Roommate: Part 4


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Special thanks: This time we want to give a special thanks to Sanjana Singh who graciously agreed to contribute her beautiful pictures for this story. She runs a CD beauty parlour in Mumbai. If you are ever in Mumbai and want to transform into a beautiful woman, don’t forget to meet Sanjana.

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Story so far:  This is the story of me i.e. Nishant and my roommate Chetan. Many years ago, one day I accidentally found a few women’s clothes in Chetan’s room. When I asked Chetan, he told me that he is a crossdresser. It came as a shock to me. Next day, I casually asked Chetan to dress up as a woman for me. And when he came back, he had transformed himself into a beautiful woman named Chetna. We both were a little drunk, and ended up making physical love. I felt guilty after that as were not gay. But soon, in an attempt to save our years of friendship, I fell in love with Chetna. And when two hearts meet, your heart doesn’t think if the person you love has male genitals or female organs. Our love was growing day by day, and Chetna had become my girlfriend. She was taking care of our home like a perfect housewife.

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My heart was still aching from remembering Chetna today. My flight to California was going through a turbulence, and my heart was going through a similar turbulence as well. The turbulence brought me back to the present for a while. But I was feeling restless. Chetna was all over in my mind and heart. I could not get her out of my mind. To feel a little better, I did what I knew best. I took out a small bottle of wine and drank it all in one shot. Still Chetna’s beautiful smiling face kept appearing in front of my eyes, and I went back thinking about those beautiful days with her.

It had been a little more than a month since I fell in love with Chetna. We both used to wait eagerly to spend our time together. If you have experienced the first love, you know how beautiful the world becomes. And something like that was happening to us too. And one evening, I returned home happily from my office to see my Chetna.

“Chetna, Chetna, where are you dear?”, I called her as soon as I reached home. I knew by now Chetan must have transformed himself into my lovely girlfriend Chetna. “Chetna!”, I called once again in my excitement.

“Hold on, dear. What’s the rush, Nishu?”, Chetna came out of the kitchen wiping her hands with her saree pallu. She was probably doing something in the kitchen. My happiness increased the instant I saw her beautiful face. And in that happiness, I picked her up in my arms by holding her around her knees. Continue reading “Roommate: Part 4”

रूममेट: भाग ४


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ख़ास धन्यवाद:  इस बार हम धन्यवाद करना चाहते है संजना सिंह का, जिन्होंने अपनी खुबसूरत तसवीरें इस कहानी के लिए दी. संजना मुंबई में CD ब्यूटी पारलर भी चलाती है. यदि आप कभी मुंबई जाए और आपके भीतर एक सुन्दर औरत बनने की ख्वाहिश हो तो संजना से ज़रूर मिले.

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कहानी में अब तक:  ये कहानी मेरी यानी निशांत और मेरे रूममेट चेतन की है. कई साल पहले एक दिन अनजाने में मुझे चेतन के कमरे में लड़की के कुछ कपडे मिले थे. पूछने पर चेतन ने मुझे बताया कि वो एक क्रॉस-ड्रेसर है, ये बात मेरे लिए किसी शॉक से कम नहीं थी. उसके अगले दिन मैंने चेतन से यूँ ही कहा कि वो एक बार मुझे लड़की बन कर दिखाए. जब चेतन तैयार होकर आया तो वो एक बहुत ही आकर्षक लड़की बन चूका था. अब वो चेतन नहीं, चेतना थी. हम दोनों बियर के नशे में थे, और उस हालत में उस रात हम दोनों के बीच शारीरिक सम्बन्ध स्थापित हो गए. होश आने पर मुझे ग्लानी हुई कि आखिर मैं और चेतन ये कैसे कर सकते है? हम तो गे नहीं थे? पर पता नहीं कैसे धीरे धीरे हमारी दोस्ती बचाते हुए, समय के साथ साथ, चेतना और मुझे आपस में प्यार हो गया. आखिर जब दो दिल मिलते है तो दिल ये नहीं सोचता कि जिससे प्यार हुआ है उसका लिंग आदमी का है या औरत का. हम दोनों का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था, और चेतना मेरी गर्लफ्रेंड बन चुकी थी, जो हमारे घर को भी बखूबी सँभालने लगी थी, एक हाउसवाइफ की तरह. अब आगे-

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चेतना को याद करते हुए जैसे मेरा दिल झकझोर उठा था, उसी तरह जिस हवाईजहाज में मैं बैठा हुआ था, वो भी टर्बुलेंस में हिचकोले खा रहा था. उन्ही हिचकोलो के बीच मेरा ध्यान वर्तमान में थोड़ी देर के लिए आ गया. मन में अजीब सी बेचैनी थी. और उस बेचैनी को दूर करने के लिए मेरे पास एक छोटी सी वाइन की बोतल थी, उसे एक ही घूंट में मैं पी गया. पर चेतना की याद मेरे मन से जा ही नहीं रही थी. उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा मेरी आँखों के सामने अब भी आ रहा था. मैं फिर से पुरानी यादो में खो गया.

हम दोनों के बीच प्यार हुए शायद एक महीने से थोडा ज्यादा गुज़र चूका था. चेतना और मैं एक दुसरे के प्यार में एक दुसरे के साथ समय बीतने को हमेशा आतुर रहते थे. जब पहला पहला प्यार होता है न, तो पूरी दुनिया गुलाबी और सुन्दर लगने लगती है. हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. एक दिन मैं ऑफिस से बड़ी ख़ुशी के साथ वापस लौटा.

