादगार पलो में एक होता है!

हर क्रॉस-ड्रेसर का एक सपना होता है कि किसी दिन वो भी सोलह श्रृंगार करके दुल्हन बनेगी. जहाँ दुल्हन बनना अपने आप में एक अप्रतिम सपना है, उतना ही यादगार होता है एक दुल्हन के कपड़ो के लिए शौपिंग करना. वो ख़ुशी जो उन दुकानों में मिलती है जहाँ रंग-बिरंगी चमचमाती महँगी साड़ियाँ और लहंगे सजे होते है, जहाँ औरतें अपने जीवन के सबसे यादगार दिन के लिए कपडे खरीद रही होती है, वो ख़ुशी भी अलग ही होती है. वहां होने वाली दुल्हन को सबसे महँगी साड़ियों को छूने मिलता है जो वो अपने जीवन में फिर कभी नहीं पहनती. उन साड़ियों को छूकर पकड़ कर, और फिर दूसरी औरतों से बातें करते हुए उनकी शादी के दिन के किस्से सुनती हुई होने वाली दुल्हन सबके ध्यान का केंद्र होती है. आखिर कैसे भूल सकती है कोई वो अनुभव? शादी के दिन के लिए होने वाली दुल्हन सबसे भारी, सबसे सुन्दर, सबसे चमकीली, और सबसे महँगी साड़ी और लहंगा ट्राई करके देखती है उन दुकानों में. और आसपास की सभी औरतें होने वाली दुल्हन को सब करते निहारती है.. उसकी सुन्दरता को देख आन्हें भरती है. हर बार जब दुल्हन नया लिबास पहनती है तो सभी औरतों की आँखें चमक उठती है. फिर कोई तारीफ़ करती है या कोई नुख्स निकालती है पर दुल्हन सबकी बातें सुनकर बड़ी सी मुस्कान के साथ शर्माती भी है. उसका चेहरा ख़ुशी से दमक रहा होता है, और सभी औरतें उस दुल्हन की तरह अपने दिनों को भी याद करती है. दुर्भाग्य से ऐसा मौका सभी क्रॉसड्रेसर को नहीं मिलता. पर सुमति, वो ये सब कुछ अनुभव करने वाली थी जो उसके जान पहचान की किसी भी क्रॉसड्रेसर को अनुभव करने नहीं मिला था.

ऐसा नहीं था कि सुमति कभी साड़ी की दूकान नहीं गयी थी. पर हर बार वो वहां उस आदमी के रूप में गयी थी जो अपनी पत्नी, गर्लफ्रेंड या माँ के लिए साड़ी लेने का बहाना बनाता था. कई बार मुश्किल होता था सेल्स गर्ल को समझाना कि क्यों वो साड़ी चुनने में इतने नखरे दिखा रही है… कि आखिर उसे कौनसी और कैसी साड़ी चाहिए उसके बारे में उसे इतने अच्छे से पता है. सेल्स गर्ल जहाँ सोचती थी कि इस आदमी को साड़ी बेचना आसान होगा, वहीँ सुमति आदमी के रूप में भी किसी औरत से कम समय नहीं लेती थी. घंटो साड़ियाँ देखने के बाद ही एक साड़ी चुनती थी वो भी. पर आज उसे कोई बहाना करने की ज़रुरत नहीं है. क्योंकि आज वो ख़ुशी से कह सकती थी कि वो अपने लिए साड़ी खरीदने आई है. सोच कर ही वो इतना खुश थी कि वो तो भूल ही गयी थी कि वो दुल्हन एक मर्द के लिए बनेगी.

सुमति अब मार्किट की उस गली में थी जो शादी-ब्याह की साड़ियों की दूकान के लिए प्रसिद्ध थी. वो अपने सास-ससुर कलावती और प्रशांत के साथ चल रही थी. रोहित और चैतन्य उनके पीछे पीछे थे. वो इस गली में पहले भी आ चुकी थी. और हर बार वो दुकानों में सजे खुबसूरत लहंगे और साड़ियों को देख कर मोहित हो जाती थी. उसी की तरह उस वक़्त उस गली में न जाने कितनी होने वाली दुल्हने इकठ्ठा थी जो अपने परिवार के साथ खरीददारी करने आई थी. हवा में ही वो ख़ुशी साफ़ महसूस की जा सकती थी. सबके चेहरे पर वही ख़ुशी थी जो इस वक़्त सुमति और कलावती के चेहरे पर थी.

एक सेल्समेन खुद पर साड़ी चढ़ा कर औरतों को दिखा रहा था. एक आदमी के रूप में सुमति भी कई बार सोचा करती थी कि ये सेल्समेन कितना भाग्यशाली है!

चलते चलते सुमति ने वहां एक छोटी सी दूकान में झाँक कर देखि तो वहां एक सेल्समेन कुछ औरतो को साड़ियाँ दिखा रहा था. वो साड़ी में प्लेट बनाकर अपनी कमर पर लगाकर उन औरतों को दिखा रहा था कि पहनने पर वो साड़ी कैसी दिखेगी. और औरतें ख़ुशी से उस साड़ी को छूकर देख रही थी कि आखिर वो साड़ी उनकी पसंद की है या नहीं. सुमति यह सब देखकर मुस्कुराने लगी. उसे याद आ रहा था कि कैसे कई बार वो सोचा करती थी कि काश वो भी इस तरह की सेल्समेन होती तो वह भी दिन भर उन खुबसूरत साड़ियों के बीच रहती. और फिर ख़ुशी से उन साड़ियों को अपने तन पर लपेट कर दिखाती.

बढ़ते बढ़ते वो सभी कई दुकानों के सामने से गुज़रे और वो सोच रही थी कि आखिर कहाँ से शुरुआत की जाए.
इतनी सारी दुकानें जो थी और सभी के पास एक से एक दुल्हन के लिए कपडे थे. यदि मैं हर दूकान में जाकर वहां की साड़ियों को देख कर अपनी चॉइस तय करने जाऊ तो मुझे तो कई दिन लग जायेंगे! मुझे तो लगता था कि मुझे पता है मुझे कौनसी साड़ी पसंद आएगी पर इतनी सारी सुन्दर साड़ियों को देख कर तो मेरा सभी को ट्राई करने का मन कर रहा है. मुझे साड़ी लेना चाहिए या लहंगा? मैं तो यह भी तय नहीं कर पा रही हूँ. क्या मुझे दोनों ट्राई करना चाहिए कुछ तय करने के पहले? नहीं नहीं… वैसे तो और भी समय लग जाएगा. मुझे तो साड़ी पर ही ध्यान लगाना चाहिए. ऐसे ही विचार सुमति के मन में चल रहे थे.

“सुनो जी, मैं तुमसे कहे देती हूँ कि आज मैं खर्चे में कोई समझौता नहीं करूंगी. आखिर एक ही बहु है मेरी और उसे जो पसंद होगा वो वोही खरीदेगी. चाहे कितनी भी कीमत हो. समझ रहे हो न?”, कलावती, सुमति की सास, ने अपने पति प्रशांत से कहा.

“अरे कलावती जी. तुम्हारी तरह मेरी भी एक ही बहु है. मैंने तुमसे कब कहा कि मैं इस ख़ास अवसर पर कंजूसी करूंगा? तुम भी न हद ही कर देती हो अपनी बातों से”, प्रशांत ने कहा. उन दोनों की बातें सुनकर रोहित और चैतन्य मुस्कुराने लगे.

“ठीक है जी. पर ये तो बताओ कि हम वहां जा रहे है या नहीं?”, कलावती ने पूछा. “हाँ मेरी पत्नी. हम उसी दूकान में जा रहे है जो तुम्हे सबसे ज्यादा पसंद है.”, प्रशांत ने जवाब दिया.

उस गली में एक से बढ़कर एक दुकानें थी होने वाली दुल्हनो के लिए पर एक दूकान थी जो सबसे अलग थी. और जब सुमति उस दूकान के सामने पहुची तो वहां सजी हुई डिज़ाइनर साड़ियों को निहारने से वो खुद को रोक न सकी. वो सोचने लगी कि काश कलावती ने यही दूकान पसंद की हो. उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा जब प्रशांत ने कहा, “तो अब चले अन्दर? या यूँ ही बाहर से ही दूकान को देखती रहोगी?” सुमति की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ रहे थे और वो मानो प्रशांत से कहना चाहती थी, “धन्यवाद् पिताजी”. पर जो शब्द ज़बान पर न आ सके वो उसकी आँखों ने कह दिया था.

