चांदी की पायल


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संपादक के विचार: हम नहीं चाहते कि इस कहानी को पढ़कर पाठक समझे कि क्रॉसड्रेसर कहीं से भी किसी भी पुरुष या स्त्री से कमतर है.

नोट: हम क्रॉसड्रेसर की ज़िन्दगी भी बड़ी अजीब होती है. एक तरफ तो हम एक औरत के रूप में दुल्हन की तरह सजने और एक हाउसवाइफ की तरह ज़िन्दगी बिताने के सपने देखती है, और दूसरी तरफ जब सचमुच किसी की पत्नी बनने का सवाल आता है, तो मन में एक झिझक होती है. मन में कई सवाल आते है. ये दुविधा न होती यदि हम तन से औरतें होती, काश…! इसी दुविधा को उकेरने के लिए कई पाठको ने हमें मेसेज भेजे. संयोग से Minal Minu जो कि खुद एक cd admirer है, उन्होंने हमें यह कहानी लिख भेजी जो इन्ही भावनाओं पर आधारित है. तो पढ़ कर हमें बताये क्या आप भी इस कहानी की कोयल की तरह महसूस करती है?

अनुपमा त्रिवेदी

दोस्तों ये दास्तान उस मज़बूरी में छुपी हुई एक औरत की है जो पूरी तरह से औरत तो बनना नहीं चाहती पर उस एहसास को सिर्फ औरत के कपडे पहनने तक सीमित नहीं रखना चाहती! उसको हर उस एहसास से गुजरने का मन होता है जिससे एक स्त्री रोजमर्रा की जिंदगी में गुजरती है। उसे गर्लफ्रेंड भी बनना है…स्कूल गर्ल भी। उसे नर्स भी बनना है और दुल्हन भी। उसे सजते समय कोई कमी भी नही चाहिए। उसे दुल्हन भी बनना है और प्रेग्नेंट होने का एहसास भी चाहिए। उसे भाभी भी बनना है और एक बच्चे को गोद में दूध भी पिलाने का मन है…… ये जो यहाँ वहा घूमता हुआ एक पुरुष के अंदर बैठी नारी का मन है उसी की किस्सा गोई है। काश कि जितना मन करता है उस औरत का, उसका दशांश भी संभव हो पाता! आशा है कि कोयल और मानस की कहानी आपको अच्छी लगेगी|

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The daughter who never was – Part 1


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It was already evening. The sun was going down. And the villages I could see from the train window looked really beautiful in the twilight hours. Bulbs and tubelights were now tinkling in those beautiful small houses. I could see people heading back home in their cycles and bikes. I was enamored with the beauty of the simplicity with which those villagers seemed to live their lives. Continue reading “The daughter who never was – Part 1”

बेटी जो थी नहीं – १


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शाम हो रही थी. और ट्रेन के बाहर जाते हुए छोटे छोटे गाँव शाम की हलकी रौशनी में बड़े सुन्दर दिख रहे थे. घरो में रौशनी के लिए बल्ब और ट्यूबलाइट अब चालू होने लगी थी. लोग शायद अब अपने अपने घरो को साइकिल और गाड़ियों से वापस हो रहे थे. और मेरा मन उनको निहारने में लगा हुआ था. Continue reading “बेटी जो थी नहीं – १”

Caption: The Pink Room


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z1

 

English

Being new to this country, I was excited when I visited a strip club to have some fun with the strippers.

When I went inside, I saw a sign saying ‘The Pink Room’. I went in, expecting to have more fun with the stripper that I liked. But what happened instead, I was transformed into a stripper myself. I had never imagined before that I would have so much more fun spending girlie time!

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हिंदी

इस देश में मैं नया था, और बेहद उत्साह के साथ एक स्ट्रिप क्लब गया था इस उम्मीद में कि किसी स्ट्रिपर की साथ थोड़ी मौज मस्ती हो जाएगी.

जब मैं अन्दर गया, जहाँ एक बोर्ड लगा था ‘द पिंक रूम’. मैं अन्दर चला गया, इस आशा में कि अन्दर एक स्ट्रिपर जो मुझे पसंद आ गयी थी, उसके साथ थोडा और करीब आकर मज़े लूँगा. पर जब मैं अन्दर गया, तो वहां मुझे सभी स्ट्रिपर ने मिलकर मुझे उनमे से एक बना दिया. मैंने कभी सोचा भी न था, एक लड़की बनकर लड़की की तरह समय बिता कर मुझे इतना अच्छा लगेगा!

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Caption: Bound to happen


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bh

English

I knew this would happen sooner or later. We both are cross-dressers who met at this resort a few hours ago.

We both wore our prettiest dresses and styled our hair.

It started as an innocent play of touches and hugs while posing for sexy pictures, but soon “her” strawberry lip-gloss became too irresistible to kiss! We made out and we loved it! We both love being each other’s girlfriend ❤

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हिंदी

मुझे पता था कि यह आज नहीं तो कल होना ही है. हम दोनों क्रॉस-ड्रेसर है जो इस रिसोर्ट में कुछ घंटे पहले मिल कर अपने सपने पूरे करने आये थे.

हम दोनों ने बेहद सुन्दर सेक्सी ड्रेस पहनी और अपने लम्बे बालो को स्टाइल किया.