“चेतना, चेतना, कहाँ हो तुम?”, घर पहुचते ही मैंने चेतना को आवाज़ लगायी. मुझे यकीन था कि अब तक चेतन ने कपडे बदल लिए होंगे और घर में मेरी प्यारी गर्लफ्रेंड चेतना होगी. “चेतना!”, मैंने एक बार फिर आवाज़ लगायी.

“आ रही हूँ बाबा! ऐसी भी क्या जल्दी है निशु?”, चेतना अपने साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछते हुए किचन से निकली. शायद किचन में कुछ कर रही थी वह. उसके खुबसूरत चेहरे को देख कर मेरी ख़ुशी और बढ़ गयी. और मैंने ख़ुशी से चेतना को घुटनों से पकड़ कर अपनी बांहों में ऊपर उठा लिया. Continue reading “रूममेट: भाग ४”

रूममेट: भाग ३


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एक हफ्ते बाद

“निशांत, अब जागो भी. तुम्हे ऑफिस के लिए देर हो रही है”, चेतना, मेरे जीवन में नई नई आई हुई इस खुबसूरत सी लड़की ने मुझे सुबह सुबह जगाते हुए कहा. मैंने धीरे से अपनी आँखें खोल कर देखा तो चेतना का खुबसूरत चेहरा मेरे सामने था, जो झुक कर मुझे जगाने की कोशिश कर रही थी. कितनी दमक रही थी वो सुबह की सूरज की रौशनी में, और उसके लम्बे बाल मेरे चेहरे के पास तक लटक रहे थे. नाईटी में चेतना का खुबसूरत चेहरा देख कर मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ और मैं ख़ुशी से मुस्कुराने लगा. इससे अच्छा कोई तरीका हो सकता था भला दिन की शुरुआत करने का?

“हाय! कौन कमबख्त ऑफिस जाना चाहता है …”, मैंने उसे प्यार से अपनी बांहों में खिंच लिया ” … जब मैं इतनी खुबसूरत औरत के साथ यहाँ समय बिता सकता हूँ”. अब मुस्कुराने की उसकी बारी थी. उसने मेरी बांहों से बाहर आने को कोशिश भी नहीं की, बल्कि खुद मुझमे समा गयी. उसके नर्म मुलायम स्तन मेरे सीने से लगकर दबे जा रहे थे. आपको तो पता चल ही गया होगा कि पिछले एक हफ्ते में हम दोनों के बीच काफी कुछ बदल गया था.

“निशु, प्लीज़ मुझे जाने दो!”, चेतना ने प्यार से कहा. कुछ दिनों से उसने मुझे प्यार से निशु कहना शुरू कर दिया था. मुझे भी सुन कर बहुत अच्छा लगता था. आखिर हम दोनों को प्यार जो हो रहा था. “ऐसे कैसे जाने दू, जानू?”, मैंने भी मासूमियत से कहा. उसके पास जवाब नहीं था. उसने अपनी नज़रे झुका ली और मेरे सीने की ओर देख कर शर्म से मुस्कुराने लगी. मेरी बांहों में उसे भी अच्छा जो लग रहा था.

“निशु, मुझे तुमसे कुछ कहना है”, उसने कहा. वो मेरे गले में लगे लॉकेट से अपनी नाज़ुक उँगलियों से खेलते हुए बहुत प्यारी लग  रही थी. “क्या बात है चेतना?”, मैं पूछा.

“पता है हमें साथ में सोते हुए एक हफ्ते हो चुके है. मुझे तुमसे गले लग कर सोना सचमुच बहुत अच्छा लगता है. जब तुम मुझे प्यार से गले लगते हो, मुझे बहुत प्यार महसूस होता है. और हमारा साथ में बिताया हुआ समय चाहे हमारी रोज़ की शाम हो या सुबह, सब कुछ सुहावना लगता है. पर हमने वो चीज़ नहीं की जो उस रात…”, वो कहते कहते रुक गयी. “कौनसी चीज़ चेतना?”, मुझे पता था वो क्या कहना चाहती थी, पर मैं झूठ मुठ का नाटक कर रहा था. “तुम्हे पता है मैं क्या कह रही हूँ!”, उसने उत्साह में कहा. “नहीं तो?”, मैं यूँ ही उसे परेशान करता रहा.

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Roommate: Part 3


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A week later

“Wake up, Nishant! You are getting late for the office”, Chetna, the woman in my life, tried to wake me up in the morning. I slowly opened my eyes. I could see the face of my beautiful Chetna who was bending over me to nudge me from my sleep. She looked radiant in the glorious sun, and her long hair were falling close to my face. Looking at the pretty face in her nighty, I smiled at the beautiful stroke of my luck. There cannot be any other better way than this to start a day.

“Who wants to go to the office…”, I pulled her gently into my arms, “… when I can spend my time with a beautiful woman like you.” It was now her turn to smile. She didn’t struggle to get out of my hold, instead lovingly came into my arms. Her breasts got squeezed against my chest. Needless to say that a lot had changed between us in the last seven days.