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उस गली की अनगिनत दुकानों में एक दूकान थी जो सबसे अलग और सबसे अद्भुत थी. सुमति को तो यकीन ही नहीं हुआ कि उसके सास-ससुर उसे यहाँ खरीददारी के लिए ले जा रहे थे.

एक बार दूकान के अन्दर जाने के बाद, उन सबको वहां एक महिला ने अपने साथ अन्दर ले गयी जहाँ निचे कुछ गद्दे बिछे हुए थे और कई सारे कपडे दिखाने वाले लोग बैठे हुए थे. सुमति कलावती के साथ अपने पैर पीछे की ओर मोड़ कर बैठ गयी, उसकी कमर बिलकुल सीधी थी और उसके हाथ उसकी जांघो पर थे. उसे हमेशा से पता था कि एक औरत की तरह कैसे बैठा जाता है, और फिर इस नए शरीर में तो यह और भी आसान लग रहा था. आदमी और औरत के तन में कुछ तो फर्क होता है. लचीली कमर और बड़े कुल्हो के साथ एक औरत के लिए निचे बैठना ज्यादा आसान होता है. अब जब शौपिंग का काम शुरू हो गया था, सुमति थोडा शर्माने लगी थी. कलावती बस एक मात्र औरत थी जो उसके साथ थी ताकि सुमति को ३ आदमियों के बीचे अकेलापन न महसूस हो. वैसे भी साड़ी खरीदने में बहुत समय लगता है और आदमी ऐसे में काफी अधीर हो जाते है. पर जब कलावती साथ थी तो अब सुमति चैन से साड़ी देखने में समय लगा सकती थी. आखिर उसकी शादी की साड़ी जो खरीदनी थी… उसमे तो समय लगाना ही था.

“कुछ दुल्हन की साड़ियाँ दिखाइये प्लीज़. रंग नारंगी से मैरून के बीच होना चाहिए, लाल हो तो बेहतर होगा.”, कलावती ने दुकानदार से कहा. “ज़रूर मैडम. साड़ी दिखाऊँ उसके पहले कुछ ठंडा ले लीजिये. मैं आपको हमारे यहाँ की सबसे बेहतरीन साड़ियाँ दिखाऊँगा. वैसे आपने कुछ कीमत सोच रखी है?”, दुकानदार ने पूछा.

“आप कीमत की मत सोचिये, बस बेहिसाब महँगी साड़ियाँ भी मत दिखियेगा”, कलावती ने गर्व के साथ कहा.

“जी मैडम”, दुकानदार बोला और अन्दर जाकर कुछ साड़ियाँ लेकर वापस आया और फिर शुरू हुआ साड़ी दिखाना. “मैडम ये कांचीपुरम सिल्क साड़ी है. ये दक्षिण भारत में काफी प्रसिद्ध है शादियों के लिए.” सुमति की आँखों के सामने मैजंटा रंग की रिच सिल्क साड़ी थी जिस पर फुल और मंदिर के डिजाईन थे जो सुनहरे धागों से बुने गए थे. और उसके साथ एक भारी सा ब्लाउज पीस भी था जिसमे बड़ी सुन्दर एम्ब्रायडरी की गयी थी. कोई भी औरत उस साड़ी को पहन कर किसी महारानी से कम न समझती खुदको. दक्षिण भारतीय साड़ी होती ही क्लासिक है. छूते ही एक लक्ज़री का एहसास होता है. उस साड़ी के सामने तो सुमति की अभी की पहनी हुई साड़ी बहुत फीकी मालूम पड़ रही थी.

“मैडम, ये दूसरा सैंपल गोटा पट्टी वाली साड़ी है जो जोर्जेट के कपडे पर बनी है. ये हमारे एरिया में बहुत पोपुलर है शादियों के लिए.”, दुकानदार ने दूसरी साड़ी दिखाई. दो रंग वाली… एक नारंगी और एक चमकीला गुलाबी. ज़री, सेक्विन, पत्थर और एम्ब्रायडरी से सजी हुई भारी साड़ी… भले वो सिल्क न हो पर वो भी एक राजसी साड़ी थी. “क्या मैं इसे छूकर देख सकती हूँ?”, सुमति ने थोडा संकोच करते हुए पूछा. “ज़रूर मैडम. आप छूकर नहीं देखेंगी तो पसंद कैसे करेंगी?”, दुकानदार बोला.

“वाह… ये तो बहुत भारी है.”, सुमति के नाज़ुक हाथ जैसे उस साड़ी के वजन को संभाल न सके. “हम्म.. कल तक तो ऐसी भारी साड़ी मैं बखूबी संभाल सकती थी”, सुमति सोच रही थी. अब उसे समझ आ रहा था कि औरतें क्यों कई बार साड़ी के भारी होने की शिकायत करती है.

“हाँ बेटा. ये गोटा पट्टी वाली साड़ियाँ ऐसे ही भारी होती है. पर किसी महल की महारानी से कम नहीं लगोगी यदि तुम इसे पहनो तो.”, कलावती ने कहा.

सुमति को ये सब तो पहले से ही पता था. आखिर इन्टरनेट पर दुल्हन की साड़ी ढूंढ कर देखना उसका फेवरेट शौक था. जब समय मिलता वो देखती रहती कि क्या फैशन में चल रहा है. वो साड़ी सच मच अद्भुत थी, पर उसे दो टोन के रंग वाली साड़ियाँ ज्यादा पसंद नहीं थी. उसे तो एक रंग की ही साड़ी चाहिए थी.

फिर दुकानदार ने अगला सैंपल दिखाया और बोला, “मैडम ये ज़र्दोसी स्टाइल है. ये …”

“नहीं नहीं… मुझे ज़रदोज़ी साड़ी नहीं चाहिए. क्या आप गोटा पत्ती वाली ही साड़ियाँ दिखा सकते है जो ऐसे दो टोन वाली न हो?”, सुमति बोली.

“सुमति को तो पहले ही पता है उसे क्या चाहिए.”, चैतन्य हस दिया.

“ऑफ़ कोर्स, मेरे होने वाले पतिदेव”, सुमति भी चैतन्य के साथ हँस दी.. आखिर चैतन्य उसका बचपन का दोस्त था. “अच्छा तुमको पता है तुम्हे क्या चाहिए तो ये तो अच्छी बात है. शौपिंग जल्दी निपट जायेगी.”, चैतन्य ने कहा.

पर भला शादी की खरीददारी इतने जल्दी पूरी होती है भला. सुमति और कलावती करीब करीब ३.५ घंटे तक साड़ियाँ देखती रही. दोनों औरतों ने कई साड़ियाँ ट्राई भी की और फिर उसके बारे में विस्तार से बात भी की. कुछ नहीं तो ५०-६० साड़ियाँ तो उन्होंने देख ही ली होंगी. पर हर साड़ी में कोई एक कमी रह जाती थी जो किसी और साड़ी में पूरी हो जाती. पर फिर दूसरी साड़ी में कुछ और कमी रहती. ऐसा नहीं था कि वो साड़ियाँ खुबसूरत नहीं थी… सभी अच्छी थी पर शादी की बात है! और शादी की साड़ी परफेक्ट होनी चाहिए आखिर इतने पैसे जो खर्च करती है औरतें उस पर. तो उस साड़ी में कोई भी कमी उन्हें बर्दाश्त नहीं होती. बेचारे आदमी वहां बैठे बैठे अब बस उंह रहे थे. इस इंतज़ार में कि कब एक साड़ी फाइनल हो और वो दूकान से बाहर निकले.

आखिर वो पल आ ही गया जब सुमति ने कहा, “मैं कैसी लग रही हूँ इस साड़ी में?” सुमति ने सभी से पूछा और उसकी आँखों में एक आशा की किरण थी. उसने हॉट पिंक रंग की एक साड़ी पहनी थी. औरतों की आँखें भी न रंगों में भेद करना बखूबी जानती है. जैसे फूचसिया पिंक, हॉट पिंक, बेबी पिंक, नीऑन पिंक, और न जाने कितने ही गुलाबी के शेड. जबकि आदमी के लिए ये सभी रंग सिर्फ गुलाबी होते है. “माइंड ब्लोविंग लग रही हो सुमति दीदी. ज़बरदस्त है ये साड़ी”, रोहित ने कहा. उसकी बहन सचमुच खिल रही थी उस साड़ी में.

“अब तो पक्का है मेरी सुन्दर बहु यही साड़ी पहनेगी अपनी शादी में!”, कलावती बोली. “इससे बेहतर तो और कोई नहीं हो सकती बेटी.”, प्रशांत ने भी अपनी मुहर लगा दी.

“मैं तो अब बस इंतज़ार करूंगा उस दिन का जब तुम इसे पहनकर सजोगी!”, चैतन्य ने कहा.

