देवर और भाभी


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नोट: इस कहानी की लेखिका है “मेल इन साड़ी” जिन्होंने यह बहुत ही प्यारी देवर भाभी की कहानी हमारे expression challenge #3 के जवाब में लिखी है. आशा है आपको बहुत पसंद आएगी! हम तो इस कहानी को पढ़ कर पहले ही दीवाने हो चुके है!

देवर और भाभी का रिश्ता बड़ा ही प्यार भरा होता है| मेरा भी मेरी भाभी के साथ कुछ ऐसा ही था| एक दिन भाभी को पता नहीं क्या सूझी और बोली “देवर जी तुम भी चलो न मेरे साथ मेरी दोस्त की शादी में “| मैं बोला, “भाभी आपकी दोस्त की शादी है और वो भी गाँव में, मैं क्या करूंगा ? और फिर मेरे साथ का कोई होगा भी नहीं बोर हो जाऊंगा।” Continue reading “देवर और भाभी”

मुक्ति


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एक ख़ुशी का पल: मुझे बेहद गर्व हो रहा इस कहानी को प्रस्तुत करते हुए. इस कहानी की लेखिका देविका सेन है जिन्होंने यह कहानी हमारे First expression challenge के जवाब में लिखी थी. जब बात होती है एक क्रॉस-ड्रेसर के रूप में हमारे अपने आत्म-विश्लेषण की और हमारे अन्दर छुपे हुए पुरुष और स्त्री को समझने की, तो इस विषय में यह कहानी इस ब्लॉग की सभी कहानियों में सर्वश्रेष्ट है. इस विषय पर मेरी एक और पसंदीदा कहानी है जिसका नाम है ‘दूसरी औरत‘  (लेखिका: अंकिता शर्मा). जहाँ  दूसरी औरत कहानी अपनी परिस्थिति को स्वीकार करने की है, वहीँ यह कहानी मुक्ति पर आधारित है जो हमारी बाहर आने की तीव्र इच्छा को दर्शाती है. इस कहानी ने मेरे दिल को छुआ है, पर मुझे यकीन नहीं है कि मैं इसका हिंदी अनुवाद इतने बेहतर तरीके से कर सकुंगी जैसी यह कहानी इंग्लिश में है. फिर भी मेरा यह प्रयास शायद आपको पसंद आये.

अनुपमा त्रिवेदी


सालो की प्रैक्टिस और तपस्या ने आखिर इस साहसिक कदम के लिए रास्ता बना ही दिया. इस बारे में निर्णय लेने के लिए मैं काफी समय से सोच रही थी, पर अब सालो से अपने कमरे में बंद रहने के बाद, अब जब मुझे बाहर आना था तो मैं इसे छोटे मोटे तरीके से नहीं करना चाहती थी. मेरे लिए यह एक बड़ा पल होने वाला था और उतने ही शानदार तरीके से मैं अब बाहर आने को आतुर थी. अब जब निर्णय ले ही लिया था, तो अब सवाल यह था कि आखिर किसके सामने सबसे पहले आऊँ मैं? कोई ऐसा व्यक्ति जो न सिर्फ आपको स्वीकार करे बल्कि कोई ऐसा जो आप को औरत के रुप में देख कर खुद उस पल की खुशियों को संजोये. आखिर किसी अनजान बिना चेहरे वाले लोगो के सामने आना भी कोई बड़ा पल हुआ? वो तो केवल एक मजबूरी होगी.  और मैं किसी मजबूरी में बाहर नहीं आना चाहती थी, मैं आना चाहती थी क्योंकि मुक्ति मेरे दिल की ख्वाहिश थी.

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Coming Out


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A Special Moment: We are really really proud to present this fascinating story from a very talented Devika Sen who submitted this in response to our First expression challenge. When it comes to self-reflection about being a crossdresser and understanding the inherent duality within us, this is the best story we have on our blog. My other personal favorite story on this subject is ‘The other woman‘ by Ankita Sharma. While The Other Woman was about accepting the circumstances, this story is about liberation, and it vividly expresses the desire to come out. This story really touched me, and I hope it will touch your heart too.

Anupama Trivedi


Years of practice and tutorials finally paved the way for this bold step. I had been mulling over this decision for a long long time, but after being trapped within the confines of your closet for what seems like an eternity, you just don’t come out one day willy-nilly. The lady wanted to make the event an occasion. After the decision was made, the only question left was to who. You need to come out to a person who will accept and cherish you as the woman you are, because coming out to a faceless nameless populace is not romantic, it’s an action taken out of compulsion. I was not coming out because I felt compelled to, I was coming out because I wanted to. Continue reading “Coming Out”

Ursula in Wonderland

Ursula in wonderland


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Special Note: We thank Ursula Unni for this story. She wants to dedicate this story to all lovely closet CDs who are living their CD lives hidden from everyone in a wonderland of their own.