“Nishu, please let me go”, Chetna pleaded with love. She had started calling me Nishu since a few days back. That was the nickname she had chosen for me. After all, we were falling in love. “Why should I let you go, sweetheart?”, I asked her innocently. She didn’t have any answer. She cast her eyes down looking towards my chest smiling out of shyness. She too loved to be in my embrace.

“Nishu, I have something to say to you.”, she said. She was playing with my locket, that I was wearing, with her delicate fingers. “What is it, Chetna?”, I asked her.

“You know it has been a week since we both started sleeping next to each other. I really like it when we cuddle together. I love to fell you next to my body. And I really enjoy the time we spend together in the evening, and again in the morning. But we haven’t done that thing since …”, she paused. “What thing, Chetna?”, I knew what she was talking about, and I still asked her feigning ignorance. “You know what I’m talking about!”, she exclaimed. “No, I don’t”, I continued to tease her.

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रूममेट: भाग २


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ख़ास धन्यवाद:  हम धन्यवाद् करना चाहते है nikkie dominoes का जिन्होंने अपनी नीली रंग की साड़ी में तसवीरें इस कहानी के लिए दी| उनका एक बहुत ही सुन्दर youtube channel भी है. इनके जैसी सुन्दर औरतें बहुत कम ही इस दुनिया में,   इनका चैनल अवश्य देखे!

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मेरी कैलिफ़ोर्निया की हवाई यात्रा अब भी काफी लम्बी बाकी थी. मुझे अब भी सालो पुरानी वो रात याद आ रही थी जब चेतना से मेरी पहली मुलाकात हुई थी. सचमुच अद्भुत रात थी वो! पहली रात जब मैंने पहली बार किसी औरत को प्यार दिया था, और मेरी किस्मत ऐसी की वो औरत औरत होकर भी औरत न थी. चेतना मेरा ख़ास दोस्त चेतन था जो साड़ी में लिपटा हुआ किसी औरत से कम नहीं था. “पर क्या इस बात से फर्क पड़ता है कि चेतना वास्तविकता में औरत नहीं थी?” जब दो दिल मिलते है तब ऐसे सवाल का कोई तुक नहीं बनता. आखिर में मैंने जिसे प्यार किया था वो दिखने और व्यवहार में तो औरत ही थी.  प्यार में कोई सीमा नहीं होती और उसका जेंडर से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए.  पर यह बोलना आसान है. उस वक़्त तक चेतना से मुझे दिल से प्यार नहीं हुआ था, हम दोनों तो केवल जिस्म की आग में तड़पते दो बदन थे जो एक दुसरे को आलिंगन किये हुए थे. इसलिए यह सवाल मुझे अगले दिन झकझोरता रहा.

अगली सुबह  जब नींद खुली तो देखा कि चेतना अब भी मेरी बांहों में थी. सुबह सुबह उठने पर एक औरत का तन जब आपकी बांहों में आपके तन से लगकर हो, उसकी फीलिंग ही कुछ ख़ास होती है. साड़ी में लिपटी नींद में आँखें बंद की हुई चेतना अब भी सुन्दर लग रही थी. मुझसे बिलकुल चिपक कर सोयी हुई थी वो. मेरी बांहों में ऐसे जैसे सारी दुनिया की चिंता से मुक्त हो निश्चिन्त थी वो. पर चेतना एक साधारण औरत नहीं थी, वो मेरा ख़ास दोस्त चेतन था, जो एक क्रॉस-ड्रेसर था. कल रात मैंने पहली बार चेतन का यह रूप देखा था. और मैंने एक ऐसी औरत के साथ शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किया था जो औरत ही नहीं थी. उस रात के बाद की सुबह होश आया तो मेरा दिमाग सोचने पर मजबूर हो गया था कि जो रात के अँधेरे में हमने किया क्या वो सही था?

सुबह उठने पर मेरा नशा उतर गया था. अब हॉर्मोन भी मुझे उत्तेजित नहीं कर रहे थे. चेतना अब भी मेरी बगल में थी, या था? टाइट ब्लाउज में उफ़ कितनी आकर्षक लग रही थी वो. उसकी नग्न पीठ देख कर मेरा मन उसे चूमने को होने लगा था. साड़ी में लिपटी हुई बेहद सेक्सी लग रही थी और चाहकर भी मैं उसे छूने से खुद को रोक नहीं पाया. मेरे स्पर्श से शायद उसकी नींद खुल रही थी. मैं कुछ देर रूककर उस औरत को एक टक देखता रहा. कितनी सुन्दर थी वो!

मेरा दिल दिमाग तो एक सवाल से विचलित था. क्या मैं गे हूँ? आप मेरी जगह होते तो आपको भी ऐसा ही लगता, खासतौर पर यदि आप जीवन भर स्त्रियों की तरफ आकर्षित रहे हो. यह सवाल मन में आते ही मेरा बिस्तर से उठकर भागने का मन हुआ.

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Roommate: Part 2


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Special thanks: We would like to thank Nikkie Dominoes, an amazingly beautiful crossdresser for her pictures in blue saree, used in this story. She reserves her copyright for the pictures. She has a youtube channel with a lovely collection of videos. It’s worth visiting!