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एक औरत को उसकी शादी के दिन कई बार कपडे बदलने होते है. उस दिन न सिर्फ एक साड़ी बल्कि एक लहंगा भी चाहिए होता है.

सुमति सबके मुंह से तारीफ़ सुनकर फिर शर्माने लगी. पर आखिर में साड़ी तय हो ही गयी.

“अब जब साड़ी चुन ली है तो अब लहंगा चोली देखा जाए?”, कलावती ने कहा.

“क्या? अब भी और खरीददारी बाकी है?”, चैतन्य ने चौंक कर कहा. “हाँ बेटा! शादी के पूरे दिन वो सिर्फ एक साड़ी पहन कर थोड़ी रहेगी. हर कार्यक्रम में एक अलग चीज़ पहननी होती है. आज तो हम लोग सिर्फ एक लहंगा चोली और खरीदेंगे, रिसेप्शन के अवसर के लिए. बाकी अवसर के कपडे सुमति खुद खरीद लेना तुम बाद में.”, कलावती ने लगभग चैतन्य को डांट ही दी थी उसकी अधीरता के लिए.

“ज़रा धीरज रखो चैतन्य जी. माँ, मुझे पता है मुझे कौनसा लहंगा चाहिए. साड़ियाँ देखते वक़्त मेरी नज़र वहां टंगे लहंगो पर थी, और उसमे से एक ही है जो मुझे पसंद आया है. मैं उसे लेकर पहनकर बस अभी आई.”, सुमति ने कहा.

और थोड़ी ही देर में सुमति चेंजिंग रूम से एक लाल रंग की लहंगा चोली पहन कर वापस आई. स्लीवलेस चोली और उस लहंगे में उसकी हलकी गोरी त्वचा दमक रही थी. इतनी सुन्दर लग रही थी वो कि देखते देखते आन्हें निकलने लग जाए.

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सुमति ने अपनी सैंडल पहन कर लहंगे की लम्बाई चेक की..

“नज़र न लगे मेरी बहु को.”, कलावती ने सुमति के आते ही उसे गले से लगा ली. “सुमति बेटा, ज़रा अपनी हील वाली सैंडल भी पहनकर देख लो कि लहंगे की लम्बाई सही है या नहीं”, कलावती ने फिर कहा. और सुमति ने वही किया. “हम्म.. बस अब चोली तुम्हारे साइज़ से सिलवानी पड़ेगी. वैसे सच कहूं बेटा तो अब तो पूरे शहर की औरतों के बीच मैं अब सबको ख़ुशी से बता सकूंगी कि सबसे सुन्दर बहु मेरी है”, और कलावती की बात सुनकर सब हँस पड़े.

और सबको हँसते हुए देख सुमति सोच रही थी, “यकीन नहीं होता कि मैं दुल्हन बनने वाली हूँ!” पर इस ख़ुशी में वो एहसास नहीं कर पा रही थी कि एक औरत के रूप में शादी करने के क्या मायने होते है. और उसे आगे क्या क्या नया देखना होगा इस नए जीवन में. उसके पास यह सब सोचने का समय ही कहाँ था. और वैसे भी अभी तो बस अपनी शादी के दिन सज-संवर कर दुल्हन बनने के बारे में ही सोच सोच कर खुश हो रही थी वो. एक तरह से वो भगवन को भी धन्यवाद दे रही थी कि उसे इतने अच्छे सास-ससुर मिले. ऐसी सास जो सुमति को बेटी की तरह चाहती थी. पर एक बात जो सुमति इस वक़्त नहीं सोच रही थी, या फिर वो जिस बारे में सोचना नहीं चाह रही थी, वो यह थी कि वो एक आदमी से शादी करने जा रही थी. एक आदमी से! क्या वो पत्नी बनने को तैयार थी? क्या वो अपना तन-मन सब कुछ एक आदमी को समर्पित कर देगी? क्या वो अब तक सिर्फ महिलाओं के प्रति आकर्षित नहीं हुआ करती थी? तो फिर कैसे एक आदमी से शादी करेगी वो? इन सब सवालों के बारे में सोचने के लिए उसे एकांत चाहिए था जो अब तक उसे मिला नहीं था.

खरीददारी के बाद प्रशांत और कलावती ने सुमति को बताया कि वो लगभग २ घंटे में आज ही अपने छोटे से शहर वापस जा रहे है. रोहित, जो उसी शहर में रहता था, वो भी उन्ही के साथ वापस जाने को तैयार हो गया था. समय कम था और सभी को भूख लग रही थी तो सबने तुरंत खाना खाने के लिए एक पास ही के भोजनालय को चुना. उस दिन सभी बेहद खुश थे. सुमति भी. और चैतन्य भी इस बात से खुश था कि सुमति बेहद खुश है. वो तो खुद को दुनिया का सबसे भाग्यवान आदमी समझता था जो उसे सुमति जैसी पत्नी मिल रही थी. वैसे किसी भी लड़के को ख़ुशी मिलती है जब उसकी होने वाली पत्नी उसके माता पिता के साथ इस तरह से घुल-मिल जाए जैसे सुमति मिल गयी थी. सुमति ज़रूर अच्छी बहु बनेगी. पर क्या वो अच्छी पत्नी बन सकेगी? ये तो समय ही बताएगा.

खाना खाने के बाद, सुमति और चैतन्य सभी के साथ रेलवे स्टेशन आ गए थे जहाँ से रोहित, प्रशांत और कलावती ट्रेन लेकर जाने वाले थे. सुमति ने अपने भाई को गले लगाकर विदा दी. सुबह के मुकाबले अब उसके और रोहित के बीच उसे कुछ भी अजीब न लगा. उसे ख़ुशी थी कि आज रोहित उसके साथ था वरना नए परिवार के बीच वो अकेले रह जाती. सुबह से अब तक कुछ घंटे ही बीते थे पर इतनी देर में ही सुमति अब कुछ अलग तरह से सोचने लगी थी. वो बहुत भावुक हो रही थी आज. और भाई को विदा करते हुए उसकी आँखों में आंसू थे. “जल्दी आना रोहित”, उसने रोहित से कहा. और फिर उसके गालों को खींचते हुए बोली, “घर में माँ-पिताजी की मदद करना और माँ से कहना कि मैं जल्दी ही आऊंगी शादी की तैयारियों में हाथ बंटाने” सुमति शायद एक अच्छी बेटी भी थी.

रोहित से अलग होकर अब सुमति ने अपने सर पर पल्लू किया और फिर चैतन्य के साथ ही झुककर अपने सास-ससुर के पैर छुए. “जीती रहो. भगवान तुम दोनों के बीच का प्यार और भी बढाए.”, प्रशांत ने सुमति को आशीर्वाद देते हुए कहा. और कलावती ने तो एक बार फिर प्यार से अपनी बहु को गले लगा ली.

जल्दी ही प्रशांत, कलावती और रोहित ट्रेन में चढ़ गए और ट्रेन रेलवे प्लेटफार्म छोड़ कर जा चुकी थी. अब बस रह गए थे सुमति और चैतन्य. दोनों ने एक दुसरे की आँखों में देखा और मुस्कुरा दिया. चैतन्य ने सुमति के सर से पल्लू को निचे उतारा और अपने हाथो में पकड़ लिया. सुमति ने उससे कुछ कहा नहीं और बस मुस्कुरा दी. चैतन्य के साथ उसे बहुत सहज लग रहा था. चैतन्य वोही तो था जिसे वो न जानते हुए भी जानती थी… उसके बचपन का बेस्ट फ्रेंड… वो दोनों साथ में एक दुसरे का हाथ थामे बाहर पार्किंग लॉट में चैतन्य की कार की ओर बढ़ चले.

क्रमश: …

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< भाग ८ भाग १० >

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इंडियन लेडीज़ क्लब: भाग ८

औरत का बदन भी एक पहेली की तरह होता है. सुमति अपने नए बदन को छूकर उसे अनुभव करना चाहती थी. उसके नाज़ुक कोमल स्तन, उसका फिगर, उसकी नाभि और जांघें, वो सबको छूकर महसूस करना चाहती थी.