The house was empty.. but it was a house so full of possibilities for me.This had been a moment that i was yearning for so long. I rushed upstairs, closed the windows, shut the doors, slipped out of my uncomfortable tshirt and shorts and just stretched and smiled. This was the day! Continue reading “Ursula in wonderland”

Mom


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I was really happy today. After all, it was mother’s day; one day dedicated to me, a mom! Today, I was going to spend my day with my son on a picnic to a beautiful spot in the valley. I needed to hurry as we were getting late. My son had lovingly picked up a saree of his liking for me to wear today! He says, “Mumma, you look really beautiful in a green saree.” And here I was, fulfilling my son’s wish by draping this saree around me. He is such a great kid. Well, every mom feels the same about her son. But I truly feel that about my Vishu!

Since this morning, I had been really busy cooking for our picnic. This was the first time since this morning, I had a moment to look at myself in the mirror. I realized that I am growing fat. Even after working so hard taking care of house and my son, I was still gaining weight. My bra felt tighter around my chest, and I could see skin folds coming out below my bra band and blouse. Ah, it was bound to happen sooner or later. I looked into the mirror once again after completing my makeup. Something felt missing. Oh! The earrings! I quickly found a pair of jhumkas and began to put it on my earlobes. To avoid getting further late, I called my son, “Vishu beta, are you dressed yet?” And he shouted back from his room, “Yes, mom. I am just wearing shoes now.” I was ready to go too. Feeling satisfied with my looks, I headed towards the kitchen. (BetaA term in Hindi language meaning son)

Vishu’s favorite sweet dish is suji ka halwa prepared by his mother. And that was the only thing left to prepare. I started roasting suji quickly. I was finding it a little difficult to cook with my long hair open. But Vishu had a special request today that I keep my hair untied today. He is just like his dad! Well, who am I kidding? Yes, I love my looks in open flowing hair. I continued to make halwa somehow managing my hair, and began to pack the picnic basket simultaneously. I once again called my son, “Vishu beta are you ready or not?” You can never trust kids when it comes to getting ready. They can take forever. “Yes, mumma. I am coming out.”, he called back from his room. The sweet dish was done too. “Vishu beta, please bring mumma’s purse from the room. And please bring a pair of black sandals from the closet too.”, I said to Vishu from the kitchen as I finished packing.
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माँ


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आज मैं बहुत खुश थी. आखिर मदर्स डे जो था. आज अपने बेटे के साथ मैं पिकनिक पर जाने वाली थी. और उसी की तैयारी में मुझे थोड़ी देर भी हो रही थी. बेटे ने आज के लिए अपनी पसंद से मेरे लिए साड़ी भी चुन कर निकाली थी. कहता है, “मम्मा आप ग्रीन साड़ी में बहुत अच्छी लगती हो.” तो बस उसी की तमन्ना पूरी करने के लिए ये साड़ी पहन रही थी मैं. और साथ ही साथ पिकनिक के लिए सुबह से खाना भी बनाने में मशगुल थी. तैयार होते हुए खुद को आज आईने में देख कर एहसास हुआ कि मैं कैसे मोटी होती जा रही हूँ. पता नहीं कैसे दिन भर इतना काम करने के बाद भी! मेरी ब्रा अब ज्यादा टाइट महसूस होने लगी थी और ब्रा के बैंड और ब्लाउज में निचे की ओर मोटापा साफ़ नज़र आने लगा था. खैर यह तो आज नहीं तो कल होना ही था. मेकअप करने के बाद भी आईने में खुद को देखकर कुछ कमी लग रही थी. ओह! कान में झुमके पहनना तो मैं भूल ही गयी थी. और झट से अपने झुमको की ड्रावर से एक सुन्दर जोड़ी निकाल कर मैं कान में पहनने लगी थी. देर न हो इसलिए मैंने अपने बेटे को आवाज़ दी, “विशु बेटा, तुम रेडी हुए या नहीं?” और उसकी आवाज़ आई, “हाँ, मम्मी. बस शूज पहन रहा हूँ”. मैं भी बस तैयार ही थी. खुद को एक बार फिर आईने में देख कर संतुष्टि करके अब मुझे किचन जाना था.

विशु को सूजी का हलवा बहुत पसंद है. बस वही बनाना बाकी रह गया था. और मैंने झटपट से सूजी को भूनना शुरू किया. खुले लम्बे बालो के साथ हलवा  बनाने में मुझे थोड़ी परेशानी हो रही थी. पर बेटे की आज ख़ास फरमाइश थी कि आज मैं खुले बाल रखू. उसे मेरे खुले लम्बे बाल अच्छे लगते है. आखिर अपने पापा पर गया है! मैं किसी तरह बालो को सँभालते हुए हलवा बनाने लगी. और साथ ही साथ बाकी का खाना डब्बे में भरकर पिकनिक बैग बनाने लगी. एक बार फिर मैंने पलट कर बेटे को आवाज़ दी, “विशु बेटा, तैयार हुए या नहीं?” बच्चो का कोई भरोसा नहीं होता है, न जाने कितना समय लगा दे. “हो गया मम्मा! बस बाहर आ रहा हूँ.”, उसने अपने कमरे से आवाज़ दी. हलवा भी अब बस तैयार हो चूका था. “विशु बेटा, प्लीज़ मम्मा का पर्स कमरे से लेकर आना. और हाँ, वो ब्लैक सैनडल्स भी निकाल लाना.”, मैंने विशु से कहा. Continue reading “माँ”