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I still have many hours left in my flight before I reach California. I could still vividly remember my hot night with Chetna. Oh, What a wonderful night it was! The first time I ever made love to a woman, and she was not even a woman. Chetna was really a man wrapped in a beautiful saree; she was a man named Chetan who also my best friend. “But does it matter if Chetna were not really a woman?” It should not matter if she behaved like a true woman. Love has no boundaries, and it should not be impacted by the gender of a person. Right?  But we were not in love, at least not until that night. We were just two horny drunk people who jumped into the bed at the first chance. And that’s why, this question was going to bother me throughout the next day.

When I woke up the next morning after that passionate night, the warm and soft body of Chetan (or Chetna) was still snuggling in my arms. The touch of his silky smooth saree felt really good on my naked chest. I was still sleepy as we had barely slept for two hours after making love all night. But after the night, comes the morning. And your mind begins to think about all the things you did in the darkness of the night.

That morning, the effect of alcohol had faded out, and my hormones were not raging anymore. Chetan was still sleeping. “He” or should I say “she”? looked really attractive with her eyes closed. I saw her lying next to me in a bed. She was sleeping unaware how attractive she looked in her tight blouse. I could see her sexy back in her silky blouse with a deep cut; inviting me to kiss her back. What can I say? Her body wrapped in that slippery saree looked so attractive. And I could not avoid touching her lightly all over her body. She moved a little as if she enjoyed my touch, but very likely she was still sleepy. I kept looking intently at this sexy woman who made me a man last night.

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मैं परिणिता: अंतिम भाग


अब तक आपने मेरी कहानी में पढ़ा: यह कहानी है मेरी भावनाओं की, एक आदमी से औरत बनकर जो भी मैंने अपने बारे में समझा| मेरे दिल से निकली इस कहानी में प्यार है, सुकून है, सेक्स भी है, और औरत होना क्या होता उसकी सीख भी| जब से होश संभाला है, मैं जानती हूँ कि मेरे अंदर एक औरत बसी हुई है। पर दुनिया की नज़र में मैं हमेशा प्रतीक, एक लड़का बनकर रही। कुछ साल पहले जब मेरी शादी परिणीता से हुई, तो उसे भी मेरे अंदर की औरत कभी पसंद न आयी। हम दोनों पति-पत्नी US में डॉक्टर बन गए। पर मेरे अंदर की औरत हमेशा बाहर आने को तरसती रही। किसी तरह मैं अपने अरमानों को घर की चारदीवारियों के बीच सज संवर कर पूरा करती थी। पर आज से ३ साल पहले ऐसा कुछ हुआ जो हम दोनों को हमेशा के लिए बदल देने वाला था। उस सुबह जब हम सोकर उठे तो हम एक दूसरे में बदल चुके थे। मैं परिणीता के शरीर में एक औरत बन चुकी थी और परिणीता मेरे शरीर में एक आदमी। हमारे नए रूप में सुहागरात मनाने के बाद हमारा जीवन अच्छा ही चल रहा था, और एक औरत के बदन में मैं बेहद खुश थी| पर परिणीता, जो अब मेरी पति थे, वो तो पुरुष के तन में एक औरत ही थी| और उसी औरत की तलाश में अब मेरे पति क्रॉस ड्रेसर बन गए थे और उन्होंने अपने लिए नाम रखा था ‘अलका’! अब मेरी कहानी का अंतिम भाग –

६ महीने बाद

रात हो चुकी थी| हम पति-पत्नी खाना खा चुके थे और मैं बर्तन धोकर अब बस सोने के लिए तैयार थी| मैं जैसे ही अपने बेडरूम पहुंची उन्होंने मुझे कस के सीने से लगा लिया| मैं जानती थी कि वो क्या चाहते थे|

“नहीं, अल्का! प्लीज़ अभी नहीं”, मैंने कहा|

हाँ, पिछले ६ महीने में काफी कुछ बदल चूका था| अब मेरे पति जैसे ही घर लौटते, वह तुरंत स्त्री के कपडे पहनकर अल्का बन जाते| अब तो उन्होंने अपने बाल भी लम्बे कर लिए थे और तन को पूरी तरह से वैक्स करके उनकी त्वचा बेहद स्मूथ हो गयी थी| वो अब बेहद ही आकर्षक स्त्री बन चुके थे| और आज तो उन्होंने रात के लिए सैटिन की सेक्सी स्लिप पहन रखी थी| मैं जानती थी कि आज रात उनका इरादा क्या था| इसलिए तो उन्होंने एक बार फिर मुझे अपनी बांहों में जोर से पकड़ लिया|

मैंने धीरे से दर्द में आंह भरी और कहा, “कम से कम मुझे साड़ी तो बदल लेने दो|” मैं नखरे करने लगी| आखिर पत्नी जो ठहरी, एक बार यूँ ही थोड़ी मान जाती चाहे मेरा भी दिल मचल रहा हो|

“परिणीता, तुम तो जानती हो कि तुम मुझे साड़ी में कितनी सेक्सी लगती हो”, अलका ने कहा और मुझे जोरो का चुम्बन दिया| उफ्फ, उनके सेक्सी तन पर वो सैटिन नाईटी का स्पर्श और उनका चुम्बन मुझे उत्तेजित कर गया| अब तो अल्का मुझे प्रतीक नहीं परिणीता कहती थी, जो मुझे और भी सेक्सी लगता था| इन ६ महीनो में मैं तो लगभग भूल ही गयी थी कि मैं कभी प्रतीक एक आदमी हुआ करती थी|