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औरत का बदन भी एक पहेली की तरह होता है जिसे सुलझाना होता है. हर एक अंग पर स्पर्श एक बिलकुल अलग अहसास उस औरत में जगाता है. तभी तो आदमी औरत को हर जगह छूना चाहते है क्योंकि हर स्पर्श से वो औरत कुछ नए अंदाज़ में लचकती है, मचलती है. और सुमति के लिए तो ये स्पर्श का आनंद कुछ अधिक ही था. अब तो वो खुद एक औरत के जिस्म में थी. अपने खुद के स्पर्श से ही उसे आनंद मिल रहा था जैसा उसने पहले कभी अनुभव नहीं की थी. और इसलिए उसके अन्दर खुद को छूकर देखने की जिज्ञासा बढती जा रही थी. वो धीरे धीरे अपने तन पर अपनी उँगलियों को सहलाते हुए अपने हर अंग में छुपे हुए आनंद को भोगना चाहती थी. उसकी नजाकत भरी लचीली कमर, उसे संवेदनशील स्तन और जांघे, सब जगह वो छूना चाहती थी. पर किसी तरह वो खुद को संभाले हुई थी. अभी तो फिलहाल वो तैयार होकर खुद को आईने के सामने निहार रही थी. हलकी हरी रंग की साड़ी में बहुत खिल रही थी वो आज. एक तरह से उसका सपना सच हो गया था. वो हमेशा से ही इस दुनिया में एक औरत की तरह स्वच्छंद तरीके से विचरण करना चाहती थी, और आज वो एक असली औरत थी. आज वो अपने इस रूप को , इस जिस्म को घंटो आईने में निहार सकती थी और एक पल को भी बोर न होती. आज उसकी बस एक ख्वाहिश थी कि समय कुछ पलो के लिए थम जाए और वो अपने बदन और इस नए वरदान का सुख भोग सके.

सुमति अपनी साड़ी में बहुत सुन्दर लग रही थी. वो आज अपने तन को छूकर महसूस करना चाहती थी. यदि आप भी सुमति की तरह खुबसूरत औरत होती, तो आप क्या करती?

सुमति ने अपनी खुली कमर को एक बार अपनी नर्म ऊँगली से छुआ. “उफ़… खुद की ऊँगली से ही मुझे एक गुदगुदी सी हो रही है.”, उसने सोचा. सुमति खुद अपने ही तन के रोम रोम में छुपे आनंद से अब तक अनजान थी. उसके खुद के स्पर्श से एक ऐसा एहसास हो रहा था उसे जो उसे मचलने को मजबूर कर रहा था. वो अपनी मखमली त्वचा पर धीरे धीरे अपनी उँगलियों को फेरने लगे. अपने पेट पर, अपनी नाभि पर और फिर धीरे धीरे अपने स्तनों के बीच के गहरे क्लीवेज की ओर. उसने अपनी आँखें बंद कर ली ताकि वो हर एक एहसास को और अच्छी तरह से महसूस कर सके. “क्या मैं खुद अपने स्तनों को छूकर देखूं? न जाने क्या होगा उन्हें छूकर , उन्हें दबाकर?”, वो सोचने लगी. बाहरी दुनिया से खुद को दूर करके सुमति सिर्फ और सिर्फ अपने अन्दर होने वाली हलचल को अनुभव करने में मग्न हो रही थी. और फिर उसने अपनी कुछ उंगलियाँ अपनी साड़ी के निचे से अपने स्तनों पर हौले से फेरी. स्पर्शमात्र से ही उसके जिस्म में मानो बिजली दौड़ गयी और वो उन्माद में सिहर उठी. और उस उन्माद में खुद को काबू करने के लिए वो अपने ही होंठो को जोरो से कांटना चाहती थी.. क्योंकि अपने एक स्तन को अपने ही हाथ से धीरे से मसलते हुए वो बेकाबू हो रही थी. उसके तन में मानो आग लग रही थी. वो रुकना चाहते हुए भी खुद को रोक नहीं पा रही थी. मारे आनंद के वो चीखना चाहती थी. उसकी बेताबी बढती ही जा रही थी. उसकी उंगलियाँ उसके स्तन और निप्पल को छेड़ रही थी… और फिर उसकी उंगलियाँ उसके निप्पल के चारो ओर गोल गोल घुमाकर छूने लगी. “आह्ह्ह…”, वो आन्हें भरना चाहती थी पर उसे अपनी आन्हें दबाना होगा. उसकी उंगलियाँ अब जैसे बेकाबू हो गयी थी और उसके निप्पल को लगातार छेड़ रही थी. अब उसकी उंगलियाँ उसके निप्पल को पकड़ कर मसलने को तैयार थी. निप्पल दबाकर न जाने कितना सुख मिलेगा, यह सोचकर ही अब बस वो अपने होंठो को दबाते हुए अपने निप्पल को मसलने को तैयार थी.

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सुमति खुद को संभाल न सकी, और वो अपने ही नर्म मुलायम सुडौल स्तनों को दबाने को बेताब थी. सिर्फ सोच कर ही वो मचल उठी थी..

“डिंग डोंग”, दरवाज़े पर घंटी बजी. आज सुबह से ही घंटी बार बार बज रही थी और हर बार वो घंटी उसके लिए एक नया अनचाहा सरप्राइज लाती थी. पर इस बार इससे सही वक़्त पर घंटी नहीं बज सकती थी. घंटी न बजती तो वो बेकाबू होकर अपने निप्पल को निचोड़ कर मचल उठती और आन्हें भरने लगती, अपने ही होंठो को जोर से कांटने लगती. अपने ही होंठो को कांटना एक पुरुष के रूप में उसे कभी सेक्सी नहीं लगा… पर औरत के रूप में वो बात ही अलग थी. शुक्र था उस घंटी का जिसने उसे अपने ही बदन के जादू से बाहर निकाला.

सुमति सुन सकती थी कि किसी ने दरवाज़ा खोल दिया था तब तक. “नमस्ते अंकल| नमते आंटी! आइये आइये आप ही का इंतज़ार था”, सुमति अपने भाई रोहित की आवाज़ सुन रही थी. आखिर सुमति के सास-ससुर आ ही गए थे. उसने झट से अपने बालो को पीछे बाँधा और उनसे मिलने के लिए बाहर जाने को तैयार हो गयी. “मुझे जल्दी करनी होगी. वरना उन्हें अच्छा नहीं लगेगा कि उनकी होने वाली बहु उनके स्वागत के लिए बाहर तक नहीं आई. पर क्या मुझे यह फिक्र करनी चाहिए? एक औरत को तैयार होने में हमेशा से ज्यादा समय लगता है.. ये तो वो भी जानते होंगे.”, सुमति यह सब सोचते हुए अपने पल्लू और अपनी साड़ी को एक बार ठीक करते हुए पल्लू को हाथ में पकडे बाहर के कमरे की ओर जाने लगी. उसने अपने हाथों से पल्लू को पीठ पर से अपने दांये कंधे पर से सामने खिंच कर ले आई ताकि उसके स्तन और ब्लाउज को छुपा सके. सुमति एक पारंपरिक स्त्री की तरह महसूस कर रही थी इस वक़्त. उसने एक बार चलते हुए खुद को आईने में देखा. “साड़ी तो ठीक लग रही है. शायद रोहित और चैतन्य की तरह मेरे सास-ससुर को भी याद न होगा कि मैं कभी लड़का थी. बहुत संभव है कि मैं उन्हें पहले से जानती हूँ. शायद वो चैताली के माता पिता होंगे. (सुमति की शादी चैताली नाम की लड़की से होने वाली थी. पर इस नए परिवर्तन के बाद चैताली चैतन्य बन चुकी थी.)”, सुमति खुद से बातें करने लगी. सुमति को साड़ी पहन कर शालीनता से चलना पहले से ही आता था. आखिर वो इंडियन लेडीज़ क्लब की फाउंडर थी. उसने न जाने कितने ही आदमियों को सुन्दर औरत बनाया था. इन सबके बाव्जूद, अब वो खुद एक पूरी औरत है, इस बात का उसे यकीन नहीं हो रहा था, और फिर चैताली, उसकी होने वाली पत्नी, अब आदमी बन चुकी थी. किसे यकीन होगा ऐसी बातों का?

सुमति अपने कमरे से बाहर आई. उसके सास-ससुर सोफे के बगल में अब तक खड़े खड़े रोहित और चैतन्य से बातें कर रहे थे. सुमति सही थी… उसके सास-ससुर चैताली के ही माता पिता थे. कम से कम ये नहीं बदला. उसने उन्हें देखा और तुरंत ही अपने सर को अपने पल्लू से ढंकती हुई उनके पैर छूने के लिए झुक गयी. जैसे कोई भी आदर्श बहु करती. एक तरफ तो सुमति चैतन्य से शादी नहीं करना चाहती थी पर फिर भी उसे बहु बनने में जैसे कोई संकोच न था.