शुरुआत तो हम दोनों ने साथ में सेक्सी तसवीरें खींचने के लिए एक दुसरे को गले लगाकर एक दुसरे के तन को प्यार से छूते हुए कैमरा के आगे पोस करते हुए की, पर जल्दी ही उसकी स्ट्रॉबेरी लिप-ग्लॉस से रस भरे होंठ मुझे बेकाबू करने लगे. और हम दोनों किस करने से खुद को रोक न सके. और सच कहूं तो हम दोनों को एक दुसरे की गर्लफ्रेंड बन कर बहुत अच्छा लग रहा है अब ❤

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रूममेट: भाग ३


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एक हफ्ते बाद

“निशांत, अब जागो भी. तुम्हे ऑफिस के लिए देर हो रही है”, चेतना, मेरे जीवन में नई नई आई हुई इस खुबसूरत सी लड़की ने मुझे सुबह सुबह जगाते हुए कहा. मैंने धीरे से अपनी आँखें खोल कर देखा तो चेतना का खुबसूरत चेहरा मेरे सामने था, जो झुक कर मुझे जगाने की कोशिश कर रही थी. कितनी दमक रही थी वो सुबह की सूरज की रौशनी में, और उसके लम्बे बाल मेरे चेहरे के पास तक लटक रहे थे. नाईटी में चेतना का खुबसूरत चेहरा देख कर मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ और मैं ख़ुशी से मुस्कुराने लगा. इससे अच्छा कोई तरीका हो सकता था भला दिन की शुरुआत करने का?

“हाय! कौन कमबख्त ऑफिस जाना चाहता है …”, मैंने उसे प्यार से अपनी बांहों में खिंच लिया ” … जब मैं इतनी खुबसूरत औरत के साथ यहाँ समय बिता सकता हूँ”. अब मुस्कुराने की उसकी बारी थी. उसने मेरी बांहों से बाहर आने को कोशिश भी नहीं की, बल्कि खुद मुझमे समा गयी. उसके नर्म मुलायम स्तन मेरे सीने से लगकर दबे जा रहे थे. आपको तो पता चल ही गया होगा कि पिछले एक हफ्ते में हम दोनों के बीच काफी कुछ बदल गया था.

“निशु, प्लीज़ मुझे जाने दो!”, चेतना ने प्यार से कहा. कुछ दिनों से उसने मुझे प्यार से निशु कहना शुरू कर दिया था. मुझे भी सुन कर बहुत अच्छा लगता था. आखिर हम दोनों को प्यार जो हो रहा था. “ऐसे कैसे जाने दू, जानू?”, मैंने भी मासूमियत से कहा. उसके पास जवाब नहीं था. उसने अपनी नज़रे झुका ली और मेरे सीने की ओर देख कर शर्म से मुस्कुराने लगी. मेरी बांहों में उसे भी अच्छा जो लग रहा था.

“निशु, मुझे तुमसे कुछ कहना है”, उसने कहा. वो मेरे गले में लगे लॉकेट से अपनी नाज़ुक उँगलियों से खेलते हुए बहुत प्यारी लग  रही थी. “क्या बात है चेतना?”, मैं पूछा.

“पता है हमें साथ में सोते हुए एक हफ्ते हो चुके है. मुझे तुमसे गले लग कर सोना सचमुच बहुत अच्छा लगता है. जब तुम मुझे प्यार से गले लगते हो, मुझे बहुत प्यार महसूस होता है. और हमारा साथ में बिताया हुआ समय चाहे हमारी रोज़ की शाम हो या सुबह, सब कुछ सुहावना लगता है. पर हमने वो चीज़ नहीं की जो उस रात…”, वो कहते कहते रुक गयी. “कौनसी चीज़ चेतना?”, मुझे पता था वो क्या कहना चाहती थी, पर मैं झूठ मुठ का नाटक कर रहा था. “तुम्हे पता है मैं क्या कह रही हूँ!”, उसने उत्साह में कहा. “नहीं तो?”, मैं यूँ ही उसे परेशान करता रहा.

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Roommate: Part 3


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A week later

“Wake up, Nishant! You are getting late for the office”, Chetna, the woman in my life, tried to wake me up in the morning. I slowly opened my eyes. I could see the face of my beautiful Chetna who was bending over me to nudge me from my sleep. She looked radiant in the glorious sun, and her long hair were falling close to my face. Looking at the pretty face in her nighty, I smiled at the beautiful stroke of my luck. There cannot be any other better way than this to start a day.

“Who wants to go to the office…”, I pulled her gently into my arms, “… when I can spend my time with a beautiful woman like you.” It was now her turn to smile. She didn’t struggle to get out of my hold, instead lovingly came into my arms. Her breasts got squeezed against my chest. Needless to say that a lot had changed between us in the last seven days.

“Nishu, please let me go”, Chetna pleaded with love. She had started calling me Nishu since a few days back. That was the nickname she had chosen for me. After all, we were falling in love. “Why should I let you go, sweetheart?”, I asked her innocently. She didn’t have any answer. She cast her eyes down looking towards my chest smiling out of shyness. She too loved to be in my embrace.

“Nishu, I have something to say to you.”, she said. She was playing with my locket, that I was wearing, with her delicate fingers. “What is it, Chetna?”, I asked her.

“You know it has been a week since we both started sleeping next to each other. I really like it when we cuddle together. I love to fell you next to my body. And I really enjoy the time we spend together in the evening, and again in the morning. But we haven’t done that thing since …”, she paused. “What thing, Chetna?”, I knew what she was talking about, and I still asked her feigning ignorance. “You know what I’m talking about!”, she exclaimed. “No, I don’t”, I continued to tease her.

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