अल्का ने मुझे दीवार से लगाकर पलटा और मेरी पीठ पर किस करने लगी और मेरे स्तनों को अपने दोनों हाथो से मसलने लगी| मैं आँखें बंद करके आंहे भरने लगी| आखिर क्यों न करती मैं ऐसा? मेरे ब्लाउज पर उनके हाथ जो कर रहे थे मुझे मदहोश कर रहे थे| मेरे ब्लाउज से झांकती नंगी पीठ पर उनकी सैटिन नाईटी/स्लिप  का स्पर्श और चुम्बन मुझे उकसा रहा था|

उनकी स्लिप उनकी कमर से थोड़ी ही नीचे तक आती थी| और उसके अन्दर पहनी हुई सुन्दर सैटिन की पैंटी में उनका तना हुआ पुरुष लिंग मेरे नितम्ब पर मेरी साड़ी पर से जोर लगा रहा था| अलका आकर्षक स्त्री होते हुए भी आखिर एक पुरुष थी| मैं अपनी साड़ी पर उनका लिंग महसूस करके मचल उठी| मैंने अपने हाथ से उनकी स्लिप को उठा कर उनकी पैंटी में उनके लिंग को पकड़ लिया| सैटिन में लिपटा हुआ वो  बड़ा तना हुआ लिंग बहुत ही सेक्सी महसूस हो रहा था|और उनकी नाज़ुक पैंटी उस मजबूत तने हुए लिंग को अन्दर अब रोक नहीं पा रही थी| फिर  मैंने भी अपने हाथो से उसे पैंटी से बाहर निकाल कर आजाद कर दिया|

“अल्का, तुम तो पूरी तरह तैयार लग रही हो|”, मैंने आंहे भरते हुए कहा| पर अल्का तो मदहोशी से मेरी गर्दन को चूम रही थी| उसने मेरी बात का जवाब एक बार फिर मेरे स्तनों को ज़ोर से दबा कर दिया| आह, उसके मेरे स्तन को दबाने से होने वाले दर्द में भी एक मिठास थी|

अल्का ने मुझे फिर ज़ोरों से जकड लिया, अब उसके स्तन मेरी पीठ पर दबने लगे| मैं तो बताना ही भूल गयी थी कि अल्का की औरत बनने की चाहत में उसने ३४ बी साइज़ के ब्रेस्ट इम्प्लांट ऑपरेशन द्वारा लगवा लिए थे| अब तो वह भी बेहद सुन्दर सुडौल स्तनों वाली औरत थी| मेरे लिए तो मानो एक सुन्दर सपना था यह| अल्का के स्तन और उसका पुरुष लिंग, मुझे एक साथ एक औरत और एक पुरुष से प्रेम करने का सौभाग्य मिलने लगा था|

कामोत्तेजना में अल्का ने अपनी पैंटी उतार दी और मुझे बिस्तर के किनारे ले जाकर झुका दी| और तुरंत ही मेरी साड़ी और पेटीकोट को उठाकर मेरी पैंटी उतारने लगी| कामोत्तेजित अल्का अब रुकने न वाली थी और मैं भी उतावली थी कि कब उसका लिंग मुझमे प्रवेश करेगा| अल्का ने मेरी पैंटी उतार कर अपनी उँगलियों से मेरी योनी को छुआ| उसके लम्बे नाख़ून और लाल रंग की नेल पोलिश में बेहद सेक्सी लग रहे थे| मुझे छेड़ते छेड़ते उसने अपनी ऊँगली मेरी योनी में डाल दी| मैं उत्तेजना में उन्माद से चीख उठी| “अब और न तरसाओ मुझे अल्का!”, मैं मदहोशी में उससे कहने लगी|

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जहाँ मैं साड़ी में खिल रही थी वहीँ अल्का अपनी सैटिन की स्लिप में गहरे रंग की लिपस्टिक के साथ बेहद सेक्सी लग रही थी| अल्का कोई और नहीं मेरे पति थे! और हम दोनों एक दुसरे के साथ रात बिताने को आतुर थे|

अल्का भी बिलकुल तैयार थी और देखते ही देखते उसका लिंग मेरी योनी को चुमते हुए मुझमे पूरा प्रवेश कर गया| मैं तो जैसे परम आनंद को महसूस कर रही थी| वो मेरी नितम्ब को अपने हाथो में पकड़ कर आगे पीछे करती तो मैं भी अपनी कमर को लहराते हुए और जोरो से आंहे भरती| और उसके हर स्ट्रोक के साथ हम दोनों के स्तन झूम उठते| मेरे स्तन तो अब भी ब्लाउज में कैद थे पर अल्का के स्तन उसकी सैटिन स्लिप में उछल रहे थे| अब अल्का खुद अपने एक हाथ से अपने ही स्तनों को मसलने लगी| और अपने ही होंठो को काटने लगी| गहरी लाल रंग की लिपस्टिक में उसके होंठ बेहद कामुक हो गए थे| वहीँ मैं अपनी साड़ी में लिपटी हुई इस पल का आँख बंद करके आनंद ले रही थी|