“जुग जुग जियो बेटी!”, उसके ससुर प्रशांत ने उसे आशीर्वाद दिया. “बेटी तुम्हारी जगह मेरे कदमो में नहीं मेरे दिल में है.”, उसकी सास कलावती ने नज़र उतारते हुए सुमति को फिर गले से लगा लिया. गले लगाते ही सुमति को माँ का प्यार महसूस हुआ. सुमति के चेहरे पर एक ख़ुशी भरी मुस्कान थी. उसे ऐसा अनुभव तो मधुरिमा के साथ भी होता था जो उसकी क्रॉस-ड्रेसर माँ थी. मधुरिमा की पत्नी अजंता भी तो सुमति को अपनी बेटी की तरह रखते थे. सुमति को आज भी याद आता है कि कैसे अजंता आंटी कहती थी कि उन्हें तो सुमति की तरह बहु चाहिए. शायद मधु और अजंता के साथ का अनुभव था जो आज सुमति सहज रूप से अपने सास-ससुर के सामने थी.

“माँ, बाबूजी, आप लोग बैठ कर थोड़ी देर आरम करिए. आप यात्रा करके थक गए होंगे. मैं तुरंत ही आप लोगो के लिए नाश्ता बनाकर लाती हूँ.”, सुमति ने प्रशांत और कलावती से कहा. पर मन ही मन वो सोच रही थी कि उसने ये सब क्यों कह दिया. उसका इस वक़्त कुछ भी पकाने का मन नहीं था. “रोहित, ज़रा माँ-बाबूजी का ध्यान रखना. मैं किचन में नाश्ता बनाती हूँ. तब तक तुम उन्हें पीने के लिए पानी तो लाकर दो.”, सुमति ने अपने भाई से कहा. और भाई ने सर हिलाकर हामी भर दी.

जब सुमति किचन की ओर बढ़ रही थी तो उसकी नज़रे चैतन्य की नजरो से मिली, उसका होने वाला पति, उसका मंगेतर! चैतन्य अपनी होने वाली खुबसूरत पत्नी को देख मुस्कुरा रहा था. सुमति भी उसे देख मुस्कुरा दी. “हम्म… इस आदमी के साथ मुझे अपनी पूरी ज़िन्दगी गुजारनी है.”, वो सोचने लगी. एक आदमी से शादी करने की बात सोच कर ही उसका मन विद्रोह करने लगता. उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे इस बात से खुश होना चाहिए या रोना चाहिए. फिलहाल तो मन रोने को तैयार था, पर अब उसके पास एक खुबसूरत औरत का तन भी तो था. एक मौका जिसके लिए लिए वो सारी ज़िन्दगी प्रार्थना करती रहती थी कि उसे औरत की तरह जीवन जीने का मौका मिल जाए. पर ये समय यह सब सोचने का न था. उसे अपने सास-ससुर के लिए नाश्ता बनाना था.. शादी के बारे में वो बाद में शान्ति से सोच लेगी.

किचन में पहुँचते ही उसने अपना पल्लू सर से उतार कर अपनी कमर पर लपेट लिया. उसकी नाज़ुक कमर सच में बेहद सेक्सी थी. उसके बड़े से नितम्ब पर लिपटी हुई साड़ी और पल्लू उसे वो एहसास दे रही थी जैसे उसने पहले कभी नहीं किया था. और फिर उसने अपने बालो को लपेटकर जुड़ा बनाया और नाश्ता बनाने में जुट गयी. सालों से इंडियन लेडीज़ क्लब की मीटिंग की तैयारी करने के अनुभव से उसे भली-भाँती पता था कि साड़ी पहन कर एक एक्सपर्ट हाउसवाइफ की तरह घरेलु काम कैसे किये जाते है. “पहले तो मैं चाय बनाने लगा देती हूँ और फिर पोहा बनती हूँ. वो जल्दी बन जाएगा.”, उसने खुद से कहा. सुमति सब कुछ एक परफेक्ट गृहिणी की तरह कर रही थी. उसने गैस पर चाय का बर्तन चढ़ाया और फिर प्याज और आलू काटने लगी पोहा बनाने के लिए.

“तो.. मेरी प्यारी बहु क्या नाश्ता बना रही है?”, कलावती सुमति की सास ने अन्दर आते हुए कहा.

“ओह कुछ ख़ास नहीं माँ जी. मैं तो बस पोहा बना रही थी आप लोगो के लिए. आशा है कि आप लोगो को पोहा पसंद है.”, सुमति ने प्यार से जवाब दिया. उसने तुरंत अपने पल्लू को कमर से निकाला और फिर अपने सर को ढकने लगी.. अपने सास के सम्मान के लिए. “लो… अब मुझे सर ढँक कर किचन में काम करना पड़ेगा..”, सुमति मुस्कुराते हुए सोच रही थी. उसने कभी इस तरह से तो खाना नहीं बनाया था.

“अरे पगली… रहने दे तुझे सर ढंकने की ज़रुरत नहीं. है. मैं भी औरत हूँ. क्या मैं नहीं जानती सर पे पल्लू करके खाना बनाना कितना कठिन है? न तो ढंग से कुछ दिखाई देता है और फिर हाथ भी अच्छी तरह पल्लू के साथ हिल नहीं पाते. तू तो मेरी बेटी है. बचपन से तुझे अपनी आँखों के सामने बड़ी होते देखा है… जबसे तू फ्रॉक पहना करती थी. तब से सलवार सूट तक तुझे बढ़ते देखा है. और अब तू साड़ी भी पहन रही है. मैं नहीं चाहती कि शादी के बाद तुझे बदलना पड़े.”, कलावती ने प्यार से सुमति के सर पर हाथ फेरते हुए कहा.

कलावती ने फिर सुमति के चेहरे को छूते हुए बोली, “मैं तो बहुत खुश हूँ कि मेरे मोहल्ले की सबसे प्यारी गुडिया सुमति जो मेरे बेटे के साथ खेला करती थी, मेरे घर की बहु बनने वाली है. मैं तो सिर्फ इस बारे में सोचा करती थी, मुझे पता नहीं था कि चैतन्य सच में तुझे बहु बनाकर लाएगा..”

सुमति की शर्म से आँखें झुक गयी. इतना प्यार जो उसे मिल रहा था. पर मन ही मन वो सोच रही थी कि कैसे उसके आस पास की दुनिया बदल गयी है. उसके सामने खड़ी औरत उससे कह रही है कि उसने सुमति को छोटी बच्ची से जवान युवती बनते देखा है. किसी को भी याद नहीं कि वो कभी लड़का भी थी. हर किसी की नज़र में वो हमेशा से ही लड़की थी. ऐसा कैसे हो सकता है? कैसा मायाजाल है ये? क्या इस दुनिया में कोई भी नहीं जो पुरानी सुमति को जानता हो? सुमति के मन में हलचल बढती जा रही थी.

कलावती फिर सुमति की पोहा बनाने में मदद करने लगी. दोनों औरतें आपस में खूब बातें करती हुई हँसने लगी. सुमति को औरत बनने का यह पहलु बहुत अच्छा लग रहा था. अपनी सास के साथ वो जीवन की छोटी छोटी खुशियों के बारे में बात कर सकती थी. ऐसी बातें जो आदमी हो कर वो कभी नहीं कर सकती थी. आदमी के रूप में सिर्फ करियर और ज़िम्मेदारी की बातें होती थी. ऐसा नहीं था कि औरतों को ज़िम्मेदारी नहीं संभालनी होती पर उसके साथ ही साथ वो अपनी नयी नेल पोलिश या साड़ी के बारे में भी उतनी ही आसानी से बात कर सकती थी. जॉब में प्रमोशन की बात हो तो उसके साथ वो फिर ये भी बात कर सकती थी कि प्रमोशन के बाद वो कैसी पर्स लेकर ऑफिस जाया करेंगी या कैसे कपडे पहनेंगी. जहाँ तक करियर की बात है, सुमति को कोई अंदाजा नहीं था कि इस नए जीवन में उसका क्या करियर है या क्या जॉब है. शादी के बाद वो काम कर सकेगी या नहीं? भले ही घर की छोटी छोटी चीजें वो संभालना चाहती थी पर वो अपनी जॉब नहीं छोड़ना चाहती थी… चाहे जैसी भी जॉब हों. और फिर क्या वो शादी के बाद माँ बनना पसंद करेगी? बड़ा भारी सवाल था जिसका जवाब अभी वो सोचना नहीं चाहती थी.

अभी तो सुमति बस खुश थी अपनी सास के साथ किचन संभालते हुए. वो वैसे भी घर संभालने में एक्सपर्ट थी. उसने जल्दी ही सबके लिए चाय नाश्ता तैयार कर ली थी. बाहर नाश्ता ले जाने के पहले सुमति एक बार फिर अपना सर ढंकने वाली थी कि कलावती ने उसे रोक लिया और बोली, “अरे सुमति तू हमारी बेटी है न? अपने माँ बाप के सामने भी कोई पल्लू करता है भला? समझी?” सुमति मुस्कुरायी. अपनी सास के प्यार से वो मंत्र-मुग्ध थी. “थैंक यू माँ! मैं हमेशा आपकी बात याद रखूंगी.” सुमति सचमुच कलावती के प्यार की शुक्र-गुज़ार थी.