मैंने पलट कर देखा तो अल्का अब भी अपने स्तनों को मसल रही थी| उसे देख कर मेरा भी मन उसके स्तनों को चूमने को मचल उठा| मैं अब उठ कर अपनी साड़ी से अपने पैरो को ढककर अपने घुटनों पर खड़ी हो गयी और उसकी ओर चंचल नजरो से देखने लगी| शायद वो भी इंतजार कर रही थी कि कब मैं उसके स्तनों को चुमुंगी| फिर क्या था? मैं  उसके एक स्तन को अपने हाथो से पकड़ कर छूने लगी और उसे तरसाने लगी| उसके मुलायम सुडौल स्तन पर फिसलती हुई सैटिन स्लिप पर छूने का आनंद ही कुछ और था| उसने भी अपने दोनों हाथो से मेरे स्तनों को पकड़ लिया| मैंने उसका एक स्तन उसकी स्लिप से बाहर निकाला और फिर अपने होंठो से चूम ली| आनंद में अल्का ने अब अपनी आँखें बंद कर ली थी| मुझे एहसास था कि उसे बेहद मज़ा आ रहा है क्योंकि वो उस आनंद में मेरे स्तनों को और जोर से दबाने लगी| फिर अपनी जीभ से मैंने उसके निप्पल को थोडी देर चूमने के बाद, अपने दांतों से उसके निप्पल को काट दिया| अल्का अब दीवानी हो कर कहने लगी, “ज़रा और ज़ोर से कांटो”| फिर उसने मेरे सर को पूरी ताकत से अपने सीने से लगा लिया| मैंने अपने दुसरे हाथ से उसका लिंग पकड़ लिया| कहने की ज़रुरत नहीं है पर हम दोनों मदहोश हो रही थी| मैं तो सालो से एक स्त्री के साथ सेक्स करने में सहज थी और इस नए रूप में अब पुरुष तन का आनंद लेना भी सिख गयी थी मैं|और अल्का तो एक ही शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों ही थी|

उसी उन्माद में फिर हम दोनों एक दुसरे को चूमने लगी| अल्का ने मेरा सर अपने हाथो में पकड़ कर मुझे चूमना शुरू कर दिया था| उसकी सैटिन स्लिप का मखमली स्पर्श मुझे उतावला कर रहा था और वहीँ मेरी नाज़ुक काया पर लिपटी हुई साड़ी उसे दीवाना कर रही थी| और हम दोनों के स्तन एक दुसरे को दबाते हुए मानो खुद खुश हो रहे थे| अल्का ने मेरे सीने से मेरी साड़ी को उठा कर मेरे ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल लिया| वह जो भी कर रही थी वो मेरे अंग अंग में आग लगा रहा था| और उसका लिंग मेरे हाथो में मानो और कठोर होता जा रहा था|

अल्का ने एक बार फिर मेरी साड़ी को कमर तक उठा लिया| उसका इरादा स्पष्ट था| अब उसका लिंग मेरी योनी में सामने से प्रवेश करने वाला था| मैं भी बस उसी पल के इंतजार में थी| मैंने अपना पेतीकोट उठा कर उसके लिए रास्ता भी आसान कर दिया था| साड़ी की यही तो ख़ास बात है, बिना उतारे ही आप झट से प्यार कर सकते है| यह मैं भी जानती थी और अल्का भी| अल्का ने फिर धीरे से अपना लिंग मेरी योनी से लगाया| और  मैंने उस बड़े से लिंग को अपने अन्दर समा लिया| उसके अन्दर आते ही मैं और जोर जोर से आवाजें निकालने लगी| इस दौरान हम दोनों एक दुसरे के स्तन दबाकर उन्मादित थे| धीरे धीरे हमारी उत्तेजना बढती गयी, दोनों की आवाजें तेज़ होती गयी, हवा में अल्का के स्तन उसकी स्लिप से बाहर आकार झुमने लगे, और दोनों की आँखें बंद हो गयी| और उस उत्तेजना की परम सीमा पर पहुच कर हम दोनों ने एक दुसरे का हाथ कस कर पकड़ लिया| और फिर अल्का का एक आखिरी स्ट्रोक और हम दोनों एक ही पल में … बस मुझे कहने की ज़रुरत है क्या? यह वो रात थी जब मेरे तन में एक नए जीवन का प्रवेश हुआ| हाँ, उस रात के बाद अब मैं माँ बनने वाली थी!

पिछले ६ महीने

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अल्का और मैं, हम दोनों बहुत अच्छी सहेलियाँ बन गयी थी!

पिछले ६ महीने हम पति पत्नी के जीवन में नयी खुशियाँ और नई परीक्षा लेकर आया था| मेरे पति अब घर आकर तुरंत स्त्री के कपडे पहनते, मेकअप करते और अल्का बन जाते| मेरे पति अब क्रॉस ड्रेसर बन चुके थे और मैं इस स्थिति से खुश थी| मुझे एक सहेली मिल गयी थी| जब भी मौका मिलता हम दोनों सहेलियाँ बाहर शौपिंग करने या घुमने फिरने निकल पड़ती| दोनों को एक बार फिर जैसे नए सिरे से प्यार हो गया था| हम दोनों के कद काठी अलग अलग थी तो ड्रेस अलग अलग ही खरीदते पर साड़ियां अब साथ मिल कर लेते थे| पर ब्लाउज हमें अलग अलग सिलवाने पड़ते थे| जहाँ मैं अब एक औरत बन कर थोड़े पारंपरिक से ब्लाउज कट सिलवाने लगी थी, वहीँ वो ज्यादा सेक्सी ब्लाउज सिलवाने लगे थे| पुरुष तन को स्त्री के रूप में निखारने में वो कोई कमी नहीं रहने देना चाहते थे|