सभी अब नाश्ता करने में व्यस्त थे, पर चैतन्य की नज़रे तो बस अपनी होने वाली खुबसूरत नाज़ुक सी पत्नी पर थी. जब भी सुमति उसकी ओर देखती, वो तुरंत मुस्कुरा देता. वो खुश था आखिर उसकी शादी उसकी बेस्ट फ्रेंड के साथ हो रही थी. कम से कम, उसकी नयी यादों में वो सच था. चैतन्य खुद चैताली नाम की लड़की हुआ करता था पर उसे वो बिलकुल भी याद नहीं था. सुमति के अन्दर थोड़ी सी झिझक थी चैतन्य की मुस्कान का जवाब देने के लिए. आखिर सास ससुर उसके सामने थे. कोई अच्छी बहु ऐसे कर सकती थी भला?

“सुमति… भाई मेरा तो पेट भर गया लज़ीज़ नाश्ता कर के. अब हमें शादी की शौपिंग के लिए निकलना चाहिए. मुझे पता है कि औरतों को कपडे खरीदने में बड़ा समय लगता है और ख़ास कर शादी के कपडे”, ससुर प्रशांत ने कहा. “अब तुम शुरू मत हो जाना जी औरतों के कपडे के बारे में… तुम्हे कुछ तो पता नहीं होता कि दुल्हन को कितनी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. बड़े आये बातें करने वाले.”, कलावती ने प्रशांत को टोका और सभी हँस पड़े.

अब सभी निकलने को तैयार थे. चैतन्य ने अपनी कार घर के दरवाज़े पर ले आया. उसके पिताजी उसके साथ सामने बैठ गए. और कलावती, सुमति और रोहित एक साथ पीछे. सुमति बीच की सीट में बैठी थी. अब तो उसकी हाइट कम थी तो उसके पैर बीच की सीट में आराम से आ गए. औरत होने का एक फायदा और!, सुमति सोच कर मुस्कुरा दी. वैसे भी वो अपनी शादी की खरीददारी के बारे में सोच कर ही खुश थी.

“सुमति बेटा, तुम्हे पता तो है न कि तुम शादी के दिन क्या पहनना चाहोगी?”, कलावती ने सुमति से पूछा. “हाँ माँ! मैं जानती हूँ मुझे क्या चाहिए.”, सुमति ने मुस्कुरा कर जवाब दिया. किसी और क्रॉस-ड्रेसर की तरह, सुमति को भी पता था कि दुल्हन के रूप में वो किस तरह से सजना चाहेंगी. इंडियन लेडीज़ क्लब में तो उसने कितनो के यह सपने सच भी किये थे. ये कितना ख़ुशी भरा दिन होने वाला था सुमति के लिए ! दुल्हन बनेगी वो सोच कर के ही वो बड़ी ख़ुश हो रही थी. और कुछ देर के लिए वो ये भूल गयी कि जब वो दुल्हन बनेगी तो उसके साथ एक आदमी दूल्हा भी बनेगा.

क्रमश: …

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< भाग ७ भाग ९ >

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Indian Ladies Club: Part 12

This is a sweet story of Sumati and Anjali who were the best friends in their crossdressing days. These two were meeting for the first time since their transformation into a woman. And the emotions were running high.


Story so far: Sumati is the brains behind Indian Ladies Club where men from all walks of life gather together to become the woman of their dreams. Sumati is assisted by her very good lovely friend Anjali in setting up her apartment for the ILC meeting. Madhurima, the senior most member of the club joins them to manage the special event.

Recently, the  “ladies” at ILC had welcomed a new member Anvesha through a very special ceremony of her transformation into a princess. Next morning, when these ladies woke up, they all had become women overnight. The world around them had changed, and the world seemed to always remember them as women, and never a man. Becoming a woman was going to bring challenges in their life they never imagined. Sumati was going to meet Anjali, her best friend, first time after their transformation.

Read all the parts here

Anjali’s ordeal

Sumati woke up early in the morning. She had to get ready to meet Anjali at 8 in the morning. Since that night when Sumati became a woman overnight, Anjali was the only person she could talk to, who herself was going through a similar experience. But Sumati could not understand why Anjali had asked her to wear conservative clothes. If it was some other time, Sumati would have happily worn a saree. But after her bad experience in the office with men yesterday, she was reluctant to wear one.

Sumati checked her wardrobe but all her traditional salwar suits were revealing with a deep back and a cut around the cleavage. She had no other choice, but to pick a saree. She looks elegant in a saree, and she knew that. She picked a dual colored crepe saree. It was a baby pink and white in color. She was getting late. So, she quickly draped herself in a nivi style. She wore a medium sleeve blouse with it. She looked herself in the mirror. She pulled her pallu to cover her head. “Hmm… looks traditional.”, she smiled. More than anything, she was really excited to meet Anjali. After all, Anjali was the only one in this world who could understand what she was going through. She checked her phone to find Anjali’s address. Her home location had changed. This seemed unusual because Sumati was still at the same home, even after her transformation into a woman. She prayed to god that everything was well with Anjali.

Sumati took an auto and arrived at Anjali’s home right on time. The world seemed like a better place in the morning. She got down and paid the auto driver. She picked up her saree pleats with one hand, and started walking towards Anjali’s house. From the outside, it seemed like any normal house with children. She could feel the early morning hustle-bustle going on there. The house appeared very old, as if this house had seen the glorious days in the past, but was in a desperate need for repair.

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Sapna’s caring mother came running behind her with a lunch box. Anjali was now a loving mother.

“Sapna, did you pack all your homework copies?” Sumati heard a voice of a caring mother running behind her daughter. “Yes, mommie. I packed everything.”, said the young cute daughter Sapna who came out of the house carrying a heavy bag on her small shoulders. “Don’t forget your lunch”, the mother said. She came running behind the daughter. She quickly gave the lunch box to Sapna. Mother was none other than Anjali. Anjali was now a mother of a 6 year old daughter! From her looks, she looked like a middle aged housewife. With her disheveled hair, it was apparent that she had a busy morning taking care of her family. Sumati watched this with a smile on her face. Somehow, all the crossdressers dream of becoming a housewife. And Anjali was living that dream now. But it surely was not an easy life.

“Hello, Sumati aunty”, Sapna noticed Sumati standing at the gate. She looked really cute in her school uniform. Those words coming out of a young girl’s mouth fell like sugar in her ears. Sumati bent down and hugged Sapna. “How is my little angel?”, Sumati said as she took out a chocolate from her purse. “Thank you, aunty.”, said Sapna.

“Sapna, it’s time to leave. You are going to miss your school bus.”, said the concerned mom. At the same time, Anjali was happy to see Sapna unite with her Sumati aunty. She smiled looking at them. Sumati used to visit Anjali’s home in the past. Of course, as a man. She knew that Anjali had a daughter, and she would always bring a chocolate for her. But in that past, Anjali was the father and not the mother, Sumati was seeing now. And Sumati used to be an uncle. But the world had changed, for good or bad. Sapna found her other girl friends outside her house, and she walked with them towards their bus stop for the school. They together bid a good bye to the cute little girl.

The happiness was clearly visible on Anjali’s face. She was really happy to see Sumati. And why not? she was her best friend. She hugged Sumati and said, “Wow, you look more beautiful than ever! I am so happy to see you Sumati.” In their short time living as women, they both had learnt how two women hug each other, barely touching each others’ breasts and putting hands on each other’s back. It can feel strange in the beginning when someone’s hand rests on your exposed back in the saree blouse. But these two friends were used to the idea since their crossdressing days at ILC.

“You have no idea how happy I feel seeing you Anjali”, Sumati said as she pulled back from the hug, but still holding her friend’s arms. They both looked at each other intently.

Bahu, we are ready to leave for the temple. We will be back in the afternoon for lunch.”, came a voice of an older woman from inside the house. “That must be my mother-in-law. They are going to a temple to listen to a pravachan (sermon) today”, said Anjali.

An elderly couple came out. They were Anjali’s in-laws. Sumati had never met them before. Because in their earlier life, Anjali was a man who lived with her parents. But things had changed now. Anjali was a woman now living with her in-laws. Sumati quickly put on her saree pallu over her head as a gesture of respect towards elders and bent forward to touch the couple’s feet. “Jug jug jiyo beti (Live a long life daughter)”, said the father-in-law to Sumati. “We hope your wedding preparations are going well.”, the father-in-law said. “Yes, uncle. Everything is going great. I will be going home in two days for the wedding preparations.”, said Sumati like an ideal girl still covering her head. “We will be there for your wedding beti. But now, we must hurry for the temple. We are already getting late.”, said the smiling father-in-law. The couple left walking slowly.

Sumati found it strange that Anjali’s mother-in-law didn’t say much to her. But she was too excited to worry about it. “Come and show me your house, Mrs. Anjali!”, teased Sumati. “Oh sure. By the way, you realized that my mother-in-law doesn’t like you much. Didn’t you?”, said Anjali. Sumati threw her pallu away now that the elders were gone. She was excited and carefree now. “OK. But why?”, asked Sumati.

“Well, in our new life and our new past as a woman, you have been here before. And you came wearing jeans and top the last time. And my mother-in-law being a very conservative woman, didn’t like it. She feels that you will have a bad impression on Sapna.”, said Anjali. “Oh! That explains why you asked me to wear something conservatively. But who cares about her. I want to know everything spicy about your new life.”, Sumati was full of energy.

Sumati got into the house and jumped on a sofa. She was strangely happy about the whole situation. In the past, these two friends secretly dressed as a woman within the four walls of Sumati’s house. They used to tease each other and often role played as devrani-jethani (sister-in-laws). But now, they were out in the real life as a woman. There was not much to hide anymore.

“OK, OK! Soon to be Mrs. Sumati. I will tell you everything. But I have to take care of the house as well. I should do it before my in-laws come back home. So, you will have to watch me do some household work while I tell you everything. You can help me if you want.”, said Anjali. She was beaming with happiness.

“No way! I am not going to help you with any of these chores. I am a working woman, you know! I do enough work as it is. “, Sumati said jokingly. But she was going to help Anjali anyway, and Anjali knew it.

“Let’s begin with the bedroom first.”, said Anjali.

“Wow bedroom stories right in the beginning. I am all ears to hear about your hot steamy nights!”, Sumati laughed.

Anjali stared at Sumati and gave a stern loving look. She said, “No, stupid! I meant that let’s clean up bedrooms first! You naughty girl!”

Anjali’s house was really old. It seemed full of really old furniture. One could easily say that the financial condition of this family was not too good. And it was very clear that Anjali was the only person taking care of this house. But despite all that, Anjali looked like a very loving housewife. Sumati had seen her briefly interact with her daughter and in-laws. She knew that Anjali was now the ideal daughter-in-law. She had a pleasant smile on her face. She was wearing an old saree of satin material. May be, Anjali preferred to wear something like that while doing house work. Sumati could not tell. She was used to seeing her in fancy sarees.

Anjali took out a broom. She slid her hands through her pallu to pulled it up over her shoulder. And then tucked the pallu’s loose end in her waist. With a pulled up pallu, her soft breasts covered in her satin blouse got exposed. But at least this way, her saree was not going to obstruct her in any of her cleaning tasks. Though Anjali was in her homely look without any makeup or fancy jewelry, she looked really desirable. She was the kind of woman who are naturally beautiful. Anjali began to sweep up the room with a broom. Sumati felt a little sad inside looking at Anjali like this. It was because as a man, Anjali was financially well-to-do. That wasn’t the case anymore. She didn’t want to bring out the difficult topic of financial well-being with her friend at the first meeting. She watched Anjali doing the clean up. “Mrs. Anjali, now tell me how does it feel to be a mom? I saw that Sapna really loves you.”, Sumati asked a question which she knew would make Anjali happy. All mothers love to talk about their kids. And Anjali was a recent mom.

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Anjali took out a broom and began sweeping the bedroom. The way she tucked her saree, and held her saree pleats gave her an appearance of a real middle-aged housewife. 

“Oh dear Sumati. You have no idea how wonderful it is to be a mother! The experience of being a mother is so much more rewarding than I ever imagined as a crossdressing man. You know that Sapna had always been a very cute girl. I never had bonded this well with her as her father. But now that I am a woman and her mother, we are so well connected! I really love to do everything for her. Preparing her lunch, braiding her hair, getting her ready for the school, playing with her, and what not. Just like me, she even loves to wear sarees. She always asks me to wrap her in my sarees. But she is too small for those. You have no idea how much time we spend together talking. She really loves her mother. She says that she wants to be like me when she would grow older. You know, the most beautiful part? My love for her has now become unlimited. The mother daughter bond is so sacred and fulfilling, you know?”, said a beaming proud mother Anjali as she continued to broom the room.

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Sumati helped Anjali clean up toys spread on the floor. She began wondering if she wants to be a mother too.

“Yes, I can see that in your eyes!”, said smiling Sumati. She picked up a few toys from the floor and put it in the toy box while Anjali cleaned up the area. Sumati looked at one of the Sapna’s doll intently and wondered if she would ever want to be a mother of Chaitanya’s kid. Of course, she would want to be a mother but that would mean she would have to mate with a man for that! But she was a lesbian who was about to get married to a man. Things were a little complicated for her. “So, have you talked to your husband-to-be about having kids?”, asked Anjali as she cleaned and prepared the bed in her room. Sumati, who was lost in her thought of becoming a mother, was suddenly broken out of her spell with Anjali’s question. “No, we haven’t talked about it yet.”, Sumati replied. It was not an easy question to answer for her.

“If I am guessing correctly, Chaitali is now a man you are marrying. Am I right?”, Anjali deduced. “Yes, Chaitali is now Chaitanya! He is a very sweet man. And his parents really love me. They were here day before yesterday to take me for bridal shopping. I had so much fun with them. I hope you are coming for my wedding. I have purchased really really fancy sarees and a lehenga. You should stand by my side when I am on the stage for my wedding. You know? I never imagined I would ever get to be a bride. I still can’t believe I am going to be a bride soon!”, said Sumati happily. But there was a pause after that.

“Still this all feels so strange Anjali. Living a life of a woman. I am not sure if I should be happy about this.”, Sumati continued with less excitement this time. “I understand what you are going through Sumati”, Anjali said with a caring tone.

“You tell me, how is the life of a housewife? We crossdressers used to dream of becoming a housewife at Indian Ladies Club. And you are now living that dream. Do you like it?”, Sumati was cheerful once again.

Anjali laughed.

“Oh your house is really cold.”, Sumati said as she sat on the bed. She carefully covered her legs with her saree. These two ladies were naturally good at maintaining sarees even when they were crossdressing men. Sumati was really feminine with her gestures and how she handled her saree perfectly. She pulled her pallu to the front with her left hand and put it on her lap to avoid sitting over it. Anjali always used to say that Sumati would be a perfect woman, if she could ever live as one. And today, she was being proved correct. Sumati wrapped herself in her soft saree to get some warmth. The soft crepe material of the saree soon made her warm.

“You haven’t answered my question Anjali”, Sumati said.

“What? About the dream of becoming a housewife? It’s not as glamorous you know? As a wife, I have to cook three meals a day, clean up the house whole day and every day for the rest of my life. And then, I have to take care of my daughter, my husband and my in-laws. And no one acknowledges how much efforts I put into taking care of everything around here, except for my lovely daughter. To be honest, being a housewife, is tough but I love to do it for all the precious moments I get to spend with Sapna. I love being a housewife but not for the reasons, we crossdressers used to believe. It’s certainly not glamorous, but is a rewarding experience.”, Anjali said. She was picking up things scattered around the house and putting it in its correct place. Certainly, Anjali had a very busy life but she looked content. Her life had changed dramatically from that of a working man with a well-paid job to the hard demanding life of a housewife now.

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Anjali had truly adapted herself to become a housewife. She cleaned up the bed and fixed the bed sheets so that Sumati could sit on it. Sumati, who felt cold inside the house, sat on the bed and covered her feet with her saree. Both friends had become the perfect woman.

“You must be hungry, Sumati. I know you haven’t had anything to eat in the morning. Let me get breakfast for you. I have made poha for you. I hope you like it.”, Anjali said to Sumati. “Oh, you don’t have to bother about that Anjali. I am here to see you. Food can wait.”, said Sumati.

“Don’t be silly, Sumati. I can’t forget how many times you cooked food for the people at Indian Ladies Club. Anyway, poha is ready. I just need to serve it on a plate. And that way, we can sit and talk. I will take care of the rest of the clean up later. I have anyway made lunch for the family. So, I don’t have anything else to do but chat with my lovely friend.”

“Are you kidding me? You have lunch ready by 8:30 in the morning? And that too when you had to send your kid to school? How did you manage that?”, Sumati was really curious.