पर समय के साथ उनकी स्त्री बनने की इच्छा तीव्र होती जा रही थी| उन्होंने बाल भी बढ़ाना शुरू कर दिया था| पर मुझे शॉक उस दिन लगा जब उन्होंने घर लौट कर कहा कि अब वो ऑपरेशन करा कर पूरी तरह स्त्री बनना चाहते है| मैं तो एक पल के लिए अन्दर ही अन्दर टूट गयी थी क्योंकि चाहे जो भी हो, अब मैं एक स्त्री थी और मुझे सम्पूर्ण करने वाले पति यानी पुरुष का साथ चाहिए था| पर उन्होंने बेहद प्यार से मुझे गले लगाया और फिर मुझसे इस बारे में और बात की| फिर हमने मिलकर निर्णय लिया कि वह ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाएंगे पर पूरी तरह लिंग परिवर्तन नहीं कराएँगे| मैं नहीं चाहती थी की वो अपना पूरा पुरुषत्व ख़त्म कर दे| ऑपरेशन के बाद ३४ बी साइज़ के उनके स्तन इतने बड़े भी नहीं थे कि दिन में अपनी नौकरी में वो पुरुष रूप में जाए तो छुप न सके| पर इतने छोटे भी न थे उनका आनंद न लिया जा सके| मेरा जीवन अब बेहद सुखी था| और उनका भी| अब मुझे पूरी तरह औरत होने का अनुभव करने में बस एक ही कमी रह गयी थी, मैं माँ बनना चाहती थी| मुझे उन्हें मनाने में थोडा समय लगा पर एक दिन वो मान ही गए|

अगले ९ महीने

अपने शरीर में पलती हुई एक नयी जान को लेकर चलने के वो ९ महीने का अनुभव शायद मेरे जीवन का अब तक सबसे प्यारा अनुभव रहा| इस दौरान मुझे अल्का के रूप में मुझे समझने वाली सहेली मिली तो पति के रूप में सहारा बनने वाला पुरुष भी| पर धीरे धीरे उन्होंने अल्का बनना कम कर दिया था, क्योंकि वो जानते थे कि अब मुझे एक पुरुष का सहारा चाहिए था| आखिर वो प्यार भरे ९ महीनो में ,अपने अन्दर पलते हुए जीवन को अब बाहर लाने का वक़्त आ गया था| बड़े प्यार से ९ महीने पाला था उसे, पर अब मैं हॉस्पिटल में प्रसव पीड़ा में थी| उस दर्द में तड़पते हुए तो मानो एक पछतावा हो रहा था कि क्यों मैंने माँ बनने का निर्णय लिया| पर उस पीड़ा को तो सहना ही था|अब उससे पीछे नहीं पलट सकती थी|

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9 महीने अपनी कोख में एक जान को पालना मेरे जीवन का सबसे प्यारा अनुभव था

मेरी प्रसव पीड़ा पूरे १४ घंटे रही| पर उसके बाद जब डॉक्टर ने मेरे हाथो में एक नन्ही सी जान को सौंपा तो मेरी आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए| मैं एक बेटी की माँ बन गयी थी| माँ, सबसे प्यारा अनुभव| औरत होने के सारे सुख दुःख इस अनुभव के सामने फीके है! मैंने अपनी बेटी को प्यार से गले से लगा लिया| मैं भावुक होकर सारा दर्द भूल चुकी थी| इसके बाद मुझे नर्स ने सिखाया कि बच्चे को दूध कैसे पिलाना है| उस बच्ची ने जब मेरे स्तन से दूध पीया तो जैसे मेरे अन्दर से प्यार की अनंत प्रेम धारा बह  निकली| मैं आँखें बंद करके उस प्यार को महसूस करने लगी| जब यह सब हो रहा था तब मेरे पति मेरे साथ ही थे| वो बहुत खुश थे पर उनकी आँखों में मैं एक बात देख सकती थी| उनके अन्दर हमारा शरीर बदलने के पहले वाली पत्नी परिणीता थी, जो सोच रही थी कि वो भी कभी माँ बन सकती थी और यह सुख वो भी पा सकती थी| पर किस्मत ने उनको अब आदमी बना दिया था| मैंने उनके दिल की बात सुनकर उन्हें पास बुलाकर कहा, “सुनो, अपनी बेटी को नहीं देखोगे?” उन्होंने प्यार से बेटी को गले लगा लिया| फिर मैंने उनके कान में धीमे से कहा, “हमारी बेटी भाग्यशाली है कि उसके पास एक पिता और दो माँ है!” मेरी बातें सुनकर उनकी आँखे भी नम हो गयी| उन्होंने कहा, “हाँ! और हमारी भाग्यशाली बेटी का नाम होगा प्रतीक और परिणीता की दुलारी “प्रणिता”!”