Anjali came back with a plate in her hand. “I wake up 4 in the morning.”, Anjali smiled. “I anyway have to make tiffin for Sapna and her father. He leaves early to his work.”

“May be I should get a week long training from you for how to be a good wife. It will prove to be useful very soon after my wedding.”, Sumati said.

Sumati was surprised how well Anjali had adapted herself to her new life. Anjali would not even had anytime to think about how things had changed since they become women. She would have been required to take care of her family the moment she woke up as a woman a few days back.  Sumati took poha in her hand, and began to eat. “Anjali, this is the most delicious poha I ever tasted!” Anjali smiled feeling satisfied that her guest liked the breakfast.

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Anjali sat across Sumati on a bench. She covered her chest with her saree. She looked tired but content with her life.

Anjali sat across Sumati on a small bench. She was beaming in her saree. She looked like a perfect housewife, and her saree was a perfect companion for everything she did in her home. She sat relaxed with her back touching the rusty wall, raised her right knee to put her arm to rest on it while her left leg crossed below the raised leg. She covered her legs with her saree. She looked a little tired from all the work she had to do everyday, but she was happy. “Living a crossdresser’s dream. Huh?”, she must have thought.

“Anjali. If you don’t mind, can I ask you a question?”, Sumati asked. “Why not? It seems that something is bothering you since yesterday evening. And I think I have an idea what this is about. But go ahead, ask me”, Anjali had a fairly good idea of Sumati’s concern. Afterall, she was in the same boat as her.

“I guess bhabhi (sister-in-law) is now your husband. How is your relationship with him?”, Sumati asked.

“Hmm. So, I guessed it right. I know what’s bothering you.”, Anjali smiled. She paused for a minute. She took a breath as if she didn’t know how to say this. “Sumati, you are my only friend with whom I can share this. I had been waiting to talk to someone about this. And thank god, you are here”, Anjali said. She pulled up her saree to cover her chest. Her satin saree was too smooth and it kept slipping exposing her blouse frequently. She didn’t really mind that in front of a woman, that too Sumati. But it was somehow in her habit to pull it up as soon as her saree would slip.

“Do you remember how your bhabhi was before? … She came from a very conservative family in a small village. She was the most obedient bahu and she used consider me, her husband, as a god. She supported me in whatever I did. She never questioned me whenever I would wear a saree. You know? She came from a background where the culture taught her to support her husband no matter what. She considered this to be her duty as a good wife. And that’s why she never complained even when I, her husband, would occasionally become a woman at night. I never knew what she felt about my dressing habit, but she supported me irrespective of what she thought. And you know, she was not well-educated either.”, Anjali was telling her story.

Sumati who was now relaxed in an environment where she could share anything with her friend, reclined on the bed, listening intently what Anjali had to say. She was carefree here. The fact that her saree was getting disheveled did not bother her here. “Umm”, Sumati nodded her head in acknowledgement of what Anjali had just said. She knew that there was something important Anjali was about to tell.

“Your bhabhi who is now my husband, is the same person, just her gender has changed.”, Anjali continued.

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Sumati reclined on the bed. She was now in a relaxing environment with her good friend Anjali where she could express herself. She had to push her boob inside when it slipped out of her bra.

“What do you mean by that?”, Sumati asked. Sumati’s one boob was coming out of her bra as she reclined on the bed. She had to push it inside with her hand in her bra. Then, she covered it with her saree out of her habit.

Anjali smiled looking at Sumati taking care of her breasts. Then, she got serious and said, “My husband has the same thinking as before. He believes that it is a wife’s duty to accept and support husband in all situations. He believes that it’s my duty to do everything in the house and take care of everyone. He is very different from the kind of husband I was. I used to help my wife whenever I could, but he doesn’t do that. Sadly, our financial condition doesn’t let me hire any domestic help. Between the two of us, I am more educated and qualified to do a job, and he isn’t well-educated. But he and his parents don’t want me to go out and work. They feel my place is at home, and my only job is to clean the house and feed the family members.”, Anjali had tear drops in her eyes but still not flowing.

“This house is barely running because of the pension that we get from my father-in-law, and a little money that my parents send here from time to time. This life is not easy, Sumati. I cannot even fulfill my only daughter’s simple desires.”, Anjali’s voice was shaking. “I work all day at home, and then, at night…”, Anjali stopped. Sumati got up from the bed, and sat next to Anjali. She held her in her arms and kept her head over her shoulder to console her. It was a touching moment, an emotional one, two friends were really bonding and talking about their life. It didn’t matter that they were women now. They were human beings and friends first. Sumati continued to pat Anjali on her back to make her feel better.

“… and at night, … and at night, I have to make myself available to my husband, even if I am tired. I don’t like that Sumati. I don’t! I don’t like the touch of a man. I hate it! But I have to do it anyway”, Anjali’s ordeal was out. She was facing the same problem as Sumati.

Sumati did not know what to say to Anjali. These two lady friends continued to hold each other and hug each other. After a few minutes, Sumati held Anjali’s head by her chin. She looked at her lovely tired friend. And then, she kissed her. Anjali didn’t stop, and she kissed Sumati back. The emotions and passions broke loose. Their soft lips continued to touch each other. Their soft warm bodies got closer to each other. Anjali’s soft satin saree rustled against Sumati’s soft crepe saree. Their breasts were pushing against each other. Sumati’s hands went over Anjali’s thighs and over her waist. That touch sent a shiver in Anjali’s body. They continued to kiss each other passionately. Sumati got more eager. She slipped her hand inside Anjali’s saree and over her saree blouse. She began to massage Anjali’s breasts. Anjali was losing her control and she began to kiss harder. Sumati pressed Anjali’s breasts against hers, and she slipped her hand inside Anjali’s blouse to massage her breasts. The soft touch of their feminine soft bodies were making it all hot. The kiss seemed to be out of this world. They had never experienced anything like that. This all might have happened in less than a minute. And that’s when, Anjali suddenly pulled back her lips. She stopped.

“I can’t do this, Sumati”, Anjali said.

“Why not? I can break my wedding and get out of that relationship. We two can start a new life together, Anjali. We can have Sapna with us too. I will make a living for all of us. We can give Sapna a very good life. Everything will be alright, Anjali. Come, let’s start a life together!”, Sumati pleaded. But she knew Anjali was not going to do this.

“No, Sumati. I like you, and it may seem alright now, but we can’t do this. This is not the right thing to do.”

“What is not right, Anjali? Can’t we live a beautiful life? Don’t we have the right to have a beautiful life?”, Sumati was saying these words but she knew what Anjali was thinking.

“Think about Chaitali, dear. No matter what, she supported you in your dressing. She was your best friend since childhood. She may have become Chaitanya today, but she is the same person you knew all along. Are you going to leave her for these hormone enraged moments? Think about Sapna! What if we don’t get a custody to have her with us? How would she live with her parents separated? I cannot leave my husband, who used to be my supportive wife a few days back. I can’t do this just because her appearance changed and she is a man now.”

Anjali was correct. Sumati realized that. But she couldn’t control her emotions. Becoming a woman has become really overwhelming for her. She started to feel as if the life of a crossdressing man, was much better than being a woman. Tears began to roll on her cheeks. Anjali picked her saree pallu as she wiped Sumati’s tears.

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Sumati got up and fixed her saree.

“Don’t get me wrong, Sumati. I wish I could live my life with you. But it would be wrong of me to abandon my family. Most importantly, I have to think about my daughter. I want her to grow to be an independent strong woman. I need her to learn that a woman’s place is not just confined within the four walls of her home. Do you understand?”, Anjali said.

Anjali looked into Sumati’s eyes, and said, “I want my daughter to be a strong independent woman, just like her Sumati aunty.”  Sumati smiled.

These two friends hugged each other once more, comforted each other with a promise that they will be there for each other and provide them the strength whenever needed. They both held each others arms. Then, the two ladies got up, and fixed their sarees.

“Sumati, I called Madhurima aunty yesterday to tell her that we would be visiting her by 10 a.m. today. We should get ready to see her.”, Anjali said.

Sumati felt a little light hearted now. Expressing their emotions to each other had helped both these friends feel better. Anjali had shown Sumati that sometimes, one has to make some sacrifices. And she was right that Chaitali had been a supportive friend of Sumati since her childhood. She was the only one who knew about Sumati’s crossdressing during her childhood days, and she never told this to anyone. Sumati cannot abandon Chaitali now just because she has become Chaitanya.

“I am going to use your bathroom to fix my makeup. My tears must have ruined my mascara.”, Sumati said.

Anjali smiled at her friend. And she began to get ready to go out as well.

Continued…

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