कुछ दिनों बाद

अब हम पति पत्नी घर आ गए थे| प्रणिता को दूध पिलाकर मैं उसे अपनी बगल में सुलाकर सोने को तैयार थी| वो भी आज बड़े दिनों बाद अल्का बन कर मेरी बगल में सोने आ गए| उन्होंने एक मुलायम सा गाउन पहना हुआ था उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाकर गुड नाईट कहा और हमारा तीन सदस्यों का परिवार चैन की नींद सो गया|

अगली सुबह जब मैं उठी तो मेरे चेहरे पर खिड़की से सुनहरी धुप आ रही थी| लगता है मैं ज्यादा देर सो गयी थी| इतनी गहरी नींद लगी थी उस रात कि सुबह होने का अहसास ही न रहा| आज कुछ बदला बदला सा लग रहा था| अब तक मैंने अपनी आँखे नहीं खोली थी| पर मेरे स्तन आज हलके लग रहे थे जबकि उन्हें दूध से भरा होना चाहिए था| फिर भी अंगडाई लेती हुई जब मैंने आँखे खोली तो जो द्रिश्य था उसको देख कर आश्चर्य तो था पर ख़ुशी भी| मेरी आँखों के सामने मेरी पत्नी परिणीता बैठी हुई थी और उसकी गोद में हमारी बेटी प्रणिता सो रही थी| परिणीता ने ख़ुशी से मेरी ओर पलट कर देखा और चहकते हुए बोली, “हम फिर से अपने अपने रूप में आ गए प्रतीक! मैं फिर से परिणीता बन गयी हूँ और तुम मेरे पति प्रतीक!”

मैंने खुद को देखा तो मैंने वो गाउन पहना हुआ था जो कल रात मेरे पति पहन कर सोये थे| मैं फिर से आदमी बन गयी थी| मुझे एक पल को तो यकीन ही नहीं हुआ| इस नए बदलाव का मुझ पर क्या असर हुआ? क्या मुझे इस बात का दुख था कि अब मैं औरत नहीं थी? बिलकुल नहीं, मुझे बल्कि बेहद ख़ुशी थी| परिणीता की ख़ुशी देख कर स्त्रि का तन खोने का मुझे कोई दुख नहीं था| अब मैं फिर से एक क्रॉस ड्रेसर आदमी बनने को तैयार थी| पर अब मेरे पास वो कुछ था जो पहले न हुआ करता था| अब मेरे पास ऐसी पत्नी थी जो मेरे जीवन के क्रॉस ड्रेसिंग वाले इस पहलू को समझ सकती थी, एक ऐसी पत्नी जो मेरा सहयोग करने को तैयार थी| और तो और अब मेरे बाल लम्बे थे और मेरे पास स्तन भी थे! ज़रा सोच कर देखिये एक क्रॉस ड्रेसर को और क्या चाहिए इससे ज्यादा?

bbc
अब तो सोच कर यकीन ही नहीं होता कि मैं कभी संपूर्ण औरत बन कर एक बच्ची को जन्म भी दी थी या कभी किसी पुरुष से शारीरिक प्यार भी किया था| सब कुछ सपने की तरह है!

परिशिष्ट

आज लगभग २ साल हो चुके है उस रात से जब मैं प्रतीक से परिणीता बन गयी थी| और अब कुछ महीने बीत चुके है मुझे फिर से प्रतीक बने| आज भी हम दोनों पति-पत्नी को यकीन नहीं होता कि हमारे साथ ऐसा भी हुआ था| सोच कर ही अजीब लगता है कि मैं एक पुरुष से प्रेम करने लगी थी! या एक स्त्री के तन में मैं कभी थी भी| मैंने एक बच्चे को माँ बनकर जन्म दिया था, एक सपने सा लगता है| पर ऐसा सब हमारे साथ क्यों हुआ था? इसका जवाब हमारे पास नहीं है|पर जो हुआ उसने हमारा जीवन हमेशा के लिए बदल दिया था| हम दोनों के बीच अब बहुत प्यार है| हम दोनों एक दुसरे की परेशानियों को और दिल को बेहद अच्छे तरह से समझ सकते है, जो समझ हम दोनों में पहले न थी|अब मैं जानती हूँ कि औरत के रूप में परिणीता कितनी मुश्किलों का सामना करती है, और अब वो समझती है कि एक पुरुष होकर औरत बनने की लालसा क्या होती है| इसी समझ की वजह से अब मैं जब मन चाहे स्त्री रूप में अल्का बन सकती हूँ| पर इन सबसे ज्यादा, अब हमारे जीवन को पूरा करने वाली बेटी प्रणिता है जिसकी दो मांए है!

यह मेरी कहानी का अंतिम भाग था| फिर भी पिछले २ सालो में और भी बहुत कुछ हुआ था जिसके बारे में मैंने लिखा नहीं है| जैसे जब मैं परिणीता के शरीर में थी तब मेरी माँ के साथ मेरा रिश्ता कैसे बदल गया? उनकी नजरो में अब मैं उनका बेटा प्रतीक नहीं बल्कि बहु परिणीता थी? या मेरे सास ससुर के साथ मेरा रिश्ता जो अब मुझे अपनी बेटी की तरह देखते थे? या मेरी बहन के साथ उसकी शादी के समय मेरा समय कैसा बीता जब मैं उसका भैया न होकर प्यारी भी थी?  इन सब के बारे में समय मिला तो ज़रूर लिखूंगी| उसके लिए आपका सब्र, प्यार और कमेन्ट भी चाहिए| आखिर आपको मेरी कहानी कैसी लगी थी ज़रूर बताना| चाहे तो ब्लॉग पर या फिर फेसबुक पर कमेंट करे| मैं इंतज़ार करूंगी आपके प्यार भरे सन्देश का!

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